राष्ट्रीय समाचार
गूगल सर्च में आई रुकावट, इंटरनल सर्वर एरर बनी वजह
अमेरिकी टेक कंपनी अल्फाबेट के गूगल सर्च में मंगलवार की सुबह वैश्विक स्तर पर यूजर्स को रुकावट (आउटेज) का सामना करना पड़ा। यह भारत के साथ अमेरिका और अन्य रीजन में भी देखने को मिला।
गूगल सर्च लॉग इन करने वाले कई यूजर्स को स्क्रीन पर एक मैसेज दिखाई दिया, जिसमें लिखा था कि हमें खेद है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि आपके अनुरोध को प्रोसेस करते समय इंटरनल सर्वर एरर आ गई है। हमारे इंजीनियरों को सूचित कर दिया गया है और वे समस्या का समाधान करने के लिए काम कर रहे हैं। कृपया बाद में पुनः प्रयास करें।
गूगल सर्च में रुकावट की ऑनलाइन आउटेज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर यूजर्स ने शिकायत की, अकेले भारत से ही कुछ ही समय में सैकड़ों शिकायतें सामने आईं।
इसके अलावा, इस समस्या को ‘500 इंटरनल सर्वर एरर’ के रूप में पहचाना गया, जो आमतौर पर सर्वर में समस्या की ओर इशारा करता है, न कि यूजर्स के उपकरणों या इंटरनेट कनेक्शन में किसी समस्या को।
यह एरर आमतौर पर तब होती है जब बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर में तकनीकी समस्याओं के कारण यूजर्स के ब्राउजर और कंपनी के सर्वरों के बीच संचार बाधित हो जाता है।
इसके अलावा, कई उपयोगकर्ताओं ने बताया कि आउटेज की अवधि के दौरान वे बीच-बीच में सर्च करने या रिजल्ट देखने में असमर्थ थे।
इससे पहले, एआई सेवाओं सहित कई टेक्नोलॉजी प्लेटफार्मों में भी आउटेज की समस्या आई थी।
मार्च में, चीन के लोकप्रिय एआई चैटबॉट डीपसीक को अपने इतिहास में सबसे बड़े आउटेज में से एक का सामना करना पड़ा, जिसके चलते प्लेटफार्म कथित तौर पर सात घंटे से अधिक समय तक ऑफलाइन रहा।
इसी तरह, इंस्टाग्राम के यूजर्स ने उसी महीने व्यापक समस्याओं की सूचना दी, जो मुख्य रूप से डायरेक्ट मैसेज (डीएम) तक पहुंच न होने और चैट थीम के गायब होने से संबंधित थीं। यूजर्नेस इंस्टाग्राम के सबरेडिट और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर भी सर्च सुविधा का उपयोग करने या संपर्क देखने में असमर्थ होने की शिकायतें पोस्ट कीं।
फरवरी में, यूट्यूब में भी ग्लोबल आउटेज हुआ था। प्लेटफार्म ने बाद में पुष्टि की कि सेवाएं बहाल कर दी गई हैं, और टीम यूट्यूब ने एक्स पर पोस्ट किया कि समस्या को पूरे प्लेटफार्म पर ठीक कर दिया गया है।
राजनीति
तमिलनाडु सरकार ने स्टालिन की केंद्र-राज्य संबंध समिति भंग की, विधि आयोग को सौंपी जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव करते हुए पूर्व डीएमके सरकार द्वारा गठित केंद्र-राज्य संबंधों पर उच्चस्तरीय समिति को समाप्त कर दिया है और इसकी जिम्मेदारी तमिलनाडु राज्य विधि आयोग को सौंप दी है।
सरकारी आदेश के माध्यम से औपचारिक रूप से पारित इस निर्णय के साथ पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा केंद्र-राज्य संबंधों को नियंत्रित करने वाले संवैधानिक प्रावधानों की जांच करने और संघवाद व राज्य स्वायत्तता को मजबूत करने के उपायों की सिफारिश करने के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति का अंत हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता वाली इस समिति में पूर्व आईएएस अधिकारी के. अशोक वर्धन शेट्टी और राज्य योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एम. नागनाथन शामिल थे। स्टालिन ने अप्रैल 2025 में तमिलनाडु विधानसभा में इसके गठन की घोषणा की थी और इसे राज्य के संवैधानिक अधिकारों और प्रशासनिक शक्तियों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया था।
