व्यापार
भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे सत्र में लाल निशान में खुला, सेंसेक्स करीब 200 अंक फिसला
SHARE MARKET
मुंबई, 7 जनवरी: वैश्विक बाजार के मिले-जुले संकेतों के बीच भारती शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ खुले।
शुरुआती कारोबार में खबर लिखे जाने तक 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 199 अंक या 0.23 प्रतिशत गिरकर 84,864 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 54 अंक या 0.2 प्रतिशत गिरकर 26,125 पर था।
व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.28 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।
वहीं सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जिसमें 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई, इसके बाद निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 0.3 प्रतिशत की गिरावट और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.2 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।
इसके अलावा, निफ्टी आईटी में 1 प्रतिशत, निफ्टी मेटल में 0.7 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी में 0.16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 18 शेयर लाल निशान में ट्रेड करते नजर आए। इनमें एचडीएफसी बैंक में सबसे ज्यादा 1.3 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसके बाद बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, मारुति सुजुकी, एचयूएल, एनटीपीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, सन फार्मा, एलएंडटी और एमएंडएम प्रमुख थे।
इसके विपरीत, टाइटन कंपनी में सबसे ज्यादा 3.7 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके बाद एचसीएल टेक, इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा, इटरनल और टाटा स्टील में बढ़त देखने को मिली।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा कि हाल के दिनों में शेयर बाजार की चाल में कोई साफ रुझान या दिशा नजर नहीं आ रही है। कुछ गिने-चुने बड़े शेयरों में हो रही गतिविधियां पूरे बाजार को जरूरत से ज्यादा प्रभावित कर रही हैं।
उन्होंने कि उदाहरण के तौर पर, कल संस्थागत निवेशकों की खरीदारी सकारात्मक रहने के बावजूद निफ्टी 71 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। इसकी मुख्य वजह सिर्फ दो शेयरों-रिलायंस और एचडीएफसी बैंक-में आई तेज गिरावट रही। इन दोनों शेयरों में डेरिवेटिव और कैश मार्केट में भारी वॉल्यूम देखने को मिला, जो सेटलमेंट डे से जुड़ी गतिविधियों का संकेत देता है। यानी इन शेयरों में आई तेज गिरावट का उनके मूल कारोबार (फंडामेंटल्स) से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह तकनीकी कारणों से हुई है।
एक्सपर्ट ने कहा कि आगे की बात करें तो बाजार में घटनाओं और खबरों के कारण तेज उतार-चढ़ाव (हाई वोलैटिलिटी) की संभावना बनी हुई है। डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट और उनके फैसले कभी भी बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, एक अहम घटनाक्रम जिस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए, वह है ट्रंप के टैरिफ से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट का संभावित फैसला, जो जल्द आ सकता है। अगर यह फैसला रेसिप्रोकल टैरिफ के खिलाफ जाता है, तो शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
पिछले कारोबारी सत्र यानी मंगलवार को भी भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। दिन के अंत में सेंसेक्स 376.28 अंक या 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 85,063.34 पर और निफ्टी 71.60 अंक या 0.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 26, 178.70 पर था।
व्यापार
कस्टम ड्यूटी बढ़ने का असर! सोने और चांदी के दाम करीब 6.66 प्रतिशत तक बढ़े

