राष्ट्रीय समाचार
टोल प्लाजा पर घूम रहा था तेंदुआ, पहुंचा ट्रक तो लगाई छलांग, बेंगलुरु की इलेक्ट्रॉनिक सिटी में लेपर्ड से दहशत
बेंगलुरु : कर्नाटक के इलेक्ट्रॉनिक सिटी में तेंदुआ घूमते हुए पाया गया है। यह टेक कॉरिडोर के आसपास घूम रहा है। तेंदुआ देखे जाने के बाद बेंगलुरु के दक्षिणी बाहरी इलाके में दहशत फैल गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी के आसपास लोगों को अलर्ट रहने को कहा गया है। तेंदुआ इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी टोल प्लाजा के पास होसुर रोड को पार करते हुए एनटीटीएफ ग्राउंड की ओर बढ़ता हुआ देखा गया। वह सीसीटीवी में कैद हो गया। यह सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद लोगों में और डर फैल गया है।
सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि तेंदुआ टोल प्लाजा पर आता है। वह टोल पर आसपास घूमता है। उसके बाद उस जगह पहुंचता है जहां से टोल टैक्स कटता है। वहां बैरिकेटिंग के पास से होता हुआ वह टोल सड़क के दूसरी ओर चला जाता है।
वीडियो में दिख रहा है कि तेंदुआ जब टोल प्लाजा से दूसरी तरफ जा रहा तो एक ट्रक टोल पर आकर रुकता है। ट्रक वाला सामने तेंदुए को देखकर ब्रेक लगाता है। ट्रक के तेज रोशनी आंखों में पड़ते ही तेंदुआ भागने लगता है। टोल प्लाजा के पास हाइवे पर बनी दीवार पर वह जोर से उछलता है और वहां से भाग जाता है। लेकिन वह आबादी की ओर जाता है, जिससे लोगों को अलर्ट जारी किया गया है।
बेंगलुरु दक्षिण के सहायक वन संरक्षक वी गणेश ने बताया, ‘तेंदुए को सुबह 3 बजे के आसपास नेत्तुर तकनीकी प्रशिक्षण फाउंडेशन (एनटीटीएफ) परिसर की ओर हाईवे पार करते हुए देखा गया था। हालांकि, दिन में बाद में यह नहीं दिखा। फिर भी, हम हाई अलर्ट पर हैं और तलाशी अभियान के लिए एलटीएफ (तेंदुआ टास्क फोर्स) को तैनात किया है।’
वन अफसर ने कहा कि हमें पिछले 10 दिनों से जिगनी क्षेत्र में एक तेंदुए की मौजूदगी के बारे में जानकारी थी और यह बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान (बीएनपी) की तरफ से आया हो सकता है। हमें संदेह है कि वही तेंदुआ ई-सिटी के इस तरफ घुसा होगा। एनटीटीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि उन्हें टोल प्लाजा अधिकारियों से अलर्ट मिला है। अधिकारी ने कहा, ‘इसके बाद, हमने सभी सीसीटीवी फुटेज की जांच की और जानवर का कोई सुराग नहीं मिला। फिर भी, हमने सभी आवश्यक सावधानियां बरती हैं क्योंकि हमें नहीं पता कि वह छिपा हुआ है या कहीं और चला गया है।
यह पहली बार नहीं है कि कई आईटी कंपनियों और अन्य उद्योगों के केंद्र में एक तेंदुआ देखा गया है। अक्टूबर 2023 में, एईसीएस लेआउट के कुडलू गेट के पास सिंगसांद्रा सीमा में एक तेंदुआ देखा गया था। बाद में वन अधिकारियों ने उस पर गोली चलाई थी, जिससे वह मर गया था।
इस बीच, तुमकुरु जिले के मधुगिरी तालुक में भेड़ों के बाड़े पर हमला करने वाले दो तेंदुओं ने 32 भेड़ों को मार डाला है। पुरावर होबली के डोड्डाहोसाहल्ली के किसान मल्लन्ना 50 से अधिक भेड़ पाल रहे थे। हालांकि, मंगलवार की सुबह दो तेंदुओं ने भेड़शाला पर हमला कर दिया और करीब 32 भेड़ों को मौके पर ही मार डाला। भेड़ों की मिमियाहट सुनकर परिवार के लोग भेड़शाला की ओर दौड़े, लेकिन तब तक तेंदुए भाग चुके थे। वन अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया और ग्रामीणों ने 32 भेड़ों के नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
रणनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर मतभेदों के बावजूद भारत-अमेरिका साझेदारी आगे बढ़ रही है : रिपोर्ट

पिछले 25 वर्षों के ज्यादातर समय में भारत-अमेरिका संबंध इस सोच पर आधारित रहे हैं कि एक मजबूत भारत एशिया में शक्ति संतुलन बनाए रखने, सप्लाई चेन में विविधता लाने और एक स्वतंत्र व खुले इंडो-पैसिफिक को मजबूत करने में मदद करके अमेरिका के बड़े रणनीतिक मकसद को पूरा करता है।
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मतभेद तो हमेशा से रहे हैं, लेकिन व्यापक रणनीतिक वजहें इतनी मजबूत मानी जाती थीं कि वे इन मतभेदों को झेल सकें। हालांकि, अब इस सोच को बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है।
भारत की पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने हाल ही में ‘इंडिया नैरेटिव’ में लिखा, “भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा मतभेद सिर्फ तेल के मुद्दे तक सीमित नहीं हैं। शायद साझेदारी के मतलब को लेकर भी गहरी असहमति है। वॉशिंगटन अक्सर रणनीतिक तालमेल को राजनीतिक सहमति की मांग करने का आधार बनाता है। वहीं, नई दिल्ली में साझेदारी का मतलब संप्रभु देशों के बीच सहयोग माना जाता है, जिनके बीच रूस, ईरान और चीन से निपटने के तरीकों को लेकर मतभेद बने रहेंगे।”
