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Tuesday,15-September-2026
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इजरायल-हमास के बीच युद्धविराम की स्थिति नाजुक : संयुक्त राष्ट्रदूत

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Israeli-airstrike

 संयुक्त राष्ट्र के विशेष समन्वयक टोर वेनेसलैंड ने मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया को लेकर चेतावनी देते हुए कहा है कि पिछले महीने इजरायल और हमास के बीच मिस्र की मध्यस्थता वाले युद्धविराम की स्थिति बहुत नाजुक बनी हुई है। उन्होंने गुरुवार को एक ब्रीफिंग में सुरक्षा परिषद को बताया, इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र युद्धविराम को मजबूत करने, तत्काल मानवीय सहायता की पेशकश करने और गाजा में स्थिति को स्थिर करने के लिए मिस्र सहित सभी संबंधित पक्षों और भागीदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

उन्होंने कहा, “मैं सभी पक्षों से एकतरफा कोई फैसला लेने और उकसावे से दूर रहने, तनाव कम करने के लिए कदम उठाने और इन प्रयासों को सफल होने देने का आग्रह करता हूं। जमीनी स्तर पर स्थिति को स्थिर करने के लिए चल रही चर्चाओं को सुविधाजनक बनाने के लिए सभी को अपनी भूमिका निभानी चाहिए ताकि गाजा एक और विनाशकारी स्थिति का सामना करने से बचें।”

वेनेसलैंड ने आगे कहा, “संघर्ष विराम के बावजूद पिछले दो हफ्तों में पूरे कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में दैनिक आधार पर हिंसक घटनाएं जारी हैं।”

एक नई इजरायली बस्ती चौकी के निर्माण के खिलाफ विरोध के संदर्भ में वेस्ट बैंक में नब्लस के पास बीता गांव में कई बार झड़पें हो चुकी हैं।

11 जून इजरायली सुरक्षा बलों ने एक 16 वर्षीय फिलिस्तीनी को मार गिराया। 17 जून को एक अन्य 6 वर्षीय फिलिस्तीनी ने पिछली रात इजरायली सुरक्षा बलों द्वारा की गई फायरिंग से लगे घावों के चलते अपना दम तोड़ दिया।

उन्होंने कहा कि 3 मई के बाद से इस क्षेत्र और इसके आसपास के इलाकों में गोला-बारूद से पांच फिलिस्तीनी मारे गए हैं और लगभग 100 फिलिस्तीनी घायल हुए हैं।

15 जून को नेसेट के सदस्यों सहित कई हजार दक्षिणपंथी इजरायली कार्यकर्ताओं ने यरूशलेम के पुराने शहर में मार्च किया, जिसमें से कई लोगों ने अरबों और मुसलमानों के खिलाफ नस्लवादी नारे लगाए।

पूर्वी यरुशलम के साथ-साथ वेस्ट बैंक के अन्य हिस्सों में इस मार्च के दौरान हुई हिंसा में 12 बच्चों सहित 66 फिलिस्तीनी घायल हो गए।

उसी दिन राष्ट्रीय और इस्लामी बलों द्वारा पूरे गाजा पट्टी में रैलियों का आयोजन किया गया।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

अमेरिकी महंगाई बढ़ने से फेड की ब्याज दर बढ़ाने की आशंका तेज होने से सोने की कीमतों में आई गिरावट

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अमेरिका में उम्मीद से अधिक महंगाई के आंकड़े आने के बाद वैश्विक बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला है। निवेशकों को अब इस सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना अधिक नजर आ रही है, जिसके चलते सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में बिकवाली बढ़ी है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4,340 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा, जो दिनभर में लगभग 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। पिछले सप्ताह के दौरान सोने की कीमतों में कुल मिलाकर 1.8 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। वहीं चांदी लगभग 0.8 प्रतिशत गिरकर 64 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई। प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में भी नरमी देखी गई।

घरेलू बाजार में गणेश चतुर्थी के अवसर पर सोमवार को एमसीएक्स के सोना और चांदी वायदा बाजार का सुबह का सत्र बंद रहा। कारोबार केवल शाम के सत्र में शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे तक होगा।

एमसीएक्स पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना वायदा 1,52,655 रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास और सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 2,34,886 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर रही।

शुक्रवार को जारी अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य और ऊर्जा कीमतों को छोड़कर मापी जाने वाली कोर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई अगस्त में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत बढ़ी। यह बाजार की अपेक्षाओं से अधिक रही और इससे यह संकेत मिला कि महंगाई पर अभी भी पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका है।

