राजनीति
सोनिया गांधी आज फिर ईडी के सामने पेश होंगी, सुरक्षा बढ़ाई गई
नेशनल हेराल्ड मामले में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से फिर पूछताछ करेगा। सोनिया के पेश होने से पहले दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी के पूरे लुटियंस जोन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। सोनिया गांधी सुबह 11 बजे एपीजे अब्दुल कलाम रोड स्थित प्रवर्तन भवन यानी ईडी कार्यालय पहुंचेंगी।
जांच एजेंसी के मुख्यालय और उसके आसपास अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है, साथ ही अतिरिक्त पुलिस दल भी तैनात किए गए हैं।
पुलिस हर वाहन की चेकिंग भी कर रही है और एपीजे अब्दुल कलाम रोड की ओर जाने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कहा है कि विशेष इंतजामों के चलते दोपहर 2 बजे तक गोल मेथी जंक्शन, तुगलक रोड जंक्शन, क्लेरिजेस जंक्शन, क्यू-पॉइंट जंक्शन, सुनहरी मस्जिद जंक्शन, मौलाना आजाद रोड जंक्शन और मान सिंह रोड जंक्शन पर भारी ट्रैफिक आवाजाही रहेगी।
ईडी ने 21 जुलाई को सोनिया गांधी से घंटों पूछताछ की थी।
शुरुआत में उन्हें 25 जुलाई को फिर से पेश होने के लिए बुलाया गया था, लेकिन उनके अनुरोध पर इसे बदलकर 26 जुलाई कर दिया गया।
मंगलवार को अपर निदेशक मोनिका शर्मा के नेतृत्व वाली टीम कांग्रेस अध्यक्ष से पूछताछ करेगी।
21 जुलाई को उनके साथ उनके बेटे राहुल गांधी और बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा भी थे।
सूत्रों ने बताया कि सोनिया गांधी से वही सवाल पूछे गए, जो राहुल गांधी से पांच दिनों की पूछताछ के दौरान पूछे गए थे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
विदेश मंत्री जयशंकर और ईरानी समकक्ष अराघची ने पश्चिम एशिया में तनाव पर की चर्चा

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने ब्रिक्स सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ बातचीत की। शुक्रवार की सुबह बातचीत के दौरान दोनों विदेश मंत्रियों ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके प्रभाव के बारे में चर्चा की।
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा कर लिखा, “आज सुबह दिल्ली में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से डिटेल में बातचीत हुई। पश्चिम एशिया के हालात और उसके असर पर बात हुई। आपसी फायदे के द्विपक्षीय मामलों पर भी विचार शेयर किए। ब्रिक्स भारत 2026 में उनके शामिल होने के लिए शुक्रिया।”
ब्रिक्स सम्मेलन के पहले दिन गुरुवार को ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मौजूदा बाधाओं के लिए अमेरिका के प्रतिबंध को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि होर्मुज उन सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला है, जो ईरानी नौसेना के साथ सहयोग करते हैं।
ईरान इस्लामिक रिपब्लिक की सरकार के आधिकारिक एक्स अकाउंट से साझा जानकारी के अनुसार, “विदेश मंत्री अराघची ने नई दिल्ली में विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान मीडिया को बताया कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज उन सभी कमर्शियल जहाजों के लिए खुला है, जो ईरानी नौसेना के साथ सहयोग करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा रुकावटें अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण पैदा हुई हैं।”
अराघची ने प्रदानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों को लेकर चर्चा की। बैठक में ब्रिक्स के अन्य प्रतिनिधियों के साथ भी क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारत में ईरान के दूतावास के ऑफिशियल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ अकाउंट पोस्ट में बताया गया, “दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने भारत पहुंचे इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेश मंत्री डॉ. सैयद अब्बास अराघची ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।” बता दें, बैठक में शामिल होने के लिए ब्रिक्स के अन्य प्रतिनिधियों के साथ-साथ ईरान के विदेश मंत्री अराघची भी बुधवार रात भारत पहुंचे।
