राष्ट्रीय समाचार
जम्मू-कश्मीर : गुरेज घाटी में ताजा बर्फबारी से जनजीवन प्रभावित, बांदीपोरा-गुरेज मार्ग बंद
बांदीपोरा, 31 जनवरी। उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले की गुरेज घाटी में ताजा बर्फबारी के कारण क्षेत्र में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। गुरेज क्षेत्र के ऊंचे इलाकों जैसे डावर, कंजालवान, नीरू, बागतोर और तुलैल में लगभग चार इंच बर्फबारी हुई है, जिसके कारण आम जीवन में प्रभावित हुआ है।
राजदान दर्रे पर भारी बर्फबारी के कारण बांदीपोरा-गुरेज सड़क को असुरक्षित मानते हुए एहतियातन बंद कर दिया गया है। इस सड़क की लंबाई 85 किलोमीटर है और यह घाटी के प्रमुख संपर्क मार्गों में से एक है।
स्थानीय प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मार्ग को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।
यात्रियों और वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले स्थानीय नियंत्रण कक्षों से सड़क की स्थिति की जानकारी प्राप्त करें।
प्रशासन की टीम स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है। जैसे ही मौसम में सुधार होगा, कनेक्टिविटी बहाल करने के प्रयास जारी रहेंगे।
इस बीच, गुरेज घाटी में सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं और स्थानीय निवासियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
दिसंबर में पीएम मोदी का कनाडा दौरा द्विपक्षीय संबंधों की तरफ बढ़ा अगला ‘तार्किक कदम’ होगा: उच्चायुक्त पटनायक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिसंबर में प्रस्तावित कनाडा यात्रा पर सभी की निगाहें टिकी हैं। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने कहा कि भारतीय समुदाय भी पीएम मोदी के दौरे का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह दौरा भारत-कनाडा संबंधों को मजबूती देने की दिशा में अगला तार्किक कदम होगा।
आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत में पटनायक ने कहा कि पिछले एक साल में दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम किया है। राजनीतिक संपर्क बढ़ने के साथ व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कृषि, शिक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाया गया है।
पढ़िए पूरा साक्षात्कार:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कनाडा दौरा दिसंबर में प्रस्तावित है। ये भारत-कनाडा संबंधों की दृष्टि से कितना अहम है?
दिनेश के पटनायक: पिछले वर्ष से, हम अपने संबंधों को उच्च स्तर पर बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। यह प्रक्रिया तब शुरू हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा के कनानास्किस में जी 7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जहां उन्हें प्रधान मंत्री मार्क कार्नी द्वारा आमंत्रित किया गया था। दोनों नेताओं ने फैसला किया कि दोनों देशों के उच्चायुक्तों को अपने-अपने पद पर लौट जाना चाहिए। दोनों उच्चायुक्तों ने पिछले साल सितंबर में अपना कार्यभार फिर से शुरू किया।
तब से, हमने एक वर्ष पूरा कर लिया है, और बहुत कुछ हुआ है। प्रधानमंत्री कार्नी ने इस वर्ष फरवरी-मार्च में भारत का दौरा किया, और दोनों विदेश मंत्री पिछले वर्ष में 12 से अधिक बार मिल चुके हैं। हमने कई बार रक्षा मंत्रियों, व्यापार मंत्रियों, ऊर्जा मंत्री, प्राकृतिक संसाधन मंत्री, कनाडा, शिक्षा प्रतिनिधिमंडलों और हाल ही में कनाडा के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भारत यात्रा देखी है। इन सभी चीजों को मिलाकर, ये घटनाक्रम हमें एक ऐसे चरण पर ले आए हैं जहां प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा अगला तार्किक कदम है।
प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार 2015 में कनाडा का दौरा किया था, इसलिए काफी समय हो गया है। हम व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) पर बातचीत की प्रक्रिया में हैं और चौथे दौर की बातचीत समाप्त हो गई है। बातचीत तेजी से आगे बढ़ी है।
जब पिछले साल नवंबर में दोनों प्रधानमंत्रियों की जोहान्सबर्ग में मुलाकात हुई, तो उन्होंने एक साल के भीतर वार्ता समाप्त करने पर सहमति जताई थी। मुझे विश्वास है कि हम नवंबर तक इन्हें पूरा कर लेंगे। हमें उम्मीद है कि जब प्रधानमंत्री मोदी कनाडा जाएंगे तो हम सीईपीए पर हस्ताक्षर करने की स्थिति में होंगे।
संक्षेप में कहूं, भारत और कनाडा के बीच साझेदारी को व्यापक बनाने के लिए जरूरी प्रमुख क्षेत्रों में अब काम आगे बढ़ रहा है। इनमें सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, निवेश, व्यापार, रक्षा संवाद, एयरोस्पेस, अंतरिक्ष, कृषि एवं खाद्य क्षेत्र, लोगों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक संबंध शामिल हैं।
मैं इसके लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर, कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद और सबसे बढ़कर दोनों प्रधानमंत्रियों का आभार जताना चाहता हूं जिनकी अगुवाई में ये संभव हो पाया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और नेतृत्व ने समय के साथ भारत-कनाडा संबंधों को किस तरह आकार दिया है?