इसके बाद समिति ने केंद्र सरकार और राज्य के बीच संबंधों को प्रभावित करने वाले संवैधानिक, कानूनी और प्रशासनिक मुद्दों की गहन जांच की। इसने 16 फरवरी 2026 को स्टालिन को अपनी रिपोर्ट का पहला भाग प्रस्तुत किया, जिसमें संघीय शासन और राज्य स्वायत्तता से संबंधित सिफारिशें शामिल थीं।
हालांकि, विजय सरकार ने अब यह निष्कर्ष निकाला है कि समिति को अलग से जारी रखना अनावश्यक है क्योंकि इसकी जिम्मेदारियां राज्य विधि आयोग को सौंपी गई जिम्मेदारियों से मिलती-जुलती हैं।
सरकारी आदेश के अनुसार, 7 अगस्त 2026 को पुनर्गठित विधि आयोग को पहले से ही अंतरराज्यीय और केंद्र-राज्यीय संबंधों, मौजूदा कानूनों की समीक्षा और राज्य के कानूनी और संस्थागत ढांचे में सुधार सहित व्यापक अधिकार प्राप्त हैं।
सरकार का तर्क था कि समान जिम्मेदारियों वाले दो निकायों को बनाए रखने से कार्यों का दोहराव होगा। परिणामस्वरूप, उसने उच्चस्तरीय समिति को तत्काल भंग करने का आदेश दिया और केंद्र-राज्य संबंधों से संबंधित मामलों की जांच का जिम्मा विधि आयोग को सौंप दिया।
महत्वपूर्ण बात यह है कि आदेश में भंग की गई समिति को गैर-वैधानिक निकाय बताया गया है और प्रशासनिक निर्णय को उचित ठहराया गया है। हालांकि, तमिलनाडु राज्य विधि आयोग स्वयं भी एक गैर-वैधानिक संस्था है, जिसकी स्थापना विधायी प्रक्रिया के बजाय कार्यकारी सरकारी आदेश द्वारा की गई है।
यह ताजा फैसला संघीय संबंधों को लेकर पूर्व डीएमके प्रशासन के दृष्टिकोण से एक अलग दिशा में है। हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि विधि आयोग के माध्यम से इस विषय पर संस्थागत ध्यान दिया जाता रहेगा।
राष्ट्रीय समाचार
भारत की केमिकल और पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री 2030 तक 300 अरब डॉलर और 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है: सरकार

भारत का रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग, जिसका वर्तमान आकार लगभग 220 अरब डॉलर है, वर्ष 2030 तक 300 अरब डॉलर और 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। सरकार द्वारा शनिवार को जारी एक फैक्टशीट के अनुसार, भारत वैश्विक रसायन उद्योग में लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और यह क्षेत्र देश की औद्योगिक एवं विनिर्माण वृद्धि का महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है।
फैक्टशीट में कहा गया है कि भारत वर्तमान में दुनिया का छठा सबसे बड़ा रसायन उत्पादक और एशिया का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है। इस क्षेत्र के उत्पादों का उपयोग औषधि, वस्त्र, निर्माण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तुओं सहित अनेक उद्योगों में किया जाता है।
सरकार ने अधिकांश रसायन क्षेत्रों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को स्वचालित मार्ग के तहत अनुमति दे रखी है, जिसके तहत विदेश से आने वाले निवेश को सरकार की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। इसी का परिणाम है कि 2014 से 2026 के बीच इस क्षेत्र में 1,04,895 करोड़ रुपए का एफडीआई आया, जो 2004 से 2014 के दौरान प्राप्त 45,240 करोड़ रुपए के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है।
फैक्टशीट के अनुसार, प्रमुख रसायनों और पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन 2015-16 के 45,638 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 58,617 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया। यह वृद्धि उत्पादन क्षमता विस्तार, विशेषीकृत विनिर्माण हब के विकास और बुनियादी ढांचे में सुधार का परिणाम मानी जा रही है।