राष्ट्रीय समाचार
नासा की नई एलईएसटीआर तकनीक, जो करेगी चंद्रमा के -388 फारेनहाइट तापमान का परीक्षण

चंद्रमा पर दिन में चिलचिलाती गर्मी और रात में कड़ाके की ठंड पड़ती है। ऐसे में अब चंद्रमा, मंगल और अन्य ग्रहों पर भविष्य के मिशनों के लिए सामग्रियों को तैयार करने की दिशा में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है।
नासा ने चंद्रमा की रात की कड़ाके की ठंड की नकल करने वाली नई तकनीक विकसित की है, जो बिना किसी तरल गैस के सामग्रियों और उपकरणों का परीक्षण कर सकेगी। नासा के ग्लेन रिसर्च सेंटर (क्लीवलैंड) के इंजीनियरों ने ‘लूनर एनवायरनमेंट स्ट्रक्चरल टेस्ट रिग’ (एलईएसटीआर) नामक एक मशीन बनाई है। यह मशीन 40 केल्विन यानी लगभग -388 डिग्री फारेनहाइट तक के अत्यधिक ठंडे तापमान पर सामग्रियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्पेस हार्डवेयर का परीक्षण कर सकती है।
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर नासा चंद्र बेस बनाने की योजना बना रहा है। वहां तापमान दिन और रात में काफी बदलता रहता है। ऐसी स्थिति में सामान्य रबर कांच की तरह टूट सकता है, सर्किट खराब हो सकते हैं और बिजली के कनेक्शन जमकर टूट सकते हैं। इसलिए चरम तापमान में सामग्रियों की स्थिति को समझना बेहद जरूरी है। पहले नासा तरल क्रायोजेन यानी तरल नाइट्रोजन, हाइड्रोजन और हीलियम का इस्तेमाल करके परीक्षण करता था। ये अत्यधिक ठंडे तरल पदार्थ विशेष टैंकों में रखे जाते थे। अब एलईएसटीआर इस पुरानी विधि की जगह ले सकेगा।
एलईएसटीआर की खासियत यह है कि यह पूरी तरह ड्राई सिस्टम है। इसमें किसी तरल पदार्थ का इस्तेमाल नहीं होता। यह हाई-पावर क्रायोकूलर का उपयोग करके गर्मी को दूर करता है।
एलईएसटीआर के तकनीकी प्रमुख एरियल डिमस्टन ने बताया, “जिस प्रकार बिना सामग्री की सही जानकारी के कोई इमारत नहीं बनाई जा सकती, उसी प्रकार बिना सामग्रियों के सही व्यवहार को जाने बिना कोई स्पेस मिशन सफल नहीं हो सकता।”
डिमस्टन के अनुसार, एलईएसटीआर पारंपरिक तरीकों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित, सस्ता और आसान है। इसमें तरल क्रायोजेन से जुड़ी जटिलताएं, सुरक्षा उपकरण, विशेष वाल्व और सेंसर की जरूरत नहीं पड़ती। इससे समय, लागत और जोखिम तीनों कम हो जाते हैं। यह नई तकनीक कई क्षेत्रों में काम आएगी।
साथ ही, नासा की टीम इससे अगली पीढ़ी के स्पेससूट के लिए कपड़ों, रोवर के टायरों के लिए नई सामग्रियों और ‘शेप मेमोरी अलॉय’ यानी आकार याद रखने वाली धातु का परीक्षण कर रही है। यह धातु मुड़ने, खिंचने या ठंडी होने के बाद भी अपने मूल आकार में वापस आ जाती है, जो चंद्रमा और मंगल की ऊबड़-खाबड़ सतह पर रोवर के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकती है।
महाराष्ट्र
अश्विनी भिड़े ने निर्देश दिया कि मच्छरों पर काबू पाने के उपायों को असरदार तरीके से लागू करने के लिए जॉइंट साइट इंस्पेक्शन किया जाएगा।

मुंबई की अलग-अलग एजेंसियों को मच्छर कंट्रोल के उपायों में साइट विज़िट के दौरान पेस्ट कंट्रोल डिपार्टमेंट की टीम तक पहुंच देने में सहयोग करना चाहिए। मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एरिया में पेस्ट कंट्रोल डिपार्टमेंट को ज़रूरी मदद देकर मच्छर कंट्रोल के उपायों को असरदार तरीके से लागू किया जाना चाहिए। इसके अलावा, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने निर्देश दिया कि म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा मानसून की बीमारियों से बचाव के उपायों के ज़रिए मरीज़ों की संख्या कम करने का मकसद होना चाहिए।
