राजनीति
मोदी का बयान सेना प्रमुख, राजनाथ के बयानों के उलट : कांग्रेस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जोर देकर यह कहने के अगले दिन कि चीनी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ नहीं की, कांग्रेस ने शनिवार को एक बार फिर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का बयान सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा पूर्व में दिए गए बयानों के उलट व विरोधाभाषी है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कल सर्वदलीय बैठक में जो कहा था, उसे दोहराकर मैं शुरुआत करना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमारे रक्षा बलों के साथ खड़ी है और यह सुनिश्चित करने के लिए वे युद्ध के लिए तैयार हैं। पार्टी कोई भी बलिदान करने के लिए तैयार है।”
चिदंबरम ने कहा कि बैठक के अंत में प्रधानमंत्री ने अपना निष्कर्षपूर्ण बयान दिया।
कांग्रेस नेता ने कहा, “इस बयान ने व्यावहारिक रूप से सबको चकित और हक्का-बक्का कर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि लद्दाख में भारतीय क्षेत्र के अंदर कोई बाहरी नहीं आया था।”
चिदंबरम ने कहा, “यह बिल्कुल स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री का बयान सेना प्रमुख,, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री द्वारा पूर्व में दिए गए बयानों के उलट है।”
कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा कि अगर प्रधानमंत्री का बयान सही स्थिति को दर्शाता है, तो हम सरकार से कुछ सवाल पूछना चाहेंगे।
मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने पूछा, “अगर कोई चीनी सैनिक ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को पार नहीं किया था और भारतीय क्षेत्र में नहीं था तो 5-6 मई, 2020 को हुआ टकराव क्या था? 5 मई से 6 जून के बीच, स्थानीय भारतीय कमांडर किस मुद्दे पर चीनी समकक्षों के साथ वार्ता कर रहे थे? 6 जून को दोनों देशों के कोर कमांडरों के बीच वार्ता का विषय क्या था?”
चिदंबरम ने लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों और भारतीय जवानों के बीच हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों के शहीद होने का जिक्र करते हुए कहा, “हम यह भी पूछना चाहते हैं कि क्या कोई चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र के अंदर नहीं था? 15-16 जून को संघर्ष कहां हुआ? 20 भारतीय जवान कहां शहीद हुए और 85 कहां घायल हुए?”
मोदी ने सर्वदलीय बैठक में कहा था कि भारतीय क्षेत्र या चौकी पर किसी का कब्जा नहीं है।
मोदी ने सभी नेताओं को भरोसा दिलाते हुए कहा था कि भारतीय सेना सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है और सभी आवश्यक कदम उठाने की छूट दी गई है।
पूर्व वित्तमंत्री ने पूछा कि अगर चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र में नहीं ते तो विदेश मंत्री एस. जयशंकर और एमईए के बयानों में पूर्व वाली यथास्थिति बहाल करने की मांग क्यों की गई थी?
उन्होंने यह भी पूछा कि अगर चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र में नहीं थे तो फिर भारतीय जवानों को शहादत क्यों देनी पड़ी?
उन्होंने कहा कि शुक्रवार को मोदी द्वारा दिए गए बयान के बाद भी चीन ने झड़प के लिए भारत को जिम्मेदार बताया और एक बार फिर पूरे गलवान घाटी पर अपना दावा किया है।
चिदंबरम ने पूछा कि इस दावे पर सरकार का क्या जवाब है? क्या सरकार इस दावे को खारिज कर देगी?
उन्होंेने पूछा कि प्रधानमंत्री ने जब कुछ दिनों पहले कहा था कि जवानों की शहादत बेकार नहीं जाएगी तो उनके दिमाग में क्या चल रहा था?
