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Wednesday,30-September-2026
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फर्जी और सांप्रदायिक खबरें चिंताजनक, देश का नाम हो रहा बदनाम : सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वेब पोर्टलों और यूट्यूब चैनलों पर फर्जी खबरें प्रकाशित करने, नियामक तंत्र के अभाव में प्रतिष्ठा को बदनाम करने और मीडिया के एक वर्ग द्वारा सांप्रदायिक समाचार प्रसारित करने पर गहरी चिंता व्यक्त की। शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि अगर इसे अनियंत्रित तरीके से जारी रखा गया तो इससे देश का नाम खराब हो सकता है।

प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, वेब पोर्टल पर, किसी का नियंत्रण नहीं है, वे कुछ भी प्रकाशित कर सकते हैं। यदि आप यूट्यूब पर जाते हैं, तो आप पाएंगे कि कैसे फर्जी समाचार स्वतंत्र रूप से प्रसारित होते हैं और कोई भी यूट्यूब पर एक चैनल शुरू कर सकता है।

बेंच में न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना भी शामिल थे। पीठ ने नोट किया कि निजी मीडिया के एक हिस्से में दिखाई गई सामग्री (कंटेंट) सांप्रदायिकता से प्रेरित होती है।

सीजेआई रमना ने कहा, समस्या यह है कि इस देश में सब कुछ मीडिया के एक वर्ग द्वारा सांप्रदायिक कोण से दिखाया गया है।

उन्होंने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, आखिरकार, इस देश का नाम खराब होने वाला है। क्या आपने (इन निजी चैनलों के लिए) स्व-नियामक तंत्र के लिए प्रयास किया है?

मेहता ने पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया कि केंद्र नए सूचना और प्रौद्योगिकी नियम लेकर आया है, जो शीर्ष अदालत द्वारा चिह्न्ति चिंताओं को दूर करता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में नए नियमों को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं दायर की गई हैं।

मेहता ने दलील दी कि केंद्र ने इन सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने के लिए याचिका दायर की है। मेहता ने आगे कहा, न केवल सांप्रदायिक बल्कि कहानियां भी गढ़ी गईं हैं। ये पोर्टल फर्जी खबरें भी डाल सकते हैं।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि सामग्री के संबंध में कोई मुद्दा उठाया जाता है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म प्रतिक्रिया नहीं देते हैं।

प्रधान न्यायाधीश ने आगे कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर संस्थानों के बारे में बुरा लिखा जाता है और वे जवाबदेह भी नहीं हैं। उन्हें केवल शक्तिशाली पुरुषों की चिंता है, न्यायाधीशों की, संस्थानों या आम आदमी की चिंता नहीं है। हमने तो यही देखा है।

मेहता ने पीठ के समक्ष यह अनुरोध किया कि वह आईटी नियमों से संबंधित याचिका को उसके समक्ष स्थानांतरित कर दे। उन्होंने कहा, आपके प्रभुत्व की समग्र तस्वीर हो सकती है क्योंकि यह एक अखिल भारतीय मुद्दा है।

शीर्ष अदालत ने जमीयत उलमा-ए-हिंद की याचिका की सुनवाई के दौरान ये तीखी टिप्पणियां कीं, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी के मरकज निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के कार्यक्रम से जुड़ी कोविड की सांप्रदायिक ब्रांडिंग के आरोपी मीडिया रिपोटरें के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अपनी याचिका में निजामुद्दीन स्थित मरकज में धार्मिक सभा से संबंधित फर्जी खबरें फैलाने से रोकने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने का केंद्र को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

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नीट पेपर लीक मामला : दिल्ली की अदालत ने आरोपी शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई

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नई दिल्ली, 6 जून। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी शुभम खैरनार को 15 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 13 मई को सीबीआई ने शुभम खैरनार को नासिक से गिरफ्तार किया था।

आरोपी शुभम खैरनार की शनिवार को न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद उसे राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई।

शुभम खैरनार, महाराष्ट्र के नासिक जिले के नंदगांव का रहने वाला है। उसने मध्य प्रदेश की श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से बीएएमएस (आयुर्वेद) की पढ़ाई की है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का आरोप है कि उसने पुणे के एक संदिग्ध से यह पेपर 10 लाख में खरीदा और इसे हरियाणा के एक खरीदार को 15 लाख में बेच दिया।

बता दें कि नीट पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जानकारी सामने आई कि सीबीआई अधिकारियों ने शुक्रवार को कल्याण के म्हारल क्षेत्र में रहने वाली एक छात्रा से भी पूछताछ की।

