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Saturday,28-March-2026
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भारत में 5 वर्षों में 33 करोड़ 5जी स्मार्टफोन सब्सक्रिप्शन होगा

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5G

भारत में अगले पांच वर्षों में लगभग 33 करोड़ 5जी स्मार्टफोन सब्सक्रिप्शन होंगे, जो देश में लगभग 26 प्रतिशत मोबाइल सब्सक्रिप्शन का प्रतिनिधित्व करेंगे। बुधवार को एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। स्वीडिश दूरसंचार दिग्गज एरिक्सन की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर, 5जी मोबाइल सब्सक्रिप्शन 2021 के अंत तक 58 करोड़ से अधिक हो जाएगा, जो हर दिन अनुमानित 10 लाख नए 5जी मोबाइल सब्सक्रिप्शन द्वारा संचालित होगा।

भारत में प्रति स्मार्टफोन यूजर औसत ट्रैफिक 2019 में 13 जीबी प्रति माह से बढ़कर 2020 में 14.6 जीबी प्रति माह हो गया है।

एरिक्सन मोबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार, भारत क्षेत्र में प्रति स्मार्टफोन औसत ट्रैफिक विश्व स्तर पर दूसरे स्थान पर है और इसके 2026 में प्रति माह लगभग 40 जीबी तक बढ़ने का अनुमान है।

एरिक्सन इंडिया के प्रमुख नितिन बंसल ने एक बयान में कहा, कोविड-19 ने भारत के डिजिटल परिवर्तन को गति दी है, क्योंकि अधिक से अधिक उपभोक्ता डिजिटल सेवाओं पर भरोसा करते हैं, चाहे वह अपने व्यवसाय या व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजिटल भुगतान हो, दूरस्थ स्वास्थ्य परामर्श हो, ऑनलाइन खुदरा हो या फिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हो।

दक्षिण पूर्व एशिया, ओशिनिया और भारत, एरिक्सन के लिए नेटवर्क सॉल्यूशंस के प्रमुख बंसल ने कहा, भारत क्षेत्र में प्रति स्मार्टफोन औसत ट्रैफिक विश्व स्तर पर दूसरे स्थान पर है और 2026 में इसके प्रति माह लगभग 40 जीबी तक बढ़ने का अनुमान है।

2021 की पहली तिमाही के दौरान 5जी-सक्षम डिवाइस के साथ 5जी सब्सक्रिप्शन में सात करोड़ की वृद्धि हुई है।

2026 के अंत तक लगभग 3.5 अरब 5जी सब्सक्रिप्शन और 60 प्रतिशत 5जी जनसंख्या कवरेज का अनुमान है।

व्यापार

लगातार पांचवें हफ्ते गिरा शेयर मार्केट, वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव में बाजार

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मुंबई, 28 मार्च : लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के चलते लगातार पांचवें हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली।

आखिरी कारोबारी दिन यह 2.09 प्रतिशत गिरकर 22,819.60 पर बंद हुआ। हालांकि सप्ताह के दौरान निफ्टी50 में 0.52 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई, जबकि इसके पिछले हफ्ते इसमें गिरावट देखने को मिली थी। पिछले एक महीने में निफ्टी 8.23 प्रतिशत गिर चुका है।

वहीं बीएसई सेंसेक्स शुक्रवार को 1,690.23 अंक यानी 2.25 प्रतिशत गिरकर 73,583.22 पर बंद हुआ। पूरे हफ्ते में इसमें 1.94 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जबकि पिछले एक महीने में इसमें 8.29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

पूरे हफ्ते बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा और इंडेक्स पर दबाव दिखा, हालांकि बीच-बीच में रिकवरी की कोशिश भी हुई।

निफ्टी बैंक ने बाजार से कमजोर प्रदर्शन किया और शुक्रवार को 2.67 प्रतिशत गिरकर 52,274 के करीब बंद हुआ। पूरे हफ्ते में इसमें करीब 2.16 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई।

बाजार पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का रहा, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी और बाजार घटनाओं पर निर्भर बना रहा।

वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 98 से 115 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहीं, जिससे महंगाई और आर्थिक स्थिरता पर दबाव बना हुआ है।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो निफ्टी मेटल और पीएसयू बैंक सबसे ज्यादा गिरने वाले सेक्टर रहे। वहीं निफ्टी आईटी और फार्मा ही ऐसे सेक्टर रहे, जिनमें क्रमशः 1.17 प्रतिशत और 0.11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी गिरावट में रहे। निफ्टी मिडकैप100 में 1.38 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप100 में 0.63 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

इस दौरान भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ और डॉलर के मुकाबले 94 के पार चला गया, जिसका कारण महंगा कच्चा तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक जोखिम कम नहीं होता, तब तक बाजार सीमित दायरे में ही रहेगा और उतार-चढ़ाव बना रहेगा। हालांकि घरेलू निवेश और तनाव में कमी आने पर बाजार को सपोर्ट मिल सकता है।

फिलहाल निफ्टी 22,850-22,750 के स्तर पर स्थिर होने की कोशिश कर रहा है। ऊपर की तरफ 23,000-23,100 का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

बैंक निफ्टी के लिए 52,000-51,800 का स्तर अहम सपोर्ट है, जबकि ऊपर की तरफ 53,000-53,600 का स्तर रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बाजार में जोरदार बिकवाली जारी रखी और हफ्ते में करीब 25,000-30,000 करोड़ रुपए की निकासी की। मार्च में अब तक यह आंकड़ा 1.13 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है, जो वित्त वर्ष 2026 में सबसे बड़ी मासिक बिकवाली है।

हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने मजबूती से खरीदारी की और हफ्ते में 25,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया, जिससे बाजार को कुछ सपोर्ट मिला।

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राजनीति

भारत के पास 60 दिनों का कच्चे तेल का भंडार, एलपीजी की एक महीने की पूरी व्यवस्था: सरकार

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नई दिल्ली, 26 मार्च : सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट कहा कि भारत में पेट्रोलियम और एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे ‘जानबूझकर अफवाह और गलत जानकारी फैलाने वाले अभियान’ से गुमराह न हों, जिनका उद्देश्य बेवजह डर पैदा करना है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि भारत के पास कुल 74 दिनों की भंडारण क्षमता है और फिलहाल करीब 60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पाद और रणनीतिक भंडारण शामिल हैं, जबकि ‘हम मध्य पूर्व संकट के 27 वें दिन में हैं’। इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा कि देश के सभी खुदरा ईंधन आउटलेट्स के पास पर्याप्त मात्रा में ईंधन मौजूद है।

सरकार ने एक बयान में कहा कि देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है। हर नागरिक के लिए लगभग दो महीने तक की सप्लाई सुनिश्चित है, चाहे वैश्विक हालात कैसे भी हों।

इसके अलावा, अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की खरीद भी पहले से तय कर ली गई है। सरकार ने कहा कि भारत आने वाले कई महीनों तक पूरी तरह सुरक्षित है और भंडार कम होने जैसी बातें पूरी तरह गलत हैं।

दुनिया के कई देशों में जहां ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं, राशनिंग लागू की जा रही है और पेट्रोल पंप बंद हो रहे हैं, वहीं भारत में ऐसी कोई स्थिति नहीं है। सरकार ने कहा कि कुछ जगहों पर घबराहट में खरीदारी सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहों के कारण हुई है।

सरकार ने यह भी बताया कि तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों को मिलने वाला क्रेडिट बढ़ाकर 3 दिन कर दिया है, ताकि किसी भी पंप पर कामकाजी पूंजी की कमी के कारण ईंधन की कमी न हो।

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद भारत अब 41 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल मंगा रहा है और पहले से ज्यादा सप्लाई मिल रही है। देश की सभी रिफाइनरी 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं और अगले 60 दिनों की सप्लाई पहले से तय है।

एलपीजी को लेकर भी सरकार ने कहा कि कोई कमी नहीं है। घरेलू उत्पादन 40 प्रतिशत बढ़ाकर रोजाना 50 टीएमटी कर दिया गया है, जबकि कुल जरूरत लगभग 80 टीएमटी है। यानी अब आयात की जरूरत कम होकर सिर्फ 30 टीएमटी रह गई है।

