राजनीति
मायावती : सपा कर रही छलावा, विधायक पहले से ही निलंबित
Lucknow: BSP chief Mayawati addresses a press conference at her residence in Lucknow on March 24, 2018. (Photo: IANS)
बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने बुधवार को समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने पार्टी में टूट को नकारते हुए कहा, ” घृणित जोड़तोड़, द्वेष व जातिवाद की संकीर्ण राजनीति में माहिर समाजवादी पार्टी मीडिया के सहारे यह प्रचारित कर रही है कि बसपा के कुछ विधायक टूट कर समाजवादी पार्टी में जा रहे हैं। यह घोर छलावा है।” मायावती ने बुधवार को ट्वीट कर कहा, ” इन विधायको को काफी पहले ही सपा और एक उद्योगपति से मिलीभगत के कारण राज्यसभा के चुनाव में एक दलित के बेटे को हराने के आरोप में बसपा से निलंबित किया जा चुका है। बसपा में टूट की बात एक दम छलावा है।”
मायावती ने लगातार पांच ट्वीट कर सपा को आड़े हाथ लेते हुए कड़ी चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, ” सपा अगर इन निलंबित विधायकों के प्रति थोड़ी भी ईमानदार होती तो अब तक इन्हें अधर में नहीं रखती। उनको यह मालूम है कि बीएसपी के यदि इन विधायकों को लिया तो सपा में बगावत व फूट पड़ेगी, जो बीएसपी में आने को आतुर बैठे हैं।”
बसपा अध्यक्ष मायावती ने कहा, ” ये जगजाहिर है कि सपा का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा ही दलित विरोधी रहा है, जिसमें थोड़ा भी सुधार के लिए वह कतई तैयार नहीं हैं। इसी कारण सपा सरकार में बीएसपी सरकार के जनहित के कामों को बंद किया। खासकर भदोई को नया संत रविदास नगर जिला बनाने को भी बदल डाला गया था, जो अति निंदनीय कदम था।”
बसपा अध्यक्ष मायावती ने अपने आखिरी ट्वीट में फिर दोहराया, ” बीएसपी के निलंबित विधायकों से मिलने आदि का मीडिया में प्रचारित करने के लिए मंगलवार को किया गया सपा का नया नाटक यूपी में पंचायत चुनाव के बाद अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख के चुनाव के लिए की गई पैंतरेबाजी ज्यादा लगती है। यूपी में बीएसपी जन आकांक्षाओं की पार्टी बनकर उभरी है, जो जारी रहेगा।”
ज्ञात हो कि मंगलवार को बसपा में बगावत से सूबे का सियासी माहौल गर्मा दिया। बसपा से निलंबित 11 विधायकों ने एकजुटता दिखाते हुए लालजी वर्मा के नेतृत्व में एक अलग दल बनाने का विचार कर रहे हैं। पांच बागी विधायकों ने कल लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। बसपा में कुल 18 विधायकों में से नौ को पार्टी ने निलंबित और दो को निष्काषित कर दिया गया है।
मंगलवार को विक्रमादित्य स्थित सपा कार्यालय पर अखिलेश यादव से मिलने गए विधायकों की अगुवाई श्रावस्ती के विधायक असलम राईनी ने की। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही वे बसपा से हाल ही में निष्कासित किए गए लालजी वर्मा के नेतृत्व में नया दल बनाएंगे। उनके साथ पार्टी के 11 विधायक हैं।
महाराष्ट्र
मुंबई: फर्जी अशोक खरात अब पुलिस स्टेशन के संपर्क में, नगर निगम अधिकारी के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज

