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Thursday,27-August-2026
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अमेरिकी टैरिफ के चलते भारतीय शेयर बाजार इस हफ्ते करीब एक प्रतिशत फिसले

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मुंबई, 2 अगस्त। भारतीय शेयर बाजार में इस हफ्ते गिरावट देखने को मिली। इस दौरान निफ्टी 271.65 अंक या 1.09 प्रतिशत गिरकर24,565.35 और सेंसेक्स 863.18 अंक या 1.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80,599.91 पर बंद हुआ।

बाजार में हुई गिरावट पर एक्सपर्ट्स ने शनिवार को कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाने के कारण बाजार के सेंटीमेंट पर नकारात्मक असर हुआ है। इससे एफआईआई की बिकवाली भी बढ़ी है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा, “इस हफ्ते बाजार सतर्क आशावाद और रक्षात्मक रुख के बीच एक दायरे में कारोबार कर रहा था, लेकिन एफआईआई की लगातार निकासी के कारण गिरावट के साथ बंद हुआ। वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच, निवेशकों ने घरेलू संकेतों को प्राथमिकता दी हैं। वहीं, एफएमसीजी शेयर आकर्षक मूल्यांकन और बाहरी झटकों से सुरक्षा के कारण तेजी के साथ बंद हुए।”

एचयूएल, डाबर इंडिया और इमामी जैसी कंपनियों की ओर से पहली तिमाही के मजबूत नतीजों के बाद एफएमसीजी शेयरों में तेजी से उछाल आया, जिससे निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स लगभग 1 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ। अमेरिकी ट्रे़ड टैरिफ को लेकर चिंताओं के बीच ऑटो, मेटल, आईटी और फार्मा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में 2-3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ का भारतीय बाजारों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि मुख्य निर्यात रत्न एवं आभूषण, चमड़ा और वस्त्र जैसी पारंपरिक वस्तुओं का होता है, जिनका सूचीबद्ध बाजार में बड़ा प्रतिनिधित्व नहीं है। उनका मानना है कि टैरिफ से जुड़ी ज्यादातर चिंताएं पहले ही सामने आ चुकी हैं, और इसमें भारी गिरावट की संभावना बेहद कम है।

इस हफ्ते के दौरान, तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के शेयरों में 5 प्रतिशत की गिरावट आई, क्योंकि कंपनी ने वित्त वर्ष 26 में लगभग 12,200 कर्मचारियों की छंटनी करने की घोषणा की है।

राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कई देशों पर “रेसिप्रोकल” टैरिफ लागू करने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करने के बाद, एशियाई, यूरोपीय और यूएस इंडेक्स फ्यूचर्स लगभग 1 प्रतिशत गिर गए। आदेश के मुताबिक, टैरिफ की दरें 10 प्रतिशत से 41 प्रतिशत तक होंगी और ये टैरिफ सात दिनों में लागू होंगे। इस कदम से अमेरिका में महंगाई और ग्लोबल अर्थव्यवस्था के धीमे होने की संभावना बढ़ गई है।

राष्ट्रीय समाचार

भारत में इस्तेमाल हो रहा ऑफिस स्पेस 900 मिलियन स्क्वायर फीट के पार, बीते एक वर्ष में 6 प्रतिशत का हुआ इजाफा

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भारत में इस्तेमाल हो रहे कमर्शियल स्पेस 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून अवधि) में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत बढ़कर 901.1 मिलियन स्क्वायर फीट हो गया है, जो कि 2025 की पहली छमाही में 847 मिलियन स्क्वायर फीट था। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल ऑफिस स्टॉक 1.05 बिलियन स्क्वेयर फीट दर्ज किया गया है। देश के शीर्ष आठ ऑफिस मार्केट में इस्तेमाल हो रहे ऑफिस स्पेस में वृद्धि, कंपनियों के लगातार विस्तार को दिखाती है।

नाइट फ्रैंक इंडिया में इंटरनेशनल पार्टनर और सीनियर एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विरल देसाई ने कहा, “जीसीसी के विस्तार और घरेलू कंपनियों के बढ़ते दायरे की वजह से ऑफिस की मांग बनी हुई है। कंपनियां ऐसे स्थापित बाजारों की ओर बढ़ रही हैं जहां उन्हें टैलेंट, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े पैमाने पर काम करने की सुविधा मिलती है।”

बेंगलुरु सबसे बड़े ऑफिस मार्केट के तौर पर सबसे आगे है, जहां 2026 की पहली छमाही में इस्तेमाल हो रहा ऑफिस स्पेस का आंकड़ा 222.4 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की मजबूत ग्रोथ दिखाता है।

