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Tuesday,23-June-2026
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आईएनएस सीवोटर-इंडियाट्रैकर पोल: खराब फॉर्म से जूझ रहे कोहली को फिर से मौका देने पर राय अलग-अलग

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 भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विराट कोहली लंबे समय से खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं। वह सबसे बढ़िया ऑल-फॉर्मेट बल्लेबाजों में से एक रहे हैं, लेकिन लगभग पिछले दो सालों में खेल के दौरान अपने बल्ले से कोई खास कमाल नहीं किया है। 33 वर्षीय कोहली ने नवंबर 2019 के बाद से शतक नहीं जड़ा है। उन्होंने कोलकाता में बांग्लादेश के खिलाफ 136 रन बनाए थे। हाल ही में कोहली इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें टेस्ट मैच में बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। कोहली ने दो पारियों में 11 और 20 रन बनाए, जिससे इंग्लैंड 7 विकेट से टेस्ट मैच में जीत हासिल करने में कामयाब रहा।

यह नहीं, कोहली 7 जुलाई 2022 को जारी पुरुष क्रिकेटरों की आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में टॉप 10 बल्लेबाजों की लिस्ट में जगह बनाने में नाकाम रहे।

खराब फॉर्म की वजह से कपिल देव जैसे दिग्गज क्रिकेटर भी विराट कोहली को टीम से बाहर निकालने की वकालत कर चुके हैं।

आईएनएस की ओर से सीवोटर-इंडियाट्रैकर ने कोहली के खराब फॉर्म और उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम में बनाए रखने के बारे में लोगों की राय जानने के लिए एक राष्ट्रव्यापी सर्वे किया। सर्वे के दौरान इस पर लोगों की राय बंटी हुई दिखी।

सर्वे के मुताबिक, जहां 52 फीसदी लोगों का मानना है कि तेजतर्रार कोहली को भारतीय टीम में बरकरार रखा जाना चाहिए, वहीं 48 फीसदी लोगों ने कोहली के टीम में बने रहने पर असहमति दर्ज करायी।

अलग-अलग उम्र के समूहों ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार रखे, जो एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थे। सर्वे के दौरान, 18-24 के बीच उम्र वाले 57 प्रतिशत लोगों का मानना है कि कोहली जल्द ही अपने पहले वाले फॉर्म में वापस आ जाएंगे। उन्हें टीम से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। वहीं 55 वर्ष से अधिक उम्र के 67 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कोहली को टीम में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

इसी मुद्दे पर शहरी और ग्रामीण मतदाताओं के विचार भी बंटे हुए दिखे। सर्वे के दौरान, 51 प्रतिशत शहरी मतदाताओं और 54 प्रतिशत ग्रामीण मतदाताओं ने कहा कि कोहली जल्द ही मैच में ताबड़तोड़ रनों की बरसात करेंगे। उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम से नहीं हटाया जाना चाहिए।

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फीफा वर्ल्ड कप: 92 साल में पहली फतह, मिस्र के राष्ट्रपति बोले- यह जीत दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति को दर्शाती है

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‘फराओ’ (मिस्र की टीम) ने सोमवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ 3-1 से ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में जीत दर्ज की। इस टीम को जीत का सूखा खत्म करने के लिए 92 साल और 25 दिन का समय लगा। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने इस उपलब्धि पर राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को बधाई दी है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर राष्ट्रपति अल-सीसी ने ग्लोबल स्टेज पर टीम के जबरदस्त जज्बे की तारीफ करते हुए कहा, “मैं मिस्र की राष्ट्रीय टीम और हमारे महान देश के फैंस को वर्ल्ड कप प्रतियोगिताओं में मिस्र की भागीदारी के इतिहास में पहली जीत हासिल करने पर बधाई देता हूं। यह जीत उस दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति को दर्शाती है, जो हमारे देश के खिलाड़ियों में है। यह शानदार जीत आत्मविश्वास और महत्वाकांक्षा के साथ आगे बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिस्र का नाम ऊंचा करने की दिशा में एक अच्छी शुरुआत है।”

फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप-जी मैच में मुस्तफा जिको, मोहम्मद सलाह और ट्रेजेगुएट के गोल की बदौलत मिस्र ने पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए न्यूजीलैंड को 3-1 से शिकस्त दी।

वैंकूवर के बीसी प्लेस में न्यूजीलैंड ने आक्रामक शुरुआत की। मुकाबले के 15वें मिनट में फिन सुरमैन ने कॉर्नर किक पर जोरदार हेडर से ‘ऑल व्हाइट्स’ (न्यूजीलैंड टीम) को बढ़त दिलाई। हाफ टाइम से पहले सालाह और इमाम अशूर गोल करने के करीब पहुंचे, लेकिन बराबरी का गोल नहीं हो सका। दूसरे हाफ के पहले मिनट में मैक्स क्रोकोम्बे ने सलाह को फिर से गोल करने से रोक दिया।

इसके कुछ ही देर बाद, मिस्र के गोलकीपर मुस्तफा शोबेर ने कैलम मैककोवाट के हेडर को शानदार ढंग से बचाकर न्यूजीलैंड को अपनी बढ़त दोगुनी करने से रोका। फिर 58वें मिनट में जिको ने फ्री हेडर से होसाम हसन की टीम की मैच में वापसी कराई।

9 मिनट बाद सालाह ने निर्णायक गोल किया। टीम के बेहतरीन तालमेल के बाद उन्होंने शानदार लो-फिनिश के साथ गेंद को नेट में पहुंचाया। मैच खत्म होने में आठ मिनट बाकी रहते हुए ट्रेजेगुएट ने मिस्र के लिए तीसरा गोल करके जीत पर मुहर लगा दी।

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फीफा वर्ल्ड कप: पैराग्वे ने 1-0 से दर्ज की जीत, हार के साथ टूर्नामेंट से बाहर तुर्किये

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फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप डी मुकाबले में पैराग्वे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तुर्किये को 1-0 से हराया। सैन फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम में इस जीत के साथ पैराग्वे ने टूर्नामेंट के अगले राउंड में पहुंचने की अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा है। वहीं, हार के साथ ही तुर्किये का टूर्नामेंट में सफर समाप्त हो गया है।

मैच का एकमात्र गोल मटियास गैलार्जा ने खेल शुरू होने के सिर्फ 64 सेकंड बाद किया। यह मौजूदा टूर्नामेंट का सबसे तेज गोल भी है। गैलार्जा ने करीब 25 मीटर की दूरी से जोरदार शॉट लगाया और तुर्किये के गोलकीपर को छकाते हुए शानदार गोल दागा। इससे पहले फीफा वर्ल्ड कप 2026 में सबसे तेज गोल का रिकॉर्ड मोरक्को के इस्माइल सैबारी के नाम था, जिन्होंने स्कॉटलैंड के खिलाफ 70 सेकंड में गोल किया था।

पैराग्वे ने मैच की शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और मैच पर अपनी पकड़ बनाई रखी। हालांकि, हाफ टाइम से ठीक पहले टीम को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब मिडफील्डर मिगुएल अल्मिरोन को रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर भेज दिया गया। पैराग्वे के मिडफील्डर वर्ल्ड कप के इतिहास में पहले ऐसे खिलाड़ी बने, जिन्हें फीफा के नए अनुशासनात्मक नियम के तहत सजा मिली। अल्मिरोन ने मर्ट मुल्डुर के साथ मुकाबले के दौरान अपना मुंह ढक लिया था और इसी कारण उन्हें रेड कार्ड थमाया गया। वीएआर रिव्यू के बाद इस फैसले को पूरी तरह से सही ठहराया गया और पैराग्वे को पूरा दूसरा हाफ 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा।

