व्यापार
पूरे सप्ताह लगे महंगाई के झटके, दिल्ली में 4 रुपये लीटर महंगा हुआ डीजल
लॉकडाउन खुलने के साथ जैसे ही सड़कों पर वाहनों की तादाद बढ़ने लगी, तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से देश के उपभोक्ताओं को एक सप्ताह से रोज महंगाई के झटके लग रहे हैं। देश की राजधानी दिल्ली में एक सप्ताह के दौरान डीजल 4.02 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है जबकि पेट्रोल के दाम में 3.90 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।
इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल की कीमत बढ़कर क्रमश: 75.16 रुपये, 77.05 रुपये, 82.10 रुपये और 78.99 रुपये प्रति लीटर हो गई। डीजल का दाम भी चारों महानगरों में बढ़कर क्रमश: 73.39 रुपये, 69.23 रुपये, 72.03 रुपये और 71.64 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
दिल्ली में पेट्रोल का दाम शनिवार को 59 पैसे, कोलकाता और मुंबई में 57 पैसे जबकि चेन्नई में 52 पैसे प्रति लीटर बढ़ गया जबकि डीजल के दाम में चारों महानगरों में क्रमश: 58 पैसे, 53 पैसे, 55 पैसे और 50 पैसे की वृद्धि हो गई।
पेट्रोल और डीजल के दाम में आने वाले दिनों में और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसीडेंट (एनर्जी एंव करेंसी रिसर्च) अनुज गुप्ता पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी की तीन वजह गिनाते हैं। गुप्ता बताते हैं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बीते करीब डेढ़ महीने से तेल के दाम में बढ़ोतरी मुख्य वजह है, वहीं घरेलू मुद्रा रुपये में आई कमजोरी भी वजह है। इसके अलावा वह बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद कर में भारी बढ़ोतरी की थी, लेकिन उस समय तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं की थी।
बीते महीने मई के आरंभ में सरकार ने पेट्रोल पर आठ रुपये प्रति लीटर इन्फ्रास्ट्रक्च र सेस और दो रुपये प्रति लीटर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी कर पेट्रोल पर कुल 10 रुपये प्रति लीटर शुल्क बढ़ा दिया। इसी प्रकार, डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर शुल्क बढ़ाया गया जिसमें आठ रुपये प्रति लीटर इन्फ्रास्ट्रक्च र सेस और पांच रुपये प्रति लीटर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी शामिल है।
भारत समेत दुनिया के अन्य देशों में लॉकडाउन खुलने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियां पटरी पर लौटने लगी है जिससे तेल की खपत मांग बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है जिससे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में बीते दिनों भारी तेजी आई है। अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज पर बेंचमार्क कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड का अगस्त वायदा अनुबंध 22 अप्रैल को 15.98 डॉलर प्रति बैरल तक गिरा था जबकि बीते शुक्रवार को 38.95 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। इस प्रकार, ब्रेंट क्रूड के दाम में 22 अप्रैल के बाद 143.73 फीसदी की तेजी आई है।
राष्ट्रीय समाचार
भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद, सेंसेक्स 249 अंक फिसला

भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 249.70 अंक या 0.33 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,478.67 और निफ्टी 80.50 अंक या 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,865.75 पर था।
एकतरफ लार्जकैप में बिकवाली देखी गई। वहीं, दूसरी तरफ मिडकैप और स्मॉलकैप में खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 230.40 अंक या 0.37 प्रतिशत की तेजी के साथ 61,797.70 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 190 अंक या 1.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,863.10 पर था।
सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.37 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 1.31 प्रतिशत के साथ टॉप गेनर थे। इसके अलावा, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स,निफ्टी फार्मा, निफ्टी मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी ऑटो, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी हेल्थकेयर हरे निशान में बंद हुआ। वहीं, निफ्टी आईटी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी सर्विसेज लूजर्स थे।
सेंसेक्स पैक में मारुति सुजुकी, टाइटन, बजाज फाइनेंस, इटरनल, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल, इंडिगो, ट्रेंट, एनटीपीसी और पावर ग्रिड गेनर्स थे। इन्फोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, आईटीसी, एचयूएल, एसबीआई, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, एमएंडएम, कोटक महिंद्रा बैंक, एलएंडटी, सन फार्मा, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी बैंक और बीईएल लूजर्स थे।
जानकारों के मुताबिक, घरेलू बाजार अभी कंसोलिडेशन फेस में है और मिलेजुले रुझानों के साथ सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। हालांकि, भू-राजनीतिक चिंताएं कम हुई हैं, लेकिन अमेरिका-ईरान शांति समझौते की नाजुक स्थिति का असर अभी भी बाजार की धारणा पर बना हुआ है, जिसके कारण निवेशक सतर्क बने हुए हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन मिला-जुला रहा, लेकिन झुकाव गिरावट की ओर था, जिसमें आईटी सेक्टर का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। निवेशक ब्याज दरों की चाल का अंदाजा लगाने के लिए अमेरिका के आने वाले रोजगार के आंकड़ों और नए फेड चेयरमैन के बयानों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि महंगाई अभी भी टारगेट से ऊपर है, जबकि आर्थिक गतिविधियां अच्छी रफ्तार से बढ़ रही हैं।
राष्ट्रीय समाचार
वित्त मंत्रालय ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए के बजट को दी मंजूरी

