अंतरराष्ट्रीय समाचार
अगर कमला हैरिस निर्वाचित हुईं तो बाइडन की बॉस होंगी: ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अगर पूर्व उपराष्ट्रपति जो बाइडन और कैलिफोर्निया की सीनेटर कमला हैरिस उन्हें हरा देते हैं और शीर्ष पद पर काबिज हो जाते हैं, तो हैरिस बाइडन की बॉस होंगी।
गौरतलब है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बाइडन ने भारतीय-जमैकन मूल की कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में चुना है।
बाइडन को कई बार मानसिक रूप से कमजोर व थका हुआ बता चुके ट्रंप ने सोमवार को सवालयिा लहजे में कहा, ” क्या आप बाइडन और उनकी बॉस कमला हैरिस की उन्मादी समाजवादी नीतियों के तहत हमारी अर्थव्यवस्था को कुचलना चाहते हैं?”
विस्कॉन्सिन के ओशकोश में एक रैली में बोलते हुए, ट्रंप ने बाइडन की मानसिक स्थिति का उल्लेख किया और कहा, “मानसिक तौर पर वह थक गए हैं।”
बाइडन के गलत बोलने के उदाहरणों और खुला प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने से इनकार करने के बाद, ट्रंप ने हैरिस और हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी पर निशाना साधा।
निर्वाचित होने पर, बाइडन जो जनवरी 2012 में 78 साल के हो जाएंगे, राष्ट्रपति पद संभालने वाले सबसे उम्रदराज व्यक्ति होंगे, जबकि हैरिस 56 वर्ष की होंगी।
यह कहने के बाद कि हैरिस ‘बॉस’ होंगी, ट्रंप ने फिर उन्हें निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी की प्राइमरी (आंतरिक चुनाव) शर्म के कारण छोड़ दी थी, जिसमें उनके समर्थन में मतदान संख्या 14 प्रतिशत से 2 प्रतिशत पर पहुंच गई।
उन्होंने हैरिस को औसत दर्जे की और गुस्सैल मिजाज महिला कहा।
ट्रंप ने कहा कि बाइडन समाजवाद के लिए ट्रोजन हॉर्स है, जिनका कोई सुराग नहीं है, लेकिन उनके आस-पास के लोग सख्त हैं और वे स्मार्ट हैं । उन्होंने कहा वे हैरिस की तरह ही औसत दर्जे के और गुस्सैल हैं।
ट्रंप ने नस्लीय असंवेदनशीलता के लिए हैरिस की आलोचना की, जब वह पार्टी के नामांकन के लिए उनके खिलाफ लड़ रही थी। ट्रंप ने कहा, “किसी ने भी कमला जितना बुरा व्यवहार बाइडन के साथ नहीं किया।”
उन्होंने कहा, “वह (बहस) मंच पर किसी भी मुकाबले में बुरी थीं। किसी ने भी बाइडन के साथ बुरा व्यवहार नहीं किया या उनके सम्मान में कमी नहीं दिखाई। कमला के मन में उनके लिए कोई सम्मान नहीं था। अचानक वह कह रहा है कि वह बहुत अच्छे हैं। वह कुछ समय पहले ऐसा महसूस नहीं करती थी।”
ट्रंप ने कहा कि अगर बाइडन और हैरिस जीत गए, तो अमेरिका पर चीन की चलेगी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
मक्का के पास ड्रोन हमले पर भारत ने जताई गहरी चिंता, क्षेत्र में जल्द शांति बहाली की उम्मीद

भारत ने सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का के पास हुए ड्रोन हमले पर बुधवार को गहरी चिंता जताते हुए क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल होने की उम्मीद व्यक्त की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में जारी बयान में कहा कि मक्का के पास हुई यह घटना शहर के धार्मिक महत्व को देखते हुए विशेष रूप से चिंताजनक है।
उन्होंने कहा, “मक्का के पास हुए ड्रोन हमले पर हमें गहरी चिंता है। भारत सऊदी अरब के संप्रभु क्षेत्र पर हमलों और नागरिकों के जीवन तथा बुनियादी ढांचे को खतरे में डालने वाली हर कार्रवाई की कड़ी निंदा करता है। मक्का के पास हुई यह घटना विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि दुनिया भर के मुसलमानों के लिए इस शहर का अत्यंत पवित्र महत्व है।”
जायसवाल ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल होगी।
विदेश मंत्रालय का यह बयान उस घटना के बाद आया है, जब सऊदी अरब की रॉयल एयर डिफेंस फोर्स ने मंगलवार शाम मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले हूती विद्रोहियों द्वारा दागे गए एक ड्रोन को मार गिराया।