दिनेश के पटनायक: बिल्कुल, मैं मानता हूं कि प्रधानमंत्री के प्रोत्साहन और नेतृत्व के बिना, कुछ भी नहीं हो पाता।
मैं इसका पूरा श्रेय दोनों प्रधानमंत्रियों को दूंगा। प्रधानमंत्री कार्नी ने कनाडा के कनानास्किस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया, जबकि मोदी ने निमंत्रण स्वीकार कर संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाया।
जब दोनों देशों के उच्चायुक्तों ने अपने-अपने पद संभाले, तब उन्हें सरकारों के शीर्ष स्तर से स्पष्ट निर्देश मिले थे कि द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत बनाना है और उन्हें पहले से बेहतर स्तर पर ले जाना है।
मेरा विचार है कि दोनों प्रधानमंत्रियों के सक्रिय समर्थन और मार्गदर्शन के बिना यह प्रगति संभव नहीं होती।
कनाडा में भारतीय समुदाय काफी बड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी की संभावित यात्रा के दौरान उनके स्वागत के लिए यह समुदाय कैसी तैयारी कर रहा है?
दिनेश के पटनायक: प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार 2015 में कनाडा का दौरा किया था। ऐसे में करीब 11 साल बाद उनकी प्रस्तावित यात्रा को लेकर वहां रह रहे भारतीय समुदाय में काफी उत्साह है। कनाडा की 2021 की जनगणना के अनुसार, यहां भारतीय मूल के लोगों की आबादी लगभग 30 लाख है।
भारतीय समुदाय के अलग-अलग वर्गों के लोगों से लगातार यह पूछने के लिए संदेश और अनुरोध मिल रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी वहां कब आएंगे और वो उनसे मिलने की इच्छा रखते हैं। इस समुदाय में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और सिख सहित विभिन्न धार्मिक पृष्ठभूमियों के लोग हैं। इसके अलावा छात्र, शोधकर्ता, शिक्षाविद, कारोबारी और भारत के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग भी प्रधानमंत्री से मिलने की इच्छा जता रहे हैं।
लगभग 30 लाख भारतीय मूल के लोगों वाले इस समुदाय के हर व्यक्ति से प्रधानमंत्री की मुलाकात संभव नहीं होगी, लेकिन यह प्रयास किया जाएगा कि उनकी यात्रा से अधिक से अधिक लोगों को जुड़ने का अवसर मिले।
भारत और कनाडा अंतरराष्ट्रीय अपराध, आतंकवाद और प्रत्यर्पण के मामलों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। आतंकवाद से निपटने में यह कितना अहम है?