केंद्र सरकार की ओर से कस्टम ड्यूटी बढ़ाने के बाद सोने और चांदी में बड़ी तेजी देखी जा रही है और दोनों कीमती धातुओं के दाम बुधवार को 6.66 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 05 जून 2026 का कॉन्ट्रैक्ट सुबह 9:52 पर 6.09 प्रतिशत या 9,348 रुपए की मजबूती के साथ 1,62,790 रुपए पर था।
वहीं, चांदी में इसी तरह की तेजी देखी जा रही है। चांदी का 5 जुलाई 2026 कॉन्ट्रैक्ट 6.66 प्रतिशत या 18,593 रुपए की तेजी के साथ 2,97,655 रुपए पर था।
सोने और चांदी में तेजी की वजह कीमती धातुओं पर केंद्र सरकार की ओर से कस्टम ड्यूटी या आयात शुल्क में वृद्धि करना है।
सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क (उपकर सहित) को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, प्लेटिनम पर आयात शुल्क को 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत कर दिया है।
इस कदम के जरिए सरकार की कोशिश वैश्विक अस्थिरता के दौर में चालू खाते घाटे को कम करना और विदेशी मुद्रा की बचत करना है।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में वृद्धि विदेशी मुद्रा संरक्षण, चालू खाते की सुरक्षा, आवश्यक आयातों को प्राथमिकता देने और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक मजबूती को बढ़ाने के उद्देश्य से अपनाई गई व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
उन्होंने आगे कहा कि यह कदम असाधारण बाहरी परिस्थितियों के प्रति संतुलित, आनुपातिक और राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदार प्रतिक्रिया है, साथ ही इसमें व्यापक आर्थिक स्थिरता और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती का भी पूरा ध्यान रखा गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में तेजी देखने को मिल रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.52 प्रतिशत बढ़कर 4,710 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.28 प्रतिशत की मजबूती के साथ 87.54 डॉलर प्रति औंस पर थी।
व्यापार
मध्य पूर्व में जारी तनाव के चलते बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ शेयर बाजार; सेंसेक्स 1,456 अंक टूटा

पश्चिम एशिया में जारी तनावों के बीच नकारात्मक वैश्विक संकेतों के चलते लगातार दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली और प्रमुख बेंचमार्क निफ्टी 50 और सेंसेक्स करीब 2 प्रतिशत तक गिर गए।
इस दौरान 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,456.04 अंकों यानी 1.92 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,559.24 पर बंद हुआ, तो वहीं एनएसई निफ्टी50 436.30 अंक (1.83 प्रतिशत) गिरकर 23,379.55 पर पहुंच गया।
दिन के दौरान सेंसेक्स 75,688.39 पर खुलकर 1,450 अंकों से ज्यादा यानी करीब 2 प्रतिशत गिरकर 74,449.50 के दिन के निचले स्तर पर आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 23,722.60 पर खुलकर दिन के दौरान करीब 2 प्रतिशत गिरकर 23,348.40 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।
व्यापक बाजारों का प्रदर्शन प्रमुख बेंचमार्कों से ज्यादा खराब रहा। निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 3.17 प्रतिशत तो निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 2.54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी और निफ्टी रियल्टी में सबसे ज्यादा 3-4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी मीडिया का प्रदर्शन भी खराब रहा, जिनमें 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। वहीं, निफ्टी मेटल और निफ्टी ऑयल एंड गैस का प्रदर्शन अन्य सेक्टर्स से बेहतर रहा।
निफ्टी 50 पैक में सिर्फ 4 शेयर, जिनमें ओएनजीसी में सबसे ज्यादा 4.70 प्रतिशत, हिंडाल्कों में 1.86 प्रतिशत, एसबीआई में 0.26 प्रतिशत और भारती एयरटेल में 0.17 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, ही हरे निशान में बंद हुए। बाकी सभी शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। टॉप लूजर्स की लिस्ट में श्रीराम फाइनेंस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, टीसीएस और टाइटन के शेयर शामिल रहे, जिनमें 3 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
