व्यापार
भारत में सोने की कीमतें अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची
शादी के सीजन और कीमती धातु की बढ़ती वैश्विक दरों के बीच भारत में सोने की कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
चेन्नई में सुबह के कारोबार में 24 कैरेट सोने की कीमत 64,530 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई।
मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता में कीमती धातु की कीमत 63,760 रुपये प्रति 10 ग्राम पर थी, जो पिछले दिन की तुलना में 810 रुपये अधिक थी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतें सात महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। शुक्रवार को हाजिर कीमतें 1.6 प्रतिशत बढ़कर 2,069.10 डॉलर प्रति औंस हो गईं।
भारत बड़ी मात्रा में सोने का आयात करता है और बढ़ती वैश्विक कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
वैश्विक बाजार में सोने की कीमतें बढ़ रही हैं क्योंकि प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर में गिरावट जारी है और वर्तमान में यह तीन महीने के निचले स्तर के करीब है, जिससे अन्य विदेशी मुद्राओं में सोना खरीदना सस्ता हो गया है।
ऐसी उम्मीदें भी बढ़ रही हैं कि फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में दरों में कटौती कर सकता है।
कम ब्याज दरों की उम्मीद वित्तीय साधनों को सोने की तुलना में निवेशकों के लिए कम आकर्षक बनाती है, जिसे सुरक्षित निवेश माना जाता है।
शादी के मौसम के बीच घरेलू बाजार में सोने की मांग मजबूत बनी हुई है क्योंकि दुल्हन और दूल्हे को बड़ी मात्रा में कीमती धातु उपहार में दी जाती है।
राष्ट्रीय समाचार
भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला, बैंकिंग स्टॉक्स में तेजी

भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गुरुवार को हरे निशान में हुई। इस दौरान सेंसेक्स 154.60 अंक या 0.20 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,724.95 और निफ्टी 83.50 अंक या 0.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,997.95 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी का नेतृत्व बैंकिंग और वित्तीय शेयर कर रहे थे। सूचकांकों में निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज टॉप गेनर्स थे। इसके बाद निफ्टी मीडिया, निफ्टी मेटल, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी कमोडिटीज में भी तेजी के साथ कारोबार हो रहा था।
वहीं, निफ्टी आईटी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी कंजप्शन लाल निशान में थे।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी के साथ कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 166 अंक या 0.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ 63,165 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 168 अंक या 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 19,981 पर था।
सेंसेक्स पैक में अदाणी पोर्ट्स, एक्सिस बैंक, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, भारती एयरटेल, इटरनल, बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक और ट्रेंट गेनर्स थे।
दूसरी तरफ टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इंडिगो, इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस, टीसीएस, टाइटन, आईटीसी, एचयूएल और एशियन पेंट्स लूजर्स थे।
ज्यादातर एशियाई बाजारों में तेजी के साथ कारोबार हो रहा था। टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक, जकार्ता और सोल हरे निशान में थे। केवल हांगकांग लाल निशान में था। अमेरिकी शेयर बाजार बुधवार को हरे निशान में बंद हुआ, जिसमें डाओ जोन्स 0.56 प्रतिशत की तेजी के साथ और नैस्डैक 0.45 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।
बाजार के जानकारों ने कहा कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स में गिरावट से भारत के साथ वैश्विक बाजारों के लिए सकारात्मक माहौल बना है। एफसीएनआर (बी) जमा में रिकॉर्ड 136 अरब डॉलर का निवेश आने के डॉलर के मुकाबले रुपए को सपोर्ट मिलेगा और विदेशी निवेशकों का भारत में विश्वास बढ़ेगा। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की 9,500 करोड़ रुपए की खरीदारी से भी इसकी पुष्टि होती है।
व्यापार
आईसीआईसीआई बैंक ने आरबीआई की एफसीएनआर(बी) स्वैप सुविधा के तहत 17.88 अरब डॉलर जुटाए

