राष्ट्रीय
जगह की तलाश कर रहे स्टार्टअप्स के लिए एक हब के तौर पर उभर रहा गुरुग्राम
भारत में कुल मिलाकर 61,400 स्टार्टअप और 83 यूनिकॉर्न हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 16 जनवरी को राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस की घोषणा के बाद यह संख्या लगातार बढ़ने वाली है। यह उस विश्वास को भी दर्शाता है जो सरकार को स्टार्टअप और यूनिकॉर्न पर है। इसे विश्वास है कि इसमें जीडीपी और रोजगार सृजन में योगदान के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था की गतिशीलता को बदलने की क्षमता है।
सरकार ने 2021 में 14,000 नए स्टार्टअप को मान्यता दी थी। जनवरी 2022 तक, भारत के 83 यूनिकॉर्न की वैल्यूएशन 277 अरब अमेरिकी डॉलर तक आंकी गई है। कई रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि भारत में जल्द ही कम से कम 50 और यूनिकॉर्न देखने को मिलेंगे।
कोई आश्चर्य नहीं कि भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बनकर उभरा है।
स्टार्टअप और यूनिकॉर्न लगातार विस्तार कर रहे हैं और उन्होंने रियल एस्टेट क्षेत्र में भी जबरदस्त नई ऊर्जा डाली है, क्योंकि वे अपने कर्मचारियों के लिए कार्यालय और आवासीय स्थान (रिजेडेंशियल स्पेस) दोनों की तलाश कर रहे हैं।
इसके अलावा, संस्थागत निवेश और एफडीआई में भी रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश में वृद्धि की प्रवृत्ति देखी जा रही है।
नवीनतम आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र बेंगलुरु को पीछे छोड़ते हुए ‘भारत की नई स्टार्टअप राजधानी’ के रूप में उभरा है।
बेंगलुरु में 4,514 की तुलना में पिछले दो वर्षों में 5,000 से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप दिल्ली-एनसीआर में स्थापित किए गए हैं।
चूंकि दिल्ली में जगह की कमी देखी जा रही है और किराया लगातार बढ़ रहा है, इसलिए अब गुरुग्राम स्टार्टअप्स और यूनिकॉर्न के लिए केंद्र बनकर उभरा है।
एक बार द्वारका एक्सप्रेसवे चालू हो जाने के बाद (2023 तक शुरू होने की संभावना है) गुरुग्राम, दिल्ली और दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के और भी करीब हो जाएगा। इसके बाद गुरुग्राम में मांग को और बढ़ावा मिलेगा।
एम3एम इंडिया के निदेशक पंकज बंसल रियल एस्टेट क्षेत्र में एक जाना पहचाना नाम है, जिन्होंने पहले कहा था कि जिस तरह से गुरुग्राम बढ़ रहा है और जिस तरह से द्वारका एक्सप्रेसवे आकार ले रहा है, इसमें कोई संदेह नहीं कि गुरुग्राम रियल्टी निवेशकों, विशेष रूप से स्टार्टअप्स और यूनिकॉर्न्स के लिए पसंदीदा विकल्प के रूप में उभरेगा।
एक बार द्वारका एक्सप्रेसवे चालू हो जाने के बाद, गुरुग्राम में रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश रुकने वाला नहीं है। गुरुग्राम में 250 से ज्यादा फॉर्च्यून-500 कंपनियां कमर्शियल स्पेस पर कब्जा कर रही है।
नई परियोजनाओं का निर्माण कंपनियों द्वारा आवश्यक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है और आवासीय परियोजनाओं के लिए भी यही नीति लागू की जा रही है।
एम3एम इंडिया, गुरुग्राम में अग्रणी रियल-एस्टेट डेवलपर में से एक रहा है और शहर के विकास में एक बड़ा योगदानकर्ता रहा है।
एम3एम इंडिया ने 10 वर्षों में लगभग 40 प्रोजेक्ट डेवलप किए हैं, जो कुल मिलाकर 2 करोड़ वर्ग फीट है, जिसमें गुरुग्राम में 40 लाख वर्ग फीट का रिटेल स्पेस शामिल है। एम3एम गोल्फ एस्टेट और एम3एम ट्रम्प टावर्स विकास के उस स्तर की गवाही दे रहे हैं, जिसे गुरुग्राम ने रियल्टी क्षेत्र में देखा है।
दिल्ली-एनसीआर एसपीआर और एनपीआर में विस्तार कर रहा है और गुरुग्राम आवासीय और वाणिज्यिक दोनों जगहों में पर्याप्त निवेश आकर्षित कर रहा है। कई राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने गुरुग्राम में कार्यालय की जगह और आवासीय स्थान पर अपना कब्जा किया है और यह प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। एसपीआर और एनपीआर के माध्यम से दिल्ली-एनसीआर का विस्तार एक संकेत है कि रियल एस्टेट में निवेश की मांग बढ़ रही है और डेवलपर्स को अचल संपत्ति की मांग में इस तरह की वृद्धि से निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत है।
