खेल
टी-20 विश्व कप-2021 तय कार्यक्रम के तहत भारत में ही होगा, आईसीसी ने की पुष्टि
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने गुरुवार को इस बात की पुष्टि कर दी है कि अगला टी-20 विश्व कप भारत में ही तय कार्यक्रम के मुताबिक आयोजित किया जाएगा। 16 टीमों का टूर्नामेंट अगले साल अक्टूबर-नवंबर में खेला जाएगा। टेस्ट खेलने वाले देशों के अलावा इस विश्व कप में पापुआ न्यू गिनी, नामीबिया, नीदरलैंड्स, ओमान और स्कॉटलैंड की टीमें भी हिस्सा लेंगी।
आईसीसी प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “अभी तक भारत में टूर्नामेंट को आयोजित कराने का कार्यक्रम तय है।”
2020 और 2021 में दो लगातार टी-20 विश्व कप होने थे। 2020 विश्व कप की मेजबानी आस्ट्रेलिया को करनी थी, लेकिन कोविड-19 के कारण इसे स्थगित कर दिया गया है और अब यह टूर्नामेंट 2022 में होगा।
आईसीसी ने इसी साल अगस्त में कह दिया था कि टी-20 विश्व कप 2022 में आस्ट्रेलिया में ही आयोजित किया जाएगा।
भारत ने 2016 में टी-20 विश्व कप की मेजबानी की थी जिसे वेस्टइंडीज ने जीता था।
आईसीसी ने कहा है कि वह अगर तब तक कोविड-19 महामारी खत्म नहीं होती है तो जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
आईसीसी द्वारा जारी बयान में बीसीसीआई के सचिव जय शाह के हवाले से लिखा गया है, “टूर्नामेंट में सभी स्वास्थ संबंधी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं इस बात को सुनिश्चित करने में बीसीसीआई कोई कसर नहीं छोड़ेगी। मुझे भरोसा है कि हम हर चुनौती से पार पा लेंगे।”
राष्ट्रीय
कृषि क्षेत्र में महिलाओं को नीति निर्माण, निर्णय प्रक्रिया और नेतृत्व के पदों में अधिक भूमिका मिलनी चाहिए: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

नई दिल्ली, 12 मार्च : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को नई दिल्ली में कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन (जीसीडब्ल्यूएएस-2026) के उद्घाटन सत्र में शिरकत की और सत्र को संबोधित किया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि बुवाई, कटाई, प्रसंस्करण और फसलों को बाजार तक पहुंचाने सहित कृषि संबंधी सभी गतिविधियों में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, पशुपालन, वन उत्पादों के समुचित इस्तेमाल और कृषि आधारित उद्यमों के संचालन सहित कई क्षेत्रों में अथक परिश्रम करती हैं। कृषि अर्थव्यवस्था में महिलाओं का अमूल्य योगदान है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों में कुल छात्रों में 50 प्रतिशत से अधिक लड़कियां हैं और कई विश्वविद्यालयों में यह संख्या 60 प्रतिशत से अधिक है। ये लड़कियां शैक्षणिक दृष्टि से भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार, समाज और कृषि क्षेत्र के सभी हितधारकों का यह दायित्व है कि वे इन होनहार लड़कियों को कृषि तथा अनाज उत्पादन के क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान करने के लिए हर संभव सहायता और प्रोत्साहन दें। उन्होंने कहा कि नेतृत्व मातृत्व का अंतर्निहित गुण है। हालांकि, मातृत्व को अक्सर घर की चारदीवारी तक ही सीमित माना जाता है। हमें इस मानसिकता को दूर करना होगा और महिला किसानों को नेतृत्व प्रदान करने के लिए सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2026 को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ घोषित किया है। इस घोषणा में कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं में महिला-पुरुष आधारित असमानताओं को दूर करने और महिलाओं के लिए नेतृत्व की भूमिकाओं को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया गया है।
उन्होंने कहा कि कृषि, विशेषकर कृषि-खाद्य प्रणालियों में कार्यरत महिलाओं के नेतृत्व को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के विचार के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नीति निर्माण, निर्णय लेने और नेतृत्व पदों में महिलाओं की भूमिका अधिक होनी चाहिए। इस क्षेत्र में सभी स्तरों पर महिलाओं की अधिक भागीदारी महिला-पुरुष समानता को बढ़ावा देने वाली कृषि वृद्धि को प्रोत्साहित करेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि महिला किसानों को भूमि के औपचारिक स्वामित्व, तकनीकी ज्ञान, वित्तीय संसाधन और अन्य सहायता प्रणालियों से संबंधित मामलों में मदद मिलनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि पिछले एक दशक में भारत ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देने वाली पहलों ने कृषि में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि लोगों, पृथ्वी, समृद्धि, शांति और साझेदारी को समान महत्व देने पर वैश्विक सहमति है। उन्होंने सभी हितधारकों से आग्रह किया कि जन आयाम पर विचार और कार्य में महिला-पुरुष समानता को विशेष प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि सहित क्रियाकलापों के हर क्षेत्र में महिलाओं और पुरुषों के प्रभावी समावेशन से हम न केवल सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे बल्कि धरती को कहीं अधिक संवेदनशील और सामंजस्यपूर्ण स्थान बनाएंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वैश्विक सम्मेलन के प्रतिभागी प्रगति को गति देने और नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के मार्ग प्रशस्त करेंगे।
जीसीडब्ल्यूएस-2026 का आयोजन कृषि विज्ञान संवर्धन ट्रस्ट (टीएएएस), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान सलाहकार समूह (सीजीआईएआर) और पादप किस्मों और किसानों के अधिकारों के संरक्षण प्राधिकरण (पीपीवी एंड एफआरए) द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य महिला-पुरुष भागीदारी को मुख्यधारा में लाने के लिए नीतिगत ढांचों और इकोसिस्टम को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करना और टिकाऊ एवं समावेशी कृषि-खाद्य प्रणालियों के निर्माण में महिलाओं की अपरिहार्य भूमिका को उजागर करना है।
राष्ट्रीय
मध्य प्रदेश में गैस एजेंसियों के बाहर नजर आने लगी है लंबी कतारें

