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Wednesday,16-September-2026
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सरसों तेल-इम्युनिटी बढ़ाने वाला विश्वसनीय पदार्थ

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Mustard-oil

कोरोनावायरस महामारी के चलते भारतीय निर्माताओं की एक बड़ी बिरादरी मूसली और ब्रेकफास्ट सीरियल्स से लेकर फोर्टिफाइड ब्रेड, बिस्कुट, फ्लेवर्ड पेय पदार्थ, शहद और च्यवनप्राश जैसे खाद्य पदार्थो का विज्ञापन करने में जुटी हुई है। जबकि इनमें से ज्यादातर में आयुर्वेद के किसी फॉर्मूले का उल्लेख भी नहीं होता है, फिर भी वे दावा करते हैं कि ये उत्पाद इम्युनिटी को बढ़ाने वाला है। इस क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इन दावों के खिलाफ उपभोक्ताओं को आगाह करते हुए कहा है कि शारीरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इस तरह के बोतलबंद शॉर्टकट उनके लिए एक आदर्श समाधान नहीं है।

दिल्ली की एक प्रतिष्ठित न्यूट्रीशनिस्ट और वेट लॉस कंसल्टेंट सिमरन सैनी ने आईएएनएस को बताया, “कोरोनावायरस महामारी के दौरान कई कंपनियां अपने उत्पादों को इम्युनिटी बूस्टर के तौर पर पेश कर रहे हैं। यह बेहद खतरनाक ट्रेंड साबित हो सकता, क्योंकि लोग कोरोना संक्रमित होने से डर रहे हैं और ऐसे में वे कोई भी चीज खरीदने के लिए तैयार हैं, जो इम्युनिटी बढ़ाने का वादा करती है।”

एक अन्य न्यूट्रीशनिस्ट, डायटीशियन और फिटनेस एक्सपर्ट मनीषा चोपड़ा कहती हैं, “हर तरह से अपनी इम्युनिटी को बढ़ाएं, लेकिन अपने कॉमन सेंस की कीमत पर नहीं!”

उन्होंने आईएएनएस से कहा, “हम सभी जानते हैं कि बीमारी की रोकथाम करना उसका इलाज करने से बेहतर है! इसमें भी कोई संदेह नहीं है कि आप अपनी इम्युनिटी बढ़ाकर कोरोनावायरस बच सकते हैं। लेकिन जब तक कि दुनिया को कोरोनावायरस को रोकने के लिए एक अच्छी वैक्सीन नहीं मिल जाती, तब तक सब अंधेरे में तीर मार रहे हैं।”

हालांकि इन सभी न्यूट्रीशनिस्ट ने खाना पकाने के लिए और उसके अलावा भी सरसों के तेल के उपयोग को इम्युनिटी का निर्माण करने वाले पदार्थ के तौर पर कारगर बताया।

सिमरन सैनी कहती हैं, “सरसों का तेल एक प्राचीन तेल है, जो हमारे शरीर के अंदर और बाहर दोनों ही सेहत के लिए ढेर सारे फायदे देने वाला तेल है। इस तेल में मोनो अनसैचुरेटेड फैटी एसिड (एमयूएफए) होते हैं जो हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल के सही संतुलन को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं। यह तेल अल्फा लिनोलेइक एसिड से भी समृद्ध है, जो हमारी कार्डियक फंक्शनिंग को सुरक्षा देता है। भारतीय भोजन पकाने में सरसों के तेल का उपयोग करना एक पुरानी परंपरा है और यह हमारी सेहत को ढेर सारे फायदे देता है।”

पी मार्क मस्टर्ड ऑयल बनाने वाली पुरी ऑयल मिल्स के महाप्रबंधक उमेश वर्मा ने आईएएनएस को बताया, “सरसों के तेल में पाए जाने वाले एलिल आइसोथियोसाइनेट्स (एआईटीसी) कंटेंट को व्यापक रूप से एक रोगाणुरोधी कारक (बैक्टीरिया आदि मारने वाला) माना गया है। इसीलिए इसे जुकाम के इलाज, इम्युनिटी बूस्टर, बालों की ग्रोथ, त्वचा को पोषण देने जैसी कई विशेषताओं वाला माना जाता है, बल्कि इसका आयुर्वेद में उल्लेख भी किया गया है।”

सैनी ने कहा, “सरसों के तेल में जीवाणुरोधी और एंटीफंगल गुण होते हैं और यह हमारे पाचन तंत्र को हानिकारक संक्रमण से बचाने में मदद करता है। बल्कि यह बंद हो गए साइनस को साफ करने में भी उपयोगी है। इतना ही नहीं, सदियों पुराने कई घरेलू उपचार हैं, जिनका अनगिनत बार परीक्षण हो चुका है।”