रियल-एस्टेट क्षेत्र स्थिर गति से चल रहा है और इसके 2025 तक भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 13 प्रतिशत का योगदान करने की उम्मीद है। इसके अलावा यह 2030 तक 1 खरब अमेरिकी डॉलर के बाजार के आकार तक पहुंचने के लिए पूरी तरह तैयार है।
रिपोर्ट में यह भी भविष्यवाणी की गई है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में 2040 तक 9.30 अरब अमेरिकी डॉलर (65,000 करोड़ रुपये) की बाजार वृद्धि देखी जाएगी।
राष्ट्रीय
पश्चिम एशिया संकट के बीच डीजी शिपिंग का बड़ा कदम, निर्यातकों को राहत देने के निर्देश; नाविकों को सुरक्षित रहने की सलाह

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है। कि युद्ध प्रभावित पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) क्षेत्र में फंसे माल (कार्गो) वाले निर्यातकों को राहत दी जाए और उन्हें जरूरी छूट प्रदान की जाए।
एक सर्कुलर में कहा गया है कि बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली छूट, जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट, रीफर प्लग-इन (कनेक्टेड लोड) और अन्य टर्मिनल चार्ज, सभी मामलों में समान रूप से निर्यातकों तक नहीं पहुंच रही हैं।
डीजी शिपिंग ने निर्देश दिया है कि पोर्ट अथॉरिटी द्वारा दी गई सभी छूट पारदर्शी तरीके से सीधे संबंधित हितधारकों, जिनमें फ्रेट फॉरवर्डर्स और एनवीओसीसी शामिल हैं, को दी जाएं और वे आगे इसे निर्यातकों तक पहुंचाएं।
इसके साथ ही बंदरगाह प्राधिकरणों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे टर्मिनल स्तर पर इसकी निगरानी करें ताकि छूट का लाभ बिना देरी के सही लोगों तक पहुंचे।
रेगुलेटर ने पोर्ट और टर्मिनल ऑपरेटर्स से कहा है कि वे इन निर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि लागत में पारदर्शिता बनी रहे, निर्यातकों के हित सुरक्षित रहें और संकट के दौरान कामकाज प्रभावित न हो।
यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि निर्यातक 497 करोड़ रुपए की रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना के तहत दावा कर सकें और लाभ उठा सकें।
डीजी शिपिंग ने कहा, “शिपिंग कंपनियां ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा बनाए रखें। साथ ही, कार्गो पर लगने वाला वॉर रिस्क प्रीमियम भी बदला है, जो पहले के निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकता। इस मामले को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है।
इसी बीच डीजी शिपिंग ने ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है।
एडवाइजरी में कहा गया है कि जो नाविक किनारे पर हैं, वे घर के अंदर रहें, संवेदनशील जगहों से दूर रहें और अपनी आवाजाही के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।
वहीं, जो नाविक जहाज पर हैं, उन्हें जहाज पर ही रहने और बिना जरूरत किनारे पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।
सभी कर्मियों से सतर्क रहने, आधिकारिक जानकारी पर नजर रखने और अपनी कंपनी व संबंधित अधिकारियों के संपर्क में बने रहने की अपील की गई है।
राष्ट्रीय
राणा अयूब के संदेशों पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स से मांगा जवाब

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल : दिल्ली उच्च न्यायालय में पत्रकार राणा अयूब से जुड़े एक मामले में अहम सुनवाई हुई है।
यह मामला वर्ष 2013 से 2017 के बीच उनके सामाजिक माध्यम पर किए गए संदेशों से जुड़ा है, जिनमें उन पर भारत विरोधी भावना फैलाने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राणा अयूब द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर को लेकर किए गए कुछ संदेशों पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि ये संदेश अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक प्रकृति के प्रतीत होते हैं, जो समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई होना आवश्यक है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस संबंध में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स को निर्देश दिया है कि वे इन संदेशों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी दें। साथ ही, यह भी बताएं कि आगे क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में देरी उचित नहीं है और इसे तुरंत सुना जाना जरूरी है।