इसी कारण बाजार में यह धारणा मजबूत हुई है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को और बढ़ा सकता है। कारोबारी अब सितंबर बैठक में करीब 88 प्रतिशत की संभावना देख रहे हैं कि फेड ब्याज दरों में वृद्धि करेगा। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने जैसी बिना ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं।

इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री आपूर्ति मार्गों पर जोखिम के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है, जबकि तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों ने ऊर्जा महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

हौथी बलों ने यमन में महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर कब्जा कर लिया है, जो उस महत्वपूर्ण तटीय रेखा से सटे हुए हैं जो दुनिया के समुद्री तेल व्यापार के एक बड़े हिस्से का आधार है।

रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में ड्रोन हमलों और एक व्यापारिक पोत पर हमले के बाद सऊदी अरब ने अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन घायल हो गए।

विश्लेषकों का कहना है कि तेल की ऊंची कीमतें वैश्विक महंगाई को बढ़ा सकती हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों पर सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। इसी वजह से निवेशकों ने सोने और चांदी में नई खरीदारी से फिलहाल दूरी बनाई है।

आने वाले दिनों में निवेशकों की निगाहें पूरी तरह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति बैठक और उसके ब्याज दर संबंधी निर्णय पर टिकी रहेंगी। यदि फेड अपेक्षा के अनुरूप दरें बढ़ाता है और आगे भी सख्त रुख के संकेत देता है, तो सोने और चांदी पर दबाव जारी रह सकता है।

हालांकि दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता अभी भी कीमती धातुओं को सुरक्षित निवेश के रूप में कुछ समर्थन दे सकती है। ऐसे में आने वाले सप्ताह में सोने और चांदी की दिशा मुख्य रूप से फेड के फैसले और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

ईरान की चेतावनी के बाद भी होर्मुज में तैनाती पर व‍िचार कर रहा दक्षिण कोरिया, अमेर‍िका के साथ करेगा रक्षा वार्ता

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दक्षिण कोरिया और अमेरिका इस सप्ताह अपने वरिष्ठ अधिकारियों के बीच नियमित रक्षा वार्ता करने जा रहे हैं। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब सोल, होर्मुज स्‍ट्रेट में सैन्य तैनाती के विकल्प पर विचार कर रहा है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कोरिया-अमेरिका इंटीग्रेटेड डिफेंस डायलॉग (केआईडीडी) की द्विवार्षिक बैठक बुधवार से शुक्रवार तक दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर बुसान में आयोजित की जाएगी।

इन वार्ताओं का नेतृत्व दक्षिण कोरिया के उप रक्षा मंत्री (नीति) किम होंग-चोल और अमेरिका के पूर्वी एशिया मामलों के उप सहायक रक्षा सचिव जॉर्ज लेमूर करेंगे। इनके साथ रक्षा और विदेश मामलों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल होंगे।

मंत्रालय ने कहा कि बैठक में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इनमें युद्धकालीन सैन्य संचालन का नियंत्रण (ओपीकॉन) वापस हासिल करना, दोनों देशों की संयुक्त रक्षा व्यवस्था और जहाज निर्माण क्षेत्र में सहयोग जैसे विषय शामिल हैं।

हालांकि दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि बैठक में होर्मुज स्‍ट्रेट में दक्षिण कोरियाई सेना की संभावित तैनाती पर भी चर्चा हो सकती है। अमेरिका काफी समय से दक्षिण कोरिया पर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के प्रयासों में शामिल होने का दबाव बना रहा है।

पिछले सप्ताह दक्षिण कोरिया ने होर्मुज स्‍ट्रेट के आसपास की सुरक्षा स्थिति का आकलन करने के लिए एक टीम संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भेजी थी।

इस कदम के बाद अटकलें लगने लगीं कि दक्षिण कोरिया वास्तव में वहां सैन्य बल भेजने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि इस मामले में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

दूसरी ओर, ईरान पहले ही सार्वजनिक रूप से चेतावनी दे चुका है कि अगर उस क्षेत्र में किसी प्रकार की सैन्य तैनाती की जाती है, तो इसके ‘गंभीर परिणाम’ हो सकते हैं।

इस सप्ताह की बैठक में एक और अहम मुद्दा युद्धकालीन सैन्य नियंत्रण (ओपीकॉन) का होगा। दक्षिण कोरिया चाहता है कि अमेरिका से यह अधिकार वापस लेकर वह अपनी सेना का पूर्ण नियंत्रण हासिल करे।

सोल की कोशिश है कि राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के 2030 में समाप्त होने वाले पांच वर्षीय कार्यकाल से पहले, या संभव हो तो अगले साल ही, यह प्रक्रिया पूरी हो जाए।