भोपाल, 12 मार्च : अमेरिका- इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर मध्य प्रदेश की एलपीजी गैस आपूर्ति पर नजर आने लगा है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें नजर आ रही हैं और उपभोक्ता इस बात को लेकर सशंकित हैं कि उन्हें गैस समय पर मिल पाएगी।
दो देशों के बीच चल रहे युद्ध के कारण दुनिया के कई देशों में पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति प्रभावित हुई है, मगर भारत में पेट्रोलियम पदार्थ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है यह दावा सरकार की ओर से किया जा रहा है। आगामी समय में किसी तरह की समस्या न आए, इसके लिए केंद्र सरकार ने कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं, वहीं मध्य प्रदेश में भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।
राज्य में कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति थामी हुई है और इसका असर सड़क किनारे चलने वाली चाय -नाश्ते की दुकान से लेकर होटल व रेस्टोरेंट पर भी पड़ रहा है। एक तरफ जहां तमाम कारोबारी कमर्शियल सिलेंडर के लिए परेशान है तो दूसरी ओर घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका आम उपभोक्ता को सताने लगी है।
यही कारण है कि उपभोक्ता ऑनलाइन के अलावा गैस एजेंसियों पर पहुंचकर नंबर लगा रहे हैं, परिणामस्वरुप गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें साफ नजर आने लगी हैं। राज्य सरकार की ओर से सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एलपीजी सिलेंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के पुख्ता इंतजाम करें।
वहीं, सरकार की ओर से दावा किया गया है कि एलपीजी उपभोक्ताओं को किसी तरह की दिक्कत नहीं आ रही है और प्रदेश में पेट्रोल डीजल और घरेलू गैस का पर्याप्त स्टॉक है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय मंत्री और अधिकारियों की समिति बनाई है जो आपूर्ति व्यवस्था पर नजर रखेगी और आवश्यक कदम उठाएगी।
वहीं कांग्रेस की ओर से लगातार गैस के बढ़ते संकट पर सवाल उठाए जा रहे हैं और आरोप लगाया जा रहा है कि सरकार आवश्यक कदम उठाने में असफल रही है। इतना ही नहीं, सच्चाई से मुंह मोड़ने की भी कोशिश कर रही है। राज्य के कई इलाकों में गैस एजेंसियों पर तो उपभोक्ताओं की कतार नजर आ रही है, मगर डीजल और पेट्रोल आम उपभोक्ता को आसानी से मिल रहा है।
राजनीति
प्रधानमंत्री घबराए हुए हैं, इसलिए सदन के अंदर नहीं आ पा रहेः राहुल गांधी

rahul
नई दिल्ली, 12 मार्च : लोकसभा में गुरुवार को विपक्ष के सांसदों ने देश में सिलेंडर संकट के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करते हुए जमकर हंगामा किया। इस दौरान विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार को जमकर घेरा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री खुद घबराए हुए हैं। वे एपस्टीन से जुड़े मामले को लेकर घबराए हुए हैं। वे सदन के अंदर नहीं आ पा रहे हैं। आपने कल देखा होगा कि प्रधानमंत्री की कुर्सी खाली पड़ी थी। अंदर नहीं आ पा रहे तो देश को कह रहे हैं कि घबराओ मत।”
सदन के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री सदन में कितनी बार उपस्थित हुए हैं? 2014 से 2024 तक के रिकॉर्ड की समीक्षा होनी चाहिए। सदन में ईद पर चांद देखने की तरह ही दिखते हैं। प्रधानमंत्री पहले दिन केवल 10 मिनट और आखिरी दिन केवल 10 मिनट के लिए उपस्थित होते हैं।”
कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा, “भारत जिसे ‘सफलतापूर्व’ रुख कहता है, हम वही चाहते हैं, लेकिन हमें कोई कार्रवाई नजर नहीं आती। ऊर्जा संकट के संबंध में यह तथाकथित सफलता कहां है? लोग परेशान हैं, होटल बंद हो रहे हैं और घरेलू बाजार बुरी तरह प्रभावित होने वाले हैं। इन चिंताओं का समाधान करना बेहद जरूरी है। उड़ानें सीमित हैं, हवाई किराए आसमान छू रहे हैं, ये वास्तविकताएं हैं फिर भी प्रधानमंत्री बिना किसी ठोस निर्णय, हस्तक्षेप या भारत सरकार की ओर से सार्थक भागीदारी के बयानबाजी करते रहते हैं।”
कांग्रेस सांसद धर्मवीर गांधी ने कहा, “हमारी अपनी जरूरतें और प्राथमिकताएं हैं और हमें अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर भी विचार करना चाहिए। वैश्विक समुदाय के सामने भारत का पक्ष रखना आवश्यक है। सरकार ने भारत की गुटनिरपेक्षता की दीर्घकालिक नीति को त्याग दिया है, जिससे विदेश मामलों में गड़बड़ी पैदा हो गई है। इससे निपटने के लिए हमें देश और अपनी पार्टी के हितों को ध्यान में रखते हुए अन्य देशों को अपना संदेश देना होगा। अगर आप विदेश यात्राओं पर नजर डालें तो मौजूदा प्रधानमंत्री ने कई दौरे किए हैं, लेकिन लोकसभा सत्र के दौरान बहुत कम समय के लिए और कोई जवाब नहीं दिया।
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