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वंदे भारत मिशन के जरिए 1 लाख से ज्यादा यात्रियों को वापस लाए : सरकार
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कांग्रेस के काले कारनामों ने भारत के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास को किया प्रभावितः निशिकांत दुबे

नई दिल्ली, 17 मार्च : झारखंड के गोड्डा से चौथी बार भाजपा से सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया एक्स पर एक के बाद एक पोस्ट कर कांग्रेस पार्टी को घेरा है।
निशिकांत दुबे ने एक्स पर लिखा है, “आज से एक नया दैनिक दिनचर्या का कार्य आरंभ कर रहा हूं। आजादी के बाद, कांग्रेस के काले कारनामे जिसने भारत के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास को प्रभावित किया।” 17 मार्च 1959 को, आज ही के दिन, तिब्बत से दलाई लामा जी भारत आए थे, इसी घटना के विरोध में चीन ने भारत पर 1962 का आक्रमण किया। आज भी हमारी लगभग 78 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन चीन ने इस युद्ध के बाद अपने कब्जे में जबरदस्ती रखी है। चीन हमारा पड़ोसी इसी घटना के बाद बना।”
वहीं, दूसरे पोस्ट में संसद में जारी गतिरोध के बीच सांसद निशिकांत ने विपक्ष के व्यवहार और निलंबन को लेकर लिखा है। उन्होंने पोस्ट में कहा, “आज सभी कांग्रेस पार्टी के सांसदों का निलंबन शायद वापस होगा। पहला समझौता हुआ कि विपक्ष के नेता अनर्गल, बेबुनियाद, तथ्यहीन, बकवास बातें सदन में नहीं करेंगे, उसके बदले मैं शांतिपूर्ण व्यवहार करूंगा। दूसरा, वेल में विपक्ष के सांसद सत्ता पक्ष की तरफ नहीं जाएंगे और कागज नहीं फेंकेंगे। लोकसभा के मेज पर चढ़कर उत्पात नहीं मचाएंगे और लोकसभा के अधिकारियों के साथ अभद्रता नहीं करेंगे। लोकतंत्र की मर्यादा बनी रहे, जनता ने हमें वाद-विवाद के लिए संसद बनाया है, ना कि उत्पात मचाने के लिए।”
इसके अलावा, विदेशी रिपोर्ट और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए निशिकांत ने एक और तीखा हमला बोला है। उन्होंने तीसरे एक्स पोस्ट में लिखा, “विदेशी सोरोस रिपोर्ट से देश को बर्बाद करने की सुपारी लेने वाली कांग्रेस। भाजपा ने कभी भी अपने आंतरिक मामलों में विदेशी रिपोर्ट का सहारा नहीं लिया। 2005 से 2013 तक की सभी विदेशी रिपोर्ट कांग्रेस पार्टी तथा भारत सरकार को बायकॉट करने की बात करती थी। हमने संसद में भी इसकी चर्चा नहीं कराई।”
इसके पहले 13 मार्च को निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी को ‘वोकेशनल लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा’ बताया था। उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी का मुख्य उद्देश्य पिकनिक मनाना है। इसलिए पिकनिक मनाने वाले को पूरा देश पहचानता है। उन्हें न तो गरीबों की चिंता है और न ही देश की चिंता है, देश उन्हें अच्छी तरह से जानता है।”
राजनीति
महाराष्ट्र: ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026’ विधेयक विधानसभा से पास, विधान परिषद में आज बिल पर चर्चा