दिनेश के पटनायक: हम इन मुद्दों से पार पाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। जब मैं पिछले साल 18 सितंबर को भारत आया था, तो कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी उसी हफ्ते भारत के दौरे पर थीं ताकि अपने भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल के साथ बातचीत कर सकें। इसी तरह, एनएसए अजीत डोभाल ने फरवरी में कनाडा का दौरा किया था।
तब से दोनों देश सीमापार अपराध, आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, जबरन वसूली और संगठित अपराध जैसी चुनौतियों से मिलकर निपटने के लिए काम कर रहे हैं।
पिछले एक साल में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क लगातार बढ़ा है। दोनों देशों की कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। दोनों पक्षों में यह साझा समझ विकसित हुई है कि कनाडा में सामने आने वाली कुछ सुरक्षा चुनौतियां भारत के लिए भी खतरा पैदा कर सकती हैं और इसी तरह इनका असर कनाडा पर भी पड़ता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने हाल ही में कनाडाई प्रधानमंत्री के वरिष्ठ सलाहकार डेविड मॉरिसन के साथ बातचीत की। आप इस बैठक को कैसे देखते हैं?
दिनेश के पटनायक: यह एक बहुत महत्वपूर्ण बैठक थी क्योंकि दोनों देशों के सुरक्षा तंत्र के बीच समन्वय द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की बुनियाद है।
पटनायक ने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता भरोसा और साझा चिंताओं को लेकर बेहतर समझ पिछले एक साल की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी के कनाडा दौरे तक दोनों देशों की संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय और मजबूत हो जाएगा। मॉरिसन कनाडा के प्रमुख विदेश नीति सलाहकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण अधिकारियों में शामिल हैं। दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा नेतृत्व के बीच संवाद ने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए आधार तैयार किया है।
दोनों पक्ष अपने बीच मौजूद समस्याओं और चिंताओं को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा का मुद्दा पहले द्विपक्षीय संबंधों में मुश्किलों का एक प्रमुख कारण रहा था, लेकिन अब इस पर बातचीत और सहयोग के जरिए आगे बढ़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
भारत और कनाडा की एजेंसियों के बीच सहयोग में रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी), भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और अन्य संबंधित संस्थाएं शामिल हैं। इस सहयोग के दायरे में आव्रजन, नशीले पदार्थों की तस्करी, जबरन वसूली, संगठित अपराध, धनशोधन और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दे आते हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि दिसंबर में प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित यात्रा तक भारत-कनाडा संबंधों में कई क्षेत्रों में ठोस प्रगति देखने को मिलेगी।
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु सरकार सहकारी स्टोरों के जरिए 40-50 रुपये प्रति किलो की दर से चावल बेचने पर कर रही विचार

खुदरा कीमतों में वृद्धि के मद्देनजर उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने के लिए तमिलनाडु सरकार सहकारी दुकानों के माध्यम से चावल को 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचने पर विचार कर रही है।
इस प्रस्ताव में भारतीय खाद्य निगम और अन्य राज्यों से चावल खरीदकर सहकारी संस्थाओं के माध्यम से वितरित करने की बात कही गई है। अधिकारी कार्यक्रम को लागू करने से पहले उपलब्धता और खरीद लागत के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं।
अगस्त में जो चावल 50 से 60 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, अब उसकी कीमत 70 से 80 रुपये के बीच है, जिससे परिवारों के बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
दालों और खाना पकाने के तेल सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि हुई है, जिसके चलते सरकार को इस वृद्धि को रोकने के उपायों की समीक्षा करनी पड़ रही है।
खाद्य मंत्री वेंकटरमनन ने मंगलवार को चेन्नई स्थित सचिवालय में मूल्य निगरानी समिति की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें स्थिति और संभावित उपायों पर चर्चा की गई। मुख्य सचिव साईकुमार, खाद्य सचिव अमुधा, वित्त सचिव सिद्दीकी और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
