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Tuesday,03-November-2026
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एलईएम प्रमुख पाकिस्तान में जेईएम आतंकवादियों के संपर्क में था,मसूद अजहर का भाई भी शामिल

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पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) ने 2019 के पुलवामा के मद्देनजर ‘अंतर्राष्ट्रीय दबाव से बचने’ के लिए अगस्त-सितंबर 2020 में नए आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-मुस्तफा का गठन किया था। सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमला और हिदायत उल्लाह मलिक उर्फ हसनैन को भारत का प्रमुख नियुक्त किया। वह अपने ‘पाकिस्तानी मोबाइल नंबरों’ के माध्यम से जैश के कमांडरों के साथ नियमित रूप से ‘संपर्क’ में था, जिसमें वांछित आतंकवादी मौलाना मसूद अजहर का भाई मुफ्ती (अब्दुल) रौफ (असगर) भी शामिल था। यह खुलासे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा मलिक समेत एलईएम के छह आतंकवादियों के खिलाफ चार अगस्त को जम्मू में विशेष एनआईए अदालत के समक्ष दायर आरोपपत्र में किए गए हैं।

एनआईए ने अपनी चार्जशीट में, जिसे आईएएनएस द्वारा देखा गया है, उसमें दावा किया कि “एलईएम के गठन के बाद, मलिक उर्फ हसनैन को जेईएम के कमांडरों द्वारा आगे निर्देश दिया गया था कि उसे (पूर्ववर्ती) जम्मू और कश्मीर राज्य और जम्मू क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देना है।”

“इस अवधि के दौरान, मलिक रोजाना पाकिस्तानी मोबाइल नंबर (92309 10..) और मौलाना मसूद अजहर के भाई मुफ्ती रौफ (प्लस92336648..) और अशक अहमद नेंगरू (प्लस92355809.. और प्लस92355141…) व्हाट्सएप के जरिए अबू तल्हा उर्फ डॉक्टर के संपर्क में था।”

अजहर, उसके भाइयों और नेंगरू को पहले भी एनआईए ने अगस्त 2020 में पुलवामा आतंकी हमले के मामले की चार्जशीट में नामित किया था।

एनआईए ने आगे दावा किया कि मलिक उन्हें नवगठित एलईएम की प्रगति के बारे में सूचित करता था।

एनआईए ने कहा, “वह जैश-ए-मोहम्मद के कुछ अन्य पाकिस्तान स्थित आकाओं के भी संपर्क में था।”

एनआईए ने कहा कि एलईएम का गठन अगस्त-सितंबर 2020 में मलिक द्वारा जेईएम के शीर्ष स्तर के कमांडरों द्वारा रची गई साजिश को जारी रखते हुए एक नए आतंकवादी संगठन बनाने के लिए किया गया था, जो जेईएम की एक शाखा के रूप में काम करेगा।

उन्होंने कहा कि यह 14 फरवरी, 2019 को पुलवामा के लेथपोरा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले के बाद ‘जांच से बचने’ और ‘जेईएम पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव को बंद करने’ के लिए किया गया था।

एनआईए ने कहा कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे, प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के रडार पर आ गया था।

एनआईए ने कहा, “इस नए संगठन (एलईएम) के गठन के बाद, मलिक को एलईएम का प्रमुख घोषित किया गया था और उसे जेईएम द्वारा अपने स्तर पर रुपयों का प्रबंधन करने और स्थानीय कश्मीरी युवाओं को इस नए आतंकी संगठन में भर्ती करने की सलाह दी गई थी।”

एनआईए के एक प्रवक्ता ने 4 अगस्त को कहा था कि जांच के दौरान, यह पता चला था कि मलिक के नेतृत्व में आरोपी व्यक्तियों ने नवंबर 2020 में शोपियां में जम्मू-कश्मीर बैंक की मुख्य शाखा में 60 लाख रुपये की दिनदहाड़े बैंक लूट को भी अंजाम दिया था।

अधिकारी ने कहा, लूटे गए पैसे का इस्तेमाल एलईएम के आतंकवादियों ने कश्मीर और बिहार से हथियार खरीदने के लिए किया था।

अधिकारी ने कहा, “मलिक ने जम्मू और दिल्ली में कई सुरक्षा प्रतिष्ठानों की भी टोह ली थी और वह पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के अपने आकाओं के लगातार संपर्क में था।”