उन्होंने कहा, “ये घरेलू उपचार आज के समय में खास तौर पर उपयोगी हैं। उदाहरण के लिए, यदि सरसों के तेल को लहसुन, लौंग के साथ गर्म किया जाता है और जुकाम होने पर इसे पैरों के तलवों और छाती पर मल दिया जाता है तो इससे काफी राहत मिलती है।”

दिल्ली स्थित मस्टर्ड रिसर्च एंड प्रमोशन कंसोर्टियम (एमआरपीसी) की सहायक निदेशक प्रज्ञा गुप्ता इस संबंध में कुछ दिलचस्प बातें बताती हैं। उन्होंने बताया, “इस साल की शुरुआत में रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के उपचार के रूप में सरसों के बीज का उपयोग फुटबाथ देने में किया गया। यह अध्ययन जर्मनी के इंस्टीट्यूट ऑफ फैमिली मेडिसिन द्वारा किया गया। इस अध्ययन में सरसों के संक्रमण से लड़ने वाले गुणों का लाभ रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन से निपटने की संभावनाओं के तौर पर लेने की बात कही गई है। इसलिए ऐसा लगता है कि यही गुण और उपचार कोविड-19 को रोकने के लिए लागू किया जा सकता है जो रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट पर हमला करके उसे संक्रमित करता है।”

लिहाजा, सारांश यही है कि यदि आप तेजी से फैलते कोरोनावायरस के इस दौर में विश्वसनीय इम्युनिटी बूस्टर की खोज कर रहे हैं, तो सरसों का तेल एक ऐसा उत्पाद है जो इम्युनिटी का निर्माण करने वाले शक्तिशाली पदार्थ के तौर पर जाना जाता है।

व्यापार

सोने और चांदी का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ा, निवेशकों को फेड के फैसले का इंतजार

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सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को तेजी देखने को मिली और दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ गया।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,50,809 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,291 रुपए या 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,52,100 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।

दोपहर 12 बजे यह 953 रुपए या 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,51,762 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

अब तक के कारोबार में सोने ने 1,51,450 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,52,100 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है, यह दिखाता है कि खुलने के बाद सोना सीमित दायरे में बना हुआ है।

सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखने को मिल रही है।

चांदी का 4 दिसंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,32,118 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 3,667 रुपए या 1.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,35,785 रुपए प्रति किलो पर खुला।

फिलहाल यह 3,250 रुपए या 1.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,35,988 रुपए प्रति किलो पर था।

अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,34,540 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,35,988 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर बनाया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में तेजी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.77 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,366 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 65 डॉलर प्रति औंस पर थी।

ब्याज दरों पर दो दिवसीय अमेरिकी फेड बैठक के फैसलों का ऐलान आज देर शाम किया जाएगा। यह ऐसे समय पर आ रहा है, जब मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत करीब चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और यूएस बॉन्ड यील्ड भी 5 प्रतिशत के ऊपर जा चुकी है। इस कारण इस फैसले पर निवेशक करीब से निगाह रख रहे हैं।

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व्यापार

भारत का आवासीय बाजार स्थिर, हाउसिंग प्राइस इंडेक्स पहली तिमाही में 3.6 प्रतिशत बढ़ा

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भारत का हाउसिंग प्राइस इंडेक्स (एचपीआई) वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सालाना आधार पर 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो पिछले साल की समान अवधि की वृद्धि के समान ही है। वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में यह सालाना 4.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा था। यह देश के स्थिर आवासीय बाजार को दिखाता है। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में बताया गया कि तिमाही आधार पर एचपीआई वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 1.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में की वृद्धि दर 0.5 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं, हाउसिंग क्रेडिट वृद्धि दर वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 11 प्रतिशत रही है।

रिपोर्ट में बताया गया कि हाउसिंग के क्षेत्र में महंगाई पर इनपुट लागत बढ़ने का असर हुआ है। ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों और कंस्ट्रक्शन की लागत में बढ़ोतरी से घरों की कीमतें बढ़ीं।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के असर से ग्लोबल ग्रोथ पर दबाव पड़ा, क्योंकि इससे कमोडिटी की कीमतें बढ़ीं और सप्लाई चेन में रुकावट आई। भारत में भी वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में महंगाई तेजी से बढ़ी और इसका असर अलग-अलग इंडस्ट्रीज पर देखा गया।

वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में एचपीआई की सालाना बढ़ोतरी में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले शहरों में चंडीगढ़ (49.6 प्रतिशत), जयपुर (36.4 प्रतिशत), कानपुर (27.5 प्रतिशत), लखनऊ (17.7 प्रतिशत) और तिरुवनंतपुरम (16.3 प्रतिशत) शामिल थे।

चंडीगढ़ में कीमतों में बढ़ोतरी की वजह कलेक्टर रेट में हालिया बदलाव है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू हुआ है। इसके अलावा, नई जमीन की कमी ने भी हाल के समय में कीमतों को बढ़ाया है।

