राजनीति
मप्र विधानसभा ने 4.21 लाख करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी, सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होगी
भोपाल, 22 मार्च। मध्य प्रदेश विधानसभा ने शुक्रवार देर रात राज्य सरकार के 2025-26 के लिए 4.21 लाख करोड़ रुपये के बजट को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
रात 10 बजे तक चले विस्तृत सत्र के बाद वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने विभागीय अनुदान मांगों को सामूहिक रूप से मंजूरी दिए जाने के बाद विनियोग विधेयक पेश किया।
उन्होंने प्रस्तावित बजट के लिए सदन की मंजूरी मांगी, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
इसके बाद विधानसभा की कार्यवाही 24 मार्च की सुबह तक के लिए स्थगित कर दी गई।
शुक्रवार के सत्र में जल संसाधन, नगरीय विकास एवं आवास, खेल एवं युवा कल्याण तथा कृषि विकास सहित प्रमुख विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा हुई।
इन विचार-विमर्श में सदस्यों की भागीदारी के कारण कार्यवाही देर शाम तक चलती रही। सत्र के समापन तक अनुदान मांगों को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी गई।
10 मार्च से शुरू हुआ बजट सत्र 24 मार्च तक चलेगा। इस सत्र के दौरान, 2024-25 के लिए सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) पर प्रकाश डाला गया, जिसमें मौजूदा कीमतों पर 15.22 लाख करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। 2024-25 वित्तीय वर्ष की प्रमुख वित्तीय विशेषताओं में व्यय (ऋण चुकौती को छोड़कर) 3.26 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जो 2023-24 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि है, राजस्व प्राप्तियां (उधार को छोड़कर) 2.63 लाख करोड़ रुपये अनुमानित हैं, जो 2023-24 के अनुमानों की तुलना में 7.6 प्रतिशत अधिक है। राज्य सरकार ने 1,700 करोड़ रुपये (जीएसडीपी का 0.1 प्रतिशत) का राजस्व अधिशेष पिछले वर्ष से 0.04 प्रतिशत अनुमानित किया है। हालांकि, राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 4.1 प्रतिशत (62,564 करोड़ रुपये) पर लक्षित है, जबकि 2023-24 के संशोधित अनुमानों में यह 3.6 प्रतिशत था।
बजट में 29,697 करोड़ रुपये के ऋण पुनर्भुगतान का भी हिसाब रखा गया है। सत्र में सरकार के वित्तीय अनुशासन पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया गया, जिसमें अधिशेष बनाए रखने और राजकोषीय घाटे को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने पर जोर दिया गया।
24 मार्च को बजट सत्र समाप्त होने के साथ, 2025-26 के लिए व्यापक वित्तीय खाका का उद्देश्य विकास संबंधी प्राथमिकताओं को राजकोषीय जिम्मेदारी के साथ संतुलित करना है।
राजनीति
नेपाल बाढ़ त्रासदी में 160 से ज्यादा मौतें, भारत हर संभव मदद के लिए तैयार: संजय निरुपम

शिवसेना नेता संजय निरुपम ने नेपाल में आई भीषण बाढ़, महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा के पेपर लीक, गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा प्रशिक्षण, कॉमेडियन समय रैना के सम्मान और कर्नाटक में ‘वंदे मातरम’ के दो छंद गाए जाने के फैसले को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने नेपाल की त्रासदी पर चिंता जताते हुए भारत की ओर से हरसंभव मदद की बात कही, जबकि पेपर लीक मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की।
नेपाल में आई भीषण बाढ़ को लेकर संजय निरुपम ने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा में 160 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब एक हजार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई तीर्थयात्री भी इस आपदा में फंसे हैं और कुछ के हताहत होने की आशंका है। नेपाल का दुख भारत का भी दुख है और भारत सरकार तथा देश नेपाल के साथ खड़ा रहेगा। नेपाल को जितनी सहायता की जरूरत होगी, भारत सरकार मदद करेगी।
बाढ़ के कारणों पर उन्होंने ग्लेशियरों और प्राकृतिक व्यवस्थाओं से छेड़छाड़ को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन प्राकृतिक संतुलन के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। नेपाल की नदियों का सीधा संबंध बिहार और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल से है। नेपाल में भारी बारिश या बाढ़ आने पर कोसी, गंडक और घाघरा जैसी नदियों में भी जलस्तर बढ़ सकता है। ऐसे में बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकारें अलर्ट मोड में हैं और बाढ़ से पहले जान-माल की सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं।
एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा का पेपर लीक होने और परीक्षा रद्द किए जाने पर निरुपम ने कहा कि पेपर लीक एक गंभीर अपराध है। यह समस्या किसी एक राज्य या सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे अंतरराज्यीय स्तर पर आपराधिक नेटवर्क काम कर रहा है। पेपर लीक करने वाले माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। अलग-अलग राज्यों की सरकारों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर ऐसे नेटवर्क को खत्म करना चाहिए। साथ ही कोचिंग और करियर गाइडेंस के नाम पर चल रहे उन संस्थानों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जो परीक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाते हैं।
निरुपम ने कहा कि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले सामान्य परिवारों के युवा वर्षों तक मेहनत करते हैं। पेपर लीक उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है, इसलिए दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा चालकों को मराठी सीखने के लिए दिए जा रहे प्रशिक्षण और इस मुद्दे पर दाखिल पीआईएल पर निरुपम ने कहा कि सरकार की स्थिति स्पष्ट है। जो लोग मराठी सीख चुके हैं, उनका स्वागत किया जाना चाहिए और जो अभी भाषा नहीं सीख पाए हैं, उन्हें पर्याप्त समय मिलना चाहिए। किसी चालक का लाइसेंस रद्द करना, परमिट जब्त करना या बैज रद्द करना उचित नहीं होगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी जरूरत के अनुसार समय देने की बात कही है।
साइबर सिक्योरिटी से जुड़े एक कार्यक्रम में समय रैना को सम्मानित किए जाने पर विपक्ष के सवालों पर निरुपम ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम की पूरी जानकारी नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर अश्लील सामग्री को बढ़ावा देना गलत है और ऐसी गतिविधियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अच्छा काम करता है तो सरकार द्वारा उसके काम को प्रोत्साहित करने के लिए सम्मानित किया जा सकता है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के ‘वंदे मातरम’ के केवल दो छंद गाने संबंधी बयान पर निरुपम ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रगीत है और इसे संसद से कानूनी दर्जा प्राप्त है। संसद ने इसके सभी छह छंद गाने के लिए कानून बनाया है। यदि कोई व्यक्ति, संस्था, सरकार या मुख्यमंत्री अपनी ओर से केवल दो छंद गाने की जिद करता है, तो यह संसद द्वारा बनाए गए कानून का उल्लंघन होगा।
उन्होंने कांग्रेस नेताओं से इस विषय को समझने की अपील करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा गीत है और हजारों-लाखों स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे गाते हुए आजादी की लड़ाई लड़ी। इसलिए इसके सम्मान और कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय समाचार
योगी सरकार को महिलाओं की याद देर से आई, योजनाएं जमीन पर दिखें: इमरान मसूद

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी की रैली रद्द होने, अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले बयान, योगी सरकार की योजनाओं, उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और नेपाल में आई बाढ़ समेत कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक दल का अपना एजेंडा है और उसे अपने हिसाब से काम करने का अधिकार है।
समाजवादी पार्टी की रैली रद्द होने के सवाल पर इमरान मसूद ने कहा कि यह उनकी पार्टी का कार्यक्रम है, इसलिए इस बारे में सवाल सपा से ही पूछा जाना चाहिए। वहीं, अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले बयान को लेकर उन्होंने कहा कि संबंधित नेता ने केवल पहले कही गई बात को दोहराया था और ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया जिससे किसी एक समाज का अपमान होता हो।
यह पूछे जाने पर कि क्या इस बयान का खामियाजा अखिलेश यादव को भुगतना पड़ेगा, मसूद ने कहा कि राजनीति में इस तरह की भविष्यवाणियों का कोई खास महत्व नहीं होता। हर पार्टी का अपना एजेंडा है और सभी अपने हिसाब से राजनीति करते हैं।
पश्चिम बंगाल में एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के सवाल पर मसूद ने कहा कि यदि अदालत को लगता है कि गलत हुआ है तो उसे कार्रवाई करने का अधिकार है। उन्होंने सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट को केवल पूछने की आवश्यकता क्यों होनी चाहिए, वह आदेश भी दे सकता है।
योगी सरकार की ओर से जेनीजी के लिए रोजगार, स्टार्टअप और अन्य पहलों के सवाल पर कांग्रेस सांसद ने कहा कि इन योजनाओं का असर धरातल पर दिखाई देना चाहिए। जब तक जमीन पर परिणाम नजर नहीं आते, तब तक ऐसे दावों का कोई खास अर्थ नहीं है। महिलाओं के लिए प्रस्तावित योजनाओं पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार को महिलाओं की याद काफी देर से आई है। उन्होंने चुनावों से पहले घोषित आर्थिक सहायता योजनाओं का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव के बाद किस्तों को लेकर स्थिति बदल जाती है। मसूद ने इसे वोट हासिल करने की राजनीति बताते हुए कहा कि इस तरह की परंपरा लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