बयान में आगे कहा गया है कि विशेष रसायनों के क्षेत्र में भी भारत की वैश्विक उपस्थिति मजबूत है। देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डाई निर्माता और निर्यातक है, जबकि कृषि रसायनों के निर्यात में तीसरे स्थान पर है। वर्तमान में इस क्षेत्र में लगभग 13,000 बड़े उद्योग और 4.45 लाख सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) कार्यरत हैं।
सरकार इस क्षेत्र को और गति देने के लिए कई नई पहलें लागू कर रही है, जिनमें समर्पित केमिकल पार्क, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने वाली योजनाएं तथा गुणवत्ता और निवेश को प्रोत्साहित करने वाले कदम शामिल हैं। इनका उद्देश्य भारत की वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भागीदारी को मजबूत करना है।
जुलाई 2026 में मंजूर की गई भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन) के तहत देश में तीन विशेष केमिकल पार्क स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक पार्क का क्षेत्रफल कम से कम 8 वर्ग किलोमीटर (करीब 2,000 एकड़) होगा। केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के लिए 1,000 करोड़ रुपए तक की सहायता देगी, जबकि संबंधित राज्य सरकार को कम से कम 500 करोड़ रुपए का योगदान देना होगा।
इस योजना का कुल वित्तीय प्रावधान 3,030 करोड़ रुपए है, जिसमें 3,000 करोड़ रुपए बुनियादी ढांचे और सामान्य सुविधाओं के विकास के लिए तथा 30 करोड़ रुपए प्रशासनिक खर्चों के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी।
इसके अलावा, नवंबर 2025 में शुरू की गई अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का कोष बनाया गया है, जिसका उद्देश्य निजी क्षेत्र के अनुसंधान और नवाचार निवेश को बढ़ावा देना है। यह योजना दीर्घकालिक वित्तपोषण और पुनर्वित्त सुविधा प्रदान करती है, जिससे उन्नत तकनीकों को अपनाने, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और महत्वपूर्ण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय समाचार
दिवाली पर कारोबार में उछाल, दिल्ली का व्यापार 80,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद: सीटीआई

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने शनिवार को बताया कि दिवाली के त्योहारी सीजन के दौरान देशभर में कारोबार लगभग 5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है। जबकि अकेले दिल्ली में लगभग 80,000 करोड़ रुपए का कारोबार दर्ज होने की संभावना है।
सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा कि त्योहारी सीजन ने देशभर के व्यापारियों के लिए कारोबार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा किए हैं, क्योंकि स्वदेशी उत्पादों की उपभोक्ताओं के बीच मजबूत मांग देखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के जिन व्यापारियों को पिछले महीने रैलियों और विरोध प्रदर्शनों के कारण कारोबार में बाधाओं का सामना करना पड़ा था, अब दिवाली की खरीदारी के बंपर सीजन से अपने नुकसान की भरपाई करने की उम्मीद कर रहे हैं।
गोयल के अनुसार, अनुमानित 5 लाख करोड़ रुपए के देशभर के कारोबार में दिवाली की खरीदारी और विभिन्न संबंधित सेवाओं से उत्पन्न कारोबार शामिल है।
ऑटोमोबाइल उद्योग की सर्वोच्च संस्था द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में खुदरा ऑटोमोबाइल बिक्री में 55 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। दोपहिया, तिपहिया, वाणिज्यिक वाहन, यात्री वाहन और ट्रैक्टरों की बिक्री में क्रमशः 52 प्रतिशत, 110 प्रतिशत, 48 प्रतिशत, 70 प्रतिशत और 58 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि ये आंकड़े मजबूत उपभोक्ता मांग को दर्शाते हैं और त्योहारी सीजन के दौरान सकारात्मक व्यावसायिक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करते हैं।
