राष्ट्रीय समाचार
भारत का गरीबी स्तर 5% से नीचे आ गया है : नीति आयोग के सीईओ
नई दिल्ली, 26 फरवरी। नीति आयोग के सीईओ बी.वी.आर. सुब्रमण्यम ने रविवार को कहा कि नवीनतम घरेलू उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि भारत का गरीबी स्तर 5 प्रतिशत से नीचे गिर गया है और ग्रामीण व शहरी, दोनों क्षेत्रों में लोग अधिक समृद्ध हो रहे हैं।
राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) द्वारा शनिवार देर रात जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रति व्यक्ति मासिक घरेलू खर्च 2011-12 की तुलना में 2022-23 में दोगुना से अधिक हो गया है, जो देश में समृद्धि के बढ़ते स्तर को दर्शाता है।
सुब्रमण्यम ने पत्रकारों से कहा, “उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण सरकार द्वारा उठाए गए गरीबी उन्मूलन उपायों की सफलता को भी दर्शाता है।”
उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण में जनसंख्या को 20 अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया और आंकड़ों से पता चला कि सभी श्रेणियों के लिए औसत प्रति व्यक्ति मासिक व्यय ग्रामीण क्षेत्रों में 3,773 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 6,459 रुपये है।
निचले 0-5 प्रतिशत वर्ग का औसत प्रति व्यक्ति मासिक व्यय ग्रामीण क्षेत्रों में 1,373 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 2,001 रुपये आंका गया है।
नीति आयोग के सीईओ ने कहा, “अगर हम गरीबी रेखा को लें और इसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के साथ आज की दर तक बढ़ाएं, तो हम देखेंगे कि सबसे निचले 0-5 प्रतिशत वर्ग की औसत खपत लगभग समान है। इसका मतलब है कि देश में गरीबी केवल 0-5 प्रतिशत समूह में है।”
उन्होंने कहा, “यह मेरा आकलन है। लेकिन अर्थशास्त्री इसका विश्लेषण करेंगे और बिल्कुल सही आंकड़े सामने लाएंगे।”
एनएसएसओ का अनुमान 1.55 लाख ग्रामीण परिवारों और 1.07 लाख शहरी परिवारों से एकत्र किए गए आंकड़ों पर आधारित है।
सुब्रमण्यम ने कहा कि आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खपत लगभग 2.5 गुना बढ़ गई है।
उन्होंने कहा, “इससे पता चलता है कि देश में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में प्रगति हो रही है।”
सुब्रमण्यम ने कहा कि सर्वेक्षण से यह भी पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खपत शहरी क्षेत्रों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच असमानताएं कम हो रही हैं।
सर्वेक्षण में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ को भी शामिल किया गया है, जिसने उन गरीब परिवारों की खपत में योगदान दिया है, जिन्हें अपने बच्चों के लिए मुफ्त खाद्यान्न और साइकिल और स्कूल यूनिफॉर्म जैसे सामान मिले हैं।
सर्वेक्षण से पता चलता है कि 2011-12 में अंतर 84 प्रतिशत था और 2022-23 में घटकर 71 प्रतिशत हो गया है। 2004-05 में यह अंतर 91 प्रतिशत के अपने चरम पर था।
एनएसएसओ सर्वेक्षण देश में ग्रामीण और शहरी दोनों परिवारों के कुल खर्च में अनाज और भोजन की खपत की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय गिरावट का भी संकेत देता है।
उन्होंने कहा, “इसका मतलब है कि लोग अतिरिक्त आय के साथ समृद्ध हो रहे हैं। इस बढ़ी हुई समृद्धि के साथ वे भोजन के अलावा अन्य चीजों पर अधिक खर्च कर रहे हैं। यहां तक कि भोजन में भी, वे अधिक दूध पी रहे हैं, फल और अधिक सब्जियां खा रहे हैं।”
सुब्रमण्यम ने यह भी कहा : “सीपीआई मुद्रास्फीति में भोजन का योगदान कम होगा और शायद पहले के वर्षों में भी कम था। इसका मतलब है कि मुद्रास्फीति को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा था और शायद कम है, क्योंकि मुद्रास्फीति में भोजन का प्रमुख योगदान रहा है।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत और कनाडा ने समुद्री सहयोग और रक्षा संबंधों को बढ़ाने पर की चर्चा

