खेल
आईपीएल-13 : बेंगलोर, हैदराबाद की नजरें प्लेऑफ पर
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 13वें सीजन के प्लेऑफ की रेस रोचक हो गई है। मुंबई इंडिंयस ने तो क्वालीफाई कर लिया है, लेकिन बाकी तीन स्थान के लिए जंग जारी है और इस रेस में जो भी टीमें शामिल हैं, उनमें विराट कोहली की कप्तानी वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर और 2016 की विजेता सनराइजर्स हैदराबाद भी शामिल हैं। ये दोनों टीमें आज शारजाह क्रिकेट स्टेडियम में आमने-सामने होंगी और अपनी पूरी ताकत लगा इस मैच को जीतना चाहेंगी। बेंगलोर 12 मैचों में सात जीत और पांच हार से सात 14 अंक लेकर दूसरे स्थान पर मौजूद है। इस मैच में जीत उसे 16 अंकों तक पहुंचा देगी और वह प्लेऑफ के लिए अपनी जगह लगभग पक्की कर लेगी।
वहीं, हैदराबाद 12 मैचों में पांच जीत और सात हार के साथ 10 अंक लेकर छठे स्थान पर है। उसे हर मैच में जीत ही चाहिए, नहीं तो प्लेऑफ की मंजिल उससे दूर ही रहेगी।
दोनों टीमों की तुलना की जाए तो बेंगलोर का पलड़ा भारी लग रहा है। पिछले मैच में मुंबई के खिलाफ बेंगलोर ने बदलाव किया था। एरॉन फिंच के स्थान पर जोशुआ फिलिपे को खेलाया था और वह देवदत्त पडिकल के साथ पारी की शुरुआत करने आए थे।
दोनों ने टीम को अच्छी शुरूआत दी थी। पडिकल ने तो अर्धशतक भी जमाया था। मुंबई के खिलाफ हालांकि कोहली और अब्राहम डिविलियर्स फ्लॉप रहे थे, लेकिन यह दोनों जिस स्तर के बल्लेबाज हैं उसे देखते हुए हैदराबाद के लिए परेशानी कम नहीं होगी। क्रिस मौरिस भी निचले क्रम में तेजी से रन बनाते आ रहे हैं।
लेकिन हैदराबाद की गेंदबाजी के सामने बेंगलोर के लिए भी काम आसान नहीं होगा। राशिद खान से निपटना एक अलग चुनौती है। टी.नटराजन और संदीप शर्मा की गेंदबाजी भी बेहतरीन रही है। डेथ ओवरों में नटराजन ने जिस तरह का प्रदर्शन किया है उससे बेंगलोर को खतरा हो सकता है। नटराजन किसी को भी आसानी से रन नहीं बनाने देते हैं।
वहीं अगर हैदराबाद की बात की जाए तो उसके बल्लेबाजों ने पिछले मैचों में दमदार प्रदर्शन किया था। जॉनी बेयरस्टो के बाहर जाने के कारण टीम में आए रिद्धिमान साहा ने तूफानी पारी खेली थी और डेविड वार्नर ने भी बखूबी उनका साथ दिया था।
बेयरस्टो इस मैच में खेलेंग या साहा की जगह बरकरार रहेगी, इस बात का पता मैच वाले दिन ही चलेगा। मनीष पांडे भी टीम के लिए रन कर रहे हैं। प्रियम गर्ग का बल्ला शांत है।
ऐसा भी संभव है कि बेयरस्टो के आने के बाद भी साहा टीम में बने रहें और प्रियम या किसी और खिलाड़ी को बाहर बैठा दिया जाए।
बेंगलोर की गेंदबाजी में भी पिछले मैच में बदलाव हुए थे। डेल स्टेन को मौका मिला था लेकिन वो असरदार नहीं रहे थे। क्रिस मौरिस और मोहम्मद सिराज तो टीम में थे। हैदराबाद के खिलाफ भी इन दोनों का देखा जाना पक्का है। स्टेन की जगह इसुरु उदाना की वापसी हो सकती है।
टीमें ( सम्भावित) :
सनराइजर्स हैदराबाद : डेविड वार्नर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, बैसिल थम्पी, भुवनेश्वर कुमार, बिली स्टानलेक, जॉनी बेयरस्टो, केन विलियम्सन, मनीष पांडे, मोहम्मद नबी, राशिद खान, संदीप शर्मा, शहबाज नदीम, श्रीवत्स गोस्वामी, सिद्धार्थ कौल, खलील अहमद, टी. नटराजन, विजय शंकर, रिद्धिमान साहा, विराट सिंह, प्रीयम गर्ग, जेसन होल्डर, संदीप बवांका, फाबियान ऐलेन, अब्दुल समद, संजय यादव।
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर : विराट कोहली (कप्तान), एरॉन फिंच, देवदत्त पडिकल, एबी डिविलियर्स, जोश फिलिपे, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, नवदीप सैनी, उमेश यादव, डेल स्टेन, युजवेंद्र चहल, मोइन अली, पवन देशपांडे, गुरकीरत सिंह मान, मोहम्मद सिराज, क्रिस मौरिस, पवन नेगी, पार्थिव पटेल, शहबाज अहमद, इसुरु उदाना, एडम जाम्पा, केन रिचर्डसन।
अंतरराष्ट्रीय
भारत ने अहमदिया लोगों पर अत्याचार के मामले में पाकिस्तान के इस्लामोफोबिया को उजागर किया

संयुक्त राष्ट्र, 17 मार्च : भारत ने अहमदिया मुसलमानों पर जानलेवा जुल्म में पाकिस्तान के अपने इस्लामोफोबिया को सामने ला दिया है। वहीं, इस्लामाबाद के प्रतिनिधि ने लगभग मान लिया है कि उनका देश अहमदिया मुसलमानों के साथ जुल्म कर रहा है।
बिना पाकिस्तान का नाम लिए और उसे ‘हमारा पश्चिमी पड़ोसी’ बताते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने सोमवार (स्थानीय समय) को कहा, ”यह सोचना जरूरी है कि अहमदिया समुदाय पर हो रहे अत्याचार, बेबस अफगानों की बड़े पैमाने पर वापसी (या जबरन निर्वासन) और रमजान के पवित्र महीने में की गई हवाई बमबारी को आखिर क्या कहा जाए?
