व्यापार
भारत में तेजी से बढ़ रहा इक्विटी कल्चर, म्यूचुअल फंड एयूएम में हुआ 300 प्रतिशत से अधिक का इजाफा

मुंबई, 29 अगस्त। भारत में इक्विटी म्यूचुअल फंड के एयूएम (एसेट अंडर मैनेजमेंट) बीते पांच वर्षों में 335.31 प्रतिशत बढ़कर जुलाई 2025 में 33.32 लाख करोड़ रुपए हो हो गया है, जो कि जुलाई 2020 में 7.65 लाख करोड़ रुपए था। यह जानकारी गुरुवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई।
आईसीआरए एनालिटिक्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, इक्विटी म्यूचुअल फंड अपनी चमक बनाए हुए हैं और खुदरा निवेशक लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के उद्देश्य से इन योजनाओं में लगातार निवेश कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि एसआईपी बाजार की अस्थिरता को प्रबंधित करने के लिए एक लोकप्रिय साधन बन गया है, जो निवेशकों को नियमित रूप से एक निश्चित राशि निवेश करने की अनुमति देता है, जिसमें उन्हें औसत भाव से लाभ मिलता है।
आईसीआरए एनालिटिक्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और बाजार डेटा प्रमुख अश्विनी कुमार ने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में इक्विटी म्यूचुअल फंडों में निवेश में तेज वृद्धि देखी गई है, क्योंकि निवेशक बड़ी संख्या में लंबी अवधि का नजरिया अपना रहे हैं, और यह समझ रहे हैं कि अल्पकालिक बाजार में उतार-चढ़ाव वेल्थ क्रिएशन की दिशा में यात्रा का हिस्सा हैं।”
ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि बाजार में समय के साथ सुधार होता है और धैर्यवान निवेशकों को लाभ मिलता है।
जुलाई में सेक्टोरल/थीमैटिक फंडों में सबसे अधिक 9,426.03 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, क्योंकि निवेशक, विशेष रूप से खुदरा क्षेत्र में नए विकास के अवसरों की तलाश में लगे हुए हैं और अल्फा या उच्च रिटर्न अर्जित करने के रास्ते तलाश रहे हैं।
कुमार ने कहा, “इसके बाद फ्लेक्सी कैप फंड और स्मॉल कैप फंड का स्थान रहा, जिनमें क्रमशः 7,654.33 करोड़ रुपए और 6,484.43 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, क्योंकि निवेशक विविध आवंटन और उच्च रिटर्न को प्राथमिकता देते हैं।”
इक्विटी म्यूचुअल फंडों में निवेश में लगातार वृद्धि देखी गई है, जुलाई 2025 में इनफ्लो 42,673 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। इसके विपरीत जुलाई 2020 में आउटफ्लो 3,845 करोड़ रुपए पर था।
कुमार ने आगे कहा, “वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, घरेलू निवेशक भारत की आर्थिक प्रगति को लेकर आशावादी बने हुए हैं। इस विश्वास ने उच्च अस्थिरता के दौर में भी इक्विटी म्यूचुअल फंडों में निरंतर निवेश को बढ़ावा दिया है।”
व्यापार
भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद, सेंसेक्स 270 अंक फिसला

मुंबई, 29 अगस्त। भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। बाजार के ज्यादातर सूचकांक लाल निशान में थे। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 270.92 अंक या 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,809.65 और निफ्टी 74.05 अंक या 0.30 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,426.85 पर था।
लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 320.10 अंक या 0.57 प्रतिशत की गिरावट के साथ 55,727.40 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 67.35 अंक या 0.39 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,227.00 पर था।
बाजार के ज्यादातर इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए हैं। ऑटो, आईटी, रियल्टी और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में सबसे अधिक गिरावट थी। दूसरी तरफ एफएमसीजी, मीडिया, डिफेंस और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए।
सेंसेक्स पैक में आईटीसी, बीईएल, ट्रेंट, एलएंडटी, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, सनफार्मा, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल और पावर ग्रिड टॉप गेनर्स थे। एमएंडएम, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इन्फोसिस, एनटीपीसी, टाटा मोटर्स, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक टॉप लूजर्स थे।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ के पूरे प्रभाव को समझने की कोशिशों के बीच निवेशकों की धारणा सतर्क रही। इस मुद्दे के बने रहने से कुछ क्षेत्रों में भविष्य में भारत के निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की संभावना है। आज इक्विटी बेंचमार्क का प्रदर्शन कमजोर रहा, खासकर मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में। इसके विपरीत, जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने और मजबूत उपभोक्ता मांग की उम्मीदों के चलते एफएमसीजी शेयरों में तेजी बनी रही।
भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत तेजी के साथ हुई थी। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 इंडेक्स 36 अंक या 0.15 प्रतिशत बढ़कर 24,537 और बीएसई सेंसेक्स 118 अंक या 0.15 प्रतिशत बढ़कर 80,199 पर था।
राष्ट्रीय समाचार
2025 में भारत का निर्यात पिछले साल से अधिक रहेगा : पीयूष गोयल