उन्होंने कहा, “जब ये मतभेद वफादारी की सार्वजनिक परीक्षा बन जाते हैं तो कूटनीति की जगह दिखावा ले लेता है। समझौता करना इसलिए और मुश्किल हो जाता है क्योंकि इसे घुटने-टेकने जैसा दिखाया जाता है।”
राव ने कहा कि नई दिल्ली ने वॉशिंगटन की उस पुरानी सोच से दूर होने में कई साल लगाए हैं, जिसके तहत भारत और पाकिस्तान को एक ही क्षेत्रीय समीकरण का हिस्सा माना जाता था। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने के ट्रंप के बार-बार किए जा रहे दावों से उस पुरानी सोच पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है।
पूर्व भारतीय राजनयिक ने कहा, “यह आपत्ति सिर्फ सम्मान की बात नहीं है। भारत के वैश्विक आर्थिक, तकनीकी और समुद्री हित हैं, जिन्हें सिर्फ पड़ोसी देश के साथ झगड़े के संकीर्ण नजरिए से नहीं समझा जा सकता, लेकिन सोचने की पुरानी आदतें दशकों की कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद बनी रह सकती हैं, खासकर तब जब वे किसी राष्ट्रपति के राजनीतिक जुनून को पूरा करती हों।”
इस रिपोर्ट में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हाल ही में न्यूयॉर्क में की गई टिप्पणियों का जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने भारत का पक्ष साफ तौर पर रखा।
विदेश मंत्री जयशंकर ने एशिया सोसाइटी को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अमेरिका के साथ अपनी साझेदारी को और ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि सुरक्षा से जुड़ी भारत की सबसे अहम चिंताओं में से किसी एक को न समझने से दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने पड़ोसी देश से होने वाले आतंकवाद को दशकों से चली आ रही एक सोची-समझी नीति बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रतिक्रिया आहत राष्ट्रवाद से प्रेरित नहीं होनी चाहिए। इसमें कहा गया है कि रणनीतिक स्वायत्तता की असली परीक्षा इस बात से नहीं होती कि बाहरी दबाव की कितनी जोर-शोर से निंदा की जाती है, बल्कि इस बात से होती है कि देश उसका कितनी प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है।
राव ने ‘इंडिया नैरेटिव’ में लिखा, “इसके लिए अलग-अलग तरह की डिफेंस सप्लाई, बेहतर एनर्जी सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी की क्षमता, मैन्युफैक्चरिंग की ताकत और संस्थागत मजबूती की जरूरत है। इन आधारों के बिना स्वायत्तता सिर्फ बातें होंगी जो असल में निर्भरता पर टिकी होंगी। भारत को उन कीमतों को समझना होगा जो उसे चुकानी पड़ सकती हैं और उन्हें चुकाने के साधन भी विकसित करने होंगे।”
इस बात पर जोर देते हुए कि इसका मतलब अमेरिका से पीछे हटना नहीं है, उन्होंने कहा, “एशिया में अनुकूल संतुलन बनाए रखने के लिए भारत को अमेरिकी टेक्नोलॉजी, निवेश और सहयोग की जरूरत है। वहीं, अमेरिका को ऐसे भारत की जरूरत है जो चीन के दबदबे का मुकाबला कर सके। दोनों देशों के पास जो कुछ उन्होंने बनाया है, उसे बनाए रखने की वजह है, और जब भी किसी असहमति को रिश्तों पर जनमत संग्रह बना दिया जाता है, तो किसी को भी फायदा नहीं होता।”
अपराध
असम राइफल्स और कस्टम विभाग ने त्रिपुरा में 25 लाख रुपए मूल्य का 501 किलोग्राम गांजा जब्त किया

असम राइफल्स ने कस्टम विभाग के समन्वय से त्रिपुरा के खोवाई जिले में लगभग 25 लाख रुपए मूल्य का 501 किलोग्राम गांजा जब्त किया है।
रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए असम राइफल्स ने कस्टम विभाग के सहयोग से गुरुवार शाम को त्रिपुरा के खोवाई जिले में एक अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 25 लाख रुपए मूल्य का 501 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया।
यह अभियान खुफिया जानकारी और निरंतर निगरानी के आधार पर चलाया गया था।
संयुक्त टीम ने पश्चिम सोनातला से संदिग्ध वाहन का पीछा शुरू किया। पीछा पश्चिम त्रिपुरा और खोवाई जिले की सीमा पर स्थित हेजामारा ब्लॉक से 18 किलोमीटर पहले बैखुंतपुर गांव में समाप्त हुआ।
हालांकि, अभियान के दौरान वाहन का चालक मौके से भागने में सफल रहा।
इस जब्ती के संबंध में किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं मिली है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अवैध नशीले पदार्थों की बरामदगी पूर्वोत्तर में सक्रिय नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क को बाधित करने के लिए असम राइफल्स और सहयोगी एजेंसियों के निरंतर प्रयासों को उजागर करती है।
बरामद प्रतिबंधित सामग्री को आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए सीमा शुल्क अधिकारियों को सौंप दिया गया है।