भारत ने इस्लामोफोबिया से लड़ने के अंतरराष्ट्रीय दिवस पर जनरल असेंबली में पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन अपने बयान में एक इशारा किया ताकि इस्लामाबाद को यह मानने की जरूरत न पड़े कि उस पर आरोप लगाया गया है, जबकि बयान से यह साफ हो गया।
भले ही उनके देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया था, फिर भी पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने अपनी प्रतिक्रिया में इन आरोपों का खंडन भी नहीं किया। उन्होंने यह कहा कि भारत इस्लामोफोबिया पर जनरल असेंबली की बैठक का राजनीतिकरण कर रहा है।
पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने अहमदिया लोगों पर हो रहे जुल्म को लगभग मान लिया।
अहमदिया समुदाय को लेकर पाकिस्तान के संविधान में 1974 के एक बदलाव में इस्लामी कट्टरपंथ की नीति अपनाई गई। इसके तहत अहमदिया लोगों को ‘गैर-मुस्लिम’ घोषित किया गया और उनके खिलाफ जुल्म को सरकारी नीति बना दिया गया। उनकी धार्मिक मस्जिदों पर अक्सर होने वाले हमलों के अलावा, ईशनिंदा विरोधी कानूनों की वजह से उन्हें मौत की सजा हो सकती है।
पाकिस्तान का नाम लिए बिना, हरीश ने साफ तौर पर कहा कि भारत के बारे में उसका प्रोपेगेंडा सिर्फ इस्लामाबाद की ‘आतंकवादी सोच को दिखाता है, जिसे इस देश ने अपनी शुरुआत से ही बनाए रखा है।
उन्होंने कहा, ”असली मुद्दा यही है। किसी भी दूसरे देश की तुलना में भारत सबसे ज्यादा धर्मों (हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म) की जन्मभूमि होने के नाते सर्व धर्म समभाव की सोच को मानता है, जो सभी धर्मों के लिए बराबर सम्मान की बात कहता है और भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को प्रेरित करता है।
उन्होंने कहा, “भारत धर्म के नाम पर हिंसा और नफरत की कड़ी निंदा करता है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब पहले से ही एक ऐसी घोषणा मौजूद है, जो सभी धर्मों के खिलाफ घृणा की स्पष्ट रूप से निंदा करती है, तो संयुक्त राष्ट्र का केवल इस्लामोफोबिया पर विशेष जोर देना उचित है या नहीं।
पी. हरीश 1981 में अपनाए गए सभी तरह की असहिष्णुता और धर्म या विश्वास के आधार पर भेदभाव को खत्म करने की घोषणा का जिक्र कर रहे थे।
उन्होंने कहा, “1981 की घोषणा हमारे विचार में एक बहुत ही संतुलित और टिकाऊ साधन है, जो बिना किसी को विशेषाधिकार दिए सभी धार्मिक अनुयायियों के अधिकारों को सुरक्षित रखता है।
उन्होंने कहा, ”मैं इस बात पर जोर देता हूं कि यूएन के लिए यह जरूरी है कि वह धार्मिक पहचान को हथियार बनाने और छोटे राजनीतिक मकसदों को पूरा करने के लिए इसका इस्तेमाल करने के बढ़ते व्यापार और खतरों पर ध्यान दे। भारत का पश्चिमी पड़ोसी अपने पड़ोस में इस्लामोफोबिया की मनगढ़ंत कहानियां गढ़ने का एक बेहतरीन उदाहरण है।
राजनीति
लोकसभा में खेद व्यक्त करने के बाद कांग्रेस के 8 सांसदों का निलंबन रद्द

नई दिल्ली, 17 मार्च : केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव के बाद मंगलवार को लोकसभा के आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन रद्द कर दिया गया है। यह प्रस्ताव 8 सांसदों के आचरण के संबंध में कांग्रेस नेतृत्व की ओर से ‘अफसोस’ व्यक्त करने के बाद लाया गया।
अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, मणिक्कम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, सी. किरण कुमार रेड्डी, प्रशांत यदाओराव पाडोले, एस. वेंकटेश और डीन कुरियाकोस के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। सदन की कार्यवाही में बाधा डालने और तीखी बहस के दौरान अध्यक्ष की ओर कागज फेंकने के आरोप में इन सभी आठ सांसदों को 3 फरवरी को बजट सत्र के शेष समय के लिए निलंबित कर दिया गया था।