दिल्ली-एनसीआर 178.1 मिलियन स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस के साथ दूसरे नंबर पर है, जहां सालाना आधार पर 2 प्रतिशत की मामूली ग्रोथ देखी गई। मुंबई में इस्तेमाल हो रहे ऑफिस स्पेस का आंकड़ा 146.6 मिलियन स्क्वायर फीट रहा, जिसमें सालाना आधार पर 5 प्रतिशत की ग्रोथ हुई।

पुणे सबसे तेजी से बढ़ने वाले मार्केट में से एक बनकर उभरा है। यह शहर 100 मिलियन स्क्वायर फीट का आंकड़ा पार करने की राह पर है। रिपोर्ट के अनुसार, पुणे ने सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की और इस्तेमाल हो रहा ऑफिस स्पेस 98.8 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गया।

वहीं, चेन्नई ने सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की अच्छी ग्रोथ बनाए रखी और कुल इस्तेमाल हो रहा ऑफिस स्पेस 88.9 मिलियन स्क्वायर फीट रहा, वहीं अहमदाबाद ने सभी ट्रैक किए गए शहरों में सबसे ज्यादा ग्रोथ दिखाई, जहां इस्तेमाल हो रहा ऑफिस स्पेस 9 प्रतिशत बढ़कर 27.5 मिलियन स्क्वायर फीट हो गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता में इस्तेमाल हो रहा ऑफिस स्पेस 24.4 मिलियन स्क्वायर फीट रहा, जिसमें सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की स्थिर बढ़ोतरी देखी गई।

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व्यापार

एआई सुरक्षा बाजार में तेज उछाल, 2027 तक 4.8 अरब डॉलर और 2028 तक 7.7 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान: रिपोर्ट

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग के साथ इसकी सुरक्षा पर होने वाला वैश्विक खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है। बुधवार को जारी गार्टनर की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, एआई प्रणालियों की सुरक्षा से जुड़ा वैश्विक बाजार 2027 में लगभग 4.8 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2026 की तुलना में 68.7 प्रतिशत अधिक होगा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2028 तक यह बाजार बढ़कर लगभग 7.7 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

गार्टनर के वरिष्ठ प्रधान विश्लेषक शैलेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि इस तेज वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण संगठनों के सामने एआई प्रणालियों को सुरक्षित बनाने की बढ़ती आवश्यकता है। कंपनियां अब केवल एआई को अपनाने पर ही ध्यान नहीं दे रही हैं, बल्कि उससे जुड़े नए सुरक्षा जोखिमों, कमजोरियों और उन्नत साइबर खतरों से बचाव को भी प्राथमिकता दे रही हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई परियोजनाओं में तृतीय पक्ष और ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर के बढ़ते उपयोग के कारण नई तरह की सुरक्षा चुनौतियां सामने आ रही हैं। आपूर्ति शृंखला पर होने वाले साइबर हमले और एआई प्रणालियों में मौजूद कमजोरियां संस्थानों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। यदि उपयुक्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था नहीं अपनाई गई तो एआई-आधारित कई परियोजनाओं के विफल होने का जोखिम बढ़ सकता है।

गार्टनर का अनुमान है कि 2029 तक एआई एजेंट्स पर होने वाले आधे से अधिक सफल साइबर हमले पहुंच नियंत्रण संबंधी कमजोरियों और प्रॉम्प्ट इंजेक्शन जैसी तकनीकों का फायदा उठाकर किए जाएंगे। इससे एआई सुरक्षा समाधानों की आवश्यकता और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के अनुसार, एआई एप्लिकेशन सुरक्षा 2027 में भी खर्च की सबसे बड़ी श्रेणी बनी रहेगी और इस पर लगभग 851 मिलियन डॉलर खर्च होने का अनुमान है, इसके बाद एआई उपयोग नियंत्रण श्रेणी का स्थान रहेगा, जिस पर लगभग 749 मिलियन डॉलर खर्च किए जाने की संभावना है।

हालांकि वृद्धि दर के लिहाज से एआई उपयोग नियंत्रण सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र होगा, जिसमें लगभग 73 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। इसके बाद एआई गेटवे श्रेणी में लगभग 70.9 प्रतिशत की वृद्धि देखी जा सकती है।