आज (14 मई 2026) म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन हेडक्वार्टर में मुंबई म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े की अध्यक्षता में मच्छर कंट्रोल कमेटी की रिव्यू मीटिंग हुई।
इस मीटिंग में एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर (वेस्टर्न सबअर्ब्स) डॉ. विपिन शर्मा, डिप्टी कमिश्नर (म्युनिसिपल कमिश्नर ऑफिस) प्रशांत गायकवाड़, डिप्टी कमिश्नर (पब्लिक हेल्थ) शरद उदय, एग्जीक्यूटिव हेल्थ ऑफिसर डॉ. दक्षा शाह, पेस्टिसाइड ऑफिसर अमृत सूर्यवंशी के साथ मुंबई की अलग-अलग सरकारी और सेमी-गवर्नमेंट संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद थे। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, महाडा, मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण, मुंबई पोर्ट ट्रस्ट, नौसेना, वायुसेना, बेस्ट, डाक विभाग, मुंबई मेट्रो रेल निगम लिमिटेड, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, डेयरी विभाग, महावतरण, एलआईसी, विमानतल प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग, एनटीसी के वरिष्ठ अधिकारी और सरकारी, अर्धसरकारी संगठनों के प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित थे। जर्जर इमारतों, घास वाले क्षेत्रों, मिल प्लॉट और विभिन्न एजेंसियों के नियंत्रण क्षेत्रों जैसे स्थानों पर कीट नियंत्रण दल की पहुंच में आने वाली बाधाओं को हटाया जाना चाहिए। यहां संयुक्त प्रयासों से मच्छर नियंत्रण उपाय करने की जरूरत है। इससे मानसून की बीमारियों के कारण रोगियों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करना संभव होगा। यह देखा गया है कि मुंबई महानगरपालिका क्षेत्र में 21 एजेंसियों के परिसर में 6,160 पानी की टंकियों के लिए मच्छर नियंत्रण उपाय लागू नहीं किए गए हैं। मुंबई महानगरपालिका के कीटनाशक विभाग और विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से एक संयुक्त निरीक्षण दौरा आयोजित किया जाना चाहिए। मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने निर्देश दिया कि अलग-अलग एजेंसियां 31 मई, 2026 तक मच्छरों के पनपने की जगहों पर रोकथाम के उपाय लागू करने के लिए मिलकर कोशिश करें।
कंस्ट्रक्शन साइट्स पर 5000 से ज़्यादा लोगों की ट्रेनिंग पूरी हुई
मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एरिया में बड़े पैमाने पर बिल्डिंग्स का रिकंस्ट्रक्शन चल रहा है। कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट साइट्स पर मच्छर कंट्रोल के उपाय लागू करने के लिए सिक्योरिटी ऑफिसर्स और वर्कर्स को ट्रेनिंग दी जा रही है। मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एरिया में 5000 से ज़्यादा लोगों को मच्छर कंट्रोल के उपायों की ट्रेनिंग दी गई है। सिक्योरिटी ऑफिसर्स और पेस्ट कंट्रोल डिपार्टमेंट के बीच बातचीत और तालमेल के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया गया है। मानसून के उपायों के तहत, पेस्ट कंट्रोल डिपार्टमेंट फरवरी से अलग-अलग जगहों पर जाकर पानी की टंकियों पर लगे कवर्स को देखने के लिए एक ड्राइव चला रहा है। इंस्पेक्शन के दौरान, यह देखा गया कि पानी की टंकियों के कवर अच्छी हालत में नहीं थे और ठीक से नहीं लगाए गए थे। यह भी पाया गया कि रुकावटों और मटीरियल को हटाने का काम पूरा नहीं हुआ है। कुछ जगहों पर इंजीनियरिंग उपाय लागू करने की ज़रूरत है। अलग-अलग सरकारी और सेमी-गवर्नमेंट संस्थाओं को साइट विजिट कैंपेन के ज़रिए मानसून से पहले मच्छर कंट्रोल के उपाय लागू करने का निर्देश दिया गया है। नगर निगम कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने निर्देश दिया है कि मच्छरों को कंट्रोल करने के उपाय 31 मई 2026 तक एक जॉइंट कैंपेन के ज़रिए प्लान के हिसाब से पूरे किए जाएं।
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