राजनीति
जम्मू-कश्मीर : पहलगाम आतंकी हमले में एक पर्यटक की मौत, 12 घायल, सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘स्तब्ध हूं’
श्रीनगर, 22 अप्रैल। जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम हिल स्टेशन पर मंगलवार को हुए आतंकवादी हमले में एक पर्यटक की मौत हो गई। वहीं पर्यटकों तथा स्थानीय लोगों सहित 12 अन्य लोग घायल हो गए।
पहलगाम हिल स्टेशन के बैसरन इलाके में आतंकवादियों ने पर्यटकों के एक समूह पर हमला कर दिया, जिसमें एक पर्यटक की मौत हो गई और नौ अन्य पर्यटक तथा तीन स्थानीय लोग घायल हो गए।
मिली जानकारी के मुताबिक, सेना की वर्दी पहने 2 से 3 आतंकवादी दोपहर करीब 2.30 बजे बैसरन इलाके में घुड़सवारी कर रहे पर्यटकों पर गोलियां चलाने लगे। बैसरन पहलगाम बाजार से 3 से 4 किलोमीटर दूर एक छोटा सा घास का मैदान है और पर्यटक यहां तक पहुंचने के लिए घोड़ों का सहारा लेते हैं, क्योंकि यहां तक पहुंचने के लिए कोई मोटर वाहन योग्य सड़क नहीं है।
एक अधिकारी ने बताया, “इस हमले में एक पर्यटक की मौत हो गई तथा पर्यटकों और स्थानीय लोगों सहित 12 अन्य घायल हो गए। घायलों को पहलगाम अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर रूप से घायल तीन लोगों को विशेष उपचार के लिए श्रीनगर भेज दिया गया।” उन्होंने बताया कि हमलावरों का पता लगाने के लिए सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक्स पोस्ट पर लिखा, “मैं अविश्वसनीय रूप से स्तब्ध हूं। हमारे आगंतुकों पर यह हमला एक घृणित कार्य है। इस हमले के अपराधी जानवर, अमानवीय और घृणा के पात्र हैं। निंदा के लिए कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं है। मैं मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। मैंने अपनी सहकर्मी सकीना इटू से बात की है और वह घायलों के लिए व्यवस्थाओं की देखरेख करने के लिए अस्पताल चली गई हैं। मैं तुरंत श्रीनगर वापस जा रहा हूं।”
सीएम अब्दुल्ला ने एक और पोस्ट में लिखा, “मृतकों की संख्या का अभी पता लगाया जा रहा है, इसलिए मैं उन विवरणों में नहीं जाना चाहता। स्थिति स्पष्ट होने पर उन्हें आधिकारिक रूप से बताया जाएगा। कहने की जरूरत नहीं कि यह हमला हाल के वर्षों में नागरिकों पर किए गए किसी भी हमले से कहीं ज्यादा बड़ा है।”
पीडीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने एक्स पर लिखा, “मैं पहलगाम में पर्यटकों पर हुए कायराना हमले की कड़ी निंदा करता हूं, जिसमें दुखद रूप से पांच लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। ऐसी हिंसा अस्वीकार्य है और इसकी निंदा की जानी चाहिए। ऐतिहासिक रूप से, कश्मीर ने पर्यटकों का गर्मजोशी से स्वागत किया है, जिससे यह दुर्लभ घटना बेहद चिंताजनक है। अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने और संभावित सुरक्षा चूक की जांच करने के लिए गहन जांच की आवश्यकता है। आगंतुकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोपरि है, और भविष्य में हमलों को रोकने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। हमारी संवेदनाएं पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ हैं।”
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया और हमले को “कायरतापूर्ण” बताया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों को आश्वासन दिया कि इस जघन्य कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने डीजीपी और सुरक्षा अधिकारियों से बात की है। सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस की टीमें इलाके में पहुंच गई हैं और तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “मैं पहलगाम में पर्यटकों पर हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले की कड़ी निंदा करता हूं। मैं लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि इस घृणित हमले के पीछे जो लोग हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। डीजीपी और सुरक्षा अधिकारियों से बात की है। सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस की टीमें इलाके में पहुंच गई हैं और तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों को पहलगाम में भर्ती लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधा प्रदान करने का निर्देश दिया है। एक घायल पर्यटक को जीएमसी अनंतनाग पहुंचाया गया है। मैं सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।”
कश्मीर घाटी में 2025 में पर्यटकों पर यह पहला आतंकवादी हमला है, जबकि इस समय घाटी में पर्यटन का मौसम काफी तेजी से बढ़ रहा है।
श्रीनगर शहर के सभी होटल और पहलगाम, गुलमर्ग और सोनमर्ग के पर्यटक रिसॉर्ट पूरी तरह से भरे हुए हैं।
इस साल जम्मू-कश्मीर में अभूतपूर्व संख्या में पर्यटकों के आने की उम्मीद है और आधिकारिक अनुमानों के अनुसार इस साल करीब दो करोड़ पर्यटक केंद्र शासित प्रदेश में आएंगे।
मंगलवार का हमला ऐसे समय में हुआ है जब इस साल की अमरनाथ यात्रा के लिए देशभर में पंजीकरण चल रहा है।