एनआईए ने इस साल 6 फरवरी को एलईएम और उसके प्रमुख मलिक द्वारा रची गई साजिश के सिलसिले में एक मामला दर्ज किया था, जिन्होंने पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन के इशारे पर काम कर रहे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के कार्यालय का चक्कर लगाया था। जेईएम, इस साल मार्च में जम्मू में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वाला था।

पिछले हफ्ते जुलाई में, एनआईए ने दो एलईएम आतंकवादियों, मोहम्मद अरमान अली उर्फ अरमान मंसूरी और मोहम्मद एहसानुल्लाह उर्फ गुड्डू अंसारी को गिरफ्तार किया था, जो बिहार के सारण जिले के निवासी हैं। दोनों बिहार से मोहाली और अंबाला में अवैध हथियारों और गोला-बारूद की दो अलग-अलग खेपों को ले जाने में शामिल थे।

मलिक के अलावा, आतंकवाद विरोधी जांच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के शोपियां के निवासी बसीरत-उल-ऐन और मुदाबीर मंजूर, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग के निवासी जान मोहम्मद तेली, बिहार के छपरा के रहने वाले मुस्ताक आलम और उनके भाई जावेद आलम को नामजद किया है।

एनआईए ने दो मार्च को जांच अपने हाथ में ली थी।

एनआईए ने 31 जुलाई को अनंतनाग के निवासी इरफान अहमद डार को भी गिरफ्तार किया था। एनआईए के अधिकारियों ने कहा कि डार ने जम्मू-कश्मीर में एलईएम आतंकवादियों के लिए लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की और हथियारों और गोला-बारूद की व्यवस्था भी की।

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कर्नाटक: नकली दवाओं के रैकेट से जुड़े लोगों और कंपनी के पांच ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई

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कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में ईडी की ओर से बड़ी कार्रवाई की गई है। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत नकली दवाओं के रैकेट से जुड़े लोगों और कंपनी के पांच ठिकानों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया है।

ईडी की ओर से यह कार्रवाई 18 अगस्त से चल रही मनी-लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई। यह केस तवरेकेरे पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।

यह एफआईआर ड्रग कंट्रोलिंग अथॉरिटी और पुलिस वालों की ओर से 18 अगस्त को सीके तांड्या गांव में एक रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर की गई जॉइंट सर्च और रेड से जुड़ी है, जहां आरोपी बिना वैलिड लाइसेंस, परमिट या ऑथराइजेशन के दवाएं और फार्मास्युटिकल ड्रग्स स्टोर करते हुए और स्टोर की गई दवाओं पर लेबल बदलते हुए पाए गए।

ईडी ने केस दर्ज किया और पीएमएलए, 2002 के तहत जांच शुरू की। जांच से पता चला है कि आर. प्रशांत ने कथित तौर पर बिना ड्रग लाइसेंस या परमिट के दवाओं को बनाने, री-पैकेजिंग और री-लेबलिंग के लिए बिदादी के पास एक फार्महाउस का इंतजाम किया था। अलग-अलग राज्यों के मैन्युफैक्चरिंग सेंटरों से मंगाए गए सस्ते बल्क फॉर्मूलेशन को कथित तौर पर नई शीशियों में रीपैकेज किया गया और धोखे से महंगे फाइजर एंटीबायोटिक्स, जैसे कि जेविसेफ्टा, एम्ब्लेवो वगैरह के तौर पर रीलेबल किया गया।

शीशियों में जेनेरिक दवाएं थीं, लेकिन उन पर फाइजर-ब्रांडेड लेबल थे। ये दवाएं कथित तौर पर मेसर्स डीएम फार्मास्यूटिकल्स के जरिए बांटी गईं और मेसर्स कृपा हेल्थकेयर को सप्लाई की गईं। इसके बाद मेसर्स कृपा हेल्थकेयर ने पता लगने से बचने के लिए असली दवाओं के साथ दूसरी फार्मास्यूटिकल कंपनियों और अस्पतालों को भी सप्लाई कीं।

छापेमारी के दौरान, वीरेश कुमार के बैंक अकाउंट में लगभग 9 लाख रुपए थे। उस अकाउंट को फ्रीज कर दिया गया है। इसके अलावा, सर्च एक्शन के दौरान अलग-अलग लोगों के डिजिटल डिवाइस, रिकॉर्ड और गलत जानकारी देने वाले डॉक्यूमेंट्स जब्त किए गए। इस मामले में आगे की जांच की जा रही है।

