अंतरराष्ट्रीय समाचार
नेपाल, भारत सीमा विवाद सुलझाने पर हुए सहमत
नेपाल और भारत सीमा मुद्दों को सुलझाने पर सहमत हो गए हैं, लेकिन दोनों देशों ने ये नहीं बताया कि सीमा का कौन सा हिस्सा। शुक्रवार सुबह काठमांडू में भारतीय दूतावास द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रंगला की काठमांडू यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों के उच्च अधिकारियों ने सीमा मुद्दों पर चर्चा की और विवाद सुलझाने के लिए विचारों का आदान-प्रदान किया।
नेपाल और भारत के बीच सुस्ता और कालापानी में कुछ पुराने सीमा विवाद हैं और सीमा कार्यसमूह नामक एक तंत्र इसे 2014 से सुलझाने की कोशिश कर रहा है।
नई दिल्ली द्वारा नवंबर 2019 में अपने क्षेत्र के तहत विवादित क्षेत्रों को शामिल करने के बाद एक नया नक्शा पब्लिश किया जिसके बाद दोनों पड़ोसियों के बीच एक ताजा सीमा विवाद सामने आया।
भारतीय फैसले का विरोध करते हुए, नेपाल ने इस साल मई में अपने क्षेत्र के तहत उसी विवादित भूमि को शामिल करते हुए एक नया राजनीतिक मानचित्र पेश किया। इससे द्विपक्षीय संबंधों में खटास आ गई।
अपनी बैठक में दोनों विदेश सचिवों ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा और समीक्षा की, भारतीय दूतावास के बयान में कहा गया है कि राजनयिकों ने चल रहे कोरोना महामारी के बावजूद सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में पर्याप्त प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
नेपाली पक्ष ने सीमा पार सुचारू रूप से व्यापार और वाणिज्य को सुनिश्चित करने और विकास परियोजनाओं के सक्रिय कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में भारत सरकार की सहायता की सराहना की।
बयान में कहा गया है कि दोनों विदेश सचिव उच्च स्तरीय द्विपक्षीय सहयोग में नए सिरे से गति बनाए रखने और दोनों देशों के बीच पारंपरिक रूप से करीबी, मैत्रीपूर्ण और बहुपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने के लिए सहमत हुए हैं।
काठमांडू यात्रा केदौरान, श्रंगला ने राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी से मुलाकात की और भारतीय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से बधाई दी।
उन्होंने दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों और इसे और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।
नेपाल के प्रधान मंत्री केपी शर्मा ओली के साथ मुलाकात के दौरान, श्रंगला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उनका अभिवादन किया।
उन्होंने ओली को विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली और विदेश सचिव भारत राज पौडयाल के साथ अपनी मुलाकातों से अवगत कराया।
दूतावास की ओर से कहा गया, “विदेश सचिव श्रंगला ने दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय सहयोग बनाए रखने के लिए आम सहमति को रेखांकित किया, लोगों से लोगों को जोड़ने, ठोस और रणनीतिक द्विपक्षीय पहल और पारस्परिक हित के मुद्दों पर ठोस प्रगति पर जोर दिया।”
विदेश सचिव ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ओर से ग्यावली को अगले संयुक्त आयोग की बैठक के लिए भारत आने का निमंत्रण दिया।
बैठक के बाद एक अलग समारोह में, श्रंगला ने कोविड-19 रोगियों के उपचार के लिए ग्यावाली को रेमेडिसविर इंजेक्शन की 2,000 शीशी सौंपी।
उन्होंने कोविड से संबंधित सहायता प्रदान करने में नेपाल को भारत के निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया।
भारतीय विदेश सचिव ने विपक्षी दल के नेता और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा से भी मुलाकात की और नेपाल-भारत संबंधों को मजबूत करने सहित कई मुद्दों पर चर्चा की।
श्रंगला नेपाल में दो भारत-वित्त पोषित परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद अपनी दो दिवसीय यात्रा पूरी करके शुक्रवार दोपहर नई दिल्ली लौट आएंगे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
विदेश मंत्री जयशंकर और उनके यूएई समकक्ष ने रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी बढ़ाने पर की चर्चा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उनके समकक्ष शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने मंगलवार को मुंबई में अहम बैठक की। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और व्यापक रणनीतिक तथा आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत-यूएई संबंध एक ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में अपनी उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं। इस बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम महाजन और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
विदेश मंत्री जयशंकर ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “यूएई के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ एक सार्थक बैठक हुई, जिसमें हमने अपने व्यापक संबंधों की विस्तृत समीक्षा की। व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक, लॉजिस्टिक्स, रक्षा, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे क्षेत्रों में हमारा सहयोग काफी व्यापक और महत्वाकांक्षी है। भारत-यूएई संबंध एक ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में अपनी उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं।”
यूएई के विदेश मंत्रालय ने भी ‘एक्स’ पर विदेश मंत्री जयशंकर और शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के बीच हुई बैठक के बारे में जानकारी साझा की।