नई दिल्ली, 29 अगस्त। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि इस वर्ष भारत का निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रहेगा, जो घरेलू उद्योग की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता और मजबूती को दर्शाता है। साथ ही सरकार नए अवसरों को खोलने के लिए दुनिया भर के साझेदार देशों से संपर्क कर रही है।
राष्ट्रीय राजधानी में ‘भारत बिल्डकॉन 2026’ कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) होने से भारत का नेटवर्क बढ़ रहा है। भारत ने अभी तक ऑस्ट्रेलिया, यूएई, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन, आइसलैंड और यूके के साथ एफटीए किया है और यूरोपीय यूनियन (ईयू) के साथ इस पर चर्चा चल रही है।
इन एग्रीमेंट्स से भारतीय कंपनियों के लिए निर्माण, स्टील और उससे जुड़े सेक्टर में मौके खुल रहे हैं।
गोयल ने आगे कहा कि कई विकसित देश भारत के साथ व्यापार संबंधों का विस्तार करने के इच्छुक हैं।
केंद्रीय मंत्री का बयान ऐसे समय पर आया है, जब रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिए हैं।
गोयल ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि उद्योग जगत को कुछ देशों की एकतरफा कार्रवाइयों से उत्पन्न अनावश्यक तनाव या कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। उन्होंने उद्योग प्रतिनिधियों से उन क्षेत्रों को उजागर करने का आग्रह किया, जहां वैकल्पिक बाजारों की आवश्यकता है, और आश्वासन दिया कि वाणिज्य मंत्रालय नए अवसर खोलने के लिए दुनिया भर के भागीदारों से संपर्क कर रहा है।
उन्होंने इस्पात और लौह अयस्क में व्यापक निर्यात संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला और कहा कि भारत सालाना 15 मिलियन टन इस्पात का निर्यात कर सकता है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले, प्रतिस्पर्धी मूल्य वाले उत्पादों के साथ उसका निर्यात क्षेत्र मजबूत हो सकता है।
गोयल ने कहा कि देश ‘विकसित भारत 2047’ की ओर अग्रसर है। इस कारण ‘भारत बिल्डकॉन 2026’ देश की ताकत, इनोवेशन, मजबूती और प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रदर्शित करेगा।
व्यापार
भारत के कंज्यूमर टैबलेट मार्केट में 2025 की पहली छमाही में 20.5 प्रतिशत की तेजी : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 28 अगस्त। 2025 की पहली छमाही में, भारत के कंज्यूमर टैबलेट मार्केट में सालाना आधार पर 20.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसे मजबूत विक्रेता प्रोत्साहन रणनीतियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, खुदरा दुकानों और ऑनलाइन चैनलों पर स्थिर मांग का समर्थन प्राप्त हुआ। यह जानकारी गुरुवार को आई एक रिपोर्ट में दी गई।
इंटरनेशनल डेटा कॉर्पोरेशन (आईडीसी) द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, सीजनल प्रमोशनल इवेंट्स और बैक-टू-स्कूल अभियानों ने भी इस वृद्धि को बढ़ावा दिया, जिससे खरीदारों को आकर्षित करने में मदद मिली।
रिपोर्ट में डिटैचेबल टैबलेट में सालाना आधार पर 18.9 प्रतिशत की वृद्धि भी दिखाई गई।
आईडीसी इंडिया और साउथ एशिया के शोध विश्लेषक प्रियांश तिवारी ने कहा, “भारत में कंज्यूमर टैबलेट सेगमेंट में लगातार मजबूत गति देखी जा रही है।”
उन्होंने आगे कहा कि ऑनलाइन चैनलों ने एक्सक्लूसिव प्रोडक्ट लॉन्च, कैशबैक ऑफर और ईएमआई विकल्पों के साथ ऑफलाइन विकास को पीछे छोड़ दिया है।
तिवारी ने आगे कहा, “बड़ी स्क्रीन, स्टाइलस-बैक्ड मॉडल और किफायती एंट्री-लेवल डिवाइस की बढ़ती मांग ने इस वृद्धि को बढ़ावा दिया।”
ब्रांड्स में, सैमसंग ने 2025 की पहली छमाही में 41.3 प्रतिशत की समग्र बाजार हिस्सेदारी के साथ नेतृत्व बनाए रखा, उसके बाद लेनोवो 12.3 प्रतिशत और एप्पल 11.8 प्रतिशत के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
सैमसंग ने कंज्यूमर और कमर्शियल दोनों सेगमेंट में अपना दबदबा बनाए रखा, जबकि लेनोवो ने एसएमबी और एंटरप्राइज कैटेगरी में बढ़त हासिल की।
रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल ने कंज्यूमर मार्केट में मजबूत प्रदर्शन के साथ 14.4 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की और एंटरप्राइज कैटेगरी में भी विस्तार किया।
भविष्य को देखते हुए, आईडीसी को उम्मीद है कि कंज्यूमर टैबलेट बाजार बढ़ता रहेगा, लेकिन सरकारी और शिक्षा क्षेत्रों में लंबे रिफ्रेश साइकल के कारण कमर्शियल सेगमेंट में भारी गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।
आईडीसी इंडिया और साउथ एशिया के शोध प्रबंधक, भरत शेनॉय ने कहा, “कंज्यूमर टैबलेट बाजार 2019 और 2021 के बीच दोगुना हो गया और 2025 के अंत तक इसके तीन गुना होने की उम्मीद है।”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र की मांग कमजोर हो रही है, जिससे आने वाली तिमाहियों में समग्र विकास दर पर असर पड़ सकता है।”
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