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Thursday,27-August-2026
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लता मंगेशकर ने सात दशकों के संगीत सफर से बनाई अपनी अमर पहचान

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स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने सात दशकों से अधिक के संगीत करियर में अमर गीतों की ऐसी गायन शैली को विकसित किया है जो संगीत प्रेमियों की कई पीढ़ियों के जेहन में अभी भी तरोताजा हैं और हमेशा रहेंगी।

उन्होंने अपने करियर की शुरूआत सिनेमा के श्वेत-श्याम दौर में उस समय की थी जब फिल्मी गाने अक्सर भीड़भाड़ वाले स्टूडियो में या रात के अंधेरे में खुले में रिकॉर्ड किए जाते थे। इसके बाद आधुनिक दौर में लता मंगेशकर ने एक चमकदार धूमकेतु जैसी अपनी पहचान बनाई जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।

उन्होंने अपने गायन में लोरी, प्रेम गीत, एकल और युगल, शास्त्रीय और व्यावसायिक, अनेक भाषाओं में अनगिनत गाने गाकर अपने स्वर की अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने गायन की एक अभूतपूर्व शैली विकसित की और अपनी आवाज को हर उसी अभिनेत्री के अनुरूप ढाला, जिस पर इसे स्क्रीन पर शूट किया गया था। उन्होंने अपने समकक्ष महान गायक प्रसिद्ध मोहम्मद रफी के साथ अनेक फिल्मों में नायिकाओं के लिए आवाज दी।

वह स्वर कोकिला ,मेलोडी क्वीन के नाम से मशहूर रही हैं और 1960 के दशक में भारतीय सैनिकों के लिए उनके गाए गाने .. ऐ मेरे वतन के लोगों..को सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंड़ित जवाहर लाल नेहरू की आंखों में आंसू आ गए थे।

हिंदी फिल्म उद्योग के लिए 1945 में पाश्र्व गायन के साथ शुरू होने वाले उनके संघर्ष के शुरूआती दिनों में उन्हें नौशाद अली की रचना उठाये जा उनके सितम (अंदाज – 1949) गाने के बाद एक जबर्दस्त मुकाम हाासिल हुआ।

नौशाद के अलावा उस समय के मशहूर संगीतकार शंकर-जयकिशन, एस.डी. बर्मन, हुसैनलाल-भगतराम, सी. रामचंद्र, सालिक चौधरी, खय्याम, रवि, सज्जाद हुसैन, रोशन, कल्याणजी-आनंदजी, मदन मोहन, वसंत देसाई, सुधीर फड़के, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, उषा खन्ना, अपने विविध संगीत के लिए उनकी मनोहारी आवाज के लिए लालायित रहते थे। उनकी आवाज शीर्ष नायिकाओं के अलावा खलनायिकाओं पर भी खूाब फबती थी।

जैसे-जैसे उनकी लोकप्रियता और शोहरत बढ़ती गई तो उन्होंने 1960 के दशक के मध्य तक कई पुरानी स्थापित महिला गायिकाओं से प्रतिस्पर्धा करनी बंद कर दी क्योंकि क्योंकि निर्माता-निर्देशक उनकी उस आवाज के मुरीद थे जो उस समय की हर अदाकारा पर फबती थी ।

उन्होंने भारतीय फिल्म संगीत के ‘स्वर्ण युग’ के रूप में पहचाने जाने वाले चार दशकों में नायिकाओं और संगीत-निर्देशकों की लगातार बढ़ती आकांक्षाओं के साथ पूर्ण न्याय किया।

