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Wednesday,04-November-2026
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जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया

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देश भर में पेपर लीक के विरोध प्रदर्शनों के बीच, धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया।

इस्तीफ़ा सौंपते हुए, प्रधान ने युवाओं और शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और समर्थन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने इसे परीक्षा की शुचिता और छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए उठाए गए कदम के तौर पर पेश किया।

यह घटनाक्रम पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ़ देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और जवाबदेही का हवाला देते हुए शिक्षा मंत्री प्रधान के इस्तीफ़े के बीच हुआ है।

अपने पत्र में प्रधान ने कहा, “चार दशकों से अधिक समय से, मैंने खुद को छात्रों, शिक्षकों और शैक्षिक सुधारों के लिए समर्पित किया है। मेरा हमेशा से मानना ​​रहा है कि एक मज़बूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा प्रणाली ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव होती है।”

उन्होंने कहा, “मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और जायज़ उम्मीदों का गहरा सम्मान करता हूँ। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हमारे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में एक नैतिक प्रतिबद्धता रही है। मैं माननीय प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करता हूँ कि उन्होंने मुझे उनके दूरदर्शी नेतृत्व में देश की सेवा करने का अवसर दिया।”

उन्होंने कहा कि जैसे ही NEET-UG परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियाँ सामने आईं, सरकार ने मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए जाँच CBI को सौंप दी, परीक्षा रद्द कर दी और दोबारा परीक्षा की तारीख़ की घोषणा की। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि अगले साल से इस परीक्षा को CBT (कंप्यूटर-आधारित परीक्षा) मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

प्रधान ने कहा, “इस दौरान हमारी मुख्य प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों के लिए परीक्षा का सुचारू संचालन सुनिश्चित करना था। हमने इसके लिए ‘संपूर्ण-सरकार’ (संपूर्ण सरकार) दृष्टिकोण अपनाया, जिसमें भारत सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों – और विशेष रूप से ज़िला प्रशासनों – ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छात्रों और अभिभावकों के सहयोग से, परीक्षा 21 जून, 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुई।”

उन्होंने आगे कहा, “पहले दिन से ही मैंने स्थिति की ज़िम्मेदारी ली और कभी इससे मुँह नहीं मोड़ा। मैं यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ था कि ‘परीक्षा माफ़िया’ के कारण किसी भी मेधावी छात्र की क्षमता बर्बाद न हो और किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो।” उन्होंने कहा कि री-एग्जामिनेशन के नतीजों के दौरान, “ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने रुकावटें पैदा करने और छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की”, एक ऐसी हरकत जिससे उन्हें “बहुत दुख” हुआ।

“मुझे हमेशा से हमारे लोकतंत्र की ताकत पर अटूट भरोसा रहा है और मैंने युवाओं की उम्मीदों, सपनों और अपेक्षाओं का हमेशा सम्मान किया है। वे सिर्फ़ भारत का भविष्य नहीं हैं; वे एक नए और विकसित भारत के मशाल-वाहक, निर्माता और आर्किटेक्ट हैं। पिछले दस दिनों की घटनाओं से मुझे दुख हुआ है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं है,” उन्होंने आगे कहा।

“जंतर-मंतर और पूरे देश में मौजूदा हालात को देखते हुए – ताकि देश-विरोधी ताकतें इसका फ़ायदा न उठा सकें, राष्ट्रीय एकता बनी रहे, यह सुनिश्चित हो सके कि किसी भी भारतीय छात्र का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न फँसे, और हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगा सकें और अपना करियर बनाने पर ध्यान दे सकें – मैंने माननीय प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है,” प्रधान ने कहा।

उन्होंने प्रधानमंत्री का उनके “मार्गदर्शन, भरोसे और लगातार समर्थन” के लिए और मंत्रिपरिषद का भी दिल से आभार व्यक्त किया।

