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Monday,05-October-2026
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न्याय

किसानों का ‘दिल्ली चलो’ मार्च आज, राष्ट्रीय राजधानी में ट्रैफिक जाम की आशंका, सुरक्षा बढ़ाई गई

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दिल्ली में यातायात में व्यवधान की एक नई लहर की तैयारी हो रही है, क्योंकि संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के बैनर तले किसान शुक्रवार को शंभू सीमा से ‘दिल्ली चलो’ मार्च की योजना बना रहे हैं। हरियाणा के अंबाला में बड़ी सभाओं पर प्रतिबंध लगाने के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है और किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है।

संसद भवन तक मार्च आज दोपहर 1 बजे शंभू धरना स्थल से शुरू होगा। यह इस सप्ताह का दूसरा ऐसा मार्च होगा। इससे पहले सोमवार को उत्तर प्रदेश के किसानों ने संसद तक पहुँचने का प्रयास किया था, लेकिन उन्हें नोएडा में ही रोक दिया गया, जिससे सीमा पर भारी यातायात जाम हो गया।

प्रदर्शनकारी किसानों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारी किसान कई प्रमुख सुधारों की मांग कर रहे हैं, जिसमें फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए कानूनी गारंटी, कृषि ऋण माफी, किसानों और उनके मजदूरों के लिए पेंशन, पुलिस मामलों की वापसी, बिजली दरों में बढ़ोतरी को वापस लेना और 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय शामिल है। 13 फरवरी से, वे पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी सीमा बिंदुओं पर डेरा डाले हुए हैं, जब सुरक्षा बलों ने दिल्ली के लिए उनके शुरुआती मार्च को रोक दिया था।

नियोजित मार्च का मुकाबला करने के लिए, हरियाणा की सीमा पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है। बहुस्तरीय बैरिकेड्स लगाए गए हैं, और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्थिति की निगरानी के लिए मौके पर मौजूद हैं। लागू निषेधाज्ञा प्रभावी रूप से चार से अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाती है, जिससे पैदल या वाहन से कोई भी जुलूस नहीं निकाला जा सकता।

चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने न्यायिक ध्यान भी आकर्षित किया है। इस सप्ताह की शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट ने लोकतांत्रिक अधिकारों और सार्वजनिक असुविधा के बीच संतुलन पर टिप्पणी की। जस्टिस सूर्यकांत और उज्जल भुयान की पीठ ने कहा, “लोकतांत्रिक व्यवस्था में, आप शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन लोगों को असुविधा न पहुँचाएँ। खनौरी बॉर्डर पंजाब के लिए जीवन रेखा है। हम इस पर टिप्पणी नहीं कर रहे हैं कि विरोध सही है या गलत।”

विरोध स्थलों पर तनाव बढ़ा

विरोध स्थलों पर तनाव पहले ही बढ़ चुका है। 21 फरवरी को खनौरी बॉर्डर पर झड़पों के दौरान पंजाब के एक किसान शुभकरण सिंह की मौत हो गई। हिंसा तब भड़की जब प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली की ओर मार्च करने की कोशिश की, जिसके बाद सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े।

जैसे-जैसे स्थिति बदल रही है, दिल्लीवासी और पड़ोसी राज्यों से आने-जाने वाले यात्री संभावित व्यवधानों के लिए तैयार हैं, जबकि किसान कृषि सुधारों और न्याय की अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

न्याय

भायखला मे गरीब झोपड़ा वासियों से लूट। बिल्डर और ई वार्ड अधिकारियों को ५०० करोड़ का फायदा।

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गरीबों के झोपड़ों पर खड़ा किया आशियाना। बी एम सी ई वार्ड के अधिकारियों और बिल्डर की सांठ घाट का काला सच।

मुंबई : एक आम इंसान का सपना होता है के उस का एक अपना घर हो और जब इन के साथ हमदर्दी दिखा उन का आशियाना ही छीन लिया जाए तो उन के लबों पर सिर्फ बददुआ ही होती है। हम बात कर रहे है ऐसे सैकड़ों परिवारों की जिन को उन के झोपड़ों की जगह पक्के घर देने की बात की गई थी और सरकार ने उन को पक्के घर के लिए हकदार भी बताया पर मुंबई महानगर पालिका के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने उन के घरों की फाइल नामचीन बिल्डरों को बेच दी और यह बिल्डर खुद को साफ सुथरा दीनदार कहलवाते हैं।

ई वार्ड ऑफिस के अधीन आने वाले सैकड़ों झोपड़ों को हटाने का काम साल २०१७ से शेरू हुआ जिस मे मुकामी नगरसेवक रईस शेख ने काफी जद्दोजहद की के इन फुटपाथ वासियों को पक्का घर मिल जाए और कई सालों से जानवरों सी जिंदगी गुजरने वाले फुटपाथ वासियों की आने वाली नस्ल एक अच्छे घर मे रह सके, पर हुआ इस का उल्ट ।