चिदंबरम ने कहा, “राष्ट्र की रक्षा और इसकी क्षेत्रीय अखंडता हर भारतीय के दिल को प्रिय है। इसलिए हम अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराने और एकजुटता की तस्वीर पेश करने के लिए सवालों के जवाब चाहते हैं।”
महाराष्ट्र
वक्फ संपत्तियों पर भूमि माफिया के खिलाफ संघर्ष : नया संशोधित बिल चुनौतियां बढ़ा रहा है

नई दिल्ली : वक्फ संपत्तियों की रक्षा करने और उनके लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने की लड़ाई पहले से ही भूमि माफिया, अतिक्रमणकारियों और अवैध समूहों के कारण कठिन थी। अब सरकार द्वारा पेश किया गया नया संशोधित बिल इस संघर्ष में एक और बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। एडवोकेट डॉ. सैयद एजाज अब्बास नक़वी ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है और तुरंत सुधारों की मांग की है। उन्होंने कहा कि वक्फ का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंदों को लाभ पहुंचाना था, लेकिन दुर्भाग्यवश यह उद्देश्य पूरी तरह असफल हो गया है। दूसरी ओर, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC), जो सिख समुदाय की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था है, दशकों से अपने समुदाय के कल्याण में सक्रिय रूप से लगी हुई है। इसके परिणामस्वरूप, सिख समाज में भिखारियों और मानव रिक्शा चालकों की संख्या लगभग समाप्त हो गई है।
वक्फ भूमि पर अवैध कब्जे और दुरुपयोग उजागर :
डॉ. नक़वी के अनुसार, वक्फ संपत्तियों को सबसे अधिक नुकसान स्वार्थी समूहों द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमणों से हुआ है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि कई वक्फ संपत्तियां मूल रूप से सैयद परिवारों की दरगाहों के लिए दान की गई थीं, लेकिन उनका भारी दुरुपयोग किया गया। उन्होंने खुलासा किया कि एक प्रसिद्ध व्यक्ति ने मुंबई के ऑल्टामाउंट रोड पर स्थित एक एकड़ प्रमुख वक्फ भूमि को मात्र 16 लाख रुपये में बेच दिया, जो वक्फ के सिद्धांतों और कानूनों का खुला उल्लंघन है।
धारा 52 में सख्त संशोधन की मांग :
डॉ. नक़वी ने सरकार से वक्फ संपत्तियों को अवैध रूप से बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने वक्फ अधिनियम की धारा 52 में तत्काल संशोधन कर मृत्युदंड या आजीवन कारावास जैसी कड़ी सजा का प्रावधान करने की मांग की है। यह मुद्दा उन लोगों के लिए एक बड़ा झटका है जो वक्फ संपत्तियों की रक्षा के लिए पहले से ही भ्रष्ट तत्वों और अवैध कब्जाधारियों से लड़ रहे हैं। यह देखना बाकी है कि क्या सरकार इन चिंताओं को गंभीरता से लेती है और वक्फ भूमि की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून लागू करती है।
राजनीति
दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने वक्फ संशोधन विधेयक पास होने पर कहा – ‘न्याय और पारदर्शिता की नई शुरुआत तय’

नई दिल्ली, 4 अप्रैल। लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी वक्फ संशोधन विधेयक के पास होने पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुशी जताई। उन्होंने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि इस विधेयक को मंजूरी मिलने से अन्याय और भ्रष्टाचार को खत्म कर न्याय और पारदर्शिता की नई शुरुआत होगी।
उन्होंने कहा कि 2013 में तुष्टिकरण के लिए रातों-रात वक्फ कानून को अतिवादी बना दिया गया, जिसके कारण दिल्ली के लुटियंस जोन की 123 वीवीआईपी संपत्तियां वक्फ को दे दी गईं। इस विधेयक के पारित होने से देश के विकास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है, जो न्याय और समानता को सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक के बाद एक कई पोस्ट किए।
सीएम रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज का दिन ऐतिहासिक है। संसद ने ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक – 2025’ को मंजूरी दे दी है, जो दशकों से चले आ रहे अन्याय और भ्रष्टाचार को खत्म कर न्याय और पारदर्शिता की नई शुरुआत करेगा। 2013 में तुष्टिकरण के लिए रातों-रात वक्फ कानून को अतिवादी बना दिया गया, जिसके कारण दिल्ली के लुटियंस जोन की 123 वीवीआईपी संपत्तियां वक्फ को दे दी गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस ऐतिहासिक कदम से अब इसकी पारदर्शिता से निगरानी की जा सकेगी।”
