अंतरराष्ट्रीय समाचार
इजरायल-यूएई शांति समझौते का गुटेरेस ने किया स्वागत
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच अमेरिका की मध्यस्थता से हुए ऐतिहासिक शांति समझौते का स्वागत किया है, जिसके तहत इजरायल वेस्ट बैंक के कब्जे वाले हिस्सों को अपने में मिलाने की योजना को रोक देगा। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख स्टीफन डुजारिक ने एक बयान में कहा कि गुरुवार का समझौता कुछ ऐसा है, जिसका महासचिव ने लगातार आह्वान किया है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने डुजारिक के हवाले से कहा, “महासचिव ने इस समझौते का स्वागत किया है। उम्मीद जताई है कि यह इजरायल और फिलिस्तीनी नेताओं के लिए सार्थक वार्ता में फिर से जुड़ने का अवसर पैदा करेगा जो संयुक्त राष्ट्र के प्रासंगिक प्रस्तावों, अंतर्राष्ट्रीय कानून और द्विपक्षीय समझौतों के अनुरूप द्वि-राष्ट्र समाधान को साकार करेगा।”
बयान में कहा गया है कि महासचिव सभी पक्षों के साथ बातचीत, शांति और स्थिरता के लिए आगे की संभावनाओं के लिए काम करना जारी रखेंगे।
यह समझौता गुरुवार को ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस व यूएई के डिप्टी सुप्रीम कमांडर शेख मोहम्मद बिन जायद के बीच एक फोन कॉल के माध्यम से हुआ।
समझौते के हिस्से के रूप में, इजरायल ट्रंप की शांति विजन में उल्लिखित क्षेत्रों पर संप्रभुता की घोषणा करने पर रोक लगाएगा और अरब और मुस्लिम दुनिया के अन्य देशों के साथ अपने संबंधों के विस्तार पर अब अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
यूएई और इजरायल कोरोनोवायरस वैक्सीन के उपचार और उसके विकास के बारे में भी सहयोग बढ़ाएंगे।
रिपोर्टों के मुताबिक, यह 25 वर्षो में इजरायल और अरब देश के बीच पहला शांति समझौता है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
विदेश मंत्री जयशंकर ने गुयाना के राष्ट्रपति से मुलाकात की; 500 मिलियन डॉलर क्रेडिट लाइन विस्तार का ऐलान

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ‘कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट मीटिंग’ (सीएचओजीएम) 2026 के दौरान गुयाना के राष्ट्रपति इरफान अली से मुलाकात की। इस मौके पर दोनों देशों ने दक्षिण अमेरिकी देश के सार्वजनिक और रक्षा बुनियादी ढांचे के लिए 500 मिलियन डॉलर की ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ (ऋण सुविधा) को बढ़ाने की घोषणा की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने एक्स पर कहा, “गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. इरफान अली से मिलकर खुशी हुई। 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के बाद हमने अपने द्विपक्षीय सहयोग में हुई निरंतर प्रगति की समीक्षा की। हमने सड़क, स्वास्थ्य और रक्षा परियोजनाओं के लिए 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ (ऋण सुविधा) बढ़ाने की घोषणा की है।”
उन्होंने आगे कहा, “हमने एमएसई (सूक्ष्म और लघु उद्यम) विनिर्माण परियोजनाओं की आपूर्ति और स्थापना, ‘क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स’ (त्वरित प्रभाव वाली परियोजनाओं) को लागू करने के लिए अनुदान सहायता, और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तथा गुयाना में यूपीआई जैसी प्रणाली के संचालन में सहयोग के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2024 में गुयाना की एक ऐतिहासिक राजकीय यात्रा की थी – जो 56 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस देश की पहली यात्रा थी। इस दौरान उन्हें गुयाना के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस’ से नवाजा गया था।
मई 1966 में गुयाना की स्वतंत्रता के बाद से ही, भारत और गुयाना के बीच संबंध काफी करीबी और सौहार्दपूर्ण रहे हैं, जिनमें आपसी समझ का स्तर बहुत ऊंचा है।
पिछले महीने, गुयाना में भारत के उच्चायुक्त चिन्मय नाइक ने जॉर्जटाउन में आयोजित एक आधिकारिक समारोह में राष्ट्रपति इरफान अली को अपना परिचय पत्र (क्रेडेंशियल्स) सौंपा। इस मुलाकात के दौरान, दोनों पक्षों ने भारत और गुयाना के बीच बहुआयामी संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।
गुयाना में भारतीय उच्चायोग ने एक्स पर पोस्ट किया, “द्विपक्षीय बातचीत के दौरान, भारत और गुयाना के बीच बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया। साथ ही, कई क्षेत्रों में मौजूद अपार संभावनाओं का लाभ उठाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।”
इरफान अली के अलावा जयशंकर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम से अलग-अलग मिले। इसकी जानकारी भी एक्स पोस्ट के जरिए विदेश मंत्री ने दी।
पीएम बर्नहम से मुलाकात के बाद जयशंकर ने लिखा, “मैंने उन्हें प्रधानमंत्री की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं। हमने सीईटीए के संदर्भ में और वैश्विक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए, आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की।”
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जर्मन विदेश मंत्री ने अमेरिका-इजरायल हमले को बताया सही, तेहरान बोला- शर्मनाक बयान