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बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी का बड़ा एक्शन, करीब 54 करोड़ रुपए की संपत्ति की जब्त

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2,200 करोड़ रुपए से अधिक के बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड (पीएएल) से जुड़ी 53.95 करोड़ रुपए मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।

ईडी के मुंबई जोन-1 कार्यालय के अनुसार, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। एजेंसी ने बताया कि इस मामले में अब तक कुल 546 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं।

यह जांच सीबीआई, ईओडब्ल्यू मुंबई और ईओबी मुंबई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। मामले में पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

ईडी की जांच में सामने आया कि कंपनी ने कथित तौर पर स्टॉक और देनदारियों से संबंधित बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के आधार पर बैंकों के एक समूह (कंसोर्टियम) से ऋण प्राप्त किया। बाद में कंपनी के ऋण खाते गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिए गए, जिनकी कुल राशि 2,296 करोड़ रुपए से अधिक थी।

जांच एजेंसी के अनुसार, इस कथित धोखाधड़ी में जेके शाह ग्रुप ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विभिन्न संस्थाओं तथा व्यक्तियों के जरिए 110.54 करोड़ रुपए की अपराध से अर्जित आय को इधर-उधर करने में मदद की।

ईडी ने दावा किया कि इस धनराशि का एक लाभार्थी 70.25 करोड़ रुपए का फायदा उठाने में सफल रहा, जो कुल 2,296.58 करोड़ रुपए की कथित अपराध आय का हिस्सा था।

एजेंसी ने बताया कि इससे पहले भी इस मामले में 493 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। साथ ही ईडी विशेष पीएमएलए अदालत, मुंबई में अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) भी दाखिल कर चुकी है, जिस पर अदालत ने संज्ञान ले लिया है।

जांच एजेंसी के अनुसार, इंडियन ओवरसीज बैंक के नेतृत्व वाले 17 बैंकों के कंसोर्टियम को इस कथित साजिश के कारण भारी वित्तीय नुकसान हुआ। ईडी अब छापों के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि इस बैंक धोखाधड़ी में शामिल अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान की जा सके।

एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच जारी है और धन के प्रवाह तथा अन्य संभावित लाभार्थियों की भूमिका का पता लगाने के लिए आगे भी कार्रवाई की जाएगी।

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मध्य प्रदेश: शाजापुर में बाइक-पिकअप की टक्कर, 5 महीने के बच्चे और पति-पत्नी की मौत

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मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन की टक्कर से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। इसमें एक पांच महीने का बच्चा भी शामिल है।

मृतकों की पहचान अजीत पंवार, उनकी पत्नी पूजा पंवार और उनके पांच माह के बेटे शिवांशु के रूप में हुई है। तीनों पड़ोसी जिले सीहोर के आष्टा नगर स्थित इंद्रा कॉलोनी के निवासी थे।

यह हादसा सलसलाई थाना क्षेत्र में उस समय हुआ, जब परिवार बाइक से बोलाई गांव से अय्यापुर मंदिर दर्शन के लिए जा रहा था।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, अचानक एक लावारिस कुत्ता उनकी मोटरसाइकिल के सामने आ गया। बाइक चला रहे अजीत ने कुत्ते को बचाने की कोशिश की, लेकिन इस दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया। मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर सामने से आ रही पिकअप वाहन की चपेट में आ गई।

पिकअप की टक्कर इतनी जोरदार थी कि अजीत, उनकी पत्नी और मासूम बेटा गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में मोटरसाइकिल भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।

बताया गया है कि परिवार शनिवार को अपने बेटे शिवांशु के पांच महीने पूरे होने के अवसर पर मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए घर से निकला था। हालांकि, गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही वे हादसे का शिकार हो गए।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “परिवार अपने बच्चे के साथ मंदिर दर्शन के लिए जा रहा था। इसी दौरान एक लावारिस कुत्ता बाइक के सामने आ गया। चालक ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन बाइक से नियंत्रण खो बैठा और सामने से आ रही पिकअप से टकरा गया।”

हादसे के बाद पिकअप चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने दोनों वाहनों को जब्त कर लिया है और अज्ञात चालक के खिलाफ लापरवाही एवं तेज रफ्तार से वाहन चलाने का मामला दर्ज किया है।

पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों की मदद से फरार चालक की तलाश की जा रही है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की आगे की जांच जारी है।

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