उपाध्याय ने कहा कि जैसे-जैसे एआई रनटाइम सुरक्षा और समर्पित एआई गेटवे जैसी तकनीकें अधिक विश्वसनीय बनेंगी, संगठनों का इन समाधानों पर भरोसा बढ़ेगा और उनका उपयोग भी तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि कंपनियां जैसे-जैसे अपने एआई कार्यक्रमों का विस्तार करेंगी, वैसे-वैसे विशेष एआई सुरक्षा समाधानों की मांग भी बढ़ती जाएगी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्वायत्त एआई प्रणालियां नई प्रकार की कमजोरियां लेकर आती हैं, जिन्हें पारंपरिक निगरानी और सुरक्षा उपकरण पूरी तरह पहचान नहीं पाते। इसलिए संगठनों को एआई मॉडल की पहचान, निगरानी और सुरक्षा के लिए विशेष समाधान अपनाने होंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, एआई-आधारित सुरक्षा रणनीति केवल नए उपकरण खरीदने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। कंपनियों को अपनी मौजूदा साइबर सुरक्षा व्यवस्था को एआई सुरक्षा समाधानों के साथ एकीकृत करना होगा, ताकि वे उभरते खतरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।

उपाध्याय ने कहा कि पारंपरिक साइबर सुरक्षा उपकरण अक्सर एआई अनुप्रयोगों को सामान्य सॉफ्टवेयर की तरह देखते हैं। यही कारण है कि एआई से जुड़े विशिष्ट खतरों से निपटने के लिए इन प्रणालियों में बड़े स्तर पर बदलाव और उन्नयन की आवश्यकता होगी। आने वाले वर्षों में एआई सुरक्षा को तकनीकी निवेश का एक केंद्रीय क्षेत्र माना जा रहा है, क्योंकि एआई का विस्तार जितनी तेजी से होगा, उससे जुड़े साइबर जोखिम भी उतनी ही तेजी से बढ़ेंगे।

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राष्ट्रीय समाचार

वित्त मंत्री सीतारमण ने कनाडाई निवेशकों को भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया

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केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडाई निवेशकों को भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनने के लिए आमंत्रित किया। इस दौरान उन्होंने निवेशकों को बैंकिंग, बीमा, फिनटेक, सेमीकंडक्टर, दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और अन्य उभरते क्षेत्रों में देश में मौजूद निवेश के अवसरों के बारे में बताया।

टोरंटो में भारतीय प्रवासी कारोबारी समुदाय के लिए आयोजित स्वागत समारोह को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक मजबूत स्थिति में हैं और बैंकिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण निवेश हो रहा है।

वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारत का वित्तीय क्षेत्र, खासकर बैंकिंग और एनबीएफसी अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित कर रहा है।

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (आईएफएससी) गिफ्ट सिटी ने पहले ही कई विदेशी बैंकों को आकर्षित किया है और अधिक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के लिए यहां अपना कारोबार स्थापित करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा, “भारत सरकार की प्रतिबद्धता है कि हम चाहते हैं कि कनाडाई निवेशक भारत आएं और भारत के साथ अधिक व्यापक जुड़ाव स्थापित करें।”

वित्त मंत्री ने भारत की बड़ी आबादी, क्रय शक्ति, खपत और मांग को ऐसे प्रमुख कारकों के रूप में बताया, जो देश को निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बनाते हैं।

एक अन्य एक्स पोस्ट में वित्त मंत्री ने कहा कि भारत गिफ्ट सिटी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पूंजी के लिए नए रास्ते बना रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में उभर रही है।

उन्होंने कहा कि गिफ्ट सिटी का नियामकीय और कर ढांचा विशेष रूप से सीमा-पार वित्तीय गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए तैयार किया गया है।

इसके अलावा, अब बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति है। वित्त मंत्री के अनुसार, बड़े पैमाने पर फिनटेक क्षेत्र में भारत का नेतृत्व वैश्विक पूंजी के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर रहा है।

वित्त मंत्री ने सेमीकंडक्टर, मैग्नेट और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों जैसे उभरते क्षेत्रों को भी कनाडाई निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संभावनाओं वाले क्षेत्र बताया।

उन्होंने कहा, “भारत वैश्विक बाजारों के लिए भरोसेमंद और लागत प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला के विकल्प भी उपलब्ध करा सकता है।”

वित्त मंत्री के अनुसार, कनाडाई संस्थागत निवेशकों के लिए ये अवसर केवल भारत की विकास यात्रा में भाग लेने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भारत को व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक वित्तीय गतिविधियों के लिए एक मंच के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

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