इस साल यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त को समाप्त होगी, जो क्रमशः श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के त्योहारों के साथ है।
पिछले महीने जम्मू-कश्मीर की अपनी यात्रा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की थी, जहां उन्होंने जम्मू संभाग पर विशेष ध्यान देते हुए आतंकवाद के पूर्ण उन्मूलन के आदेश दिए थे।
उन्होंने घुसपैठ के प्रति जीरो टॉलरेंस सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए थे। बैठक में केंद्रीय गृह सचिव, आईबी निदेशक, सेना प्रमुख, जम्मू-कश्मीर में सभी कोर के जीओसी, अर्धसैनिक बलों के प्रमुख, जम्मू-कश्मीर के डीजीपी और खुफिया अधिकारी शामिल हुए।
बीते दिनों उपराज्यपाल मनोज सिन्हा इस बात पर जोर दिया था कि जम्मू-कश्मीर को आतंकवाद के अभिशाप से पूरी तरह मुक्त करने के लिए आतंकवादियों, उनके ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) और समर्थकों सहित आतंकवाद के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र से निपटना होगा।
राजनीति
सत्ताधारी पार्टी ने खो दिया है अपना मानसिक संतुलन : संजय राउत

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने सोमवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला किया। राउत ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है।
संजय राउत ने भाजपा की मौजूदा हालत की तुलना 1942 में ब्रिटिश साम्राज्य के पतन से ठीक पहले की घबराहट और हताशा से की।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने चुनाव की निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि लाखों नागरिकों का वोट देने का अधिकार छीना जाना गलत है। जनता के गुस्से के आगे भाजपा का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है।
सीएम फडणवीस के राजनीतिक करियर पर तंज कसते हुए संजय राउत ने कहा कि हम उन्हें यह कहकर ऊर्जा देने की कोशिश करते हैं कि दिल्ली में उनका भविष्य है लेकिन वे खुद को नुकसान पहुंचाते रहते हैं। वे राष्ट्रीय स्तर की बड़ी भूमिका के लिए कतार में हैं। जब उन्हें यह समझ आ जाएगा कि लाखों लोगों का सड़कों पर उतरना शिकायत नहीं बल्कि एक क्रांति है, तभी वे शीर्ष पर पहुंच पाएंगे।
मंत्री आशीष शेलार की टिप्पणी पर संजय राउत ने कहा कि वे खुद सियार हैं, इसलिए उन्हें हर तरफ हुआं-हुआं ही सुनाई देता है। यह हुआं-हुआं नहीं थी, यह ‘गर्जना’ थी। चुनाव में हेरफेर के खिलाफ देश का अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन है।
विपक्ष के लामबंद होने के पीछे राष्ट्रीय स्तर पर बन रहे माहौल का जिक्र करते हुए राउत ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जनता में बढ़ते गुस्से से केंद्रीय अधिकारी बुरी तरह घबराए हुए हैं।
राउत ने बताया कि दिल्ली किसी सैन्य छावनी जैसी लग रही है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के आवासों के आसपास भारी सुरक्षा बल, बीएसएफ और हथियारबंद जवान तैनात किए गए हैं ताकि संभावित विरोध प्रदर्शनों को रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि कपिल सिब्बल जैसे बड़े वकील सड़कों पर उतर आए हैं देशभर में विपक्षी ताकतें संस्थागत ईमानदारी की विफलता के खिलाफ एकजुट हो रही हैं।
राउत ने घोषणा की कि पूरे भारत से विपक्षी दल संसद के मकर द्वार पर इकट्ठा होंगे और ठोस सबूत सौंपने के लिए सीधे चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च करेंगे। उन्होंने मांग की कि सीईसी ज्ञानेश कुमार छिपे रहने के बजाय जनता के सवालों का जवाब देने के लिए सामने आएं।
डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की आलोचना करते हुए राउत ने कहा कि महाराष्ट्र सूखे और बढ़ते भ्रष्टाचार से जूझ रहा है, फिर भी उपमुख्यमंत्री दिल्ली में गृह मंत्री के घर के लॉन में एक पेइंग गेस्ट की तरह बैठे हैं। सूखे से प्रभावित तालुकाओं की सूची की घोषणा करना और दिल्ली भाग जाना बेशर्मी की हद है।
पार्टी बदलने वाले विधायकों का जिक्र करते हुए राउत ने कहा कि पैसे से सम्मान नहीं खरीदा जा सकता। आपको 50 करोड़ रुपए या आगे-पीछे दो पुलिस एस्कॉर्ट गाड़ियां मिल सकती हैं, लेकिन जनता की भावनाएं नहीं खरीदी जा सकतीं। जब छात्र ‘गद्दार’ कहते हैं, तो यह लोगों की सच्ची आवाज होती है।
राष्ट्रीय समाचार
135 साल पुराने केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय को शिफ्ट करने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगी विस्तृत जानकारी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नई दिल्ली के शास्त्री भवन से 135 साल पुराने केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय (सीएसएल) को दूसरी जगह शिफ्ट करने से जुड़े मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय (सीएसएल) को दूसरी जगह शिफ्ट करने से जुड़े मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पीवी संजय कुमार और संजीव सचदेवा की पीठ ने सरकार को तीन सप्ताह के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा। इसमें लाइब्रेरी के लिए आवंटित की जाने वाली जगह का लेआउट प्लान और पूरी जानकारी देनी होगी।