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Wednesday,08-April-2026
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ऑस्ट्रेलिया में जंगलों में लगी आग, कई घर जलकर हुए खाक

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सिडनी, 25 जनवरी। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में जंगलों में लगी आग अब रौद्र रूप धारण कर चुकी है। इस आग की जद में आकर कई घर जलकर खाक हो चुके हैं। लोगों का कहना है कि यहां से उनका निकलना मुश्किल हो चुका है।

मीडिया के अनुसार, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में अधिकारियों ने शनिवार सुबह चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि राज्य के दक्षिण-पश्चिम में दो जंगलों में आग लगी है। आग के कारण निकासी मार्गों पर असर पड़ा है। अब वहां से निकलने का समय बहुत कम है।

पर्थ से 190 किमी दक्षिण-पश्चिम में आर्थर नदी शहर के पास एक जगह आग लग गई। इस आग ने शुक्रवार को गर्म और हवा वाली स्थिति में 11,000 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन को जला दिया। ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (एबीसी) ने शनिवार को बताया कि आग से दो घर जल गए हैं। इसके साथ ही और घरों को नुकसान होने की आशंका है।

आर्थर नदी और आसपास के शहरों के लोगों को चेतावनी दी गई है। कहा गया है कि अब वहां से निकलने के लिए बहुत देर हो चुकी है। लोग अब अपने घरों में आश्रय ले लें।

अग्निशमन और आपातकालीन सेवा विभाग (डीएफईएस) ने आपातकालीन चेतावनी जारी की। इसमें कहा गया, “अगर आप अभी निकले, तो आपकी जान खतरे में पड़ सकती है। आग आने से पहले आपको सुरक्षित जगह लेनी चाहिए। आग की जद में आकर आप अपनी जान से भी हाथ धो सकते हैं।”

इस संबंध में जारी की गई चेतावनी में निवासियों से कहा गया है कि वे अपने घरों को खाली करने के लिए तैयार रहें। राज्य के दक्षिणी तट पर ब्रेमर बे के पास एक अलग आग की भी चेतावनी दी गई।

डीएफईएस ने कहा, “कृपया इस क्षेत्र को छोड़ने या आने की कोशिश न करें, चाहे आप वाहन से हों या पैदल। अगर आप किसी मजबूत संरचना में सुरक्षित नहीं रह सकते, तो आपको समुद्र तट या खुले मैदान में जाना चाहिए, जहां कोई घास या पेड़ न हों।”

पर्थ से 300 किमी पूर्व में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के कम आबादी वाले मध्य क्षेत्र में आग लगी है। यह आग 40,000 हेक्टेयर में फैली हुई है। अब आग के लिए चेतावनियां कम कर दी गई हैं। लेकिन क्षेत्र के लोगों को स्थितियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया कई दिनों से तेज गर्मी झेल रहा है। राज्य में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर है।

अंतरराष्ट्रीय

भारत ने ईरान में मौजूद भारतीयों को दी जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह, युद्धविराम का स्वागत किया

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल : अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौते के बावजूद, भारत ने बुधवार को ईरान में मौजूद अपने नागरिकों को सलाह दी कि वे जल्द से जल्द देश छोड़ दें। भारत ने अपने नागरिकों को ईरान में स्थित दूतावास के बताए रास्तों का इस्तेमाल करने का भी सुझाव दिया है।

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को एक एडवाइजरी में कहा, “7 अप्रैल की एडवाइजरी के क्रम में और हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे दूतावास के साथ तालमेल बिठाकर और दूतावास की ओर से सुझाए गए रास्तों का इस्तेमाल करके जल्द से जल्द ईरान छोड़ दें।”

भारतीय दूतावास ने आगे कहा, “यह फिर से दोहराया जाता है कि दूतावास से पहले से सलाह और तालमेल किए बिना किसी भी अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमा तक पहुंचने की कोई कोशिश नहीं की जानी चाहिए।” एडवाइजरी में दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए आपातकालीन नंबर भी शेयर किए हैं।

हालांकि, एक ताजा पोस्ट में भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम का स्वागत किया। इसके साथ ही, उम्मीद जताई कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी।

पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रम पर विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “हम युद्धविराम का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी। जैसा कि हमने पहले भी लगातार जोर दिया है, मौजूदा संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए तनाव कम करना, बातचीत और कूटनीति बेहद जरूरी हैं। इस संघर्ष ने लोगों को पहले ही भारी कष्ट पहुंचाया है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व व्यापार नेटवर्क को बाधित किया है। हमें उम्मीद है कि होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आवागमन की अबाध स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार का प्रवाह जारी रहेगा।”

यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौता होने के महज कुछ घंटों बाद सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष-विराम समझौते के तहत ईरान के खिलाफ हमलों को दो हफ्ते के लिए सशर्त रोकने की घोषणा की। उन्होंने इस कदम को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलने के प्रयासों से जोड़ा।

ईरान ने इस प्रस्ताव को अस्थायी रूप से स्वीकार करने का संकेत दिया। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि अगर ईरान पर हमले बंद हो जाते हैं, तो तेहरान भी अपनी सैन्य कार्रवाई रोक देगा।

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अंतरराष्ट्रीय

‘ड्राफ्ट- एक्स पर पाकिस्तान के पीएम का संदेश’, शहबाज शरीफ की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल : ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम समझौते पर वाहवाही लूटने की कोशिशों में जुटे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की एक गलती ने सोशल मीडिया पर एक बहस छेड़ दी। कई यूजर्स ने दावा किया कि शहबाज शरीफ की ओर से कई गई पोस्ट को किसी बाहरी व्यक्ति ने लिखा था।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया था, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान को दी समय सीमा बढ़ाने की अपील की। हालांकि, सोशल मीडिया यूजर्स ने इसमें एक ऐसी लिखने की गलती पकड़ ली, जिससे लगा कि यह पोस्ट किसी बाहरी व्यक्ति ने लिखी है।

शहबाज शरीफ के ‘एक्स’ अकाउंट से पोस्ट होने के कुछ ही देर बाद, यूजर्स ने ‘एडिट हिस्ट्री’ के स्क्रीनशॉट शेयर करना शुरू कर दिया। इन स्क्रीनशॉट में दिख रहा था कि शुरुआत में पोस्ट में एक लाइन लिखी थी, “ड्राफ्ट- एक्स पर पाकिस्तान के पीएम का संदेश।”

‘द डेली बीस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा लगता है कि ‘ड्राफ्ट’ वाला लेबल गलती से मूल पोस्ट में शामिल हो गया था, जिसे बाद में किए गए एक बदलाव में हटा दिया गया। इस मीडिया आउटलेट ने रिपोर्ट किया कि यह घटना इस बात को ‘बेनकाब’ करती है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने शायद इस संदेश को ‘कट और पेस्ट’ किया था, जिससे यह अटकलें तेज हो गईं कि इस संदेश को असल में किसने लिखा।

सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस पोस्ट में अमेरिका के कई वरिष्ठ अधिकारियों को टैग किया गया था, जिनमें ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वैन्स और विदेश मंत्री मार्को रूबियो शामिल थे। इससे इस बात की अटकलें और तेज हो गईं कि यह सब किसी आपसी तालमेल के तहत किया गया था। यह भी सवाल उठाया गया कि किसी देश के प्रधानमंत्री की टीम ड्राफ्ट मैसेज में अपने ही देश का नाम क्यों लिखेगी। कुछ यूजर्स ने दावा दिया कि यह शब्द अमेरिकी अधिकारियों की ओर से दिए गए होंगे।

‘फोर्ब्स’ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संदेश की बारीकी से जांच की गई, क्योंकि उनकी अपील का शुरुआती ड्राफ्ट देखकर ऐसा लग रहा था कि इसे पाकिस्तान के बाहर की किसी संस्था ने लिखा है।

‘द डेली बीस्ट’ की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि शहबाज शरीफ ने बाद में एक संशोधित बयान जारी किया, जिसमें ‘ड्राफ्ट’ वाला संदर्भ हटा दिया गया था और उनके कार्यालय ने इस मामले पर टिप्पणी के लिए किए गए अनुरोधों का तत्काल कोई जवाब नहीं दिया।

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अंतरराष्ट्रीय

ईरान को लेकर ट्रंप के संकेत के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई

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वॉशिंगटन, 8 अप्रैल : तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को दो सप्ताह के लिए रोकेंगे, जिससे ऊर्जा-समृद्ध खाड़ी क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंकाएं कम हो गईं।

अमेरिकी कच्चे तेल के वायदा भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गए, जिससे हालिया बढ़त उलट गई। यह बढ़त होरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास कई हफ्तों से जारी तनाव के कारण हुई थी, जो वैश्विक तेल परिवहन का एक प्रमुख मार्ग है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने को यह जानकारी दी।

जर्नल के अनुसार, यह गिरावट ट्रंप की उस घोषणा के बाद आई जिसमें उन्होंने कहा कि यदि तेहरान जलडमरूमध्य को फिर से खोलता है तो वे ईरान पर हमले रोक देंगे।

शेयर बाजारों ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों से जुड़े वायदा 2 प्रतिशत से अधिक बढ़ गए, जो संकट से जुड़ी कई दिनों की अस्थिरता के बाद निवेशकों की राहत का संकेत है।

रिपोर्ट में कहा गया, “स्टॉक फ्यूचर्स तेजी से बढ़ रहे हैं और तेल की कीमतें गिर रही हैं, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि वे ईरान पर हमले दो सप्ताह के लिए रोक देंगे।”

होरमुज़ जलडमरूमध्य, जिसके माध्यम से वैश्विक तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है, इस संघर्ष का केंद्र रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने कई हफ्तों तक इस मार्ग को सीमित किया था, जिससे कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ीं।

जर्नल के अनुसार, ईरान के साथ समझौते की समयसीमा से पहले बाजारों में तनाव था क्योंकि व्यापारियों को डर था कि बड़े स्तर पर संघर्ष से खाड़ी क्षेत्र में आपूर्ति बाधित हो सकती है और कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

इसके बजाय, संभावित युद्धविराम की घोषणा से वैश्विक बाजारों में व्यापक तेजी आई। एशियाई शेयर बाजार भी चढ़े, जिसमें जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बढ़त के साथ बंद हुए।

निवेशकों ने ट्रंप की पहले की धमकियों को काफी हद तक बातचीत की रणनीति माना था। रिपोर्ट के अनुसार, “कुछ निवेशकों ने दांव लगाया था कि ट्रंप समयसीमा बढ़ा सकते हैं, जैसा कि उन्होंने पिछले महीने कई बार किया है।”

हाल के हफ्तों में तेल की कीमतें इस आशंका के कारण बढ़ी थीं कि जलडमरूमध्य को बंद या गंभीर रूप से सीमित किया जा सकता है। यह मार्ग कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस जैसी महत्वपूर्ण आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।

तनाव कम होने से अन्य परिसंपत्तियों को भी समर्थन मिला। सोने की कीमतें बढ़ीं, जो अनिश्चितता को दर्शाती हैं जबकि शेयर बाजार में तेजी आई क्योंकि तत्काल संघर्ष का जोखिम घटा।

हालांकि, विश्लेषकों ने चेतावनी दी कि स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। प्रस्तावित दो सप्ताह का युद्धविराम इस बात पर निर्भर करता है कि ईरान जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलता है और दोनों पक्ष आगे तनाव नहीं बढ़ाते।

घोषणा के बाद भी खाड़ी के कुछ हिस्सों में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों की खबरों ने इस विराम की स्थिरता पर सवाल उठाए।

व्यापक संघर्ष पहले ही ऊर्जा बाजारों को कई हफ्तों से प्रभावित कर चुका है। सीमित शिपिंग और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है।

अब यह दो सप्ताह का समय कूटनीति के जरिए स्थिति को स्थिर करने का अवसर देता है लेकिन व्यापारी अभी भी नीतिगत या सैन्य बदलावों को लेकर सतर्क हैं।

होरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक बना हुआ है। इसमें कोई भी व्यवधान वैश्विक स्तर पर तुरंत प्रभाव डाल सकता है, खासकर बड़े आयातकों पर।

भारत के लिए, जो खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल के आयात पर काफी हद तक निर्भर है, तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव से महंगाई, मुद्रा स्थिरता और समग्र आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है।

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