यूएई के विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर लिखा, “महामहिम शेख अब्दुल्ला बिन जायद ने मुंबई में भारत के विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर के साथ एक विस्तृत बैठक की। इसमें उन्होंने भारत और यूएई के बीच व्यापक रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने के नए अवसरों पर चर्चा की। साथ ही, दोनों देशों की विकास और समृद्धि की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी सहयोग का दायरा बढ़ाने पर भी बात हुई।”
विदेश मंत्रालय ने बताया कि यूएई के शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान सोमवार को एक आधिकारिक दौरे पर मुंबई पहुंचे। यह भारत और यूएई के बीच करीबी और नियमित जुड़ाव को दर्शाता है।
विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर कहा, “यूएई के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री महामहिम शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान का भारत के आधिकारिक दौरे पर मुंबई पहुंचने पर हार्दिक स्वागत है। महाराष्ट्र सरकार के कौशल विकास मंत्री श्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने उनका स्वागत किया।”
मंत्रालय ने आगे कहा, “यह उच्च-स्तरीय दौरा भारत और यूएई के बीच करीबी और नियमित संबंधों को दर्शाता है, और इससे हमारी ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ और भी मजबूत होगी।” शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान का भारत दौरा, विदेश मंत्री जयशंकर के हालिया यूएई दौरे के बाद हो रहा है, जहां उन्होंने यूएई के नेतृत्व के साथ बातचीत की थी और ‘रायसीना मिडिल ईस्ट डायलॉग’ में हिस्सा लिया था।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ली छ्यांग ने ईरान के प्रथम उप राष्ट्रपति से मुलाकात की

चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने दुशानबे में एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद के 25वें सम्मेलन में भाग लेने से इतर ईरान के प्रथम उप राष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ से मुलाकात की।
ली छ्यांग ने कहा कि चीन और ईरान दोनों प्राचीन सभ्यता वाले देश हैं और परंपरागत मित्रता का लंबा इतिहास है। वर्तमान वर्ष दोनों देशों की सर्वांगीण रणनीतिक साझेदारी की स्थापना की 10वीं वर्षगांठ है। चीन ईरान के साथ इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों का आदान-प्रदान व सहयोग बढ़ाने को तैयार है।
ली छ्यांग ने कहा कि इस साल में मध्यपूर्व की स्थिति डांवाडोल रही है। चीन का पक्ष है कि विभिन्न देशों की प्रभुसत्ता और सुरक्षा को सम्मान मिलना चाहिए। संबंधित पक्षों को शांति के विकल्प पर कायम रहकर यथाशीघ्र ही वार्ता बहाल कर राजनीतिक तथा कूटनीतिक माध्यम से मतभेद हल कर यथाशीघ्र ही क्षेत्रीय शांति की बहाली करनी चाहिए। चीन वार्ता बढ़ाने की भरसक कोशिश करता रहता है और राष्ट्रपति शी द्वारा प्रस्तुत श्रृंखलात्मक महत्वपूर्ण प्रस्ताव के मुताबिक क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और विकास के लिए कोशिश जारी रखेगा।
मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि ईरान चीन के साथ संबंधों को बड़ा महत्व देता है और चीनी पक्ष के साथ विभिन्न स्तरीय आवाजाही घनिष्ठ बनाकर विभिन्न क्षेत्रों का परस्पर लाभकारी सहयोग मजबूत करने और एससीओ, ब्रिक्स आदि बहुपक्षीय ढांचे में समन्वय मजबूत करने को तैयार है ताकि ईरान-चीन सर्वांगीण रणनीतिक साझेदारी निरंतर आगे बढ़े। ईरान मध्यपूर्व शांति व सुरक्षा पर राष्ट्रपति शी के अहम प्रस्ताव का स्वागत और समर्थन करता है और वार्ता से मतभेद सुलझाना चाहता है। ईरान इस्लामाबाद मेमोरेंडम पर लौटकर यथाशीघ्र ही क्षेत्रीय शांति बहाल करने की उम्मीद करता है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अराघची और लावरोव की बैठक में परमाणु साझेदारी पर जोर, यूरोप से पश्चिम एशिया तक कई मुद्दों पर हुई चर्चा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय बैठक में यूरोप से लेकर पश्चिम एशिया तक कई मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान परमाणु क्षेत्र में साझेदारी आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
विदेश मंत्री अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट पर बैठक की जानकारी साझा की।
अराघची ने पोस्ट में लिखा, ”आज सर्गेई लावरोव का तेहरान में स्वागत किया और उनके साथ अहम बातचीत हुई। हमने यूरोप से लेकर पश्चिम एशिया तक कई मुद्दों पर चर्चा की। इसमें लेबनान, फिलिस्तीन, यूक्रेन और यमन की स्थिति भी शामिल रही।”
उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा, ”हमने आर्थिक सहयोग बढ़ाने और परमाणु क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया। हमारे इतिहास में शायद ही कभी ऐसा समय आया हो जब ईरान और रूस के रिश्ते आज जितने करीब और मजबूत रहे हों।”
इससे पहले सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाल ही में हुए घटनाक्रमों पर चर्चा की।
पेजेश्कियन ने कहा कि तेहरान और मॉस्को के बीच हुए समझौतों और आपसी सहमतियों को तेजी से लागू करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, परिवहन, व्यापार और बिजली संयंत्रों से जुड़े बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना दोनों देशों के रिश्तों की प्राथमिकता है।
पेजेश्कियन ने आगे कहा कि ईरान और रूस अपनी साझा क्षमताओं का बेहतर उपयोग करके और क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों के जरिए मिलकर शांति, स्थायी सुरक्षा और बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बैठक के दौरान तेहरान और मॉस्को के संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। साथ ही, दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
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