मुंबई: नासिक का नकली बाबा अशोक खराट अब सामने आया है। पुलिस ने दावा किया है कि उसने नगर निगम थाने में उस समय के असिस्टेंट कमिश्नर महेश भाऊराव अहीर के खिलाफ रेप का केस दर्ज किया है। जानकारी के मुताबिक, पीड़िता 2020 से 2023 तक नगर निगम पंच पखरी ऑफिस में काम करती थी। इस दौरान आरोपी ने असिस्टेंट डेटा ऑपरेटर से दोस्ती की और थाने में ही एक बिल्डिंग में किराए के मकान में उसके साथ सेक्सुअल रिलेशन बनाए। उसकी मर्जी के खिलाफ कई बार उसका यौन शोषण किया और शिकायत करने पर उसकी न्यूड तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी। पहली बार वह पीड़िता को हीरानंदानी बिल्डिंग में ले गया, उसे नशीला ड्रिंक पिलाया और उसके साथ सेक्सुअल रिलेशन बनाए। इसके बाद उसने कई बार उसके साथ रेप किया। पुलिस ने शिकायतकर्ता की शिकायत पर कसारवाड़ी थाने में रेप और दूसरी धाराओं में केस दर्ज किया है। खास बात यह है कि अहीर ने पीड़िता से कहा था कि वह अशोक का भविष्य और किस्मत जानने के लिए उसे अशोक खड़ात के पास भी ले गया था और ऑफिस में उसे नींबू का रस दिया गया था और उसके बाद वह बेहोश हो गया था। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि अशोक खरात के मामले में एसआईटी जांच कर रही है। रेप केस से अशोक खरात का कनेक्शन सामने आने के बाद पुलिस इस लाइन पर भी जांच कर रही है। पुलिस ने इस मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में पुलिस जांच में और प्रगति होने की साफ संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
डोनाल्ड ट्रंप के कड़ा रुख अपनाने से ईरान से चल रही वार्ता लड़खड़ाई

trump
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता असमंजस की स्थिति में लग रही है क्योंकि तेहरान ने पाकिस्तान में होने वाली बातचीत में शामिल होने को लेकर हिचकिचाहट दिखाई है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कड़ा रुख अपना लिया है। इससे आगामी संघर्ष विराम की समय सीमा से पहले किसी समझौते को लेकर नए संदेह पैदा हो गए हैं।
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दूसरा दौर, जिसके इस्लामाबाद में होने की उम्मीद थी, अब अनिश्चित हो गया है। ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अमेरिका की ओर से ईरान के झंडे वाले एक जहाज को ज़ब्त किए जाने के बाद वे इस बातचीत में शामिल नहीं हो सकते हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अब तक, हमने बातचीत के अगले दौर के बारे में कोई फैसला नहीं किया है।
यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का संघर्ष-विराम खत्म होने वाला है। इससे दोनों पक्षों पर किसी समझौते पर पहुंचने का दबाव बढ़ गया है, वरना उन्हें फिर से दुश्मनी शुरू होने का जोखिम उठाना पड़ सकता है।
सीएनएन के अनुसार, इस अनिश्चितता को और बढ़ाते हुए, ट्रंप के सार्वजनिक बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट ने इस नाज़ुक बातचीत को और भी पेचीदा बना दिया है।
दोनों पक्ष सात हफ्ते से चले आ रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए किसी समझौते के काफी करीब लग रहे थे। लेकिन ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि ईरान कुछ अहम शर्तों पर सहमत हो गया है, जबकि अधिकारियों का कहना था कि उन शर्तों को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया था।
ईरानी अधिकारियों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इन दावों को खारिज कर दिया और इस बात पर संदेह जताया कि क्या बातचीत का अगला दौर आगे बढ़ पाएगा?