मुंबई, 17 मार्च : महाराष्ट्र विधानसभा में सोमवार देर रात तगड़ी बहस के बाद धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2026 पारित किया गया। सत्तारूढ़ महायुति सरकार ने गैरकानूनी और जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए विधेयक की जरूरत पर जोर दिया। शिवसेना (यूबीटी) ने भी इस विधेयक का समर्थन किया। जिससे महा विकास अघाड़ी में मतभेद दिखाई दिया। कांग्रेस, एनसीपी (एसपी) और समाजवादी पार्टी सहित अन्य सहयोगी पार्टियों ने इस विधेयक का विरोध किया।
बता दें कि विधेयक में सामान्य मामलों में 7 साल तक की जेल और 1-5 लाख रुपये जुर्माना,महिला/नाबालिग/एसी-एसटी मामलों में 10 साल तक जेल और 7 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। धर्म परिवर्तन के लिए 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित नोटिस देना अनिवार्य होगा, और बाद में घोषणा भी। अवैध धर्मांतरण से हुई शादी निरस्त मानी जा सकती है।
विधानसभा से पारित होने के बाद अब यह विधेयक पारित करने के लिए विधान परिषद को भेजा गया है। मंगलवार को विधान परिषद में इस पर चर्चा है। विधानसभा में चर्चा के दौरान सीएम देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी खास वर्ग के खिलाफ नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसे केवल जबरदस्ती, धोखाधड़ी या प्रलोभन के माध्यम से किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में सरकार के रुख को स्पष्ट किया। ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ नाम का यह विधेयक शुक्रवार को गृह राज्य मंत्री (ग्रामीण) डॉ. पंकज भोयर ने सदन में पेश किया। जिसका उद्देश्य प्रलोभन, छल या बल के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण पर अंकुश लगाना है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक और राजस्थान सहित कई राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून पहले से ही लागू हैं। इसी को देखते हुए महाराष्ट्र ने भी ऐसा ही कानून लागू करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार देता है। सभी को अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने का अधिकार। हालांकि, किसी को जबरदस्ती धर्मांतरित करना, धोखाधड़ी, दबाव, बल प्रयोग या प्रलोभन देना स्वतः ही गलत है, इसलिए ऐसे मामलों को रोकने के लिए यह कानून आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहते हैं, उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। उन्हें धर्म परिवर्तन के बारे में अधिकृत अधिकारियों को सूचित करना होगा। सक्षम अधिकारी स्वीकृति देने से पहले यह सत्यापित करेंगे कि धर्म परिवर्तन वास्तव में स्वैच्छिक है।
इस विधेयक का समर्थन करते हुए शिवसेना (यूबीटी) के भास्कर जाधव ने कहा कि इसका उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करना और अवैध धर्मांतरण को रोकना है। यह व्यापक है और अफवाहों या गलतफहमियों के बावजूद किसी विशेष धर्म को निशाना नहीं बनाता है। इसका उद्देश्य अनैतिक प्रथाओं और धर्म के दुरुपयोग पर रोक लगाना है।
जाधव ने कहा कि मीडिया में झूठे दावे किए जा रहे हैं कि यह विधेयक किसी विशेष धर्म को निशाना बनाता है; यह गलत है। यह विधेयक सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होता है, और इसका उद्देश्य धर्मांतरण में जबरदस्ती या प्रलोभन को रोकना है।
बहस के दौरान, एनसीपी (एसपी) विधायक जितेंद्र आव्हाड ने महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2026 पर बोलते हुए विधानसभा में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। अपने भाषण में, आव्हाड ने विभिन्न ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला दिया। हालांकि, जब उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक का विशेष रूप से उल्लेख किया, तो सदन में हंगामा मच गया। अध्यक्ष राहुल नरवेकर ने आव्हाड से खेद व्यक्त करने का निर्देश दिया। जिसके बाद उन्होंने ने सदन से माफी मांगी।
अपराध
मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज को बम से उड़ाने की मिली धमकी

मुंबई, 17 मार्च : मुंबई के विभिन्न स्थानों पर बम रखने की धमकी मिलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन किसी न किसी संस्थान को बम से उड़ाने की धमकी मिल रही है। इसी कड़ी में अब मुंबई के माहिम स्थित सेंट जेवियर्स कॉलेज को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। धमकी मिलने के बाद प्रशासन ने कॉलेज को खाली करवा दिया।
मुंबई पुलिस के मुताबिक, सेंट जेवियर्स कॉलेज के बाथरूम में सोमवार को बम विस्फोट की धमकी भरा एक पत्र मिला। इसके बाद प्रधानाचार्य ने मुख्य नियंत्रण कक्ष को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस और बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचकर परिसर में तुरंत तलाशी अभियान चलाया। हालांकि अभी तक कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली है। पुलिस गुमनाम पत्र की जांच कर रही है। पुलिस का मानना है कि यह मुख्य रूप से एक झूठी धमकी है। मुंबई पुलिस उचित कार्रवाई कर रही है और मामले की जांच कर रही है।
गौरतलब है कि 12 मार्च को भी मुंबई मेट्रो, बीएसई, हाईकोर्ट और विधानभवन को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। ईमेल के जरिए अलग-अलग ठिकानों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। इसके बाद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। विधानभवन को भेजे गए ईमेल में लिखा गया था, “विधान भवन में बम रखा गया है।” इसके बाद, सुरक्षा के मद्देनजर, पूरा विधानसभा परिसर खाली करा दिया गया और पत्रकारों और कर्मचारियों को बाहर भेज दिया गया था। बम स्क्वॉड की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और सर्च ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन किसी भी तरह की विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। मुंबई मेट्रो और बैंकों को भी धमकी भरे ईमेल मिले थे।
महाराष्ट्र विधान परिषद के चेयरमैन राम शिंदे ने उस समय कहा था कि राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) को सुबह 6.57 बजे एक ईमेल भेजा गया था। बजट सत्र चल रहा है, इसलिए ईमेल में खासतौर पर बम का इस्तेमाल करके हमले की धमकी दी गई थी। धमकी में मुंबई में चार हाई-प्रोफाइल टारगेट की पहचान की गई थी, जिनमें विधानभवन, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई), बॉम्बे हाईकोर्ट और मुंबई मेट्रो शामिल हैं।”
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