चर्चा का मुख्य केंद्र आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने और उपभोक्ताओं को अधिक किफायती दरों पर आपूर्ति उपलब्ध कराने के उपायों पर था।
समीक्षा के दौरान सहकारी भंडारों के माध्यम से चावल की प्रस्तावित बिक्री सहित कई उपायों पर विचार किया गया। सहकारिता एवं खाद्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार भारतीय खाद्य निगम और अन्य राज्यों के आपूर्तिकर्ताओं से उत्तम गुणवत्ता वाले चावल खरीदने की संभावना पर विचार कर रही है।
अधिकारी ने बताया कि इसका उद्देश्य सहकारी दुकानों के माध्यम से 40 रुपये से 50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से चावल उपलब्ध कराना था।
अधिकारी उन राज्यों की पहचान कर रहे हैं जहां चावल बिक्री के लिए उपलब्ध है और उन दरों का आकलन कर रहे हैं जिन पर आपूर्ति खरीदी जा सकती है। ये विवरण प्रस्तावित हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त मात्रा में चावल सुरक्षित किया जा सकता है या नहीं, यह निर्धारित करने में सहायक होंगे।
अधिकारी ने कहा कि एक लाख टन चावल की उपलब्धता की पुष्टि हो जाने के बाद सरकार कम कीमत पर बिक्री शुरू करने के लिए कदम उठाएगी।
इसलिए, प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले उस मात्रा को सुरक्षित करना एक प्रमुख आवश्यकता है। योजना अभी भी विचाराधीन है, और खरीद संबंधी व्यवस्थाओं को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
बिक्री शुरू होने की कोई तारीख तय नहीं की गई है। यदि प्रस्तावित दरों पर इसे लागू किया जाता है, तो इस पहल से उपभोक्ताओं को अधिकारियों द्वारा बताई गई मौजूदा खुदरा कीमतों से कम दामों पर चावल उपलब्ध होगा। इसका क्रियान्वयन आपूर्ति की पुष्टि और सरकार द्वारा खरीद विकल्पों और लागतों के आकलन के पूरा होने पर निर्भर करेगा।
राजनीति
सीजेपी नेताओं की न्यायिक हिरासत पर राहुल गांधी बोले-‘युवाओं को जेल भेजना कायरता’

लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को जेल भेजना कायरता का काम है।
यह बयान तब आया जब सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया जबकि अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “शांतिपूर्ण विरोध में जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराना अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता का काम है। छात्र, युवा, पत्रकार, इंडिया ब्लॉक, अलग-अलग बैनर के एक ही कारण है कि नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “जंतर-मंतर भारत के लोगों का है। हम इसे वापस लेंगे।” तीन सीजेपी सदस्यों को जंतर-मंतर में अतिक्रमण के लिए निवारक गिरफ्तारी के तहत पकड़ा गया था, जिसे अब निर्धारित विरोध स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित कर दिया गया है। उन पर अतिक्रमण, बॉन्ड उल्लंघन और लोक सेवकों के कर्तव्य में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया है।
सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को बुधवार सुबह नई दिल्ली के मंदिर मार्ग पर एक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ सौरव दास और आशुतोष रांका को 10 अक्टूबर के विरोध से जुड़े मामले में 50,000 रुपए का बॉन्ड भरने और इस शर्त पर रिहा किया गया था कि वे एक साल तक शांति भंग के किसी भी मामले में शामिल नहीं होंगे।
इस बार सौरव दास और आशुतोष रांका पर अतिक्रमण और बॉन्ड शर्तों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है। उन्हें आदतन अपराधी के तौर पर देखा जा रहा है।
तीनों सीजेपी नेताओं को मंगलवार सुबह पुलिस बैरिकेड्स पार कर जंतर-मंतर में प्रवेश करने के लिए हिरासत में लिया गया था, जिसे निर्धारित विरोध स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित किया जा चुका है।
वे चुनाव आयोग के खिलाफ मतदाता सूची की एसआईआर में अनियमितताओं को लेकर विरोध करने जा रहे थे। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाते हुए पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद तीनों को हिरासत में ले लिया गया।
12 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर को ‘निर्धारित’ विरोध स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित कर दिया गया। दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह फैसला गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया था। दिल्ली में विरोध के लिए तीन नई जगहें (रामलीला ग्राउंड, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड) तय की गई हैं।
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