राजनीति
राहुल गांधी द्वारा 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में हेराफेरी के आरोप पर कमलनाथ को राहत
भोपाल, 22 जुलाई। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को मंगलवार को कुछ हद तक अपनी बात सही साबित करते हुए देखा गया जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों में “हेरफेर” किया गया था।
गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए, कमलनाथ ने पार्टी कार्यकर्ताओं से राज्य में चल रही मतदाता सूची सत्यापन प्रक्रिया के दौरान सतर्क रहने का आग्रह किया।
कमलनाथ, जिन्होंने 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का नेतृत्व किया था – जहाँ पार्टी ने 230 में से केवल 63 सीटें जीती थीं – ने कार्यकर्ताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि कोई भी नकली मतदाता न जोड़ा जाए और कोई भी असली नाम मतदाता सूची से न हटाया जाए।
“मैं कांग्रेस कार्यकर्ताओं के समर्पण की सराहना करता हूँ। सभी ने कड़ी मेहनत की, लेकिन वोटों में हेराफेरी के कारण हम जीत हासिल नहीं कर सके। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इसे स्वीकार किया है,” नाथ ने X पर एक पोस्ट में कहा।
राहुल गांधी ने यह आरोप सोमवार को धार जिले के मांडू में आयोजित मध्य प्रदेश कांग्रेस विधायकों के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए लगाया। राज्य कांग्रेस इकाई द्वारा साझा की गई एक छोटी क्लिप में, गांधी को यह कहते हुए सुना जा सकता है: “2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में हेराफेरी की गई थी। यह महाराष्ट्र में हुई घटना जैसा ही था।”
इस बयान को कमलनाथ के लिए एक महत्वपूर्ण समर्थन के रूप में देखा जा रहा है, जिन्हें चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद राज्य कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। नाथ को उम्मीदवारों के चयन पर कथित तौर पर एकतरफा फैसले लेने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के लिए नियुक्त दो AICC प्रभारियों को चुनाव के दौरान महज दो महीने के भीतर ही बदल दिया गया था।
राहुल गांधी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को भविष्य के चुनावों से पहले मतदाता सूची में छेड़छाड़ के नए प्रयासों के प्रति भी आगाह किया। उन्होंने कहा, “मतदाता सूची में फिर से छेड़छाड़ की योजना है और महाराष्ट्र की तरह मध्य प्रदेश में भी चुनाव चोरी हो सकते हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इससे लड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए।”
निर्वाचित प्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों के बीच समन्वय को मज़बूत करने और भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयारी करने के उद्देश्य से आयोजित प्रशिक्षण शिविर मंगलवार को संपन्न हुआ।
राजनीति
सुप्रिया सुले ने सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर जताई चिंता, केंद्र से रिहाई की मांग

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी तथा उन्हें तिहाड़ जेल भेजे जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप कर दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की।
सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “जंतर-मंतर पर तिरंगा थामना कोई अपराध नहीं है। सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी और उन्हें तिहाड़ जेल भेजे जाने की खबर चिंताजनक है। मैं गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप करने और उनकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने का अनुरोध करती हूं।”
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा करनी चाहिए। असहमति लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर भारतीय को बिना भय के अपनी आवाज उठाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर अतिक्रमण के मामले में बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। जानकारी के अनुसार, सौरव दास को तिहाड़ जेल नंबर-2 और आशुतोष रांका को जेल नंबर-4 में रखा गया है। वहीं, इसी मामले में गिरफ्तार किए गए अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
सीजेपी नेताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अभिष्ट हेला ने बताया कि अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा है। उन्होंने दावा किया कि यह आदेश पर्याप्त न्यायिक विचार किए बिना पारित किया गया और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने केवल आशंकाओं के आधार पर कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह मान लिया कि आरोपी कुछ कर सकते हैं और इसी आधार पर उन्हें पांच दिनों के लिए जेल भेज दिया गया। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लोगों को ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने और तिरंगा लहराने के लिए जेल भेजा जाना चिंताजनक है।
पुलिस के अनुसार, सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर पुलिस बैरिकेड्स पार करने और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। तीनों नेता चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन करने जा रहे थे। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी भी की थी।
दिल्ली पुलिस ने हाल ही में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान बनाए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
सऊदी अरब में भारतीयों की तादाद ठीक-ठाक, दूतावास कर रहा हरसंभव मदद : विदेश मंत्रालय