वित्त मंत्रालय की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दे दी है, जिससे देश में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने का अगले चरण का रास्ता साफ हो गया है। यह जानकारी एडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट में दी गई।
इस प्रस्ताव को समिति ने पिछले हफ्ते मंजूरी दी थी और अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।
आईएसएम 2.0 प्रस्तावित बजट आईएसएम 1.0 के तहत आवंटित 76,000 करोड़ रुपए से काफी अधिक है। आईएसएम 1.0 के तहत सरकार ने चिप बनाने, असेंबली और डिजाइन से जुड़ी 10 सेमीकंडक्टर सुविधाओं को मंजूरी दी थी।
आईएसएम 2.0 से भारत की सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने के उद्देश्य से इंडस्ट्रियल गैस, स्पेशल केमिकल, कैपिटल इक्विपमेंट, एमएसएमई और सहायक सप्लायर जैसे बड़े इकोसिस्टम को मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से भारत 2030 तक अपनी घरेलू सेमीकंडक्टर मांग का 75 प्रतिशत तक हिस्सा पूरा कर सकेगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और देश के ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का लक्ष्य भी पूरा हो सकेगा।
सरकार नई स्कीम को शुरू करने के लिए मंत्रालयों के बीच बातचीत पहले ही कर चुकी है और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार था।
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स की खपत और उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। आज भारत में 65 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स हैं और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का सालाना उत्पादन 12 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
साथ ही, देश एआई-आधारित सिस्टम, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी बना रहा है, जिनके लिए सेमीकंडक्टर चिप्स की जरूरत होती है। मांग और इनोवेशन में इस तेजी की वजह से भारत के लिए ग्लोबल सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में अपनी जगह बनाना जरूरी हो गया है।
‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के तहत 10 सेमीकंडक्टर प्लांट को मंजूरी दी गई है। इन प्लांट का निर्माण तेजी से चल रहा है। गुजरात के साणंद में एक यूनिट में पायलट प्रोडक्शन लाइन पहले ही शुरू हो चुकी है और एक साल के अंदर चार और यूनिट में प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है। एप्लाइड मैटेरियल्स, लैम रिसर्च, मर्क और लिंडे जैसी ग्लोबल कंपनियां सपोर्टिंग फैक्टरियों और सप्लाई चेन में निवेश कर रही हैं।
राष्ट्रीय समाचार
डेयरी संस्था आविन ने दूध की किल्लत वाली खबर का किया खंडन, कहा- ऐसी खबरें पूरी तरह भ्रामक

तमिलनाडु की राज्य संचालित डेयरी सहकारी संस्था आविन ने दूध की आपूर्ति में गिरावट संबंधी खबरों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि चेन्नई में दूध की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में दूध की बिक्री में वृद्धि दर्ज की गई है।
यह स्पष्टीकरण तमिलनाडु मिल्क एजेंट्स एंड वर्कर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा लगाए गए उन आरोपों के बाद आया है, जिनमें कहा गया था कि निजी डेयरी कंपनियां आविन की तुलना में अधिक खरीद मूल्य देकर दूध उत्पादकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।
एसोसिएशन के अनुसार, इसके कारण आविन के दूध खरीद में गिरावट आई है, जिससे कई इलाकों में दूध की आपूर्ति पर 30 प्रतिशत तक असर पड़ा है।
इन आरोपों को खारिज करते हुए आविन ने कहा कि दूध की खरीद या वितरण में किसी भी तरह की कोई बाधा नहीं आई है और चेन्नई के उपभोक्ताओं को प्रतिदिन आविन के सभी प्रकार के दूध के पैकेट बिना किसी कमी के उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
आधिकारिक बयान में आविन ने कहा कि वह वर्तमान में चेन्नई में प्रतिदिन औसतन 14.50 लाख लीटर दूध की आपूर्ति कर रहा है और अपने व्यापक वितरण नेटवर्क के माध्यम से निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है।
सहकारी संस्था ने कहा कि वह उपभोक्ताओं की मांग पूरी करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और दूध की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
बिक्री में गिरावट के दावों का जवाब देते हुए आविन ने जून महीने के दौरान दूध वितरण के तुलनात्मक आंकड़े भी जारी किए।
जारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 में सहकारी संस्था ने प्रतिदिन औसतन 14.46 लाख लीटर दूध की बिक्री की थी। वहीं जून 2026 में औसत दैनिक बिक्री बढ़कर 14.82 लाख लीटर पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में प्रतिदिन लगभग 36,000 लीटर अधिक है।
आविन ने कहा कि ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि उपभोक्ता मांग या दूध वितरण में किसी प्रकार की कोई गिरावट नहीं आई है। इसके विपरीत, मिल्क एजेंट्स एसोसिएशन द्वारा जताई गई चिंताओं के बावजूद बिक्री में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
डेयरी सहकारी संस्था ने आगे कहा कि आविन दूध की कमी या आपूर्ति में व्यवधान संबंधी खबरें “निराधार और भ्रामक” हैं।
संस्था ने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे ऐसी खबरों से गुमराह न हों। उसने दोहराया कि पर्याप्त मात्रा में दूध उपलब्ध है और दूध वितरण का कार्य पूरी तरह सामान्य रूप से चल रहा है।
उपभोक्ताओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए आविन ने कहा कि निर्बाध दूध आपूर्ति उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और उसने जनता को आश्वस्त किया कि चेन्नई में सभी श्रेणियों के दूध के पैकेट बिना किसी कठिनाई के लगातार उपलब्ध रहेंगे।
सहकारी संस्था ने यह भी दोहराया कि वह दूध खरीद और वितरण की लगातार निगरानी करती रहेगी, ताकि शहर के उपभोक्ताओं को भरोसेमंद और निर्बाध दूध आपूर्ति मिलती रहे।
-
दुर्घटना10 months agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
राजनीति1 year agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
महाराष्ट्र12 months agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
-
अनन्य3 years agoउत्तराखंड में फायर सीजन शुरू होने से पहले वन विभाग हुआ सतर्क
