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Wednesday,01-July-2026
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मणिपुर में शांति के लिए जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया

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नई दिल्ली, 24 जून : हिंसा प्रभावित मणिपुर में शांति बहाली की मांग को लेकर 40 संगठनों के एक समूह ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान लोगों ने जातीय हिंसा पर अपनी हार्दिक संवेदना और दुख व्यक्त किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले समूहों ने राज्य के कुछ हिस्सों में जलाए गए सैकड़ों चचरें पर भी अपनी पीड़ा व्यक्त की।

समूहों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि हमारे राज्य में कानून और व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है, जहां सशस्त्र भीड़ आए दिन शासन करती है। मणिपुर के लोगों द्वारा कई दशकों में बनाई और विकसित की गई संपत्तियां कुछ ही घंटों में जलकर राख हो गई हैं। हालांकि, दुख की बात यह है कि स्थानीय अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने में अप्रभावी साबित हुए हैं, और पीड़ितों का अपने घरों को छोड़कर जाना जारी है। राज्य सरकार मणिपुर के लोगों के जीवन और संपत्ति की रक्षा करने के अपने कर्तव्य में निराशाजनक रूप से विफल रही है।

वर्तमान में, महिलाओं और बच्चों सहित 1,000 से अधिक व्यक्तियों ने असम और मिजोरम के पड़ोसी क्षेत्रों में राहत शिविरों में शरण ली है। इस बात पर जोर देना महत्वपूर्ण है कि राहत शिविरों में पनाह चाहने वाले लोग बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। उनके पास भोजन, कपड़े और साफ पानी जैसे जरूरी सामानों का अभाव है।

हालांकि, हम मृतकों के परिवारों को मुआवजे की पेशकश करने वाले तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की नियुक्ति के लिए गृह मंत्रालय द्वारा की गई पहल की सराहना करते हैं। लेकिन, जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के आयोजकों ने महसूस किया कि मौजूदा पुनर्वास पैकेज जरूरतों को पर्याप्त रूप से पूरा करने में कम है। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि स्कूलों से बच्चों के विस्थापन ने भी स्थिति को खराब कर दिया है।

ज्ञात हो कि तीन मई को मणिपुर में पहली बार हिंसा भड़कने के बाद से अब तक करीब 120 लोग मारे जा चुके हैं और 400 से ज्यादा घायल हुए हैं। इसके अलावा लगभग 50,650 पुरुष, महिलाएं और बच्चे अपने स्थान को छोड़कर दूसरे स्थानों पर शिफ्ट हुए हैं।

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भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद, सेंसेक्स 249 अंक फिसला

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भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 249.70 अंक या 0.33 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,478.67 और निफ्टी 80.50 अंक या 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,865.75 पर था।

एकतरफ लार्जकैप में बिकवाली देखी गई। वहीं, दूसरी तरफ मिडकैप और स्मॉलकैप में खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 230.40 अंक या 0.37 प्रतिशत की तेजी के साथ 61,797.70 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 190 अंक या 1.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,863.10 पर था।

सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.37 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 1.31 प्रतिशत के साथ टॉप गेनर थे। इसके अलावा, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स,निफ्टी फार्मा, निफ्टी मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी ऑटो, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी हेल्थकेयर हरे निशान में बंद हुआ। वहीं, निफ्टी आईटी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी सर्विसेज लूजर्स थे।

सेंसेक्स पैक में मारुति सुजुकी, टाइटन, बजाज फाइनेंस, इटरनल, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल, इंडिगो, ट्रेंट, एनटीपीसी और पावर ग्रिड गेनर्स थे। इन्फोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, आईटीसी, एचयूएल, एसबीआई, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, एमएंडएम, कोटक महिंद्रा बैंक, एलएंडटी, सन फार्मा, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी बैंक और बीईएल लूजर्स थे।

जानकारों के मुताबिक, घरेलू बाजार अभी कंसोलिडेशन फेस में है और मिलेजुले रुझानों के साथ सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। हालांकि, भू-राजनीतिक चिंताएं कम हुई हैं, लेकिन अमेरिका-ईरान शांति समझौते की नाजुक स्थिति का असर अभी भी बाजार की धारणा पर बना हुआ है, जिसके कारण निवेशक सतर्क बने हुए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन मिला-जुला रहा, लेकिन झुकाव गिरावट की ओर था, जिसमें आईटी सेक्टर का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। निवेशक ब्याज दरों की चाल का अंदाजा लगाने के लिए अमेरिका के आने वाले रोजगार के आंकड़ों और नए फेड चेयरमैन के बयानों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि महंगाई अभी भी टारगेट से ऊपर है, जबकि आर्थिक गतिविधियां अच्छी रफ्तार से बढ़ रही हैं।

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वित्त मंत्रालय ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए के बजट को दी मंजूरी

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वित्त मंत्रालय की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दे दी है, जिससे देश में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने का अगले चरण का रास्ता साफ हो गया है। यह जानकारी एडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट में दी गई।

इस प्रस्ताव को समिति ने पिछले हफ्ते मंजूरी दी थी और अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।

आईएसएम 2.0 प्रस्तावित बजट आईएसएम 1.0 के तहत आवंटित 76,000 करोड़ रुपए से काफी अधिक है। आईएसएम 1.0 के तहत सरकार ने चिप बनाने, असेंबली और डिजाइन से जुड़ी 10 सेमीकंडक्टर सुविधाओं को मंजूरी दी थी।