बातचीत से परिचित एक व्यक्ति ने सीएनएन को बताया कि ईरानियों को यह बात पसंद नहीं आई कि अमेरिकी राष्ट्रपति सोशल मीडिया के जरिए बातचीत कर रहे थे और ऐसा दिखा रहे थे जैसे उन्होंने उन मुद्दों पर सहमति दे दी हो जिन पर वे अभी तक सहमत नहीं हुए थे।
बदलती समय-सीमाओं और अमेरिका से मिलने वाले मिले-जुले संकेतों ने इस भ्रम को और भी बढ़ा दिया है। ट्रंप कभी यह संकेत देते हैं कि समझौता बस होने ही वाला है, तो कभी चेतावनी देते हैं कि अगर बातचीत विफल रही तो फिर से सैन्य कार्रवाई की जाएगी।
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ट्रंप के बुधवार के बाद संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने की संभावना कम है, जिससे कूटनीतिक प्रयासों में और भी तेजी आ गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तों पर सहमत नहीं होता है, तो उसे पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे अहम बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने वाले हमलों का सामना करना पड़ सकता है।
हालाँकि, ईरान ने जोर देकर कहा है कि वह दबाव में आकर बातचीत नहीं करेगा। ईरान की संसद के स्पीकर और एक अहम वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने कहा कि तेहरान ‘धमकियों के साये में’ बातचीत स्वीकार नहीं करेगा।
यह गतिरोध दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास को दर्शाता है। ईरानी अधिकारी वाशिंगटन की कूटनीति के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि दोनों पक्ष संभावित बातचीत की तैयारियां जारी रखे हुए हैं।
अनिश्चितता के बावजूद अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि एक प्रतिनिधिमंडल के पाकिस्तान जाने की उम्मीद है। हालांकि इसका समय और इसमें कौन शामिल होगा, यह अभी तय नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक महत्व को देखते हुए मौजूदा बातचीत के नतीजों का क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।
राजनीति
टीएमसी ने चुनाव आयोग से उत्तरपारा से भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ की शिकायत, मतदाताओं को रिश्वत देने का आरोप

टीएमसी ने हुगली जिले की उत्तरपारा विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार दिपांजन चक्रवर्ती के खिलाफ चुनाव आयोग से शिकायत की है। टीएमसी का दावा है कि भाजपा कुछ दिन पहले शुरू किए गए “मातृ शक्ति भरोसा कार्ड” के जरिए मतदाताओं को रिश्वत देने की कोशिश कर रही है।
भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त, मुख्य निर्वाचन आयुक्त पश्चिम बंगाल, डीईओ हुगली और सामान्य पर्यवेक्षक को संबोधित करते हुए टीएमसी ने पत्र लिखकर शिकायत की है। पत्र में टीएमसी ने लिखा है, “हमें यह जानकारी मिली है कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा 185 उत्तरपारा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाए गए दिपांजन चक्रवर्ती और उनके एजेंट व समर्थक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं को एक फॉर्म भरवाकर, जिसका नाम “मातृशक्ति भोष कार्ड” है, उन्हें 3000 मासिक भत्ता देने का वादा कर रहे हैं। मतदाताओं को रिश्वत देने की यह भ्रष्ट प्रथा भारतीय जनता पार्टी और उसके उम्मीदवार द्वारा मुख्य रूप से उत्तरपारा निर्वाचन क्षेत्र के पंचायत क्षेत्रों में अपनाई गई है।”
टीएमसी ने आगे लिखा है, “मतदाताओं की व्यक्तिगत जानकारी इस वादे के साथ एकत्र करना कि सत्ता में आने पर पार्टी उन्हें 3000 मासिक भत्ता देगी, अवैध, अनैतिक और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत परिभाषित भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है। केवल इसी कृत्य के लिए भाजपा उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द की जानी चाहिए और उसके खिलाफ उचित आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए।”
इसके पहले 17 अप्रैल को तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल पर गंभीर आरोप लगाए था। पत्र में आरोप लगाया गया था कि चुनाव आयोग द्वारा जारी ‘फोर्स डिप्लॉयमेंट इन इलेक्शंस मैनुअल, 2023”, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 का उल्लंघन किया गया है।
फेसबुक पर प्रसारित एक वीडियो के आधार पर यह शिकायत की गई थी। वीडियो में कुछ नागरिक यह दावा करते हुए दिखाई दे रहे हैं कि सीआरपीएफ के जवान कथित तौर पर भाजपा उम्मीदवारों के साथ घूम रहे थे, भाजपा के पर्चे बांट रहे थे और मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में वोट देने के लिए प्रेरित कर रहे थे।
पत्र में कहा गया था कि यह व्यवहार कथित तौर पर आपराधिक धमकी और चुनावी प्रक्रिया में अनुचित प्रभाव (धारा 174) के तहत अपराध है। इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि इस तरह की गतिविधियां मतदाताओं में डर का माहौल पैदा करती हैं और स्वतंत्र मतदान के अधिकार को प्रभावित करती हैं।
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