यमन में वैध सरकार की बहाली के लिए गठित गठबंधन के आधिकारिक प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने बताया कि मंगलवार शाम करीब 6:50 बजे रॉयल सऊदी एयर डिफेंस फोर्स ने मक्का के दक्षिणी क्षेत्र में इस ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया।
अल-मालिकी ने कहा कि मक्का को निशाना बनाने की यह दूसरी कोशिश है। इससे पहले 27 जुलाई 2017 को बैलिस्टिक मिसाइल से भी ऐसा प्रयास किया गया था। उन्होंने इसे “आतंकी और शर्मनाक कृत्य” बताते हुए कहा कि यह दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को भड़काने और उमराह यात्रियों में दहशत फैलाने की कोशिश थी।
उन्होंने कहा कि दो पवित्र मस्जिदों और उमराह यात्रियों की सुरक्षा “रेड लाइन” है और गठबंधन बल हूती मिलिशिया की ऐसी गतिविधियों के खिलाफ आवश्यक और कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
विदेश मंत्री जयशंकर का दो दिवसीय भूटान दौरा, राजा और प्रधानमंत्री से करेंगे मुलाकात

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर 16 और 17 सितंबर को भूटान दौरे पर रहेंगे। उनकी यह दो दिवसीय यात्रा भूटान के विदेश और बाहरी व्यापार मंत्री ल्योंपो डीएन ढुंग्येल के निमंत्रण पर हो रही है।
एमईए के अनुसार, अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर भूटान के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा, उनकी भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से शाही मुलाकात भी तय है। वे भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से भी मुलाकात करेंगे।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा भारत और भूटान के बीच नियमित उच्चस्तरीय संपर्क की परंपरा को आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद घनिष्ठ मित्रता तथा सहयोग को और मजबूत करने के लिए की जा रही है।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और भूटान के बीच लगातार उच्चस्तरीय और संस्थागत स्तर पर बातचीत व सहयोग जारी है। दोनों देश कूटनीति, विकास और लोगों से जुड़े कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।
इससे पहले सोमवार को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने थिम्पू में भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मुलाकात की। यह उनके तीन दिवसीय भूटान दौरे की शुरुआत थी। ज्ञानेश कुमार भूटान के राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह में भी हिस्सा लेने वाले हैं।
भूटान के राजा ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की। भूटान की तीन दिन की यात्रा पर आए भारतीय मुख्य चुनाव आयुक्त को आज शाही मुलाकात का अवसर दिया गया।”
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ज्ञानेश कुमार की यात्रा का उद्देश्य भारत के चुनाव आयोग और भूटान के चुनाव आयोग के बीच संस्थागत सहयोग को और मजबूत करना है।
उनकी यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम मंगलवार को पारो स्थित जिग्मे सिंग्ये वांगचुक स्कूल ऑफ लॉ में आयोजित भूटान के राष्ट्रीय मतदाता दिवस का समारोह था।
भारत और भूटान समुदाय स्तर पर विकास परियोजनाओं में भी मिलकर काम कर रहे हैं। अगस्त में भूटान स्थित भारतीय दूतावास ने बताया था कि झेमगंग जिले के पानबांग क्षेत्र में तीन हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स (एचआईसीडीपी) का उद्घाटन किया गया।
भूटान में भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “भारत के सहयोग से पूरी की गई ये एचआईसीडीपी परियोजनाएं कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचने में मदद करेंगी, लोगों की आजीविका बेहतर करेंगी और पानबांग क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाएंगी।”
