राजनीति
मायावती ने 53 प्रत्याशियों की जारी की सूची, सत्ता में वापसी का किया दावा
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने 66वें जन्मदिन पर पहले चरण की 58 में 53 उम्मींदवारों की सूची जारी की है। साथ ही सत्ता में वापस आने का दावा भी किया है।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने जन्मदिन के अवसर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी मेरे जन्मदिन को कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मनाया जा रहा है। मेरे जन्मदिन को जनकल्याणकारी के रूप में आज सभी लोग मना रहे हैं।
बसपा प्रमुख मायावती ने 66वें जन्मदिन पर आयोजित लखनऊ में शनिवार को कार्यक्रम में दल-बदल कानून को कड़ा बनाने की भी मांग की। इसका सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने कहा कि बसपा को सत्ता में वापसी का पूरी उम्मीद है। पिछले कामकाज के आधार पर जनता हमें जिताएगी, विरोधी हमें सत्ता में आने से रोकने के लिए हर हथकंडे अपना रहे हैं, लेकिन जनता उनके इन हथकंडों को समझ चुकी है।
मायावती ने पत्रकारों से कहा कि बसपा ने ही प्रदेश में दलितों, पिछड़ों तथा वंचितों के लिए काम किया है। मायावती ने कहा कि हम हर वर्ग की भलाई के लिए सरकार चलाएंगे। बसपा दलितों के मुद्दे पर गंभीर है। 2007 की तरह फिर सत्ता में वापस आएंगे। इस दौरान मायावती ने कहा कि सतीश चंद्र मिश्रा के बेटे कपिल के साथ आकाश आनंद भी पार्टी के लिए काफी मेहनत कर रहे हैं। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ,मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों पर चलकर कमजोर, दलित, लाचार ,असहाय लोगों की मदद की है और कर रहे हैं।
मायावती ने विधानसभा चुनाव में खुद के लड़ने की खबर पर भी साफ-साफ जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मीडिया को मेरे खिलाफ कोई मुद्दा नहीं मिल रहा है तो वो आये दिन मेरे चुनाव लड़ने के मुद्दे को उछालते रहते हैं। मैं चार बार लोकसभा और तीन बार राज्यसभा की सदस्य रह चुकी हूं। मैंने अपनी पार्टी के हित में सीधा चुनाव लड़ने की जगह अपने कार्यकतार्ओं को जिताने का काम करूंगी। हमारे संविधान में ये व्यवस्था है कि कोई बिना चुनाव लड़े भी अपनी योग्यता से किसी प्रदेश का मुख्यमंत्री बन सकता है।”
लखनऊ में शनिवार को अपने जन्मदिन के अवसर पर विधानसभा चुनाव में पहले चरण के मतदान के लिए पार्टी के 53 प्रत्याशियों की सूची जारी करने के साथ ही अपनी लिखित किताब ब्लू बुक के 17वें भाग का विमोचन भी किया।
महाराष्ट्र
भाजपा और शिवसेना (शिंदे) के पार्षद आज कोंकण भवन में ‘अलग’ समूहों के रूप में पंजीकरण कराएंगे

मुंबई: 2026 के बीएमसी चुनाव संपन्न होने के पंद्रह दिन बाद, भाजपा और शिवसेना (शिंदे) के पार्षद आज (सोमवार, 2 फरवरी) कोंकण भवन में कोंकण मंडल आयुक्त के समक्ष पंजीकरण कराएंगे। दोनों पार्टियों ने महायुति गठबंधन के तहत बीएमसी चुनाव लड़ा था और पिछले सप्ताह तक यह कहा जा रहा था कि दोनों पार्टियां अपने नवनिर्वाचित पार्षदों का पंजीकरण एक ही समूह के रूप में कराएंगी। हालांकि, मीडिया से बात करते हुए मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित सतम ने पुष्टि की कि भाजपा और शिंदे सेना के पार्षद अलग-अलग पंजीकरण कराएंगे।
नगर निगम चुनाव परिणाम घोषित होने के कुछ ही दिनों के भीतर कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), एमएनएस और अन्य दलों के पार्षदों ने कोंकण आयुक्त के पास पंजीकरण करा लिया। वहीं, भाजपा और शिवसेना के पार्षदों का पंजीकरण पिछले गुरुवार को होना था। हालांकि, पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की आकस्मिक मृत्यु और तीन दिन के राजकीय शोक के कारण पंजीकरण स्थगित कर दिया गया था।
हालांकि शिंदे सेना ने महापौर पद और स्थायी समिति की अपनी मांग वापस नहीं ली है, लेकिन जीत के संभावित आंकड़ों को देखते हुए महापौर और स्थायी समिति के पद भाजपा के खाते में जाने की अधिक संभावना है। ऐसी चर्चा थी कि शिंदे सेना महापौर पद की मांग कर रही है और भाजपा को स्थायी समिति देने को तैयार है, हालांकि दोनों पार्टियों ने अभी तक आधिकारिक तौर पर अपने फैसले की पुष्टि नहीं की है। स्थायी समिति के अलावा, सुधार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेस्ट कमेटी भी महत्वपूर्ण समितियां हैं जिनके अध्यक्ष पद महायुति सदस्यों के बीच विभाजित किए जाने हैं।