भारत ने सऊदी अरब पर हो रहे मिसाइल हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय (एमईए) के मुताबिक नागरिक या सार्वजनिक ठिकानों को निशाना बनाना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। बिगड़ते हालात के भारतीय दूतावास की तरफ से अपने नागरिकों को पहुंचाई जा रही हरसंभव मदद का भी उल्लेख किया।
बुधवार को पाक्षिक प्रेस ब्रीफिंग में एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हुए हमले को लेकर कहा, “सऊदी अरब पर कई हमले हुए हैं। कल अरामको मुख्यालय पर भी हमला हुआ। हम सऊदी अरब में आम लोगों के बुनियादी ढांचे पर हुए ऐसे सभी हमलों की निंदा करते हैं। हमारा मानना है कि ये हमले तुरंत बंद होने चाहिए। ये बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं। हम सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए वहां की जनता और सरकार के साथ खड़े हैं, और हमें उम्मीद है कि इस इलाके में जल्द ही शांति और सामान्य स्थिति बहाल होगी।”
प्रवक्ता ने वहां रह रहे भारतीयों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “सऊदी अरब में हमारा दूतावास भारतीय समुदाय के लगातार संपर्क में है और उनकी भलाई के लिए एडवाइजरी जारी की है। हवाई अड्डों पर हमलों के कारण उड़ानों के शेड्यूल पर असर पड़ा है, जिससे भारतीय एयरलाइंस, खासकर रियाद, दम्मम, मदीना और जेद्दा से आने-जाने वाली उड़ानें प्रभावित हुई हैं। लेकिन कुछ सऊदी एयरलाइंस आ जा रही हैं। दूतावास यात्रियों और फंसे हुए लोगों को ताजा जानकारी दे रहा है। कह सकते हैं कि विकल्प तो हैं लेकिन साथ में दिक्कतें भी मौजूद हैं।”
हवाई अड्डे हमले में पीड़ितों, भारतीय प्रवासियों और धार्मिक यात्रा को लेकर पूछे सवाल पर जायसवाल ने कहा, “10 अक्टूबर के हमले में 12 लोग घायल हुए थे, जिनमें से एक की दुर्भाग्य से मौत हो गई। परिवार की इच्छानुसार, दूतावास की मदद से रियाद में उनका अंतिम संस्कार किया गया। बाकी 11 घायलों में से तीन को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि आठ अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से चार आईसीयू में हैं। दूतावास के अधिकारी लगातार उनसे मिल रहे हैं और पीड़ित परिवारों के संपर्क में हैं। वहां भारतीय प्रवासियों और यात्रियों की संख्या ठीक-ठाक है और हम विदेश में अपने नागरिकों के कल्याण और सुरक्षा की खातिर हर संभव मदद करने को तत्पर हैं।”
राष्ट्रीय समाचार
तिरंगा फहराने पर गिरफ्तारी को लेकर ‘आप’ बोली- क्या अपने ही देश में झंडा फहराना अपराध है?

जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर निशाना साधा है। पार्टी ने दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया। आप नेताओं ने मौजूदा परिस्थितियों की तुलना वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल से की और आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि क्या अब अपने ही देश में तिरंगा फहराना भी अपराध हो गया है? उन्होंने सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी को हास्यास्पद बताते हुए इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई। आप के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने सवाल किया कि क्या देश में अंग्रेजों का शासन चल रहा है, जो तिरंगा फहराने और भारत माता की जय के नारे लगाने पर युवाओं को जेल भेजा जा रहा है?
संजय सिंह के अनुसार, सीजेपी नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्या शिंदे ने जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराया और भारत माता की जय के नारे लगाए थे। उन्होंने कहा कि देश के युवा आगे भी भारत माता की जय बोलेंगे और तिरंगा फहराएंगे। उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल भेजकर सरकार युवाओं की आवाज दबाने में सफल नहीं होगी। संजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी कार्रवाइयों से लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर जनता की आवाज को रोका नहीं जा सकता।
आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस पूरे घटनाक्रम की तुलना वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल से की। उन्होंने कहा कि उस समय भी चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप, छात्र और मजदूर आंदोलन, आर्थिक संकट तथा राजनीतिक अस्थिरता जैसे मुद्दे चर्चा में थे। उनके मुताबिक, मौजूदा समय में भी चुनावी धांधली के आरोपों, युवाओं के आंदोलनों और राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर असंतोष देखने को मिल रहा है।
सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले युवाओं के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई से लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ती हैं। उन्होंने आगे कहा कि 1975 के आपातकाल के दौरान राज नारायण और मोरारजी देसाई जैसे नेताओं समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।
भारद्वाज के अनुसार, मौजूदा समय में भी विपक्षी नेताओं और सरकार की आलोचना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की आशंका बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार औपचारिक रूप से आपातकाल घोषित किए बिना भी ऐसे कदम उठा सकती है, जिनसे लोकतांत्रिक गतिविधियां प्रभावित हों। सौरभ भारद्वाज ने देश की आर्थिक स्थिति, विदेश नीति और भाजपा के आंतरिक राजनीतिक हालात को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने दावा किया कि देश आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और चीन की ओर से लद्दाख पर किए जा रहे दावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। भारद्वाज ने भाजपा के भीतर नेतृत्व को लेकर कथित मतभेदों का भी जिक्र किया। तिरंगा फहराने के मामले में सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत को लेकर आम आदमी पार्टी ने इसे नागरिक अधिकारों तथा लोकतांत्रिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए सरकार की आलोचना की है।
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