दिल्ली (-1.2 प्रतिशत), कोलकाता (-31.5 प्रतिशत), मुंबई (2.8 प्रतिशत) और हैदराबाद (-0.8 प्रतिशत) जैसे शहरों में वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के दौरान गिरावट आई है या बढ़ोतरी की रफ्तार बहुत धीमी रही है।

बेहतर कनेक्टिविटी और सर्विस-सेक्टर में रोजगार के बढ़ते मौकों की वजह से बड़े शहरों के बजाय टियर-2 शहर बाजार की मांग को आगे बढ़ा रहे हैं।

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व्यापार

बोफा ने भारतीय शेयर बाजार पर बढ़ाया भरोसा, दिसंबर 2026 तक निफ्टी के 26,200 तक पहुंचने का लगाया अनुमान

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बोफा यानी बैंक ऑफ अमेरिका (बीओएफए) सिक्योरिटीज ने लगभग दो वर्षों तक सतर्क रुख अपनाने के बाद भारतीय शेयर बाजारों को लेकर अपना दृष्टिकोण सकारात्मक कर लिया है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि निफ्टी दिसंबर 2026 तक 26,200 के स्तर तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तरों से करीब 12 प्रतिशत की संभावित बढ़त को दर्शाता है।

अपनी नवीनतम रणनीति रिपोर्ट में बीओएफए ने कहा कि वह अगस्त 2024 से भारतीय शेयरों को लेकर सतर्क था और उसने आठ प्रमुख जोखिमों की पहचान की थी, जो बाजार में अस्थिरता बनाए रख सकते थे। हालांकि अब इन आठ में से पांच जोखिम या तो सामने आ चुके हैं या फिर बाजार पहले ही उन्हें अपने मूल्यांकन में शामिल कर चुका है। इसी वजह से ब्रोकरेज ने अब भारतीय इक्विटी बाजारों पर अधिक सकारात्मक रुख अपनाया है।

बोफा के अनुसार, शेष तीन जोखिमों के कारण उसके नकारात्मक परिदृश्य में निफ्टी 50 में लगभग 7 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। हालांकि उसके आधारभूत अनुमान में निफ्टी दिसंबर 2026 तक 26,200 के स्तर तक पहुंच सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बचे हुए जोखिम अक्टूबर 2026 तक अपने चरम पर पहुंच सकते हैं। इसके बाद नवंबर से बाजार में टिकाऊ सुधार की संभावना बन सकती है।

ब्रोकरेज फर्म ने पहले जिन प्रमुख जोखिमों की पहचान की थी, उनमें कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाना भी शामिल था। ब्रोकरेज का चौथी तिमाही 2026 के लिए कच्चे तेल का अनुमान 81 डॉलर प्रति बैरल है। रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले सात महीनों में कच्चे तेल की कीमतें सात बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से वापस नीचे आई हैं।

रुपया भी पहले चिंता का विषय था, हालांकि बीओएफए का कहना है कि हाल में आए लगभग 136 अरब डॉलर के पूंजी प्रवाह से भारतीय मुद्रा को समर्थन मिलना चाहिए और उसने रुपये को लेकर मजबूती का दृष्टिकोण बनाए रखा है।

कमजोर मानसून को भी जोखिमों में शामिल किया गया था। वर्तमान में वर्षा की कमी 13 प्रतिशत है, जो बीओएफए के पहले से अनुमानित 15 प्रतिशत के सबसे खराब परिदृश्य के काफी करीब है।

ब्रोकरेज का यह भी मानना है कि एल्यूमीनियम और तांबे की कीमतों में अब अधिक तेजी की संभावना सीमित है। मौद्रिक नीति के मोर्चे पर बीओएफए के अर्थशास्त्री का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) दिसंबर 2026 तक नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है, जबकि स्वैप बाजार फिलहाल करीब 45 आधार अंकों की बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं।

बोफा ने जिन तीन प्रमुख जोखिमों को अभी भी बरकरार बताया है, उनमें पहला प्राथमिक बाजार में बड़े पैमाने पर पूंजी जुटाने की गतिविधियां हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर से दिसंबर के बीच लगभग 30 अरब डॉलर के नए इश्यू आ सकते हैं और अक्टूबर में इनकी रफ्तार सबसे अधिक रहने की संभावना है।

दूसरा जोखिम अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में अपेक्षा से अधिक बढ़ोतरी का है। बीओएफए का अनुमान है कि फेड कुल 75 आधार अंक तक दरें बढ़ा सकता है, जबकि बाजार फिलहाल लगभग 35 आधार अंकों की बढ़ोतरी को मूल्यांकन में शामिल कर रहे हैं।

तीसरा और दीर्घकालिक जोखिम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ा है। बीओएफए ने कहा कि एआई-आधारित बदलावों का भारत में रोजगार बाजार पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है और निवेशकों को इस विषय पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

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