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Sunday,31-August-2025
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अफगानिस्तान में उथल-पुथल के बीच भारत को दक्षिण एशिया पर ध्यान देना चाहिए

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अफगानिस्तान की पराजय से उत्पन्न एक तेजी से अस्थिर और अनिश्चित भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच, भारत को दक्षिण एशिया, विशेष रूप से बांग्लादेश, भूटान, नेपाल पर अपना ध्यान बढ़ाने की आवश्यकता है, जिसका उद्देश्य व्यापार, सुरक्षा और खुफिया जानकारी साझा करने सहित क्षेत्रों में अधिक सहयोग होना चाहिए।

एक शांतिपूर्ण दक्षिण एशिया क्षेत्र के देशों के लिए आर्थिक विकास और समग्र स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

जबकि वैश्विक समुदाय की निगाहें अफगानिस्तान पर टिकी हैं, दक्षिण एशियाई देशों को इसे आपस में जुड़ाव बढ़ाने के अवसर के रूप में उपयोग करना चाहिए और भारत को इस ब्लॉक को मजबूत करने में एक विस्तारित भूमिका निभानी चाहिए, क्योंकि अधिकांश देश तालिबान की वापसी के निहितार्थ को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ अफगानिस्तान का पतन भारत के लिए एक सबक है। नई दिल्ली को जल्द से जल्द अपनी विदेश नीति पर फिर से विचार करना चाहिए और इसमें दक्षिण एशियाई क्षेत्र को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

नेपाल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज के निदेशक भास्कर कोइराला ने इंडिया नैरेटिव को बताया, “नेपाल और भारत के पास वैश्विक इतिहास के इस महत्वपूर्ण मोड़ पर अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का एक अनूठा अवसर है, जब इतने सारे प्रणालीगत (राजनीतिक, तकनीकी, सामाजिक आदि) परिवर्तन क्षेत्रीय और वैश्विक रुझानों को प्रभावित कर रहे हैं।”

कोइराला ने कहा, “इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि भारत के साथ संबंध एक साधारण कारण के लिए अद्वितीय हैं, जिसका मतलब है 1800 किलोमीटर से अधिक खुली सीमा।”

दरअसल हाल ही में भाजपा के विदेश मामलों के विभाग के प्रमुख विजय चौथवाले ने काठमांडू का दौरा किया और नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा समेत तमाम शीर्ष नेताओं से मुलाकात की।

द इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स-एक अमेरिकी ऑनलाइन प्रकाशन ने उल्लेख किया कि चौथवाले की हाल की काठमांडू यात्रा और शीर्ष नेताओं के साथ बैठकें पर संभवत: जनता ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन यह भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय संबंधों को तेजी से शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

हालांकि अफगानिस्तान में विकास पर ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि उस देश में राजनीतिक रूपरेखा का भारत पर सीधा असर पड़ेगा।

कई रिपोर्टों ने पहले ही सुझाव दिया है कि एक अस्थिर अफगानिस्तान दुनिया भर में आतंकवादी खतरे पैदा करेगा।

पाकिस्तान के अलावा, रूस और चीन भी तालिबान 2.0 के तहत अफगानिस्तान के साथ जुड़ने के लिए तैयार हैं। देश में सरकार बनने के तुरंत बाद ईरान और तुर्की द्वारा तालिबान को मान्यता देने की भी उम्मीद है।

भारत की स्थिति मुश्किल है। इसने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में करीब 3 अरब डॉलर खर्च किए हैं। यदि नई दिल्ली, तालिबान के साथ पूरी तरह से अलग होने का फैसला करता है, तो यह देश में अब तक अर्जित की गई सद्भावना को खो देगर, जबकि दूसरों को युद्धग्रस्त देश के पुनर्निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने की इजाजत दे देगा।

सूत्रों ने बताया कि भारत ने फिलहाल वेट एंड वॉच की नीति अपनाई है। एक अंदरूनी सूत्र ने कहा, “एक फैसला (अफगानिस्तान पर) समय आने पर लिया जाएगा।”