टूर्नामेंट से पहले लाए गए इस नए नियम के तहत, अगर कोई खिलाड़ी मुकाबले के दौरान अपना मुंह ढकता है तो उसे रेड कार्ड दिखाना जरूरी है। यह नियम उस घटना के बाद लाया गया, जब बेनफिका के खिलाड़ी जियानलुका प्रेस्टियानी पर आरोप लगा था कि उन्होंने रियल मैड्रिड के खिलाड़ी विनिसियस जूनियर से मुंह छिपाकर भेदभावपूर्ण टिप्पणी की थी।

दूसरे हाफ में तुर्किये ने बराबरी का गोल करने के लिए लगातार दबाव बनाया। टीम ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखा और कई हमले किए, लेकिन 10 खिलाड़ियों संग खेल रही पैराग्वे की टीम ने शानदार रक्षात्मक खेल दिखाया। गोलकीपर और डिफेंस लाइन ने मिलकर तुर्किये को गोल करने का कोई मौका नहीं दिया।

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ईरान वर्ल्ड कप 2026 के दौरान यात्राओं पर लगी रोक की फीफा से शिकायत करेगा

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ईरान के फुटबॉल फेडरेशन ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 के दौरान सह-मेजबान अमेरिका द्वारा ईरान टीम पर लगाई गई यात्रा पाबंदियों पर निराशा जताई है। इस मामले पर गवर्निंग बॉडी ने फीफा में आधिकारिक तौर पर शिकायत करने का फैसला किया है।

ईरान के खिलाड़ियों को मैच से एक दिन पहले ही अमेरिका आने की इजाजत है। उन्हें अपने वीजा की शर्तों के तहत मैच वाले दिन ही देश छोड़ना होगा। ये शर्त ईरान के बेल्जियम खिलाफ होने वाले अगले मैच में घातक हो सकता है।

ईरान के फुटबॉल फेडरेशन ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा, “हमारा मानना है कि इस तरह की पाबंदियां सभी हिस्सा लेने वाली टीमों को बराबर माहौल देने के नियम के खिलाफ हैं और टीमों की तैयारी की प्रक्रिया पर बुरा असर डाल सकती हैं। फेडरेशन आधिकारिक तौर पर अपनी नाराजगी जाहिर करेगा और सही तरीकों से फीफा में आधिकारिक तौर पर फीफा से शिकायत करेगा।”

फेडरेशन ने कहा, “इन दिक्कतों के बावजूद, ईरान की नेशनल टीम अपनी तैयारी जारी रखेगी और बेल्जियम के खिलाफ अपने आने वाले मैच पर पूरा फोकस रखेगी।”

इससे पहले, ईरान के कोच आमिर घालेनोई ने कहा था कि लॉस एंजिल्स में न्यूजीलैंड के साथ अपने शुरुआती गेम में 2-2 से ड्रॉ के बाद वे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा दबाव में हैं।

मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में घालेनोई ने कहा था, हमारी टीम को अचानक बताया गया कि उन्हें लॉस एंजिल्स में मैच के तुरंत बाद मेक्सिको लौटना होगा। हमें प्लेन में बैठकर तिजुआना में अपने कैंप में लौटने के लिए कहा गया है, और हम इससे सच में परेशान हैं। वे हमें जल्दी वापस जाने के लिए मजबूर कर रहे हैं। वे हालात को और मुश्किल बना रहे हैं, और मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं, लेकिन हम इसे अपना बेस्ट करने से रोकने नहीं देंगे।”

कोच ने कहा था, “हमें गेम से दो रात पहले पहुंचना था, लेकिन हमें इसकी इजाजत नहीं थी। मुझे लगता है कि हमारी टीम पूरे वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा दबाव में है। हमारा फेडरेशन यहां नहीं है, हमारा मीडिया यहां नहीं है, हमारा मैनेजमेंट यहां नहीं है।”

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