आरक्षण लॉटरी में यह निर्धारित किया गया है कि मुंबई के मेयर का पद सामान्य (महिला) वर्ग के लिए आरक्षित है, और भाजपा की वरिष्ठ पार्षद अलका केरकर, जो उप महापौर भी हैं; और राजश्री शिरवाडकर, जिनके पति मुंबई भाजपा के महासचिव हैं, मुंबई के महापौर पद के लिए शीर्ष दावेदार हैं। सभी नवनिर्वाचित पार्षदों का कोंकण आयुक्त और नगर सचिव के पास पंजीकरण हो जाने के बाद महापौर चुनाव की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पार्षदों के पंजीकरण के कम से कम एक सप्ताह बाद महापौर चुनाव होंगे। मुंबई के महापौर का चुनाव फरवरी के दूसरे सप्ताह में होने की संभावना है।
विपक्ष के नेता के शिवसेना (यूबीटी) से होने की खबर है। पार्टी ने पूर्व महापौर किशोरी पेडनेकर को अपना समूह नेता चुन लिया है। महापौर और उप महापौर के चुनाव के बाद विपक्ष के नेता की घोषणा होने की उम्मीद है।
इसके बाद वैधानिक समितियों के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी।
बीएमसी चुनाव के सभी 227 सीटों के नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए गए, जिनमें भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, वहीं शिंदे सेना ने 29 सीटें जीतीं। शिवसेना (यूबीटी) ने 65 और एमएनएस ने छह सीटें जीतीं। वीबीए के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस ने 24 सीटें, एनसीपी ने तीन और एनसीपी (एसपी) ने एक सीट जीती। वहीं एआईएमआईएम ने आठ और एसपी ने दो सीटें जीतीं।
राजनीति
लोकसभा में ‘डोकलाम’ पर हंगामा, राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर लगाया सदन को गुमराह करने का आरोप

नई दिल्ली, 2 फरवरी : संसद के बजट सत्र के चौथे दिन सोमवार को लोकसभा में उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बीच डोकलाम मुद्दे को लेकर तीखी बहस हो गई। राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया और उनके बयान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
इसी चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या द्वारा कांग्रेस पर भारतीय संस्कृति को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज किया और कहा कि उनकी पार्टी इसका जवाब देगी। इसके बाद राहुल गांधी ने डोकलाम से जुड़े मुद्दे पर पूर्व थल सेनाध्यक्ष मनोज नरवणे की एक किताब का हवाला देते हुए बोलना शुरू किया।
राहुल गांधी के इस बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तुरंत खड़े हो गए। उन्होंने सवाल किया कि जिस किताब का जिक्र किया जा रहा है, क्या वह वास्तव में प्रकाशित हुई है या नहीं?
राजनाथ सिंह ने कहा कि किताब प्रकाशित ही नहीं हुई है, इसलिए उसके आधार पर बयान देना ठीक नहीं है। इस पर सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया।
स्पीकर ने राहुल गांधी से अपने स्रोत को प्रमाणित करने के लिए कहा। राहुल गांधी ने जवाब दिया कि यह किताब सरकार द्वारा प्रकाशित नहीं होने दी जा रही है, लेकिन यह ‘सौ फीसदी ऑथेंटिकेटेड’ है।
इस पर राजनाथ सिंह ने फिर कहा कि राहुल गांधी सदन को गुमराह कर रहे हैं, क्योंकि जिस किताब का जिक्र किया जा रहा है, वह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ही नहीं है।
इस बीच गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी ने खुद ही विवाद खत्म कर दिया है, क्योंकि वह मान रहे हैं कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है।
स्पीकर ओम बिरला ने सदन को याद दिलाया कि अखबार की कटिंग या अप्रकाशित किताबों पर चर्चा करने की परंपरा नहीं रही है और सदन की कार्यवाही नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार चलती है। उन्होंने राहुल गांधी से आगे बढ़ने के लिए कहा।
राहुल गांधी ने कहा कि वह यह मुद्दा उठाना नहीं चाहते थे, लेकिन जब कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाए गए, तो उन्हें इसका जवाब देना पड़ा। इसके बाद उन्होंने फिर से मनोज नरवणे की किताब का जिक्र किया।
स्पीकर ने दोहराया कि सदन में बोलने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार नियमों और परंपराओं के तहत ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में हंगामा जारी है।
खेल
भारत-पाक क्रिकेट विवाद : विपक्ष ने बीसीसीआई से पूछा, ‘आतंकी हमलों के बाद भी क्यों खेल रहा था भारत?’