अंतरराष्ट्रीय समाचार

जेलेंस्की रूस के साथ युद्ध को ‘लगभग तुरंत’ खत्म कर सकते हैं : ट्रंप

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TRUMP

वाशिंगटन, 18 अगस्त। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की रूस के साथ युद्ध को लगभग तुरंत खत्म करने का विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि, रूस के कब्जे वाले क्रीमिया को वापस लेना या नाटो में शामिल होना उनके लिए संभव नहीं है।

ट्रंप ने रविवार को अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर कहा, “यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की यदि चाहें तो रूस के साथ युद्ध को लगभग तुरंत समाप्त कर सकते हैं, या फिर वे लड़ाई जारी रख सकते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि अब ओबामा के समय (12 साल पहले) की तरह क्रीमिया वापस नहीं मिलेगा, और यूक्रेन नाटो में शामिल नहीं होगा।

जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ बेहद महत्वपूर्ण वार्ता की पूर्व संध्या पर, राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में स्पष्ट कर दिया है कि यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के लिए जेलेंस्की को रूस की कुछ शर्तों पर सहमत होना होगा।

इन शर्तों में दो मुख्य बातें हैं: यूक्रेन क्रीमिया रूस को दे दे (जिसे रूस ने 2014 में अपने साथ मिला लिया था) और कभी नाटो में शामिल न हो। ये वही शर्तें हैं जो रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने युद्ध खत्म करने के लिए रखी हैं।

यूरोपीय नेता, जो सोमवार को जेलेंस्की के साथ व्हाइट हाउस जा रहे हैं, वह इस बात को लेकर चिंतित हैं कि ट्रंप इस मुलाकात में जेलेंस्की पर दबाव डाल सकते हैं ताकि वे पुतिन की अलास्का शिखर सम्मेलन में रखी शर्तों को मान लें।

वे ट्रंप से यह जानना चाहते हैं कि शांति समझौते में रूस क्या छोड़ सकता है और भविष्य में अमेरिका यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी में क्या भूमिका निभाएगा।

ट्रंप ने जेलेंस्की को भेजे अपने संदेश के बाद लिखा, “कल व्हाइट हाउस में बड़ा दिन है। इतने सारे यूरोपीय नेता एक साथ कभी नहीं आए। उनकी मेजबानी करना मेरे लिए सम्मान की बात है!!!”

यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और नाटो महासचिव मार्क रुटे सोमवार को जेलेंस्की के साथ व्हाइट हाउस की यात्रा में शामिल होंगे।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

भारत ने ट्रंप-पुतिन की बैठक का किया स्वागत, कहा- संवाद और कूटनीति से ही शांति की राह संभव

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नई दिल्ली, 16 अगस्त। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अलास्का में हुई बैठक पर भारत की पहली प्रतिक्रिया आई। भारत ने कहा कि संवाद और कूटनीति से ही शांति की राह बनेगी।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि भारत अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शिखर सम्मेलन का स्वागत करता है। शांति की दिशा में उनका नेतृत्व अत्यंत सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि भारत शिखर सम्मेलन में हुई प्रगति की सराहना करता है। आगे का रास्ता केवल संवाद और कूटनीति से ही निकल सकता है। दुनिया यूक्रेन में संघर्ष का शीघ्र अंत देखना चाहती है।

अलास्का में ट्रंप और पुतिन के बीच करीब तीन घंटे तक बैठक चली। इसके बाद यूएस राष्ट्रपति वाशिंगटन लौट गए। इससे पहले ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा कि वह नाटो नेताओं, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और अन्य संबंधित अधिकारियों को बैठक में हुई चर्चाओं के बारे में जानकारी देने की योजना बना रहे हैं।

वहीं, अलास्का के एंकोरेज से मास्को रवाना होने से पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने फोर्ट रिचर्डसन मेमोरियल कब्रिस्तान का दौरा किया, जहां उन्होंने सोवियत संघ के सैनिकों की कब्रों पर फूल चढ़ाए। ये कब्रें उन सोवियत पायलटों और नाविकों को श्रद्धांजलि हैं, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान शहीद हो गए थे।