भारत और कनाडा रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक और कनाडा के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री डेविड मैकगिन्टी के बीच हुई मीटिंग में समुद्री सहयोग, डिफेंस कैपेसिटी-बिल्डिंग और ट्रेनिंग पर फोकस करते हुए चर्चा हुई। भारतीय उच्चायोग ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
बातचीत समुद्री सहयोग को मजबूत करने, डिफेंस कैपेसिटी-बिल्डिंग और ट्रेनिंग को आगे बढ़ाने, और भारत-कनाडा रक्षा संबंधों को गहरा करने पर केंद्रित थी।
कनाडा में भारतीय उच्चायोग के अनुसार, दोनों पक्षों ने शांति, स्थिरता और मजबूत द्विपक्षीय जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता को भी दोहराया।
यह मीटिंग विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की पिछले हफ्ते मनीला में अपनी कनाडाई समकक्ष अनीता आनंद के साथ हुई मीटिंग के बाद हुई है।
इस बात पर जोर देते हुए कि भारत और कनाडा के बीच सहयोग बढ़ रहा है, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि अनीता आनंद के साथ उनकी बातचीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई पीएम मार्क कार्नी द्वारा तय किए गए संबंधों के लक्ष्यों को पाने पर केंद्रित थी।
विदेश मंत्री जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट किया, “मंगलवार दोपहर कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ हुई चर्चा के लिए धन्यवाद। भारत-कनाडा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। हमारी बातचीत हमारे प्रधानमंत्रियों द्वारा तय किए गए संबंधों के लक्ष्यों को पाने पर फोकस थी।”
पिछले महीने, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष, मार्क कार्नी ने फ्रांस के एवियन में चल रहे जी7 समिट के दौरान अपनी द्विपक्षीय बैठक के दौरान भारत और कनाडा के बीच संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की।
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “इवियन जी7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री कार्नी से मिलकर बहुत खुशी हुई। एक साल से भी कम समय में यह हमारी चौथी मीटिंग है, जो भारत-कनाडा के मजबूत संबंधों के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है। हमने अपने देशों के बीच संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की, खासकर पिछली मुलाकात के बाद से अब तक हुई बातचीत का।”
उन्होंने कहा, “हमने इन चीजों में बड़े पैमाने पर सहयोग पर चर्चा की: व्यापार और अर्थव्यवस्था। ऊर्जा, तकनीक, लोगों के बीच संबंध।”
भारत और कनाडा के बीच संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के राज के लिए पक्की प्रतिबद्धता और लोगों के बीच अच्छे संबंधों से दिखते हैं। दोनों देशों के बीच आधिकारिक स्तर पर बातचीत के तरीके हैं, जैसे मंत्रियों के स्तर पर रणनीतिक, व्यापार और ऊर्जा डायलॉग; फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन; एनवायरनमेंट पर जॉइंट कमेटी मीटिंग और दूसरे सेक्टर-स्पेसिफिक जॉइंट वर्किंग ग्रुप (जेडब्ल्यूजी)।
राजनीति
कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से मांग जवाब, कहा-‘छात्र आंदोलन में ‘एके-47′ से क्यों की गई फायरिंग’

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली, छात्रों के भविष्य, पेपर लीक विवाद और बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान कथित एके-47 के इस्तेमाल के मुद्दे पर कांग्रेस के नेताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के हितों की अनदेखी कर रही है और उनकी समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान एके-47 के इस्तेमाल की बात सामने आई थी, जिस पर पुलिस ने कार्रवाई भी की। उन्होंने कहा कि अब जब भाजपा इस घटना से इनकार कर रही है तो कई सवाल खड़े होते हैं। उनके अनुसार, यदि छात्रों पर इस तरह की कार्रवाई होगी तो यह देश के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार देश को किस दिशा में ले जाना चाहती है।