इसके अलावा, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से 800 टीएमटी एलपीजी पहले ही भारत के लिए भेजा जा चुका है, जो देश के 22 आयात टर्मिनलों पर पहुंचेगा। सरकार के अनुसार, कम से कम एक महीने की एलपीजी सप्लाई पूरी तरह सुनिश्चित है और आगे भी लगातार व्यवस्था की जा रही है।

तेल कंपनियां रोजाना 50 लाख से ज्यादा सिलेंडर की डिलीवरी कर रही हैं। साथ ही, ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई 50 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है।

सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को भी बढ़ावा दे रही है, क्योंकि यह सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर है। भारत रोजाना 92 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति माह (एमएमएससीएमडी) गैस खुद पैदा करता है, जबकि कुल जरूरत 191 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति माह है, जिससे भारत एलपीजी की तुलना में गैस पर आयात के मामले में काफी कम निर्भर है।

देश में पीएनजी नेटवर्क भी तेजी से बढ़ा है। 2014 में जहां 57 क्षेत्र थे, वहीं अब 300 से ज्यादा क्षेत्रों में यह सुविधा पहुंच चुकी है। वहीं घरेलू पीएनजी कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ से ज्यादा हो गए हैं।

सरकार ने साफ किया है कि पीएनजी को बढ़ावा एलपीजी की कमी के कारण नहीं दिया जा रहा है, बल्कि यह एक बेहतर और सस्ता विकल्प है। एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है।

मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे ईंधन और गैस से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ सरकारी आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।

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व्यापार

भारतीय शेयर बाजार में लौटी रौनक; सेंसेक्स 1,372 अंक चढ़कर बंद, निवेशकों ने कमाए करीब 8 लाख करोड़ रुपए

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मुंबई, 24 मार्च : सोमवार की बड़ी गिरावट के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली और घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क निफ्टी और सेंसेक्स 1.5 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ गए।

ऑटो और बैंक शेयरों ने बाजार को समर्थन दिया, जिससे दोनों प्रमुख बेंचमार्क अपने दिन के उच्चतम स्तर के करीब बंद हुए। दोनों पक्षों के विरोधाभासी बयानों के बीच अमेरिका-ईरान युद्ध में तनाव कम होने की उम्मीद से निवेशकों में जोखिम भावना में सुधार हुआ।

बाजार बंद होने के समय एनएसई निफ्टी50 399.75 अंक या 1.78 प्रतिशत बढ़कर 22,912.40 पर था, तो वहीं बीएसई सेंसेक्स 1.89 प्रतिशत या 1,372.06 अंकों की बढ़त के साथ 74,068.45 पर था।

इंट्रा-डे कारोबार में सेंसेक्स 74,212.47 पर खुलकर एक समय 74,489.39 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी50 22,878.45 पर खुलकर एक समय 23,057.30 को टच कर गया था।

व्यापक बाजारों ने बेंचमार्क सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप में जहां 2.60 प्रतिशत की तेजी आई, तो वहीं निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.63 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो ऑटो सेक्टर में 2.43 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। वहीं निफ्टी मीडिया (3.45 प्रतिशत की तेजी) और निफ्टी बैंक सेक्टर (2.27 प्रतिशत की तेजी) ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। इसके अलावा, निफ्टी आईटी में 1.72 प्रतिशत तो निफ्टी एफएमसीजी में 1.25 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

निफ्टी50 में इंडिगो और एलएंडटी के शेयरों में सबसे ज्यादा क्रमशः 5.49 प्रतिशत और 5.17 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई। इसके बाद बजाज फाइनेंस, इटरनल, एशियन पेंट्स और अपोलो हॉस्पिटल के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली, जबकि कोल इंडिया, पावरग्रिड, सन फार्मा और सिप्ला के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

बाजार में आई इस तेजी से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में 7.74 लाख करोड़ रुपए की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह पहले (सोमवार) के 415.11 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 422.85 लाख करोड़ रुपए हो गया। यानी एक ही दिन में निवेशकों को करीब 8 लाख करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ।

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