ट्रंप के साथ हुई बैठक को लेकर पुतिन ने कहा कि हमारी बातचीत रचनात्मक और परस्पर सम्मान के माहौल में हुई। उन्होंने एक पड़ोसी के रूप में ट्रंप का स्वागत किया और उनके साथ बहुत अच्छे सीधे संपर्क स्थापित किए। साथ ही उन्होंने ट्रंप को साथ मिलकर काम करने और बातचीत में एक दोस्ताना और भरोसेमंद माहौल बनाए रखने के लिए धन्यवाद दिया। खास बात यह है कि दोनों पक्ष परिणाम हासिल करने के लिए दृढ़ थे। हमारी बातचीत सकारात्मक रही।

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ट्रंप, पुतिन ने यूक्रेन पर तीन घंटे की बातचीत के बाद बड़ी सफलता की घोषणा की

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न्यूयॉर्क, 16 अगस्त। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को अलास्का के एंकोरेज में तीन घंटे की वार्ता के बाद बड़ी सफलता की घोषणा की।

ट्रंप ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि हम जिस समझौते पर पहुंचे हैं, वह हमें उस लक्ष्य (समाधान खोजने) के और करीब लाने में मदद करेगा और यूक्रेन में शांति का मार्ग प्रशस्त करेगा। मुझे लगता है कि हमारी बैठक बहुत ही उपयोगी रही। ऐसे कई मुद्दे थे जिन पर हम (राष्ट्रपति पुतिन और मैं) सहमत हुए।”

यह समझौता भारत के लिए भी महत्वपूर्ण होगा क्योंकि यूएस ने रूसी तेल खरीदने पर भारत पर 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क की घोषणा की है।

हालांकि, अभी किसी भी नेता ने समझौते का कोई विवरण नहीं दिया और न ही यह बताया कि युद्धविराम होगा या नहीं।

ट्रंप ने रहस्यमय ढंग से कहा, “कुछ बड़े समझौते ऐसे हैं जिन तक हम अभी तक नहीं पहुंच पाए हैं, लेकिन हमने कुछ प्रगति की है। एक समझौता शायद सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन हमारे पास उस तक पहुंचने की बहुत अच्छी संभावना है। हम वहां तक नहीं पहुंच पाए, लेकिन हमारे पास वहां पहुंचने की बहुत अच्छी संभावना है।”

उन्होंने कहा, “मैं नाटो और उन सभी लोगों को फोन करूंगा जिन्हें मैं उपयुक्त समझता हूं, और निश्चित रूप से, राष्ट्रपति (वोलोदिमिर) जेलेंस्की को फोन करके उन्हें आज की बैठक के बारे में बताऊंगा।”

शिखर सम्मेलन में जाते हुए, ट्रंप ने कहा कि वह यूक्रेन की ओर से बातचीत नहीं करेंगे, और समझौता करना जेलेंस्की पर निर्भर है।

उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “इसलिए जब तक समझौता नहीं हो जाता, तब तक कोई समझौता नहीं है।”

दोनों राष्ट्रपतियों ने पत्रकारों के सवालों के जवाब नहीं दिए।

पुतिन ने कहा, “हमें टकराव से बातचीत की ओर बढ़ने के लिए स्थिति में सुधार करना होगा।”

उन्होंने कहा, “इन परिस्थितियों में यह कितना भी अजीब लगे, हमारी (रूस और यूक्रेन की) जड़ें एक ही हैं और जो कुछ भी हो रहा है वह हमारे लिए एक त्रासदी और एक भयानक घाव है। इसलिए, देश ईमानदारी से इसे समाप्त करने में रुचि रखता है।”

शिखर सम्मेलन की शुरुआत में पहले से तय तीन चरणों को बदलकर, वे सीधे दूसरे चरण में चले गए। इस चरण में ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और विदेश मंत्री मार्को रुबियो, और पुतिन के विदेश नीति सलाहकार यूडी उषाकोवा, रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव, और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने हिस्सा लिया।

ऐसा नहीं लग रहा था कि अधिकारियों के साथ तीसरे चरण का लंच हो रहा था। ट्रंप ने पुतिन का रेड कार्पेट पर स्वागत किया और लिमोजीन में बैठते ही उन्होंने दोस्ताना अंदाज में बातचीत जारी रखी।

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