“देश की सेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है; मैं हमेशा इसके लिए समर्पित रहूँगा। भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद से, मैं भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा के लोगों और देश के युवाओं की उम्मीदों को पूरा करने के लिए हर संभव तरीके से खुद को समर्पित करता रहूँगा,” उन्होंने आगे कहा।

राजनीति

दीया मिर्जा के दीपावली वीडियो पर सियासी घमासान, शिवसेना ने किया विरोध तो एनसीपी आई सपोर्ट में

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बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा अभिनेत्री दीया मिर्जा का पर्यावरण-अनुकूल और पटाखा-मुक्त दीपावली को बढ़ावा देने वाला जागरूकता वीडियो हटाए जाने के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। एक ओर शिवसेना के नेता आनंद दुबे ने वीडियो का विरोध किया है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो अभिनेत्री दीया मिर्जा के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं।

शिवसेना प्रवक्ता आनंद दुबे ने आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि कलाकार लोगों को ज्ञान देने के बजाय टेलीविजन पर अपनी कला का प्रदर्शन करें। उन्होंने कहा, “देखिए, सनातन इतना महान है कि उसे दीया मिर्जा या किसी से जानकारी प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है। दीपावली का पावन पर्व सभी हिंदुओं के लिए सबसे बड़ा त्योहार होता है। हमें दीपावली का पर्व कैसे और किस तरह से मनाना है, ये किसी और से जानने की जरूरत नहीं है। हमें अच्छी तरह से अपनी संस्कृति के बारे में पता है और यह भी पता है कि पर्यावरण की किस तरह से रक्षा करनी है।”

उन्होंने कहा कि कलाकार टेलीविजन पर अपनी कला का प्रदर्शन करें, हम अपना काम कर लेंगे। हम अपनी परंपरा, आदर्शों और मूल्यों को हमेशा आगे रखकर चलते हैं। तो हमें किसी से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है कि किस तरह से त्योहार मनाना चाहिए।”

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र परिवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो का कहना है कि दीया मिर्जा ने हाई कोर्ट के आदेशों का पालन किया है। उन्होंने कहा, “दीया मिर्जा ने खुद अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पर वीडियो जारी नहीं किया है, बल्कि बीएमसी के किसी इंचार्ज ने उन्हें वीडियो बनाने के लिए अप्रोच किया था और दीया मिर्जा ने वीडियो बना दी, तब कहीं जाकर बीएमसी के हैंडल पर वीडियो डाली गई। जब दीया मिर्जा को अप्रोच किया जा रहा था, तब बीएमसी की मेयर ऋतु रावडे को इस बात की जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने उस समय कुछ भी क्यों नहीं कहा था? इसका मतलब है कि बीएमसी में भी अलग-अलग ग्रुप बन रहे हैं, जो मेयर को कुछ बताते नहीं हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “इसी तरह का वीडियो माधुरी दीक्षित और अजिंक्य रहाणे ने भी बनाया था। दोनों ने भी वही बात कही थी। इस वीडियो को लेकर बेवजह विवाद बढ़ाया जा रहा है। देखिए, दीपावली का त्योहार हम सभी मनाते हैं। यह खुशी का पर्व है, तो जब भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस तरह की बातें कही जाती हैं, तो यह गलत है। दीया मिर्जा ने कोई गलती नहीं की, उन्हें सिर्फ बताया गया था कि ये हाई कोर्ट के आदेश हैं। बीएमसी ने वही बात दीया मिर्जा समेत सभी कलाकारों से कहलवाई, लेकिन भाजपा बात का बतंगड़ बना रही है।”

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राष्ट्रीय समाचार

भारत ने यूएई को अनार और कीवी का किया निर्यात, किसानों की बढ़ेगी आय

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भारत के अनार और कीवी फलों की ताजा खेप यूएई के दुबई के बाजार में पहुंच गई है, जिससे देश के किसानों के लिए नए बाजारों के रास्ते खुले हैं। यह केंद्र सरकार के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से संभव हुआ है। यह जानकारी वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को दी।