सपा द्वारा सरकार बनने पर महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपए देने के वादे पर उन्होंने कहा कि पार्टी ने निश्चित रूप से अपना अध्ययन और आकलन करने के बाद यह घोषणा की होगी।
मायावती द्वारा भाजपा पर सवाल उठाने के मुद्दे पर इमरान मसूद ने कहा कि देश में इस समय दो विचारधाराओं के बीच संघर्ष है। उन्होंने एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरी तरफ राहुल गांधी को प्रमुख राजनीतिक चेहरों के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के साथ समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दल सहयोगी के तौर पर खड़े हैं। सपा के इस दावे पर कि भाजपा और सपा के बीच सीधी लड़ाई है, मसूद ने कहा कि व्यापक वैचारिक लड़ाई राहुल गांधी भाजपा के खिलाफ लड़ रहे हैं और विपक्षी दल उनके साथ हैं।
मायावती के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले पर मसूद ने कहा कि इससे बहुजन आंदोलन कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि बसपा का राजनीतिक प्रभाव लगातार घटा है। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश में दलितों के खिलाफ अत्याचार की घटनाओं का मुद्दा उठाते हुए मायावती पर भाजपा की तारीफ करने को लेकर भी सवाल खड़े किए।
शामली में सिंगर अंकित बालियान की हत्या पर उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर पूछे गए सवाल पर मसूद ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था तो बहुत अच्छी है।
वहीं, एटीएस की ओर से संदिग्धों से पूछताछ और प्रदेशभर में सर्च ऑपरेशन के सवाल पर उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई राजनीतिक एजेंडे के तहत लक्षित हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ लोगों को आतंकवाद के आरोपों में गिरफ्तार किया जा सकता है और बाद में अदालत से रिहाई मिल सकती है, लेकिन तब तक उनका जीवन प्रभावित हो चुका होगा।
नेपाल में आई बाढ़ और तबाही पर इमरान मसूद ने गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि प्रकृति और पानी के वेग के साथ छेड़छाड़ के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने मानसरोवर यात्रा से लौट रहे लोगों से जुड़े कथित वीडियो का जिक्र करते हुए इसे बेहद विचलित करने वाला बताया।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र: सुप्रिया सुले पर ओबीसी प्रमाणपत्र के आरोप को लेकर मचा बवाल

कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार द्वारा गुरुवार को यह आरोप लगाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले के पास अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का प्रमाण पत्र है।
इस दावे पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए सुले ने आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया और वडेट्टीवार से या तो अपने बयान को साबित करने या सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की। सुले के कड़े रुख के बाद, वडेट्टीवार ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अनजाने में उनका नाम लिया था और अपनी गलती पर खेद व्यक्त किया।
आरक्षण की स्थिति से संबंधित बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सुले ने वडेट्टीवार को अपने स्रोत बताने की चुनौती दी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने वडेट्टीवार से यह खुलासा करने का आग्रह किया कि यह जानकारी किसने और किस आधार पर दी। उन्होंने पोस्ट किया कि यदि वडेट्टीवार का दावा है कि यह सच है, तो उन्हें इसे साबित करने के लिए सार्वजनिक प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। अन्यथा, उन्हें निराधार दावे करने के लिए सार्वजनिक माफी मांगनी होगी।
विरोध के जवाब में, वडेट्टीवार ने एक्स के बारे में स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया कि ओबीसी प्रमाणपत्र मुद्दे पर अपना रुख बताते समय उन्होंने गलती से सुले का नाम ले लिया था। उन्होंने कहा कि उनका सुले पर आरोप लगाने का कोई इरादा नहीं था और अनजाने में हुई इस गलती के लिए खेद व्यक्त किया।
इस बीच, विवाद ने दोनों दलों के नेताओं से तीखी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कीं। महाराष्ट्र राष्ट्रीय बाल्यावस्था सेवा (एनसीपी) इकाई के प्रमुख शशिकांत शिंदे ने वडेट्टीवार की टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं का ऐसा व्यवहार 2014 में सत्ता के पतन का एक प्रमुख कारण था।
शिवसेना (यूबीटी) नेता अंबदास दानवे ने विवाद पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी ने निर्धारित कानूनी नियमों के भीतर प्रमाण पत्र प्राप्त किया है, तो इसमें कोई गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए।
इस बहस ने महाराष्ट्र में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी गुट के बीच बढ़ते आंतरिक मतभेदों को उजागर किया।
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