उस दौर की विभिन्न प्रमुख नायिकाओं पर फिल्माए गए उनके मशहूर गीतों में शामिल हैं: हवा में उड़ता जाए (‘बरसात’), चले जाना नहीं नैन मिलाके (‘बड़ी बहन’ – दोनों 1949 ), राजा की आएगी बारात (‘आह’ – 1953), मन डोले मेरा तन डोले (‘नागिन’ – 1954), रसिक बलमा (‘चोरी चोरी’ – 1956), नगरी नगरी, द्ववारे द्ववारे (‘मदर इंडिया’ – 1957), आजा रे परदेसी (‘मधुमति’), उनको ये शिकायत है की हम (‘अदालत’ – दोनों 1958), तेरे सुर और मेरे गीत (‘गूंज उठी शहनाई’) ‘-1959), ‘मुगल-ए-आजम’ (1960) प्यार किया तो डरना क्या, मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोये, हमें काश तुमसे मोहब्बत ना होती, खुदा निगहबान हो तुम्हारा, बेकस पे करम कीजे ; अजीब दास्तां है ये (‘दिल अपना और प्रीत परायी’), ओ सजना, बरखा बहार आई (‘परख’), तेरा मेरा प्यार अमर (असली नकली – सभी 1960), अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम (‘हम दोनो’), दो हंसों का जोड़ा (‘गंगा जमुना’), ज्योति कलश छलके. (‘भाभी की चूड़ियां’ – सभी 1961), तेरे प्यार में दिलदार (‘मेरे महबूब’) ‘ – 1963), आजा आई बहार (‘राजकुमार’), मैं क्या करू राम, मुझे बूढ़ा मिल गया (‘संगम’), लग जा गले से (‘वो कौन थी’ – सभी 1964), कांटो से खींच के ये आंचल (‘गाइड’), ये समा, समा है ये प्यार का (‘जब जब फूल खिले’ – दोनों 1965), तू जहां, जहां चलेगा, नैनों में बदरा छाए ( ‘मेरा साया’), रहे ना रहे हम (‘ममता’), नील गगन की छाँव में (‘आम्रपाली’ – सभी 1966), रात और दिन, दिया जले (‘रात और दिन’ – 1967) ), मैं तो भूल चली बाबुल का देश (‘सरस्वतीचंद्र’ – 1968), बिंदिया चमकेगी, चूड़ी खनकेगी (‘इंतकाम’ – 1969)।

इसके बाद 1970 और 1980 के दौर में गाए गए उनके मधुर गीतों में बाबुल प्यारे (‘जॉनी मेरा नाम’ – 1970), 1972 की ब्लॉकबस्टर ‘पाकीजा’ – चलते, चलते, इन्ही लोगों ने, मौसम है आशिकाना, ठाडे रहियो; आज सोचा तो आँसू भर आए (‘हंसते जख्म’ – 1973), ये रातें नई पुरानी (‘जूली’) जब तक है जान (‘शोले’), नहीं नहीं, जाना नहीं (‘) जिंदा दिल’ – सभी 1975), मेरे घर आई एक नन्ही परी (‘कभी कभी’), दिल में तुझे बिठाके (‘फकीरा’), हुस्न हाजिर है (‘लैला मजनू’ – सभी 1976), दिल तो है दिल (‘मुकद्दर का सिकंदर’), सत्यम शिवम सुंदरम (‘सत्यम शिवम सुंदरम’ – दोनों 1978), जाने क्यूं मुझे (‘एग्रीमेंट’ – 1980), मेरे नसीब में (‘नसीब’) ‘ – 1980), तूने ओ रंगीले कैसा जादू किया (‘कुदरत’ – 1981), दिखाई दिए यूं (‘बाजार’ – 1982), ऐ दिल-ए-नादान (‘रजिया सुल्तान’- 1983) , सुन साहिबा सुन (‘राम तेरी गंगा मैली’ – 1985), पतझर सावन, बसंत बहार (‘सिंदूर’ – 1987)शामिल है।

लता मंगेशकर ने एकल गीतों के अलावा जीएम दुर्रानी, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, मुकेश, महेंद्र कपूर, मन्ना डे, एसपी बालसुब्रमण्यम, शमशाद बेगम, नितिन मुकेश, अनवर, शब्बीर कुमार, आशा भोंसले आदि के साथ कई यादगार युगल गीत प्रस्तुत किए।

फिल्मी खबरे

’36 साल से यही रूटीन’, अक्षय कुमार ने बताया क्यों नहीं लेना चाहते हैं रिटायरमेंट

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मुंबई, 11 जून: अभिनेता अक्षय कुमार की फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ का ट्रेलर गुरुवार को रिलीज कर दिया गया है। ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम के दौरान अक्षय कुमार ने मीडिया से बातचीत के दौरान रवीना के प्रोफेशनलिज्म और मजबूत नैतिकता की भी तारीफ की। साथ ही, अपने रिटायरमेंट के प्लान पर मजेदार खुलासे किए।

ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम के दौरान जब मीडिया ने अक्षय से रिटायरमेंट प्लान को लेकर सवाल किए, तो अभिनेता ने अपने अंदाज में जवाब देते हुए बताया, “जब मैं रोज सुबह 4 बजे उठता हूं, तो सिर्फ 5 सेकंड के लिए मन में आता है कि अब रिटायरमेंट ले लूं, लेकिन अगले ही पल याद आता है कि मुझे शूटिंग पर जाना है। वहां पर पूरी टीम मेरी इंतजार कर रही होगी। बस, इसी ‘कश्मकश’ में जिंदगी चल रही है। अगले दिन फिर से वही रूटीन शुरू हो जाता है और ऐसा करते-करते मुझे 36 साल बीत चुके हैं।”