आईसीआईसीआई बैंक ने बुधवार को एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा के तहत विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफसीएनआर(बी)) जमा के जरिए करीब 17.88 अरब डॉलर जुटाए हैं।
बैंक ने बताया कि जुटाई गई राशि में से ऐसी जमाओं के बदले बैंक की अंतरराष्ट्रीय शाखाओं और सहायक कंपनियों द्वारा दिए गए ऋण की राशि करीब 9 अरब डॉलर रही। वहीं, ऐसी जमाओं से समर्थित ऋण के बदले बैंक द्वारा अन्य ऋणदाताओं को जारी किए गए स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट (एसबीएलसी) करीब 3.63 अरब डॉलर के रहे।
हालांकि, रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आरबीआई की डॉलर जमा योजना के जरिए 100 अरब डॉलर से अधिक की राशि जुटाई गई है।
इसके अलावा, आईसीआईसीआई बैंक ने बताया कि उसने जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान कुल 3.55 अरब डॉलर के अमेरिकी डॉलर-मूल्य वाले बॉन्ड जारी किए हैं।
आरबीआई ने रुपए पर दबाव के बीच विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के लिए 8 जून को यह सुविधा शुरू की थी।
केंद्रीय बैंक के अनुसार, 21 अगस्त तक अधिकृत डीलर बैंकों ने इस योजना के तहत 72.848 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह जुटाया था। इसमें एफसीएनआर(बी) जमा की हिस्सेदारी 65.397 अरब डॉलर थी।
वहीं, 21 अगस्त तक इस सुविधा के तहत ईसीबी और ओएफसीबी के जरिए 7.451 अरब डॉलर का अतिरिक्त विदेशी मुद्रा प्रवाह आया था। ईसीबी और ओएफसीबी के लिए यह सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक खुली रहेगी।
सरकार ने अगस्त में कहा था कि इस योजना से विदेशी मुद्रा के प्रवाह में तेज वृद्धि हुई है और इसे भारत द्वारा अब तक की गई सबसे बड़ी और सबसे तेज विदेशी मुद्रा जुटाने की कवायद बताया था। यह 2013 की एफसीएनआर(बी) स्वैप योजना के स्तर को भी पार कर गई है।
आरबीआई ने शुरुआत में घोषणा की थी कि एफसीएनआर(बी) विंडो 30 सितंबर तक खुली रहेगी, लेकिन उत्साहजनक प्रतिक्रिया और पर्याप्त विदेशी मुद्रा जुटाए जाने का हवाला देते हुए इसे 31 अगस्त को ही बंद कर दिया गया।
व्यापार
भारत में डेटा सेंटर की क्षमता 2029 तक बढ़कर 6 गीगावाट होने की उम्मीद

भारत का डेटा सेंटर इंडस्ट्री की क्षमता जून 2026 तक 1.6 गीगावाट की क्षमता से बढ़कर 2029 तक 6 गीगावाट होने की उम्मीद है। इसके लिए करीब 110 अरब डॉलर की पूंजी की जरूरत होगी। इस वृद्धि को एआई वर्कलोड और हाइपरस्केल क्लाउड की तैनाती से बढ़ावा मिलेगा। यह जानकारी बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में डेटा सेंटर क्षेत्र में 101 मेगावाट की मांग दर्ज की गई, जो पिछले तीन वर्षों के पहली छमाही के औसत से 20 प्रतिशत से अधिक है।
इस अवधि में आपूर्ति भी मजबूत रही और 85 मेगावाट क्षमता जोड़ी गई, जो मुख्य रूप से मुंबई और चेन्नई में केंद्रित रही। पहले से बुक की गई क्षमता की तेजी से डिलीवरी के कारण डेटा सेंटर में मौजूद खाली क्षमता घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर 2.8 प्रतिशत पर आ गई, जो बाजार की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियां बाजार की गतिशीलता को मूल रूप से बदल रही हैं। वे नई क्षमता का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा सेल्फ-बिल्ड सुविधाओं के जरिए विकसित करने की प्रतिबद्धता जता रही हैं।
हाइपरस्केल सेल्फ-बिल्ड परियोजनाओं के तहत 2029 तक 1.4 गीगावाट क्षमता उपलब्ध होने की उम्मीद है। बड़े निवेश के चलते हैदराबाद और विशाखापत्तनम जैसे शहर गीगावाट-स्तरीय डेटा सेंटर हब में बदल रहे हैं, जबकि मुंबई और चेन्नई जैसे स्थापित बाजार भी तेजी से विस्तार कर रहे हैं।
हालिया केंद्रीय बजट में विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 20 साल की टैक्स हॉलिडे की घोषणा की गई है, जिसे 31 मार्च, 2047 तक बढ़ाया गया है। इससे निवेश प्रतिबद्धताओं में काफी तेजी आई है।
इस नीति के तहत 50 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी पूंजी निवेश प्रतिबद्धताएं आकर्षित हुई हैं। यह पहल भारत को वैश्विक एआई और क्लाउड सेवाओं की रूटिंग के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ लंबी अवधि के पूंजी निवेश के जोखिम को कम करने में मदद कर रही है।
इस विस्तार के लिए रियल एस्टेट निर्माण पर 4 अरब डॉलर, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग (एमईपी) बुनियादी ढांचे पर 18 अरब डॉलर तथा सर्वर और रैक समेत आईटी उपकरणों पर 88 अरब डॉलर की जरूरत होगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2033 तक छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) विकसित होने से बड़े डेटा सेंटर कैंपस के लिए ऑफ-ग्रिड बिजली समाधान की भविष्य में संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।
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