तेहरान ने जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के उस बयान पर सख्त ऐतराज जताया है जिसमें उन्होंने ईरान पर अमेरिका-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई का बचाव किया था। गुरुवार को ईरानी विदेश मंत्रालय ने इसे ‘शर्मनाक और निम्न स्तर का बयान’ करार दिया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट के जरिए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने उनकी आलोचना की। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की पुरानी टिप्पणी याद दिलाई।
पोस्ट में लिखा, “एक समय चांसलर मर्ज ने बड़े उत्साह से कहा था कि इजरायल, ईरान पर हमला करके ‘गंदा काम’ कर रहा है। लेकिन कुछ ही महीनों बाद, वही चांसलर अब इस बात पर अफसोस जता रहे हैं कि इस युद्ध की वजह से यूरोपीय अर्थव्यवस्था को 100 अरब यूरो का नुकसान हो रहा है!”
बाघेई ने आगे लिखा, “अब उनके विदेश मंत्री भी ईरान पर हुए सैन्य हमले को सही ठहराने के लिए मजबूर महसूस कर रहे हैं। बाघेई ने आगे कहा कि वे इतनी उदासीनता और गहरे नैतिक पतन का शिकार हैं कि न तो उन्हें इंसानी जानों के नुकसान और युद्ध अपराधों का एहसास है, और न ही वे उस आर्थिक नुकसान को समझ पा रहे हैं जो यह युद्ध उनके अपने देश और पूरे यूरोप को पहुंचा रहा है।”
बाघेई ने एक जर्मन कहावत के जरिए अपनी बात पर विराम लगाया। उन्होंने कहा , “नुकसान उठाने से इंसान समझदार बनता है।” लेकिन ऐसा लगता है कि ‘हंस गुक-इन-दी-लुफ्ट’ (लापरवाह व्यक्ति) को कुछ भी सिखाया नहीं जा सकता।
विदेश मंत्री वाडेफुल का बुधवार को एक पॉडकास्ट प्रसारित हुआ जिसमें उन्होंने सैन्य हमले को सही तो नहीं ठहराया लेकिन साथ ही उन्होंने कहा, “इस टकराव का कारण जाहिर तौर पर ईरान है, जो खुद को परमाणु हथियारों से लैस करने की तैयारी कर रहा है और कई पड़ोसी देशों में ऐसे मिलिशिया समूहों का समर्थन करता है, जो उन देशों की संप्रभुता का सम्मान नहीं करते हैं।” ईरान के मुताबिक उनका ये वक्तव्य अमेरिका और इजरायल के पक्ष में है।
जून में ही जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने इजरायल और अमेरिका के ईरान पर किए गए हमलों को लेकर संतुलित बयान देने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि इजरायल हम सब की तरफ से “गंदा काम” कर रहा है।
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अमेरिका से बातचीत शांति का विकल्प, लेकिन राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा उत्तर कोरिया: किम यो जोंग

उत्तर कोरिया ने बुधवार को कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत शांति स्थापित करने का एक विकल्प है, लेकिन इसे अपने राष्ट्रीय हितों के लिए वो जरूरी नहीं मानता। उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने यह बयान देते हुए अमेरिका पर प्योंगयांग के प्रति शत्रुतापूर्ण नीति जारी रखने का आरोप लगाया।
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के हवाले से योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि किम यो जोंग ने कहा कि अमेरिका लगातार ऐसे संकेत दे रहा है, जिनसे उत्तर कोरिया को उसके वास्तविक इरादों पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, ”शांति के विकल्पों में निश्चित रूप से बातचीत भी शामिल है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि बातचीत हमारे राष्ट्रीय हितों के बराबर है।”
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी एफबीआई ने दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस से 6 अरब डॉलर से अधिक की क्रिप्टोकरेंसी चोरी के मामले में उत्तर कोरिया की संलिप्तता का आरोप लगाया है। उत्तर कोरिया ने इस आरोप को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक उकसावे की कार्रवाई बताया है।
किम यो जोंग ने बुधवार को एक बार फिर इस आरोप को अमेरिका की शत्रुतापूर्ण नीति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि तथाकथित उत्तर कोरियाई क्रिप्टोकरेंसी हैकिंग का मामला अमेरिका की प्योंगयांग विरोधी नीति की वास्तविक प्रकृति की केवल एक झलक है।
उन्होंने दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के विदेश मंत्रियों की हालिया त्रिपक्षीय बैठक का भी उल्लेख किया। इस बैठक में तीनों देशों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी। किम ने इन देशों के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को भी उत्तर कोरिया के खिलाफ शत्रुतापूर्ण गतिविधियों का हिस्सा बताया।
किम यो जोंग ने कहा कि अमेरिका को उत्तर कोरिया के प्रति अपनी शत्रुतापूर्ण नीति छोड़नी होगी। उनके मुताबिक, सभी समस्याओं के समाधान के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण शर्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक वाशिंगटन अपनी टकराव की नीति नहीं बदलता, तब तक प्योंगयांग के पास अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर बैठने का कोई कारण नहीं है।
उन्होंने कहा, “उत्तर कोरिया को ऐसे अविश्वसनीय और शत्रुतापूर्ण लोगों के साथ आमने-सामने बैठने की जरूरत नहीं है, जो अपनी टकराव की नीति छोड़ने को तैयार नहीं हैं।”
यो ने अमेरिका की कथित शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के जवाब में उत्तर कोरिया की ओर से जवाबी कदम उठाए जाने की चेतावनी भी दी। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्योंगयांग किस तरह की कार्रवाई कर सकता है।
उनका यह बयान उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच संभावित कूटनीतिक संपर्कों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन से मुलाकात की इच्छा जता चुके हैं। इस महीने दोनों नेताओं के बीच संभावित मुलाकात को लेकर अटकलें भी लगाई जा रही हैं, हालांकि उत्तर कोरिया की ओर से इस संबंध में कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है।
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