वाणिज्य मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी एक बयान के अनुसार, एपीडा ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले से सिंदूरी किस्म के 1.3 मीट्रिक टन अनार और अरुणाचल प्रदेश के जीरो से 1.5 मीट्रिक टन कीवी के परीक्षण निर्यात को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई तक पहुंचाने में मदद की है।

अनार की इस खेप में 2-2 किलोग्राम के 650 बॉक्स शामिल थे, जिसका निर्यात उत्तर प्रदेश स्थित अमामा एक्सपोर्ट्स ने किया। इस पहल के तहत स्थानीय उत्पादकों और एक किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को निर्यातक से जोड़ा गया है, जिससे हिमाचल प्रदेश के बागवानी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने के अवसर मिल रहे हैं।

बयान के अनुसार, अनार सीधे स्थानीय किसानों और भुंतर एफपीओ से खरीदे गए थे, जो लगभग 600 किसानों से जुड़ा हुआ है। कुल्लू जिला बागवानी प्रशासन ने खरीद और समन्वय में मदद करके इस पहल को समर्थन दिया।

यह पहल किसानों के लिए बाजार संपर्क मजबूत करने में प्रत्यक्ष खरीद और एफपीओ के माध्यम से सामूहिक भागीदारी की भूमिका को दर्शाती है। इस निर्यात में शामिल किसानों को घरेलू बाजार में प्रचलित कीमतों की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक मूल्य मिला।

सिंदूरी किस्म हिमाचल प्रदेश में उगाई जाने वाली अनार की प्रमुख किस्मों में शामिल है। इसके अलावा यहां भगवा और कंधारी किस्मों की भी खेती होती है। आकर्षक लाल छिलके, रसीले दानों और मीठे-खट्टे स्वाद के लिए पहचाने जाने वाले सिंदूरी अनार ताजा खपत के लिए उपयुक्त हैं और इनमें निर्यात बाजार की भी अच्छी संभावनाएं हैं।

अरुणाचल प्रदेश से 1.5 मीट्रिक टन कीवी की परीक्षण निर्यात खेप सफलतापूर्वक दुबई पहुंची और अल कुसैस स्थित लुलु हाइपरमार्केट में प्रदर्शित की गई। यह पहल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इस फल की संभावनाओं का आकलन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीओएनईआर) के तहत शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य ‘कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी’ ब्रांडिंग अभियान के अंतर्गत राज्य के कीवी क्षेत्र को बढ़ावा देना और मजबूत करना है। राज्य सरकार के सहयोग से लागू इस पहल का लक्ष्य राज्य के कीवी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पेश करना, उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया का आकलन करना और स्थानीय उत्पादकों के लिए निर्यात के अवसर बढ़ाने हेतु मजबूत बाजार संपर्क विकसित करना है।

अरुणाचल प्रदेश की ऊंचाई वाले क्षेत्रों की जलवायु और प्राकृतिक वातावरण कीवी की खेती के लिए अनुकूल हैं। यहां उगने वाले कीवी की गुणवत्ता और स्वाद विशिष्ट हैं। राज्य के उत्पादों में प्रीमियम घरेलू बाजारों, निर्यात को बढ़ावा देने और मूल्यवर्धित उत्पादों के क्षेत्र में अच्छी संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से हेवर्ड, मोंटी, एलिसन और ब्रूनो किस्मों की खेती की जाती है। इनमें हेवर्ड किस्म की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी मांग है।

इस पहल का उद्देश्य स्थानीय कीवी उत्पादकों को संभावित विदेशी बाजारों से जोड़ना भी है, ताकि भविष्य में होने वाली खेपों के माध्यम से बिक्री के अतिरिक्त माध्यम और किसानों को बेहतर आय के अवसर मिल सकें। उम्मीद है कि इस परीक्षण निर्यात से बाजार की प्रतिक्रिया का आकलन करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अरुणाचल प्रदेश के कीवी की पहुंच बढ़ाने के लिए जरूरी आवश्यकताओं की पहचान करने में मदद मिलेगी।

