राष्ट्रीय
आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नीति आयोग के फिनटेक ओपन समिट की शुरुआत की
फिनटेक उद्योग के महत्व को प्रदर्शित करने के प्रयास में नीति आयोग ने फोनपे, एडब्ल्यूएस (अमेजन वेब सर्विसेज) और ईवाई के साथ मिलकर तीन सप्ताह 7-28 फरवरी तक चलने वाले वर्चुअल शिखर सम्मेलन ‘फिनटेक ओपन’ का आयोजन किया है।
शिखर सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय रेल, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार की उपस्थिति में किया।
वैष्णव ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, हम स्वास्थ्य देखभाल, रसद और अन्य क्षेत्रों के लिए कोविन और यूपीआई जैसे खुले मंच बनाने में विश्वास करते हैं। सार्वजनिक निवेश का उपयोग करके एक खुला मंच बनाया जाता है, जिसमें कई निजी उद्यमी, स्टार्ट-अप और डेवलपर्स नए समाधान बनाने के लिए शामिल हो सकते हैं।”
आईटी मंत्री ने कहा, “उदाहरण के लिए, आज, 270 बैंक यूपीआई से जुड़े हुए हैं और कई उद्यमियों और स्टार्ट-अप ने समाधान प्रदान किए हैं, जिससे देश की फिनटेक अपनाने की दर को बढ़ाने में मदद मिली है – जो कि वैश्विक स्तर पर 87 प्रतिशत पर सबसे अधिक है।”
अपनी तरह की पहली पहल, ‘फिनटेक ओपन’ नियामकों, फिनटेक पेशेवरों और उत्साही, उद्योग जगत के नेताओं, स्टार्ट-अप समुदाय और डेवलपर्स को सहयोग करने, विचारों का आदान-प्रदान करने और नवाचार करने के लिए एक साथ लाएगा।
कुमार ने कहा, “भारत में डिजिटलीकरण बढ़ रहा है और लोगों की वित्तीय सेवाओं तक आसान पहुंच हो रही है। इससे उपभोक्ताओं के वित्तीय व्यवहार नकद से ई-वॉलेट और यूपीआई में बदलाव आया है।”
उन्होंने विस्तार से बताया, “डिजिटल भुगतान का विस्तार एक अधिक न्यायसंगत, समृद्ध और वित्तीय रूप से समावेशी भारत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण धुरी है। फिनटेक के उदय ने वित्तीय समावेशन को गति दी है। मैं अगले कुछ हफ्तों में अनगिनत संभावनाओं को देखने के लिए उत्साहित हूं जो हमारे देश के उज्जवल दिमागों द्वारा प्रस्तुत की जाएंगी।”
शिखर सम्मेलन में विभिन्न स्टार्टअप द्वारा किए गए नवाचारों और चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए गहन बातचीत, डीप-डाइव, वेबिनार, राउंड टेबल चर्चा आदि होंगे।
इसके अतिरिक्त, फिनटेक से संबंधित कार्यों को भी प्रदर्शित किया जाएगा और वर्चुअल सम्मान समारोह में सबसे नवीन स्टार्टअप को मान्यता दी जाएगी।
फोनपे के संस्थापक और सीईओ समीर निगम ने कहा, “हमें इस पहल पर नीति आयोग के साथ साझेदारी करने की खुशी है, जिसका उद्देश्य भारत की फिनटेक क्रांति को तेज करना है। फिनटेक उद्योग देश भर में वित्तीय समावेशन को सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हम अगले कुछ हफ्तों के लिए तत्पर हैं, जहां हमें पूरे उद्योग के सहयोगियों के साथ सहयोग करने, पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सार्थक ढांचे को नया करने और बनाने का अवसर मिलता है।”
शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण भारत का अब तक का सबसे बड़ा फिनटेक हैकथॉन होगा, जो व्यक्तिगत डेवलपर्स और स्टार्टअप समुदाय को वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने की क्षमता के साथ सफलता के विचार प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करेगा।
इसके अतिरिक्त, बच्चों में रचनात्मकता, नवाचार और उद्यमशीलता की मानसिकता को बढ़ावा देने के लिए, अटल इनोवेशन मिशन के ‘अटल टिंकरिंग लैब्स नेटवर्क’ के माध्यम से स्कूली छात्रों के लिए एक और हैकथॉन भी आयोजित किया जाएगा।
शिखर सम्मेलन में इंफोसिस के सह-संस्थापक, गैर-कार्यकारी अध्यक्ष नंदन नीलेकणी और नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत जैसे विशिष्ट वक्ता होंगे।
कई प्रमुख व्यापारिक नेता जैसे क्रेड के संस्थापक कुणाल शाह, पॉलिसीबाजार के सीईओ यशिश दहिया, केयर हेल्थ इंश्योरेंस के संस्थापक एमडी और सीईओ, अनुज गुलाटी, एको जनरल इंश्योरेंस के सीईओ वरुण दुआ, जेरोधा के सीईओ नितिन कामथ, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक विजय चंडोक, ग्रो के सीईओ ललित केशरे, अपस्टॉक्स की सह-संस्थापक कविता सुब्रमण्यम और रेजरपे के सीईओ व संस्थापक हर्षिल माथुर भी हिस्सा लेंगे।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
-
दुर्घटना1 year agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
महाराष्ट्र2 years agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
महाराष्ट्र2 years agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
राजनीति2 years agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल2 years agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