नई दिल्ली, 2 फरवरी : पाकिस्तान के भारत के खिलाफ टी-20 वर्ल्ड कप मैच खेलने से मना करने पर विपक्ष के नेताओं ने बीसीसीआई और भारत सरकार से सवाल किए हैं। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि हम लोगों को पहले ही खेलने के लिए मना कर देना चाहिए था, पता नहीं क्यों भारत खेलने जा रहा था।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “भारत सरकार को अपनी विदेश नीति पर विचार करना पड़ेगा कि किस दिशा में उनकी विदेश नीति जा रही है।”
कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कहा, “‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान को भारत के खिलाफ खेलने से रोक देना चाहिए था। उस समय हमने सवाल उठाया था कि भारत क्यों खेल रहा है। शुरू से ही मेरा पक्का मानना था कि जब से पहलगाम हमला हुआ, भारत को उनके खिलाफ खेलने से मना कर देना चाहिए था। हमें इस मुद्दे को ग्लोबल लेवल पर उठाना चाहिए था कि हम कोई मैच नहीं खेलेंगे।”
उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भी भारत उनके खिलाफ खेला। यहां तक कि आईसीसी भी इतना लाचार है कि वह पाकिस्तान के साथ सख्ती नहीं बरत रहा है। अगर पाकिस्तान ऐसा कुछ करता है तो आईसीसी को उस पर बैन लगा देना चाहिए। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारत सरकार और आईसीसी को इस पर ध्यान देना चाहिए। भारत को अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहिए कि यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “यह बीसीसीआई के मुंह पर सबसे बड़ा तमाचा है। बीसीसीआई दुनिया की सबसे पावरफुल और सबसे अमीर क्रिकेट बॉडी है और आईसीसी की मेंबर है। आतंकी हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद, हमने बार-बार दुनिया भर में आतंकवाद में पाकिस्तान की भूमिका का मुद्दा उठाया। जिन 26 लोगों की जान गई, उनके परिवार लगातार अपील करते रहे कि पाकिस्तान के साथ मैच नहीं खेले जाने चाहिए।”
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, “सच कहूं तो, यह बहुत शर्मनाक है कि दोनों तरफ से खेल का इस तरह से राजनीतिकरण किया गया है। मुझे नहीं लगता कि मुस्तफिजुर (बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान) को कोलकाता में खेलने का कॉन्ट्रैक्ट देने से मना किया जाना चाहिए था। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण था। राजनीति का दखल, मुझे लगता है कि बांग्लादेश की प्रतिक्रिया जरूरत से ज्यादा थी, लेकिन यह उसी का एक नतीजा भी है और पाकिस्तान, बांग्लादेश के साथ अपनी एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है।”
उन्होंने कहा कि यह पूरी बात हाथ से निकलती जा रही है। मुझे लगता है कि हमें सच में यह समझने की जरूरत है कि खेल, खासकर क्रिकेट जैसा खेल जो सभी लोगों के लिए इतना मायने रखता है, कम से कम खेल के मैदान पर हमें एक साथ लाने का जरिया होना चाहिए, न कि इसे ऐसे ही चलने दिया जाए। मुझे सच में लगता है कि यह अब सभी संबंधित लोगों के लिए एक वेक-अप कॉल है कि वे इमरजेंसी बेसिस पर एक-दूसरे से संपर्क करें, आईसीसी इसके लिए प्लेटफॉर्म हो सकता है। बस करें, आप हमेशा ऐसे नहीं चल सकते।
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा, “पाकिस्तान जानता है कि वह जीत नहीं सकता। इसलिए उसने अपनी इज्जत बचाने के बारे में सोचा। जब बैसरन (पहलगाम की घाटी) में 26 लोग मारे गए थे, तब भारत के पास एक बड़ा मौका था। भारत को तब वर्ल्ड कप में नहीं खेलना चाहिए था। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश जाता कि हम आतंकवादियों के खिलाफ हैं और पाकिस्तान सबसे बड़ा आतंकवादी देश है।”
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