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राष्ट्रीय समाचार

गुजरात में 9.08 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम लगे, 2027 के लक्ष्य का 90 प्रतिशत पूरा

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केंद्र सरकार की ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के तहत गुजरात में 9.08 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए हैं। इसके साथ ही, मार्च 2027 तक 10 लाख घरों में सोलर सिस्टम लगाने के लक्ष्य का 90 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर लिया गया है।

इन सोलर सिस्टमों की कुल क्षमता 3,408 मेगावाट है। इस योजना के तहत रूफटॉप सोलर क्षमता के मामले में गुजरात देश का अग्रणी राज्य बन गया है।

राज्य में राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कुल रूफटॉप सोलर क्षमता का 18.21 प्रतिशत हिस्सा है। यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल हुई है, जब राज्य नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और बिजली के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को तेज कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। वहीं, देश का लक्ष्य 2030 तक अपनी बिजली की 50 प्रतिशत जरूरतें अक्षय ऊर्जा स्रोतों से पूरी करना है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मार्च 2027 तक 10 लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्य तय किया है। घरों की छतों पर सौर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से राज्य सरकार वित्तीय सहायता और नियामकीय रियायतें प्रदान करती है। छह किलोवाट तक के सिस्टम लगाने वाले उपभोक्ताओं को नियामकीय शुल्क के रूप में 2,950 रुपए की सहायता प्राप्त होती है।

सरकार ने ‘नेटवर्क मजबूत करने के शुल्क’ को भी माफ कर दिया है और ‘नेट मीटरिंग एग्रीमेंट’ की अनिवार्यता को भी हटा दिया है। छोटे घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोलर सिस्टम लगाना और भी सस्ता हो सके, इसके लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी दी गई है।

अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) परिवारों को 2.18 किलोवाट-पीक तक की क्षमता वाले रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाने के लिए निर्धारित लागत का केवल पांच प्रतिशत योगदान देना होगा। अन्य उपभोक्ताओं को 10 प्रतिशत योगदान देना होगा।

इस योजना के तहत केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता और उपभोक्ता के योगदान को घटाने के बाद, तय लागत की बाकी बची राशि का खर्च राज्य सरकार उठाती है। राज्य ने आवासीय उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाना और आसान बनाने के लिए कुछ प्रावधान भी पेश किए हैं।

अपनी सोलर नीति के तहत, घर वाले ‘नेट मीटरिंग’ का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें ग्रिड से ली गई बिजली और ग्रिड को वापस दी गई अतिरिक्त बिजली, दोनों का हिसाब रखा जाता है।

घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए ‘कनेक्टेड लोड’ की कोई सीमा नहीं है। साथ ही, घर वाले अपने सिस्टम से पैदा हुई अतिरिक्त बिजली को बेच भी सकते हैं। सरकार ने बताया कि “घरेलू उपभोक्ताओं को बैंकिंग शुल्क से भी छूट दी गई है।”

रूफटॉप सोलर के अलावा, गुजरात ने पूरे राज्य में काफी बड़ी मात्रा में अक्षय ऊर्जा क्षमता हासिल की है। इस साल 30 सितंबर तक, राज्य की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता 55,511.46 मेगावाट थी, जो देश की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता का 18.55 प्रतिशत है।

राज्य की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता में सोलर पावर का हिस्सा 36,234.55 मेगावाट है, जो भारत की कुल सोलर क्षमता का 21.2 प्रतिशत है। वहीं, पवन ऊर्जा की क्षमता 17,043.76 मेगावाट है, जो देश की कुल पवन ऊर्जा क्षमता का 28.8 प्रतिशत है।

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