आप को यह जान कर हैरत होगी के इंसानियत को शर्मसार करने वाले बीएमसी के अधिकारियों ने बिल्डरों से अपने ईमान का सौदा कर दिया । कई झोपड़ा मालिकों को बुला के धमकाया भी गया के आप अपनी जगह खाली कर दो और आप को घर भी नहीं मिल सकता क्यों के आप के कागजात पूरे नहीं है आप अपात्र हैं सरकारी घर के लिए। घबराए लोगों ने समाजसेवकों और मुकामी नेताओं से गुहार लगाई के वो कहां जायेंगे पर कुछ हासिल ना हुआ ।

बीएमसी ई विभाग के मेंटिनेंस विभाग मे कार्यरत असिस्टेंट इंजीनियर परवीन मुल्क, अमजद खान और अन्य सहयोगी अधिकारियों ने सब झोपड़ा मालिकों को अकेले अकेले बुला के मीटिंग की, इस मीटिंग मैं सब इंजीनियर और स्थानीय बिल्डर के लोगो को भी रखा गया, पूरा काम एक सोची समझी साजिश के तहत किया गया।

बीएमसी अधिकारी ने नोटिस दी के आप को फुटपाथ खाली करना है आप के दस्तावेज काफी नहीं है यह साबित करने को के आप वहां ५० सालों से रह रहे हो इसी दौरान घबराए झोपड़ा धारक को बिल्डर के आदमी द्वारा धारस दी गई और फिर क्या उस झोपड़ा मालिक से एफिडेविट लिया गया के उस ने अपना झोपड़ा बिल्डर के रिश्तेदारों या उस के एम्पलाई को दे दिया है बदले मैं बिल्डर ने उसे कुछ पैसे दे दिए ता के वो कहीं और किराए के मकान में अपना बसेरा कर ले ।

अब भ्रष्ट बीएमसी ई विभाग के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में यह बताया के जब झोपड़े का इंस्पेक्शन किया गया तो वहां जिस के नाम पर झोपड़ा था वो नहीं मिला और उस ने जिन को रहने दिया था वो बंदे को हम ने झोपड़ा मालिक मान लिया है और उसे सरकार से घर दिया जाएगा ।

अगली कड़ी मे यह बिल्डर अपने नाम पर लिए गए झोपड़े और अपने रिश्तेदारों के नाम के झोपड़ों को अपनी कंपनी द्वारा बनाई जा रही उच्च प्रोफ़ाइल की बिल्डिंग मे जगह देने की विनती बीएमसी से करता है जिसे पैसे खाने के बाद मान लिया जाता है और बिल्डर के हाइप्रोफाइल प्रोजेक्ट मे उन झोपड़वासियों जो के बोगस होते हैं शिफ्टिंग बता दी जाती है इतना ही नहीं इन झोपड़ा वासियों को अपने प्रोजेक्ट मे जगह देने के एवज बिल्डर सरकार से अच्छी एफ एस आई भी लेता है ।

अगले अंक मे पढ़ना ना भूलें कौन कौन सी बिल्डिंग मे करोड़ों के घरों को यह बताया गया है के झोपड़ा वासी को दिया गया है कौन है भ्रष्ट अधिकारी और कौन कौन है वो दयालु चीटर बिल्डर

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न्याय

जेल में बंद किसानों को अगर नहीं छोड़ा गया तो, बीकेयू 23 को लेगा बड़ा फैसला

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ग्रेटर नोएडा, 16 दिसंबर: गौतमबुद्ध नगर में अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे किसानों को लुक्सर जेल में बंद कर दिया गया है। अभी तक इन किसानों की रिहाई नहीं हुई है। इसमें सुखबीर खलीफा समेत कई संगठन के किसान नेता शामिल हैं। अब उनकी रिहाई की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने रविवार को एक बैठक की है जिसमें उसने फैसला लिया है कि अगर 22 दिसंबर तक इन्हें नहीं छोड़ा गया तो 23 दिसंबर यानी चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन पर भारतीय किसान यूनियन एक बड़ा फैसला लेगा।

इसके साथ साथ भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने भी अपने जिले के सभी पदाधिकारियों को निर्देशित किया है कि पूरे उत्तर प्रदेश में प्रत्येक जिले के कम से कम एक थाने में गौतम बुद्ध नगर के 129 आंदोलनकारी किसान जो 3 दिसंबर से गौतमबुद्ध नगर की जेल में बंद हैं, उनके लिए सांकेतिक गिरफ्तारी देंगे और ज्ञापन सौंपेंगे।

भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने यह आरोप लगाया है कि जेल में बंद चार किसान नेताओं से तो मुलाकात भी बंद है। किसी को मिलने भी नहीं दिया जा रहा है। संज्ञान में आया है कि उनको अकेले में भी रखा गया है। यह आजाद भारत में पहली बार देखने को मिला है।

भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के नेता मास्टर श्यौराज का कहना है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गौतम बुद्ध नगर के किसान आंदोलन से भले ही खफा हैं। लेकिन प्रशासन सांकेतिक गिरफ्तारी न लेकर वास्तव में जेल भेजना चाहे तो भी खुशी खुशी अपने किसान भाईयों के सम्मान में जेल जाएंगे और यह संदेश प्रत्येक जिले में भेजने का काम करेंगे। यह फैसला उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय पदाधिकारियों से विचार विमर्श कर लिया गया है। इसलिए सभी पालन करेंगे।

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दुर्घटना

कुर्ला बस हादसा: काम के बाद घर लौट रही 20 वर्षीय महिला की कुचलकर मौत; पिता ने बीएमसी, हॉकर्स और ट्रैफिक पुलिस को ठहराया जिम्मेदार

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मुंबई: मुंबई के कुर्ला में सोमवार रात करीब 9:30 बजे हुई दुखद दुर्घटना ने पीड़ितों के परिवारों के लिए दर्दनाक यादें छोड़ दी हैं। मृतकों में से एक 20 वर्षीय लड़की थी जिसकी पहचान आफरीन शाह के रूप में हुई जो सुबह नौकरी के पहले दिन के लिए घर से निकली थी। जब वह नई नौकरी के पहले दिन के लिए उम्मीद और उत्साह से भरी हुई अपने घर से बाहर निकली, तो उसके पिता ने कल्पना भी नहीं की होगी कि यह आखिरी बार होगा जब वह उसे जीवित देख पाएगी।

दुखद बात यह है कि आफरीन उन सात पीड़ितों में से एक बन गई, जिनकी जिंदगी उस समय खत्म हो गई, जब रूट नंबर ए-332 पर चलने वाली एक तेज रफ्तार बेस्ट वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बस ने कुर्ला (पश्चिम) में एसजी बारवे रोड पर पैदल यात्रियों और कई वाहनों को कुचल दिया।

आफरीन के पिता अब्दुल सलीम शाह ने अपनी आखिरी बातचीत को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी बेटी से आखिरी बार तब बात की थी, जब उसने उन्हें फोन करके शिकायत की थी कि वह काम का पहला दिन पूरा करने के बाद घर लौटते समय कुर्ला रेलवे स्टेशन पर ऑटो नहीं ढूंढ पा रही है।

शाह ने बताया कि उसने उसे हाईवे से ऑटो लेने को कहा, जो दुर्घटना वाली जगह से अलग रास्ते पर पड़ता है। कथित तौर पर यह लड़की और उसके पिता के बीच आखिरी बातचीत थी।

आफ़रीन ने अपने पिता की सलाह नहीं मानी और दूसरा रास्ता नहीं अपनाया। उसके पिता का मानना ​​है कि अगर उसने दूसरा रास्ता चुना होता तो शायद वह अभी भी ज़िंदा होती।

सलीम शाह ने एक यूट्यूब चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि उन्हें कुर्ला भाभा अस्पताल से फोन आया जिसमें दावा किया गया कि उन्हें उनकी बेटी का मोबाइल फोन मिल गया है और उन्हें तुरंत अस्पताल आने को कहा गया है।

जब वे अस्पताल पहुंचे तो उन्हें अपनी बेटी का शव मिला। तीन बच्चों में उनकी इकलौती बेटी आफरीन इस दुखद घटना में कुचलकर मर गई थी। शाह ने दुख जताते हुए बताया कि वे अगले पांच-छह महीनों में उसकी शादी की योजना बना रहे थे।

शाह ने इस दुर्घटना के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी), सड़कों के किनारे अवैध रूप से सामान बेचने वालों, यातायात पुलिस, पार्षद, विधायक और सांसद को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इतने सालों में स्थिति नहीं बदली है, लोगों को इन अवैध फेरीवालों द्वारा अतिक्रमण की गई भीड़भाड़ वाली सड़कों पर चलने में भी परेशानी हो रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि ये फेरीवाले अधिकारियों को रिश्वत देकर इलाके में अपना धंधा चलाते हैं। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और सरकार से भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।

इस दुर्घटना में सात लोगों की मौत हो गई और 42 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। बस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया। पुलिस ने बस चालक को गिरफ्तार कर लिया है और अदालत ने उसे 21 दिसंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। बेस्ट ने बस दुर्घटना की जांच के लिए एक समिति गठित की है।

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