इस दौरान, बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के 467.5 लाख करोड़ रुपए से घटकर 456.3 लाख करोड़ रुपए हो गया, जिससे निवेशकों को करीब 11.2 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
बाजार में यह गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के साथ एक महीने से चल रहा युद्धविराम ‘बहुत नाजुक स्थिति’ में है, क्योंकि ईरान ने एक ‘अस्वीकार्य’ प्रस्ताव पेश किया है, के चलते आई। साथ ही एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्धविराम की स्थिति अभी भी कमजोर है, जिसके चलते निवेशकों के बीच जोखिम की भावना में भी गिरावट आई है और बाजार में बिकवाली हावी रही।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची तेल कीमतें और डॉलर की मजबूती आने वाले समय में वैश्विक महंगाई को बढ़ा सकती हैं।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिनों में बाजार की चाल मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव कम होता है और तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो भारतीय बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है।
राष्ट्रीय समाचार
गूगल सर्च में आई रुकावट, इंटरनल सर्वर एरर बनी वजह

अमेरिकी टेक कंपनी अल्फाबेट के गूगल सर्च में मंगलवार की सुबह वैश्विक स्तर पर यूजर्स को रुकावट (आउटेज) का सामना करना पड़ा। यह भारत के साथ अमेरिका और अन्य रीजन में भी देखने को मिला।
गूगल सर्च लॉग इन करने वाले कई यूजर्स को स्क्रीन पर एक मैसेज दिखाई दिया, जिसमें लिखा था कि हमें खेद है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि आपके अनुरोध को प्रोसेस करते समय इंटरनल सर्वर एरर आ गई है। हमारे इंजीनियरों को सूचित कर दिया गया है और वे समस्या का समाधान करने के लिए काम कर रहे हैं। कृपया बाद में पुनः प्रयास करें।
गूगल सर्च में रुकावट की ऑनलाइन आउटेज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर यूजर्स ने शिकायत की, अकेले भारत से ही कुछ ही समय में सैकड़ों शिकायतें सामने आईं।
इसके अलावा, इस समस्या को ‘500 इंटरनल सर्वर एरर’ के रूप में पहचाना गया, जो आमतौर पर सर्वर में समस्या की ओर इशारा करता है, न कि यूजर्स के उपकरणों या इंटरनेट कनेक्शन में किसी समस्या को।
यह एरर आमतौर पर तब होती है जब बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर में तकनीकी समस्याओं के कारण यूजर्स के ब्राउजर और कंपनी के सर्वरों के बीच संचार बाधित हो जाता है।
इसके अलावा, कई उपयोगकर्ताओं ने बताया कि आउटेज की अवधि के दौरान वे बीच-बीच में सर्च करने या रिजल्ट देखने में असमर्थ थे।
इससे पहले, एआई सेवाओं सहित कई टेक्नोलॉजी प्लेटफार्मों में भी आउटेज की समस्या आई थी।
मार्च में, चीन के लोकप्रिय एआई चैटबॉट डीपसीक को अपने इतिहास में सबसे बड़े आउटेज में से एक का सामना करना पड़ा, जिसके चलते प्लेटफार्म कथित तौर पर सात घंटे से अधिक समय तक ऑफलाइन रहा।
इसी तरह, इंस्टाग्राम के यूजर्स ने उसी महीने व्यापक समस्याओं की सूचना दी, जो मुख्य रूप से डायरेक्ट मैसेज (डीएम) तक पहुंच न होने और चैट थीम के गायब होने से संबंधित थीं। यूजर्नेस इंस्टाग्राम के सबरेडिट और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर भी सर्च सुविधा का उपयोग करने या संपर्क देखने में असमर्थ होने की शिकायतें पोस्ट कीं।
फरवरी में, यूट्यूब में भी ग्लोबल आउटेज हुआ था। प्लेटफार्म ने बाद में पुष्टि की कि सेवाएं बहाल कर दी गई हैं, और टीम यूट्यूब ने एक्स पर पोस्ट किया कि समस्या को पूरे प्लेटफार्म पर ठीक कर दिया गया है।
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
दुर्घटना8 months agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
महाराष्ट्र11 months agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
अनन्य3 years agoउत्तराखंड में फायर सीजन शुरू होने से पहले वन विभाग हुआ सतर्क
-
न्याय2 years agoमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ हाईकोर्ट में मामला दायर