इमरान मसूद ने एनटीए पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एजेंसी की लापरवाही के कारण छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने एक छात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने परीक्षा में सभी सवालों के सही उत्तर दिए थे लेकिन रिव्यू के लिए मार्क किए गए एक प्रश्न को गलत दर्ज कर दिया गया। उनका दावा था कि इस त्रुटि के कारण छात्रा के 16 अंक कम हो गए, जिससे वह सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने से वंचित रह गई और मानसिक तनाव का शिकार हो गई। उन्होंने कहा कि इस मामले में एनटीए की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस और पूरा विपक्ष छात्रों के भविष्य को लेकर चिंतित है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में भाजपा सरकार ने बार-बार छात्रों के हितों के साथ खिलवाड़ किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून या नीति को लागू करते समय जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि छात्रों को नुकसान न उठाना पड़े।
राकेश सिन्हा ने बिहार में छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने के फैसले का स्वागत करते हुए इसे सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यदि मामले वापस नहीं लिए जाते तो आंदोलन और तेज हो सकता था। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में छात्रों के खिलाफ जिस तरह कथित तौर पर एके-47 के इस्तेमाल की अनुमति दी गई, वह स्वीकार्य नहीं है। छात्रों पर बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज करना भी उचित नहीं था।
वहीं, कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि उनके इस्तीफे के पत्र में पेपर लीक जैसी गंभीर घटना का कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस पूरे मामले में जवाबदेही से बच रही है।
राजनीति
‘एंटी-पेपर लीक’ बिल को लेकर संजय राउत बोले- यह काफी हद तक पुराने बिल की तरह

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने ‘एंटी-पेपर लीक’ बिल को लेकर प्रतिक्रिया दी है।
‘एंटी-पेपर लीक’ बिल को लेकर संजय राउत ने कहा कि इस पर चर्चा हो रही है। एक नया बिल लाया गया है, और अगर सरकार को लगता है कि इससे पेपर लीक रुकेंगे, तो यह अच्छी बात है। लेकिन बिल में असल में नया क्या है? यह काफी हद तक पुराने वाले जैसा ही है। पहले सजा एक साल जेल थी; अब इसे बढ़ाकर दस साल कर दिया गया है। पहले जुर्माना 1 करोड़ रुपए था; अब इसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए कर दिया गया है।”
संजय राउत ने कहा, “हालांकि, देशभर में चल रहे पेपर लीक रैकेट को भाजपा से जुड़े लोग कंट्रोल करते हैं। कई इंस्टीट्यूशन पर उनका कंट्रोल है। महाराष्ट्र में नीट पेपर लीक केस में गिरफ्तार किए गए सभी लोग भाजपा के कार्यकर्ता हैं।” उन्होंने आगे कहा, “जिन पर देश को लूटने का आरोप है, उन्हें ‘वॉशिंग मशीन’ में डालकर साफ किया जा रहा है, और फिर अपनी पार्टी में शामिल करके ‘पवित्र’ बना देते हैं। लेकिन जब स्टूडेंट्स की बात आती है, तो आपका रवैया बिल्कुल अलग होता है।”
संजय राउत ने कहा, “अब आप यह भी जांच कर रहे हैं कि जंतर-मंतर पर खाना कौन परोस रहा था, पानी कौन बांट रहा था, और जूस कौन बांट रहा था। यह सरकार क्या कर रही है? किसी भी प्रोटेस्ट के दौरान, जो लोग मदद करना चाहते हैं, वे आगे आते हैं। कोई पानी देता है, कोई खाना देता है, कोई सैंडविच बांटता है, कोई दवाइयां देता है। अब आपने उनकी भी जांच शुरू कर दी है।”
संजय राउत ने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान का जिस तरह से स्वागत किया गया है, इसको बंद कर देना चाहिए। जिसको नीट पेपर लीक मामले के लिए इस्तीफा देना पड़ा हो, उसका स्वागत किया जा रहा है।
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