जयशंकर की यह यात्रा भारत और भूटान को अपने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करने और भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा करने का अवसर देगी। उनकी भूटान के शीर्ष नेतृत्व के साथ होने वाली बैठकों में दोनों देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर रहने की उम्मीद है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
यमन में जारी लड़ाई की वजह से लोग घर छोड़ने को मजबूर : संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) से जुड़े मानवीय सहायता संगठनों ने चेतावनी दी है कि यमन में जारी लड़ाई लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर कर रही है। इससे आम नागरिकों की मौत और घायल होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। वहीं, पहले से दबाव में चल रहे राहत कार्यों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने सोमवार (स्थानीय समयानुसार) बताया कि सितंबर की शुरुआत से अब तक यमन में फिर से भड़की हिंसा के कारण कम से कम 1.25 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने इस महीने के पहले दो हफ्तों में 40 आम नागरिकों के हताहत होने की पुष्टि की है। इनमें 8 लोगों की मौत हुई है और 32 लोग घायल हुए हैं। मरने वालों में आधे और घायल होने वालों में आधे से अधिक महिलाएं और बच्चे हैं।
ओसीएचए ने कहा कि बेहद मुश्किल हालात के बावजूद संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठन राहत कार्य जारी रखे हुए हैं। शनिवार तक हजारों परिवारों को सहायता पहुंचाई जा चुकी थी। हालांकि, राहत सामग्री की भारी कमी हो रही है और उपलब्ध फंडिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
ओसीएचए ने कहा, “सुरक्षा संबंधी जोखिमों के कारण राहत एजेंसियों की आवाजाही और सहायता पहुंचाने का काम गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।”
संस्था ने बताया कि यमन के पश्चिमी तट के कई इलाकों में मानवीय सहायता पहुंचाने और राहत कर्मियों की आवाजाही फिलहाल रुकी हुई है। कई महत्वपूर्ण सड़कें या तो बंद हैं या उन पर यात्रा करना संभव नहीं है।
ओसीएचए ने एक बार फिर सभी पक्षों से अपील की कि वे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सम्मान करें और राहत सहायता को सुरक्षित तथा बिना किसी रुकावट के जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने दें।
इस महीने की शुरुआत में यमन की सरकारी सेना ने कहा था कि पश्चिमी तट पर हूती विद्रोहियों के साथ एक महीने तक चली लड़ाई में 500 से ज्यादा सैनिक मारे गए और लगभग 1,500 घायल हुए।
यह लड़ाई उस समय तेज हो गई जब हूती समूह ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब-अल-मंदब स्ट्रेट की ओर बड़े पैमाने पर बढ़त बनाने की कोशिश की।
सरकारी समर्थक नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज ने सरकारी चैनल अल-जौम्हूरिया टीवी पर जारी बयान में कहा कि ये हताहत 9 अगस्त से 10 सितंबर के बीच दर्ज किए गए।
बयान में दावा किया गया कि इस दौरान 1,000 से अधिक हूती लड़ाके मारे गए और हजारों घायल हुए। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
बयान के अनुसार, लड़ाई की शुरुआत हूती समूह की ओर से किए गए मिसाइल, ड्रोन और विस्फोटक नौकाओं से हमलों के साथ हुई थी।
इसके बाद संघर्ष लाल सागर के किनारे स्थित होदेदाह प्रांत के दक्षिणी हिस्से के हैस क्षेत्र से बढ़कर पड़ोसी ताइज़ प्रांत के कई मोर्चों तक फैल गया।
यह हताहत ऐसे समय में हुए हैं जब हूती समूह ने तीन सितंबर को एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया था, जिसने यमन के लाल सागर तट पर नियंत्रण की स्थिति को तेजी से बदल दिया।
इस अभियान के दौरान हूती लड़ाकों ने होदेदाह और पड़ोसी ताइज प्रांत के कई ऐसे क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया, जो पहले सरकार के नियंत्रण में थे।
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