गोयल ने आगे कहा कि दिवाली के त्योहार के दौरान किफायती वस्तुओं से लेकर प्रीमियम उत्पादों तक लगभग पांच करोड़ उपहारों का आदान-प्रदान हुआ, जिससे त्योहारी बिक्री में काफी योगदान मिला।
सीटीआई ने कहा कि उसने होटल और बैंक्वेट एसोसिएशन, रेस्तरां और मॉल एसोसिएशन, सिनेमा एसोसिएशन, शॉपिंग सेंटर एसोसिएशन, ऑटोमोबाइल डीलर एसोसिएशन, मेकअप और सैलून एसोसिएशन, टूर एंड ट्रैवल एसोसिएशन, मार्केट एसोसिएशन और उद्योग निकायों के प्रतिनिधियों से परामर्श के बाद अपने अनुमानित व्यावसायिक अनुमान तैयार किए हैं।
व्यापारियों के संगठन ने एक बयान में कहा कि इस साल दिवाली के मौसम में स्वदेशी उत्पादों की खरीद-बिक्री पर विशेष जोर दिया जा रहा है और भारतीय निर्मित वस्तुओं की लोकप्रियता उपभोक्ताओं के बीच बढ़ रही है।
संगठन ने यह भी कहा कि जीएसटी सुधारों से भारतीय उत्पादों को अधिक मान्यता मिली है और स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्तुओं की मांग मजबूत हुई है।
घर की सजावट के सामान, दिवाली पूजा की सामग्री, मिट्टी के दीये, देवी-देवताओं की मूर्तियां, दीवार पर टांगने वाली वस्तुएं, हस्तशिल्प और शुभ-लाभ और ओम जैसे पारंपरिक शुभ प्रतीक, और उन उत्पादों में शामिल हैं जिनकी मांग देखी जा रही है। देवी-लक्ष्मीो और भगवान गणेश की पूजा से संबंधित वस्तुएं, साथ ही स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और कुशल श्रमिकों द्वारा निर्मित सजावटी उत्पाद भी त्योहारी बिक्री में महत्वपूर्ण योगदान देने की उम्मीद है।
इनके अलावा, कई अन्य क्षेत्रों (एफएमसीजी, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं, खिलौने, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिजली के उपकरण, रसोई के बर्तन, उपहार वस्तुएं, मिठाई, स्नैक्स, घरेलू साज-सज्जा, वस्त्र, रेडीमेड कपड़े, फैशन परिधान, जूते, घड़ियां, फर्नीचर, सौंदर्य प्रसाधन, सौंदर्य उत्पाद, मोबाइल फोन और सहायक उपकरण शामिल) में भी अच्छी बिक्री होने की उम्मीद है।
त्योहारी मांग पैदा करने वाले अन्य क्षेत्रों में बर्तन, निर्माण सामग्री, लकड़ी और प्लाईवुड, पेंट और कांच, दूध और डेयरी उत्पाद, किराना, अनाज, खाद्य तेल, दालें, साइकिल और सहायक उपकरण, दीवार घड़ियां, गोटा-जरी, साड़ियाँ और पोशाक सामग्री शामिल हैं।
सीटीआई ने कहा कि दिल्ली के व्यापारी त्योहारी सीजन में लगभग 80,000 करोड़ रुपए के कारोबार की उम्मीद कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 1 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच रैलियां और विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय राजधानी के व्यापारियों को लगभग 14,000 करोड़ रुपए का अनुमानित व्यापारिक नुकसान हुआ।
गोयल ने कहा कि अब व्यावसायिक गतिविधियां गति पकड़ रही हैं और त्योहारी खरीदारी के लिए दिल्ली भर के बाजारों में भारी भीड़ उमड़ रही है।
उन्होंने बताया कि चांदनी चौक, दरीबा कलां, मालीवाड़ा, सदर बाजार, कमला नगर, अशोक विहार, मॉडल टाउन, शालीमार बाग, वज़ीरपुर, पीतमपुरा, राजौरी गार्डन, साउथ एक्सटेंशन, ग्रेटर कैलाश, ग्रीन पार्क, यूसुफ सराय, लाजपत नगर, प्रीत विहार, शाहदरा और लक्ष्मी नगर जैसे बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही में वृद्धि देखी जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न कंपनियों के ऑटोमोबाइल शोरूम भी त्योहारी अवधि के दौरान अच्छी बिक्री दर्ज कर रहे हैं।
ग्राहक मोबाइल फोन, उपहार, सजावटी सामान, सूखे मेवे, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू साज-सज्जा सहित कई तरह के उत्पाद खरीद रहे हैं, जो राष्ट्रीय राजधानी में खरीदारी गतिविधियों में सुधार का संकेत है।
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