कांग्रेस के मुख्य सचेतक के. सुरेश ने कार्यवाही के दौरान सदस्यों की ओर से की गई ‘अनजाने में हुई लापरवाही’ पर खेद व्यक्त किया। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू ने सदन में सांसदों का निलंबन रद्द करने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सुप्रिया सुले ने समर्थन दिया। सदन को संबोधित करते हुए रिजिजू ने संसदीय कार्यवाही के सुचारू और प्रभावी संचालन को सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट रूप से परिभाषित सीमा में रहने पर जोर दिया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनुशासन बनाए रखना और संसदीय प्रक्रियाओं का सम्मान करना विधायिका के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक है। उन्होंने संसदीय नियमों के पालन के संबंध में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हुई पिछली चर्चाओं का भी जिक्र किया। सदन में मर्यादा बनाए रखने को लेकर उन्होंने कहा कि अगर हम लक्ष्मण रेखा खींच लें, तो सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलेगी।
रिजिजू ने कहा कि कल हमने कहा था कि यदि विपक्ष सदन और अध्यक्ष के नियमों का पालन करने में हमारी मदद करता है, तो हम (सत्ता पक्ष) भी ऐसा ही करेंगे। संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष से भविष्य में सुचारू कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए संसदीय मानदंडों के पालन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट करने को भी कहा। इसके बाद सदन ने ध्वनि मत से सभी आठ सांसदों का निलंबन रद्द कर दिया, जिससे उन्हें चल रहे बजट सत्र में भाग लेने की अनुमति मिल गई। निलंबन रद्द होने के बाद सांसदों ने संसद परिसर में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान: 56 ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान, इनमें से 19 तेहरान में

तेहरान, 17 मार्च : यूएस-इजरायल की एयरस्ट्राइक में ईरान की 50 से ज्यादा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुमूल्य स्थलों को नुकसान पहुंचा है। यह जानकारी ईरान के हेरिटेज मंत्रालय ने दी है।
सरकारी न्यूज एजेंसी आईआरएनए ने मंत्रालय के हवाले से बताया कि कुल 56 स्थलों को नुकसान हुआ है। इनमें राजधानी तेहरान की 19 अहम जगहें शामिल हैं। इनमें गोलस्तान पैलेस, तेहरान बाजार और पुरानी सीनेट बिल्डिंग भी शामिल है।
इससे पहले भी नुकसान को लेकर रिपोर्ट आई थी, लेकिन ये नहीं पता था कि तेहरान में कुल कितनी इमारतें इसकी जद में आई हैं।
रिपोर्ट में प्रमुख औद्योगिक शहर इस्फहान की कुछ ऐतिहासिक जगहों को भी नुकसान पहुंचा है। इनमें नक्श-ए-जहान स्क्वायर स्थित मशहूर इमाम शाह मस्जिद के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। नक्श-ए-जहान स्क्वायर 16वीं-17वीं सदी की सफवीद वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर सूची में भी शामिल कर रखा है।
इस्फहान शहर को ‘आधा जहां’ कहा जाता है क्योंकि यहां दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतें मौजूद हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 17वीं सदी के इस ऐतिहासिक महल के लकड़ी के खंभों, दरवाजों और अन्य हिस्सों को भारी नुकसान पहुंचा है। महल के अंदर और चारों ओर बिखरा मलबा, टूटी खिड़कियां और गिरे हुए मलबे की तस्वीर एजेंसी ने जारी की है।
बता दें, ईरान के तीसरे बड़े शहर के तौर पर इस्फहान को पहचाना जाता है। इसके आसपास ईरान के कई संवेदनशील प्रतिष्ठान मौजूद हैं, जिनमें परमाणु अनुसंधान केंद्र, मिसाइल उत्पादन सुविधाएं, एक प्रमुख तेल रिफाइनरी और वायुसेना के अड्डे शामिल हैं।
इस्फहान ईरान के स्टील उद्योग का भी प्रमुख केंद्र है। यहां स्थित मुबारक स्टील कंपनी को मध्य-पूर्व के सबसे बड़े स्टील उत्पादकों में गिना जाता है। इसके अलावा शहर में एक बड़ा एयरफोर्स बेस भी मौजूद है, जहां ईरान के पुराने अमेरिकी निर्मित एफ-14 टॉमकैट लड़ाकू विमानों का बेड़ा तैनात बताया जाता है।
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