आईएसएम 2.0 से भारत की सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने के उद्देश्य से इंडस्ट्रियल गैस, स्पेशल केमिकल, कैपिटल इक्विपमेंट, एमएसएमई और सहायक सप्लायर जैसे बड़े इकोसिस्टम को मदद मिलने की उम्मीद है।

सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से भारत 2030 तक अपनी घरेलू सेमीकंडक्टर मांग का 75 प्रतिशत तक हिस्सा पूरा कर सकेगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और देश के ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का लक्ष्य भी पूरा हो सकेगा।

सरकार नई स्कीम को शुरू करने के लिए मंत्रालयों के बीच बातचीत पहले ही कर चुकी है और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार था।

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स की खपत और उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। आज भारत में 65 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स हैं और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का सालाना उत्पादन 12 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

साथ ही, देश एआई-आधारित सिस्टम, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी बना रहा है, जिनके लिए सेमीकंडक्टर चिप्स की जरूरत होती है। मांग और इनोवेशन में इस तेजी की वजह से भारत के लिए ग्लोबल सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में अपनी जगह बनाना जरूरी हो गया है।

‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के तहत 10 सेमीकंडक्टर प्लांट को मंजूरी दी गई है। इन प्लांट का निर्माण तेजी से चल रहा है। गुजरात के साणंद में एक यूनिट में पायलट प्रोडक्शन लाइन पहले ही शुरू हो चुकी है और एक साल के अंदर चार और यूनिट में प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है। एप्लाइड मैटेरियल्स, लैम रिसर्च, मर्क और लिंडे जैसी ग्लोबल कंपनियां सपोर्टिंग फैक्टरियों और सप्लाई चेन में निवेश कर रही हैं।

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तमिलनाडु में कुरुवई फसल के नुकसान के बाद डेल्टा क्षेत्र के किसानों ने विशेष राहत पैकेज की मांग की

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मेट्टूर बांध में जलस्तर कम होने के कारण इस सीजन में कम अवधि वाली धान की फसल ‘कुरुवई’ का रकबा काफी घट गया है। इसे देखते हुए कावेरी डेल्टा के किसानों ने तमिलनाडु सरकार से बढ़ते नुकसान की भरपाई के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित करने और वैकल्पिक फसलों की वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने की मांग की है।

यह मांग ऐसे समय उठी है, जब खाद्य मंत्री पी. वेंकटरामनन ने डेल्टा क्षेत्र के अपने हालिया दौरे के दौरान किसानों को पानी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए वैकल्पिक फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी।

इस सुझाव का स्वागत करते हुए किसान संगठनों ने कहा कि ऐसा बदलाव तभी सफल हो सकता है जब इसे वित्तीय सहायता, तकनीकी सहयोग और खेती की स्पष्ट रणनीति का समर्थन मिले।

किसान प्रतिनिधियों के अनुसार, इस साल ‘कुरुवई’ की खेती न हो पाने से डेल्टा जिलों में लगभग 1,125 करोड़ रुपए की आय का नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका असर केवल धान के किसानों तक ही सीमित नहीं रहेगा, क्योंकि कुरुवई की खेती न होने से धान के भूसे (जो मवेशियों के चारे का मुख्य स्रोत है) की भारी कमी हो जाएगी, जिससे पशुपालन क्षेत्र भी प्रभावित होगा।

तमिलनाडु कावेरी किसान संरक्षण संघ के सचिव स्वामीमलाई सुंदर विमलनाथन ने कहा कि मौजूदा हालात में वैकल्पिक फसलों की खेती के बारे में सरकार की सलाह सही थी, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई फसलें अपनाने से पहले किसानों को समय पर मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

उन्होंने राज्य सरकार से कृषि विशेषज्ञों, अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों की एक संयुक्त बैठक बुलाने का आग्रह किया ताकि ऐसी फसलों की पहचान की जा सके जो पानी की मौजूदा उपलब्धता और स्थानीय मिट्टी की स्थितियों के अनुकूल हों।

उन्होंने कहा कि इस तरह की बातचीत से किसानों को सही फैसले लेने और फसल खराब होने का जोखिम कम करने में मदद मिलेगी।

किसान संगठनों ने वैकल्पिक फसलों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु इनपुट सब्सिडी, अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक और विस्तार सहायता को शामिल करते हुए एक व्यापक विशेष पैकेज की भी मांग की।

उन्होंने कहा कि कई किसान मुनाफे, बाजार तक पहुंच और सरकारी समर्थन के आश्वासन के बिना खेती में बदलाव करने को लेकर हिचकिचा रहे थे।

कावेरी का पानी छोड़े जाने को लेकर अनिश्चितता और मेट्टूर जलाशय में पानी का कम स्तर पहले ही कुरुवई सीजन की योजनाओं को बाधित कर चुका है। यह डेल्टा में उगाई जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण अल्पकालिक धान फसलों में से एक है।

किसानों ने कहा कि ग्रामीण आजीविका की रक्षा करने, बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान को रोकने और पानी की कमी के बावजूद कृषि गतिविधियों को जारी रखने के लिए सरकार का तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि उचित योजना, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और पर्याप्त वित्तीय सहायता के साथ, किसान इस सीजन में सफलतापूर्वक खेती में विविधता ला सकते हैं और कुरुवई फसल में कटौती के आर्थिक प्रभाव को कम कर सकते हैं।

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