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भारत की आर्थिक मजबूती को घरेलू मांग और आकांक्षाओं से मिल रहा सपोर्ट : वित्त मंत्री सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को लोगों की आकांक्षाओं और देश के बड़े घरेलू बाजार में मांग से सहारा मिल रहा है। साथ ही, सरकार वित्तीय समावेश, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और वित्तीय अनुशासन पर फोकस कर रही है।
देश की आर्थिक राजधानी में एचएसबीसी इंडिया के ‘फर्दरिंग फाइनेंशियल इंक्लूजन’ कार्यक्रम में, सीईओ हितेंद्र दवे के साथ बातचीत के दौरान, वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि मध्यम वर्ग के विस्तार से लोगों की खरीदारी की क्षमता बढ़ी है और इससे घरेलू मांग को भी समर्थन मिला है।
वित्तीय सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार के लिए सभी के लिए बीमा सुरक्षा एक उच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
उन्होंने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) जैसी योजनाओं का जिक्र किया, जो किफायती प्रीमियम पर बीमा सुरक्षा प्रदान करती हैं। इसके साथ ही उन्होंने अटल पेंशन योजना का भी जिक्र किया, जो नागरिकों को पेंशन कवरेज देती है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2047 तक ‘सभी के लिए बीमा’ हासिल करना है और वह पूरे देश में बीमा की पहुंच बढ़ाने के लिए काम कर रही है।
वित्त मंत्री ने आगे कहा कि प्रति परिवार 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान करने वाली आयुष्मान भारत जैसी पहलों ने लोगों को अपनी संपत्ति या जायदाद बेचे बिना इलाज कराने में सक्षम बनाया है। उनके अनुसार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के विस्तार से भी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर हुई है।
उन्होंने कहा कि शासन में स्थिरता व्यवसायों को स्पष्टता और आत्मविश्वास देती है, जिससे निरंतर आर्थिक विकास में मदद मिलती है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने विश्व बैंक के उस अनुमान का जिक्र किया, जिसके अनुसार लगभग 50 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि लगातार किए गए नीतिगत प्रयासों और बुनियादी सेवाओं तक बेहतर पहुंच को दर्शाती है।
उन्होंने कहा, “स्कूलों तक पहुंच और स्कूली शिक्षा के बाद कौशल प्रशिक्षण ने गरीबी कम करने में मदद की है।”
भविष्य के रोजगार के अवसरों पर बात करते हुए, वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि सरकार युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी नौकरियों के लिए जरूरी कौशल सिखाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
उनके अनुसार, एआई-केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्योग की उम्मीदों और कार्यबल की क्षमताओं के बीच के अंतर को कम करने में मदद करेंगे।
इसके अलावा, वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि पूंजीगत व्यय सरकार की विकास रणनीति का एक मुख्य स्तंभ बना हुआ है। उन्होंने राजकोषीय घाटे पर कड़ी नजर रखने और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “सरकारी खर्च जिम्मेदारीपूर्ण होना चाहिए।”
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दिवाली से पहले कीमती धातुओं में लौटी तेजी, सोना 0.50 प्रतिशत चढ़ा तो चांदी में 3,500 रुपए की उछाल

कई दिनों से लगातार गिरावट की मार झेल रहे सोने और चांदी के भाव में सप्ताह की शुरुआत के साथ तेजी लौटती दिखाई दी। धनतेरस और दिवाली से ठीक पहले कीमती धातुओं में आई इस रिकवरी ने ज्वेलरी खरीदारों और निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हालांकि कीमतें अभी भी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से काफी नीचे हैं, लेकिन सोमवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खरीदारी बढ़ने से सोने-चांदी के दाम मजबूत हुए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में सोमवार को सोने और चांदी दोनों में मजबूती देखने को मिली। सोना करीब 0.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ 3,911.60 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा, जबकि चांदी का प्रदर्शन और बेहतर रहा, और इसके भाव 2.24 प्रतिशत चढ़कर 50.380 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गए।
विश्लेषकों के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताह की तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की, जिससे कीमतों को समर्थन मिला।
वहीं, वैश्विक बाजारों की तेजी का असर भारतीय बाजार में भी देखने को मिला। घरेलू बाजार में सोना 1.39 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास, तो वहीं चांदी 1.82 लाख प्रति किलोग्राम के करीब कारोबार करती दिखाई दी।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना सोमवार को अपने पिछले बंद भाव 1,38,485 रुपए से 518 रुपए या 0.37 प्रतिशत चढ़कर 1,39,003 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। वहीं दिन के कारोबार में एक समय इसने 694 रुपए या 0.50 प्रतिशत उछलकर 1,39,179 रुपए प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