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह बताने को कहा है कि नए सेंट्रल विस्टा प्लान में 135 साल पुराने पुस्तकालय के लिए कितनी जगह तय की गई है। बता दें कि इस लाइब्रेरी में लगभग 8.5 लाख किताबें हैं। सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत इस लाइब्रेरी को मौजूदा जगह से दूसरी जगह ले जाने का प्रस्ताव है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह पूरी जानकारी वाला विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। इसमें यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि लाइब्रेरी के लिए कितनी जगह उपलब्ध कराई जाएगी। क्या यह जगह लाइब्रेरी की लगभग 8.5 लाख किताबों को रखने के लिए पर्याप्त होगी। कोर्ट ने यह भी जानकारी मांगी है कि क्या आरके पुरम में डिब्बों में रखी लगभग 2 लाख अतिरिक्त किताबों को भी रखने के लिए क्या वहां पर्याप्त जगह होगी।
हालांकि, सरकार की ओर से एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि सेंट्रल विस्टा प्लान में लाइब्रेरी के लिए जगह निर्धारित की गई है।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्यरत केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय (सीएसएल) की स्थापना 1891 में कलकत्ता में इंपीरियल सचिवालय पुस्तकालय के रूप में हुई थी।
सीएसएल की वेबसाइट के अनुसार, इंपीरियल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी को 1912 में दिल्ली में स्थानांतरित कर दिया गया था और सिविल लाइंस स्थित ओल्ड सचिवालय भवन में रखा गया था। 1969 से केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय दिल्ली के शास्त्री भवन में स्थित है। यह कोलकाता के राष्ट्रीय पुस्तकालय के बाद दूसरा सबसे बड़ा केंद्रीय सरकारी पुस्तकालय है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
विदेश मंत्री जयशंकर ने स्विस राष्ट्रपति से मुलाकात की, भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को और मजबूत करने पर जोर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को नई दिल्ली में स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने को लेकर उत्साह की प्रशंसा की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात से संबंधित जरूरी जानकारी साझा की। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति परमेलिन के बीच बैठक से भारत और स्विट्जरलैंड के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग और बढ़ेगा।
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “भारत की राजकीय यात्रा पर आए स्विस परिसंघ के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन से मुलाकात कर खुशी हुई। भारत-ईएफटीए टीईपीए के वादे को आगे बढ़ाते हुए हमारी साझेदारी को गहरा करने के राष्ट्रपति परमेलिन के विचारों की गहराई से सराहना करता हूं।”
उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि राष्ट्रपति परमेलिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बैठक से दोनों देशों के बीच व्यापक क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत होगा।
राष्ट्रपति परमेलिन सोमवार को तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी भारत की पहली राजकीय यात्रा है। इस साल फरवरी में वह नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आए थे।
भारत पहुंचने पर परमेलिन का राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
इस यात्रा का मुख्य जोर दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और लोगों की आवाजाही समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर है। स्विस राष्ट्रपति के साथ वरिष्ठ अधिकारियों और कारोबारी नेताओं का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है।
राष्ट्रपति मूर्मू ने राष्ट्रपति परमेलिन के सम्मान में राजकीय भोज का आयोजन करेंगी।
विदेश मंत्रालय ने भारत और स्विट्जरलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा है कि यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती देगी। मंत्रालय के अनुसार, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के देशों में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निवेश साझेदार है।
भारत और ईएफटीए के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) को भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। जयशंकर ने भी अपनी मुलाकात के दौरान इस समझौते से पैदा हुए अवसरों का उल्लेख किया।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध हैं और दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संपर्क ने इस साझेदारी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रपति परमेलिन की मौजूदा यात्रा से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे तथा साझा हित वाले नए क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
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