सूत्रों ने बताया कि जांच टीम ने म्हारल इलाके में छात्रा के घर पहुंचकर उसका बयान दर्ज किया। सूत्रों का दावा है कि संबंधित छात्रा नाशिक की एक अन्य छात्रा के संपर्क में थी, जिसकी जांच के दौरान उसका मोबाइल नंबर जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में आया। इसी आधार पर सीबीआई ने उससे पूछताछ की है। हालांकि, सीबीआई की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे। एजेंसियों की शुरुआती जांच में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे। इसी आधार पर परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया और अब इसे नए सिरे से आयोजित किया जाएगा। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी।

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कथित बांग्लादेशियों के जाली और फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों की जांच शुरू; किरीट सोमैया के आरोपों के बाद मुंबई पुलिस हरकत में।

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मुंबई: भाजपा नेता किरीट सौम्या ने मुंबई में अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया था, जिसके बाद मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच भी एक्शन में आ गई है। मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती ने फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट के मामलों में कार्रवाई करने के लिए एक एसआईटी टीम बनाने को मंजूरी दे दी है और एक आदेश भी जारी किया है। किरीट सौम्या ने पहले इस मामले की जांच की मांग की थी। मुंबई पुलिस कमिश्नर ने अब एक आदेश जारी कर यह जिम्मेदारी मुंबई क्राइम ब्रांच की एसआईटी को दी है, जो इन मामलों की जांच करेगी। मुंबई शहर से अब तक एक हजार से ज्यादा बांग्लादेशी अप्रवासियों को निकाला जा चुका है, इसके बावजूद किरीट सौम्या ने आरोप लगाया है कि शहर में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी रहते हैं और यह देश की अखंडता के लिए खतरा है। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले में धार्मिक नफरत फैलाना भी शुरू कर दिया है। मुंबई मुंबई पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बर्थ सर्टिफिकेट और शिकायत की जांच के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच की एसआईटी बनाई है। इस एसआईटी के बारे में डिपार्टमेंटल ऑर्डर जारी करते हुए मुंबई पुलिस कमिश्नर ने साफ किया है कि इस टीम को जॉइंट पुलिस कमिश्नर क्राइम लक्ष्मी गौतम हेड करेंगी, जबकि एडिशनल कमिश्नर क्राइम मुंबई, एडिशनल कमिश्नर स्पेशल ब्रांच, डीसीपी डिटेक्शन क्राइम और असिस्टेंट कमिश्नर क्राइम इस टीम का हिस्सा हैं। ऑर्डर में कहा गया है कि यह एसआईटी टीम बड़े पैमाने पर फर्जी डॉक्यूमेंट्स और बर्थ सर्टिफिकेट में फर्जी सर्टिफिकेट की शिकायतें सामने आने के बाद बनाई गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का मकसद डॉक्यूमेंट्स की जांच करके जरूरी एक्शन लेना है। यह ऑर्डर मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती ने जारी किया है।

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नासिक: जालसाज अशोक खराट की जांच में अहम नतीजा, कई जगहों पर छापेमारी के दौरान जानवरों के अवशेष और महिलाओं के बाल बरामद, बली देने का संदेह

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मुंबई: नासिक के धोखेबाज अशोक खरात की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं और SIT ने कई जगहों पर छापेमारी की है। SIT को यहां से जानवरों के अवशेष भी मिले हैं, लेकिन SIT ने यह जांच शुरू कर दी है कि क्या ये सच में जानवरों के अवशेष हैं या फिर मानव बलि का मामला है। इस मामले में SIT ने अवशेषों को अपने कब्जे में भी ले लिया है, वहीं शक है कि अशोक खरात अघोरी करता था और इसी प्रथा के चलते उसने मानव बलि भी दी होगी। इस बारे में SIT की जांच सही दिशा में जा रही है। नासिक के धोखेबाज अशोक खरात मामले में SIT की जांच में कई अहम नतीजे भी निकले हैं। SIT टीम की हेड तेजस्वी सतपोवे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों पर काम कर चुकी हैं और उनकी जांच कर चुकी हैं। इसी तरह अब नासिक मामले में भी जांच चल रही है। तेजस्वी सतपोवे की मां टीचर हैं जबकि उनके पिता किसान हैं। वह अहमदनगर के शेगांव की रहने वाली हैं। तेजस्वी सतपोवे ने अब खरात के पॉलिटिकल कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है। अशोक खरात के कई बड़े नेताओं और अफसरों से भी कनेक्शन थे। महिला आयोग की हेड रूपाली चाकणकर से भी उनके कनेक्शन थे, इसी आधार पर रूपाली को इस्तीफा देना पड़ा था। SIT जांच में जानवरों के अवशेषों के साथ महिलाओं के बाल भी मिले थे। अब SIT टीमें पता लगा रही हैं कि ये बाल किसके हैं, क्या ये एक महिला के बाल हैं या कई महिलाओं के बाल हैं।

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