न्यायालय ने राणा अयूब को भी नोटिस जारी किया है और उनसे इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत का कहना है कि यह मामला सार्वजनिक भावना और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों का जवाब समय पर आना जरूरी है।
साथ ही, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और सोशल साइट एक्स को निर्देश दिया है कि वे अगले दिन तक अपना जवाब दाखिल करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को तय की है, जहां इस पूरे प्रकरण पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
राजनीति
बारामती उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार आकाश मोरे की इस शर्त से बढ़ी सियासी हलचल

पुणे, 6 अप्रैल : बारामती विधानसभा उपचुनाव में एक नए मोड़ आ गया है। कांग्रेस उम्मीदवार और वकील आकाश मोरे ने साफ कह दिया है कि वह अपना नामांकन तभी वापस लेंगे, जब महाराष्ट्र सरकार अजित पवार के विमान हादसे की जांच के लिए एफआईआर दर्ज करेगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह हादसा केवल संयोग नहीं था और सच सामने लाना बेहद जरूरी है।
आकाश मोरे ने कहा, “हम यह लड़ाई लोकतंत्र की रक्षा और भाजपा की विचारधारा का विरोध करने के लिए लड़ रहे हैं। अगर सरकार इस मामले में एफआईआर दर्ज करती है और गंभीर जांच करती है, तभी मैं अपना नामांकन वापस लेने पर विचार करूंगा।”
आकाश मोरे पेशे से वकील हैं और उनकी एक राजनीतिक विरासत है। उनके पिता 2014 में अजित पवार के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं।
उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि गृह मंत्रालय को इतने बड़े नेता की मौत को गंभीरता से लेना चाहिए। मोरे ने कहा, “बारामती और महाराष्ट्र के ‘कर्तापुरुष’ चले गए। सवाल यह है कि आखिर एफआईआर क्यों नहीं हुई या जांच क्यों नहीं हुई? हमने अजित दादा का राजनीतिक विरोध किया, ये हो सकता है, लेकिन राज्य के विकास के मामले में उनके साथ खड़े रहे। अगर कोई बड़ा नेता हादसे में मर जाए और एफआईआर दर्ज न हो, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।”
उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल भी इस रुख से सहमत हैं। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे की शर्त पूरी तरह जायज है। उन्होंने कहा, “अजित दादा के निधन के बाद उनके परिवार ने भी जांच की मांग की थी। इसलिए उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन यह प्रक्रिया कहां अटकी? रोहित पवार को एफआईआर दर्ज कराने के लिए महाराष्ट्र भर में दौड़ लगानी पड़ी और आखिरकार यह एफआईआर केवल कर्नाटक में हुई। क्या यही संवेदनशीलता है? हमारी मांग है कि एफआईआर महाराष्ट्र, खासकर बरामती में दर्ज हो तभी हम निर्णय करेंगे।”
अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे सोमवार को कांग्रेस की तरफ से नामांकन दाखिल करेंगे। इस पर काफी चर्चा और आलोचना हो रही है। कई लोग पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए सुझाव दे रहे हैं कि कांग्रेस को इस चुनाव में निर्विरोध मतदान होने देना चाहिए। क्या नांदेड में वसंतराव चव्हाण की मृत्यु के बाद चुनाव नहीं हुए थे? क्या भरत भालके के निधन के बाद मंगलवेढा में चुनाव नहीं हुए थे? ऐसे अनगिनत उदाहरण दिए जा सकते हैं जहां भाजपा ने अपनी सुविधा के अनुसार राजनीति की है।”
कांग्रेस के इस कदम ने निर्विरोध चुनाव की संभावना को रोक दिया है। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि शरद पवार और उद्धव ठाकरे के समर्थन से सुनेत्रा पवार बिना मुकाबले चुनाव जीत सकती हैं, लेकिन कांग्रेस द्वारा आकाश मोरे को मैदान में उतारे जाने के फैसले ने सबको चौंका दिया और अब नामकंन वापस लेने के लिए ये मांग रखी है।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने पहले कोशिश की कि चुनाव बिना मुकाबले हो, लेकिन कांग्रेस ने आकाश मोरे को मैदान में उतारकर खेल बदल दिया। जैसे-जैसे नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है, सबकी नजरें अब महायुति सरकार पर हैं कि वह इस मांग का क्या जवाब देती है। इस बीच, एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने बारामती के लोगों से अपील की है कि सुनेत्रा पवार को रिकॉर्ड बहुमत से चुने।
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