वहीं दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी अपने पिछले बंद भाव 1,79,132 रुपए से 1,962 रुपए यानी 1.09 प्रतिशत चढ़कर 1,81,094 रुपए पर खुला। वहीं दिन के कारोबार में एक समय इसने 3,569 रुपए यानी 1.99 प्रतिशत की उछाल के साथ 1,82,701 रुपए प्रति किलोग्राम का उच्चतम स्तर छुआ।
हालांकि सोमवार की तेजी ने राहत दी है, लेकिन सोना और चांदी अभी भी अपने रिकॉर्ड स्तरों से काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं। सोना अपने ऑल टाइम हाई से करीब 28 प्रतिशत तक नीचे है, जबकि चांदी में 40 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में होने वाले मिड-टर्म चुनाव, वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और हालिया भारी गिरावट के बाद निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने से कीमती धातुओं को सहारा मिला है। वहीं पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेत भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रहे हैं।
बाजार के जानकारों का कहना है कि मंगलवार को होने वाले अमेरिकी मिड-टर्म चुनावों से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। इसके अलावा हाल के दिनों में अमेरिकी शेयर बाजार में आई भारी गिरावट ने भी सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग को बढ़ाया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में सोने-चांदी की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की चाल से तय होगी। यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है तो कीमती धातुओं में और रिकवरी देखने को मिल सकती है।
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68,500 शिक्षक भर्ती: आरक्षण विसंगति पर अभ्यर्थियों का विधानसभा के सामने प्रदर्शन, पुलिस ने बसों से ईको गार्डन भेजा

उत्तर प्रदेश में 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती 2018 में आरक्षण विसंगति को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। पिछले 63 दिनों से ईको गार्डन में धरना दे रहे सैकड़ों अभ्यर्थियों ने सोमवार को विधानसभा के सामने प्रदर्शन कर सरकार से संशोधित परिणाम जारी करने और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग की। सात दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने सड़क पर बैठकर अपना विरोध जताया। बाद में पुलिस ने उन्हें जबरन हटाकर बसों से ईको गार्डन पहुंचा दिया। इस दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प हुई।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थियों के लिए समान अर्हता मानक अपनाए गए, जबकि ओबीसी वर्ग को आरक्षण का नियमानुसार लाभ नहीं दिया गया। उनका दावा है कि इससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपने अधिकारों से वंचित रह गए। इस मामले में उन्होंने बेसिक शिक्षा नियमावली, उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली और एनसीटीई की गाइडलाइन की अनदेखी का आरोप लगाया है।
अभ्यर्थियों के मुताबिक, उन्होंने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और विधान परिषद की सामाजिक न्याय एवं सद्भाव समिति के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। उनका दावा है कि इन संस्थाओं ने उनके पक्ष में संस्तुतियां और आदेश जारी किए हैं। उनकी मांग है कि ओबीसी अभ्यर्थियों को आरक्षित श्रेणी का लाभ देते हुए 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत अर्हता के आधार पर परिणाम संशोधित किया जाए और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिले।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह और आशुतोष वर्मा ने बताया कि 10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह मामला उठा था। बैठक में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाबो देवी, बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। मंत्री ने अभ्यर्थियों की मांग मुख्यमंत्री के समक्ष रखने और शासन के निर्देशों से अवगत कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ।
अभ्यर्थियों ने पिछले 63 दिनों में ‘दस्तक दो अभियान’ के तहत उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, मंत्री ओमप्रकाश राजभर, डॉ. संजय निषाद, स्वतंत्र देव सिंह, आशीष पटेल, अनिल कुमार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह सहित कई जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे। उनका कहना है कि आश्वासन के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
महिला अभ्यर्थी रंजना जायसवाल ने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए अभ्यर्थी तमाम कठिनाइयों के बावजूद न्याय की उम्मीद में धरने पर डटे हैं। धरना प्रभारी नवीन चौधरी ने कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि संवैधानिक और आरक्षण संबंधी अधिकारों तथा नियुक्ति के लिए है। अभ्यर्थियों ने आरक्षण विसंगति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की भी मांग की। उन्होंने कहा कि शासन से ठोस लिखित निर्णय मिलने तक उनका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।
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