राष्ट्रीय
आयुर्वेद से दूर होगी आयरन की कमी
शरीर में अगर कमियां आने लगे तो उससे स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं। महिलाओं के लिए आयरन की कमी प्रमुख है। खून में ऑक्सीजन ले जाने वाले हीमोग्लोबिन बनाने के लिए आयरन आवश्यक है। जब हमारे मेटावॉलिक तंत्र में पर्याप्त आयरन की कमी होती है, तो हमारे शरीर को आवश्यक ऊर्जा नहीं मिलती है। यह आहार में आयरन की कमी के कारण होता है या जब शरीर स्वयं हमारे द्वारा खाए गए भोजन से आयरन को समाहित करने में असमर्थ होता है। आयुर्वेद, जीवन और दीघार्यु का विज्ञान होने के नाते अच्छे स्वास्थ्य के लिए, विशेष रूप से महिलाओं के लिए पर्याप्त आयरन लेवल के महत्व को पहचानता है।
महर्षि आयुर्वेद अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ सौरभ शर्मा ने कहा, ” महिलाएं जीवंत लोगों में से एक हैं, जो अपने जीवन में कई भूमिकाएं निभाती हैं, जो फोकस और ऊर्जा की मांग करती हैं। हालांकि, काम के अधिक बोझ और उचित सुविधाओं की कमी के कारण आहार का सेवन, कभी-कभी, उनका शरीर उन्हें हर क्षेत्र में समान प्रदर्शन करने से रोकता है और शायद यह आयरन की कमी के कारण होता है। दरअसल, लोहे की कमी से थकान, सिरदर्द, चक्कर आना, क्षतिग्रस्त बाल और त्वचा, दिल की धड़कन आदि हो सकते हैं। समस्याएं अक्सर उन्हें स्वस्थ कार्य-जीवन संतुलन बनाए रखने से वंचित कर सकती हैं और कार्य इकोसिस्टम को बाधित कर सकती हैं। साथ ही आयरन की कमी से एनीमिया होता है।”
उन्होंने आगे कहा, “यह देखा गया है कि काम की अधिकता के कारण, महिलाएं थकान, कम इम्यूनिटी, बार-बार सिरदर्द, पीली त्वचा, खराब नाखून, पीले होंठ, बालों का झड़ना, बेचैन पैर सिंड्रोम, अवसाद और कमी से पीड़ित होती हैं । ये समस्याएं आयरन की कमी के कारण हो सकती हैं क्योंकि 3 में से एक व्यक्ति में आयरन की कमी होने का खतरा होता है और आयरन की कमी की आवश्यकता को नियमित आहार से पूरा नहीं किया जा सकता है क्योंकि हमारा शरीर केवल 3 प्रतिशत आयरन ही पौधे स्रोत और 15 प्रतिशत पशु स्रोत आहार से निकाल पाता है। इसलिए, आयरन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए कि हमारे शरीर, विशेष रूप से महिलाओं के शरीर को आयुर्वेदिक आयरन पूरक की आवश्यकता होती है, जो आयरन की कमी और एनीमिया को ठीक करती है।”
आयरन की कमी के लक्षणों को विकसित करने में कुछ समय लगता है क्योंकि शरीर नई रक्त कोशिकाओं को बनाने के लिए संग्रहीत और रिसाइकल आयरन का उपयोग करता है । जब शरीर पर्याप्त मात्रा में आयरन प्रदान नहीं कर पाता है, तो लाल रक्त कोशिकाएं समाप्त होने लगती हैं, जिसे आयरन की कमी कहा जाता है।
महर्षि आयुर्वेद के निदेशक राम श्रीवास्तव ने कहा, “आयरन की कमी एक सामान्य रूप से होने वाली समस्या है, जो विशेष रूप से महिलाओं में पाई जाती है। यह एनीमिया के प्रमुख कारणों में से एक है। यह एक महत्वपूर्ण खनिज है जो शरीर को लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करता है। (आरबीसी) जिसमें मेटालोप्रोटीन होता है, जो रक्त में कोशिकाओं के लिए ऑक्सीजन अणुओं और पोषण को वहन करता है। आरबीसी की कम संख्या का मतलब कोशिकाओं की कम पोषण आपूर्ति और ऑक्सीजनकरण है, जो ऊतकों को कम करता है और शरीर के अंगों को कमजोर करता है। हालांकि, हर्बल आयरन की खुराक संख्या में वृद्धि करती है रक्त में आरबीसी की मात्रा और शरीर के सभी अंगों को फिर से जीवंत करता है और थकान, सुस्ती, सांस फूलना और तनाव जैसी समस्याओं को प्रभावी ढंग से ठीक करता है। इनके अलावा, यह कोविड संक्रमित रोगियों के लिए उपयोगी हो सकता है, जिनका एचबी स्तर कम हो रहा है और दर्द हो रहा है।”
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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