उन्होंने आगे हंसते हुए कहा, “अगर मैं रिटायर हो भी गया, तो घर पर बैठकर ज्यादा से ज्यादा क्या करूंगा। इलेक्ट्रिशियन का काम हाथ आ जाएगा, या फिर कुत्तों घुमाने चला जाऊंगा। ऐसे ही घर के सारे काम मेरे हिस्से आ जाएंगे। मुझे लगता है कि उन सब कामों को करने से बेहतर है कि मैं फिल्मों में एक्टिंग करता रहूं।”

अभिनेता ने अपनी बात को रखते हुए बताया कि उन्हें रिटायरमेंट शब्द से नफरत हैं। उन्होंने कहा, “अगर आपको एक लंबी और सेहतमंद जिंदगी जीनी है, तो कभी काम करना बंद मत कीजिए और हमेशा एक्टिव रहिए।”

अभिनेता अक्षय कुमार ने आगे पुराने दिनों को याद करते हुए अभिनेत्री रवीना टंडन की जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि समय कैसे बदल गया है; उनकी पुरानी साथी कभी बॉलीवुड में हीरोइन के तौर पर राज करती थीं, लेकिन अब वह हीरोइन की मां बन गई हैं। अक्षय कुमार ने रवीना की बेटी राशा थडानी की ओर इशारा किया।

एक्टर ने रवीना के प्रोफेशनलिज्म और मजबूत नैतिकता की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, “मैं आपको रवीना के बारे में बताना चाहता हूं कि वह हमेशा से बहुत प्रोफेशनल रही हैं। मुझे आज भी याद है, मैं एक फिल्म की शूटिंग कर रहा था और सूरज डूबने वाला था। सूरज डूबने में बस 25-30 मिनट बचे थे। ग्रीन रूम बहुत दूर था और उन्हें जल्दी से कपड़े बदलकर आना था। यह नामुमकिन लग रहा था। लेकिन मुझे याद है, वह जनरेटर वैन में गईं और जल्दी से कपड़े बदलकर वापस आ गईं।”

दिवंगत अभिनेता पंकज धीर को याद करते हुए अक्षय कुमार ने कहा कि जैसा सभी जानते हैं, फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ पंकज धीर की आखिरी फिल्म थी। आज इस खास मौके पर पूरी टीम उन्हें बहुत मिस कर रही है।

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फिल्मी खबरे

‘वेलकम टू द जंगल’ का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज, अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी की जोड़ी ने फिर मचाया धमाल

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मुंबई, 11 जून: अक्षय कुमार की बहुप्रतीक्षित कॉमेडी ड्रामा फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ का ट्रेलर मेकर्स ने गुरुवार को रिलीज कर दिया गया है। एक्शन, कॉमेडी, रोमांस, ड्रामा और सस्पेंस से भरपूर ट्रेलर की सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है।

4 मिनट 10 सेकंड के इस ट्रेलर में बेहतरीन कलाकारों की बड़ी टोली नजर आती है, जो दर्शकों को हंसी और रोमांच का डबल डोज देने वाली है। ट्रेलर की शुरुआत परेश रावल से होती है, जो एक फिल्म बनाना चाहते हैं। इसके बाद फिल्म के सभी कलाकारों का परिचय कराया जाता है और फिर जंगल में शूटिंग शुरू होती है।

इसके बाद परेश रावल अपनी टीम को समझाते हैं कि उनकी फिल्म आर्मी पर आधारित है, जिसके लिए उन्हें पहले इसकी ट्रेनिंग करवाई जाएगी। इसी दौरान लारा दत्ता की एंट्री होती है और प्रशिक्षण के बीच कलाकारों की मजेदार नोकझोंक देखने को मिलती है।

पूरा ट्रेलर काफी मनोरंजक नजर आता है। इसमें भरपूर कॉमेडी और मजेदार उथल-पुथल देखने को मिल रही है। अपने दमदार एक्शन और शानदार कॉमिक टाइमिंग के साथ अक्षय कुमार प्रभाव छोड़ते नजर आते हैं। वहीं, सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, तुषार कपूर और जैकी श्रॉफ भी अपने-अपने किरदारों में बेहद मजेदार दिखाई देते हैं।