दक्षिण कोरिया चाहता है कि संयुक्त सैन्य बलों की ‘पूर्ण परिचालन क्षमता’ के सत्यापन के दूसरे चरण को पूरा किया जाए और इस साल शरद ऋतु में होने वाली रक्षा प्रमुखों की बैठक में ओपीकॉन हस्तांतरण का लक्ष्य वर्ष घोषित किया जाए।

केआईडीडी की शुरुआत 2011 में हुई थी। यह दोनों सहयोगी देशों के बीच वरिष्ठ स्तर की एक व्यापक रक्षा वार्ता है।

इस साल यह दूसरी केआईडीडी बैठक होगी। इससे पहले मई में इसका पिछला सत्र वॉशिंगटन में आयोजित किया गया था।

इस बार की बैठक पहली बार सोल या वॉशिंगटन के बाहर आयोजित की जा रही है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बुसान को चुनने का उद्देश्य जहाज निर्माण के क्षेत्र में दोनों देशों के बढ़ते सहयोग और उसकी प्रतिबद्धता को दिखाना है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

ओमान में ईरान और खाड़ी देशों के बीच होने वाली बैठक टली, नई तारीख पर बनी सहमति

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ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद अल बुसैदी ने रविवार को बताया क‍ि ओमान के शहर सलालाह में सोमवार को होने वाली ईरान और खाड़ी देशों की बैठक को फिलहाल टाल दिया गया है।

अल बुसैदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर ल‍िखा, “सभी पक्षों के बीच सहमति बनाए रखने के हित में कल सलालाह में होने वाली क्षेत्रीय बैठक को स्थगित कर दिया गया है।”

उन्होंने कहा क‍ि हम अपने क्षेत्र में स्थिरता और लंबे समय तक सहयोग को बढ़ावा देने वाले संवाद के लिए प्रतिबद्ध हैं।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए को दिए एक इंटरव्यू में ईरान के विदेश मंत्रालय में फारस की खाड़ी मामलों के महानिदेशक मोहम्मद अली बाक ने भी बैठक टलने की पुष्टि की।

उन्होंने बताया कि कुछ क्षेत्रीय देशों के अनुरोध पर और ईरान तथा ओमान के संयुक्त फैसले के आधार पर इस बैठक को किसी दूसरी तारीख के लिए स्थगित किया गया है। अधिकारी ने कहा कि बैठक के लिए सही समय तय करने और जरूरी तैयारियों तथा समन्वय को सुनिश्चित करने के लिए ईरान लगातार ओमान के साथ बातचीत कर रहा है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने शुक्रवार को बताया था कि खाड़ी तटवर्ती देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक सोमवार को ओमान में होने वाली थी। इस बैठक में क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की जानी थी, जिनमें होर्मुज स्‍ट्रेट में सुरक्षित समुद्री मार्ग तय करने को लेकर ईरान और ओमान के बीच चल रही बातचीत भी शामिल थी।

शनिवार को मीडिया से बात करते हुए बाघेई ने कहा था कि उम्मीद है इस बैठक में खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों के अलावा ईरान और इराक के विदेश मंत्री भी शामिल होंगे।

इस बीच, इराक ने रविवार को घोषणा की कि उसने पड़ोसी देश ईरान के साथ अपनी तीन प्रमुख सीमा चौकियों को चरणबद्ध तरीके से फिर से खोलना शुरू कर दिया है। यह फैसला सुरक्षा बढ़ाने और सीमा पार आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए प्रशासनिक और तकनीकी समीक्षा के बाद लिया गया।

इराक के सिक्योरिटी मीडिया सेल (एसएमसी) ने एक बयान में कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के निर्देशों के तहत लिया गया है। इसके तहत शलामचेह, मंदाली और अल-शीब सीमा चौकियों की संगठनात्मक और तकनीकी व्यवस्था को बेहतर बनाया गया है।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, अल-शीब और शलामचेह सीमा चौकियों से यात्रियों की आवाजाही रविवार सुबह 6 बजे से फिर शुरू हो गई है।

वहीं, शलामचेह पर व्यापारिक गतिविधियां सोमवार से शुरू होंगी, मंदाली पर मंगलवार से और अल-शीब पर गुरुवार से व्यापार दोबारा शुरू किया जाएगा।

एसएमसी ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्बातियाह और अल-मुंथिरिया सीमा चौकियों पर ईरान के साथ यात्रियों और व्यापार की आवाजाही पहले की तरह जारी है और ये चौकियां 24 घंटे काम कर रही हैं।

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