इस बीच, असम राइफल्स ने सीमा शुल्क अधिकारियों के साथ मिलकर 6 अक्टूबर को खोवाई जिले में लगभग 1.74 करोड़ रुपए मूल्य का 340 किलोग्राम गांजा जब्त किया है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि राज्य पुलिस, असम राइफल्स, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (टीएसआर) और अन्य सुरक्षा बल संयुक्त अभियानों में राज्य के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर बांग्लादेश से सटे सेपाहिजाला जिले में अवैध गांजे की खेती को अक्सर नष्ट कर देते हैं।
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, त्रिपुरा में उत्पादित सूखा गांजा स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल नहीं होता और बिहार और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में तस्करी करके भेजा जाता है, जहां इसकी ऊंची कीमत मिलती है।
परिवहन के दौरान, सूखे गांजे की खेप अक्सर ट्रकों, छोटे वाहनों और यहां तक कि यात्री ट्रेनों से भी जब्त की जाती है।
महिलाओं सहित निवासियों ने दावा किया है कि वे अपनी आजीविका के लिए पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में गांजे की खेती करते हैं।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि कई बार यह पाया गया है कि वन भूमि और अन्य सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करके अवैध रूप से गांजे की खेती की जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि मादक औषधि और मनोरोगी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत किसी भी व्यक्ति द्वारा मादक और मनोरोगी पदार्थों की खेती, कब्जा, बिक्री, खरीद या सेवन करना अवैध है, और उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और 20 साल तक की कैद हो सकती है।
राजनीति
कांग्रेस कार्यकर्ताओं को परेशान कर रही पुलिस, लोकतंत्र की आवाज दबाई नहीं जा सकती: दीपेंद्र हुड्डा

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने हरियाणा कांग्रेस कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को पुलिस द्वारा कथित तौर पर परेशान किए जाने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा पुलिस, सीआईडी और सीआईए के कर्मचारी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घरों पर पहुंचकर उन्हें रोकने और हिरासत में लेने की कोशिश कर रहे हैं। हुड्डा ने सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र में विपक्षी दल के कार्यकर्ताओं को अपनी बात रखने और आंदोलन में शामिल होने का अधिकार नहीं है?
कांग्रेस सांसद ने कहा कि सुबह से उनके पास हजारों फोन आ चुके हैं। पुलिस और विभिन्न जांच एजेंसियों के कर्मचारियों को अन्य काम छोड़कर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घरों पर जाने की जिम्मेदारी दी गई है। कार्यकर्ताओं से पूछा जा रहा है कि क्या वे दिल्ली आकर सांसद से मिलेंगे या आंदोलन में शामिल होंगे। जो लोग दिल्ली आने की बात कहते हैं, उन्हें कथित तौर पर रोका जा रहा है और परेशान किया जा रहा है। सांसद ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोकने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस को कार्यकर्ताओं के घरों में जाकर उन्हें रोकने की अनुमति किसने दी है।
उन्होंने एक महिला कार्यकर्ता का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि जब वह दिल्ली आई हुई थीं, तब पुलिस उनके घर पहुंची और उनके बच्चों से कहा कि वे अपनी मां को वापस आने के लिए कहें। इस घटना के बाद बच्चे रो रहे थे और परिवार की ओर से फोन आ रहे थे। इस तरह की कार्रवाई बेहद दुखद है। उन्होंने चेतावनी दी कि पुलिस की कार्रवाई से जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। लोकतंत्र में विरोध करने और अपनी मांगें उठाने का अधिकार सभी को मिलना चाहिए।
10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में जगह-जगह बैरिकेडिंग किए जाने और मेट्रो स्टेशन बंद रखने के ऐलान पर भी दीपेंद्र हुड्डा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलने के लिए विपक्ष के 250 सांसदों को उस दिन अनुमति दे दी जाती, जब वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात कर उनका इस्तीफा मांगना चाहते थे, तो आज दिल्ली में रास्ते बंद करने जैसी स्थिति पैदा नहीं होती।
हुड्डा ने कहा कि विपक्ष अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना चाहता है। उन्होंने सवाल किया कि जब जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलेगा, तो वे अपनी शिकायतें लेकर कहां जाएंगे।
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