उन्होंने लिखा, “2013 में लाए गए संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों में कुल साढ़े 5 घंटे चर्चा हुई थी, जबकि इस विधेयक पर दोनों सदनों में 16 घंटे से ज्यादा की चर्चा हुई। मोदी सरकार ने संयुक्त समिति बनाई, जिसमें 38 बैठकें हुईं, 113 घंटे चर्चा हुई और 284 हितधारकों को शामिल किया गया। ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025’ को संसद के पटल पर लाने से पहले मोदी सरकार को देशभर से करीब एक करोड़ ऑनलाइन सुझाव मिले, जिनका विश्लेषण करने के बाद यह कानून बनाया गया, जो दर्शाता है कि जहां मोदी सरकार मुस्लिमों के साथ खड़ी है, वहीं विपक्ष केवल वोट बैंक की आड़ में गुमराह कर रहा है।”
सीएम रेखा गुप्ता ने लिखा, “इस विधेयक के पारित होने से देश के विकास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है, जो न्याय और समानता को सुनिश्चित करेगा। इसे समर्थन देने वाले सभी दलों और सांसदों का भी धन्यवाद। वक्फ बोर्ड को अधिक उत्तरदायी बनाना अनिवार्य था। यह विधेयक सुनिश्चित करेगा कि वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग न हो और इसका लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचे। यह पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा, जिससे करोड़ों लोगों को न्याय मिलेगा।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
प्रधानमंत्री मोदी ने बिम्सटेक देशों के बीच व्यापार और पर्यटन को बढ़ाने के लिए यूपीआई लिंक का दिया प्रस्ताव

बैंकॉक, 4 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत के यूपीआई को बिम्सटेक देशों के पेमेंट सिस्टम से जोड़ने का प्रस्ताव दिया। इससे ग्रुप के सदस्य देशों के बीच व्यापार और पर्यटन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, सात देशों (बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड) के समूह की छठी समिट में प्रधानमंत्री मोदी ने स्थानीय करेंसी में रीजन में व्यापार बढ़ाने के लिए बिम्सटेक चेम्बर ऑफ कॉमर्स स्थापित करने का प्रस्ताव दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने 28 मार्च को म्यांमार और थाईलैंड में आए
बिम्सटेक समिट में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में समृद्धि, सुरक्षा और समावेशिता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को साकार करने के लिए बैंकॉक विजन 2030 को अपनाया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने बिम्सटेक समूह के दायरे और क्षमताओं को लगातार बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया, गृह मंत्रियों के तंत्र को संस्थागत बनाने का स्वागत किया और भारत में पहली बैठक आयोजित करने की पेशकश की।
उन्होंने आगे कहा कि यह मंच साइबर अपराध, साइबर सुरक्षा खतरों, आतंकवाद, साथ ही नशीली दवाओं और मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस संबंध में, मैं 2025 में इसकी पहली बैठक भारत में आयोजित करने का प्रस्ताव करता हूं।
थाईलैंड द्वारा आयोजित बिम्सटेक समिट में भारत, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका और भूटान के शीर्ष नेता भाग ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि एक स्वतंत्र, खुला, सुरक्षित और संरक्षित हिंद महासागर हमारी साझा प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा, “आज साइन हुए समुद्री परिवहन समझौते से व्यापारिक नौवहन और माल परिवहन में सहयोग मजबूत होगा और व्यापार में तेजी आएगी।”
विनाशकारी भूकंप में हुई जानमाल की हानि पर अपनी संवेदना व्यक्त की और आपदा की तैयारी, राहत और पुनर्वास पर सहयोग के लिए भारत में बिम्सटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट की स्थापना का प्रस्ताव रखा।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में एक सस्टेनेबल मैरीटाइम ट्रांसपोर्ट सेंटर की स्थापना की भी बात की। उन्होंने कहा, “यह केंद्र समुद्री नीतियों में क्षमता निर्माण, अनुसंधान, नवाचार और समन्वय पर ध्यान केंद्रित करेगा और समुद्री सुरक्षा में सहयोग को भी बढ़ावा देगा।”
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