फिल्म में बड़ा मोड़ तब आता है, जब परेश रावल की पूरी टीम एक गांव पहुंच जाती है। गांव के लोगों को लगता है कि सेना के जवान उन्हें बचाने आए हैं। इसी दौरान रवीना टंडन की एंट्री होती है।

ट्रेलर की खास बात यह है कि इसमें मुख्य कलाकारों की वास्तविक जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प और मजेदार संदर्भ भी शामिल किए गए हैं। साथ ही, अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी को लंबे समय बाद पर्दे पर एक साथ देखना दर्शकों के लिए खास आकर्षण माना जा रहा है।

यह लोकप्रिय ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी की तीसरी किस्त है, जिसका निर्देशन अहमद खान ने किया है। फिल्म में अक्षय कुमार के अलावा सुनील शेट्टी, परेश रावल, राजपाल यादव, जॉनी लीवर, जैकलीन फर्नांडिस, दिशा पाटनी, कृष्णा अभिषेक, तुषार कपूर, जैकी श्रॉफ, अरशद वारसी और रवीना टंडन समेत कई कलाकार नजर आएंगे।

यह फिल्म 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है।

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फिल्मी खबरे

‘ आयुष्मान खुराना ने फैमिली संग नेपाल की वादियों का उठाया लुत्फ, पत्नी ताहिरा ने शेयर कीं खूबसूरत तस्वीरें

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मुंबई, 10 जून: अभिनेता आयुष्मान खुराना इन दिनों अपने परिवार के साथ नेपाल में छुट्टियों का आनंद ले रहे हैं। बुधवार को उनकी पत्नी ताहिरा कश्यप ने इंस्टाग्राम पर इस खूबसूरत ट्रिप की कुछ तस्वीरें शेयर की। इन तस्वीरों में आयुष्मान, ताहिरा और उनके बच्चे प्रकृति के सुंदर नजारों के बीच मस्ती करते हुए नजर आ रहे हैं।

पहली तस्वीर में आयुष्मान और ताहिरा नजर आ रहे हैं, जबकि कुछ तस्वीरों में ताहिरा हरे-भरे नजारों में आनंद लेती नजर आ रही हैं, तो कुछ में वे अपने आयुष्मान बच्चों के साथ लुत्फ उठा रहे हैं।

ताहिरा ने पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “कैरोसेल की आखिरी तस्वीर वही है, जिसे हर कोई सबसे ज्यादा पसंद कर रहा है और नौवीं तस्वीर लेने से पहले कैमरे के लेंस को साफ करने की जरूरत थी।”

ताहिरा और आयुष्मान की वैकेशन की तस्वीरें फैंस समेत सेलेब्स भी खूब पसंद कर रहे हैं। अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती ने कमेंट सेक्शन पर लिखा, “खूबसूरत नारी।” अभिनेत्री ऐश्वर्या सुष्मिता ने लिखा, “फिर भी धुंधली तस्वीर ही सबसे खूबसूरत लगती है।”

ताहिरा कश्यप भले ही आयुष्मान खुराना की पत्नी के नाम से पहचानी जाती हैं, लेकिन वे एक भारतीय लेखिका, फिल्म निर्माता और स्तन कैंसर जागरूकता पैरोकार भी हैं। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं, जिनमें ‘क्रैकिंग द कोड: माय जर्नी इन बॉलीवुड’ और ‘द 12 कमांडमेंट्स ऑफ बीइंग ए वुमन’ शामिल हैं। इसके अलावा ताहिरा ने शॉर्ट फिल्में जैसे ‘टॉफी’ (2018) और ‘पिन्नी’ (2020) बनाई हैं। उन्होंने फीचर फिल्म ‘शर्मा जी की बेटी’ (2024) का भी निर्देशन किया है।

फीचर फिल्म ‘शर्मा जी की बेटी’ एक कॉमेडी-ड्रामा फिल्म है, जो मध्यमवर्गीय महिलाओं और किशोरियों के सपनों, चुनौतियों और जीवन के अनुभवों को दर्शाती है। इसमें साक्षी तंवर, दिव्या दत्ता और सैयामी खेर मुख्य भूमिकाओं में हैं। इसमें टीनेज लड़कियों के पीयर प्रेशर, करियर-ओरिएंटेड महिलाओं की उलझनों और पितृसत्तात्मक समाज की रूढ़ियों को रेखांकित किया गया है। फिल्म में सभी मुख्य महिला पात्रों का उपनाम ‘शर्मा’ है, जो अलग-अलग उम्र और पृष्ठभूमि से आती हैं।

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