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Monday,04-May-2026
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ईपीसी को अगले साल 450-500 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखना चाहिए : पीयूष गोयल

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केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी) से अगले साल 450-500 अरब डॉलर के निर्यात का आह्वान किया है। वीडियो कॉन्फ्रेंन्सिंग के माध्यम से विभिन्न ईपीसी के प्रमुखों के साथ हुई मध्यावधि समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए गोयल ने नई विदेश व्यापार नीति को अंतिम रूप देने से पहले सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करने के निर्देश दिए हैं।

वित्तवर्ष 2021-22 की पहली छमाही में भारत से होने वाले निर्यात के 197 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचने पर संतोष प्रकट करते हुए, गोयल ने कहा कि 48 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के साथ ही हम सही राह पर हैं।

गोयल ने कहा, “हमारे निर्यातकों ने हम सभी भारतीयों को गौरवान्वित किया है। इस प्रकार हम अगले साल के लिए निर्यात लक्ष्य को बढ़ाकर 450-500 अरब डॉलर कर सकते हैं।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इंजीनियरिंग सामानों में काफी ज्यादा क्षमता है। वस्त्र निर्यात का लक्ष्य 100 अरब डॉलर होना चाहिए। गोयल ने सरकार द्वारा हाल में घोषित विभिन्न पीएलआई योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा, “आपको देखना चाहिए कि हम ये योजनाएं लेकर आए हैं।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ब्रिटेन, यूएई, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ईयू, रूस और साउथ अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन (एसएसीयू) सहित विभिन्न देशों और ब्लॉकों के साथ एफटीए पर बातचीत कर रही है। एसएसीयू में बोत्सवाना, लेसोथो, नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और स्वाजीलैंड शामिल हैं।

गोयल ने कहा, समान, निष्पक्ष और संतुलित व भारतीय निर्यातकों के हित में आपको अपनी चिंताओं को सामने रखना होगा। उन्होंने कहा कि ज्यादातर मुद्दे टैरिफ के बजाय बाजार पहुंच से संबंधित हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 अक्टूबर अष्टमी पर अपने सबसे ज्यादा महत्वाकांत्री इन्फ्रास्ट्रक्च र विकास के विजन- गति शक्ति कार्यक्रम का अनावरण करेंगे। गोयल ने निर्यात परिषदों के प्रमुखों को इस कार्यक्रम से वीसी के द्वारा जुड़ने और निर्यात क्षेत्रों से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्च र के मुद्दों के साथ भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।

उन्होंने कहा, हाल में राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति का भी अनावरण किया गया है और निर्यातकों को अपनी चिंताओं के साथ आगे आना चाहिए।

मंत्री गोयल ने पॉलिमर की ऊंची वैश्विक कीमतों के मुद्दों और पर्यावरण कानूनों पर एक समान आवेदन, प्लास्टिक सेक्टर के लिए इनपुट पर भरोसा दिलाया कि वाणिज्य विभाग वर्जिन प्लास्टिक स्कै्रप के आयात को अनुमति देने और उससे संबंधित मुद्दों को पर्यावरण मंत्रालय के सामने रखेगा।

उन्होंने निर्यात परिषदों से उन निर्यातकों की पहचान करने और नाम बताने के लिए कहा, जिनके उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों पर खरे उतरने में नाकाम रहे हैं और खराब गुणवत्ता के कारण अक्सर खारिज हो जाते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बार-बार अनुस्मारक (रिमांडर) भेजने के बावजूद ईपीसी ने वैश्विक बाजारों में मेक इन इंडिया उत्पादों की छवि खराब करने वाले कुछ निर्यातकों की पहचान नहीं की है। उन्होंने कहा, गुणवत्ता से ही हमारे निर्यात का भविष्य निर्धारित होगा।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यमंत्री (वाणिज्य एवं उद्योग) अनुप्रिया पटेल ने निर्यातकों को विभिन्न मंत्रालयों से जुड़ी उनकी चिंताओं के त्वरित समाधान का भरोसा दिलाया, जो निर्यात के विकास को नुकसान पहुंचा रही हैं। सचिव, वाणिज्य विभाग, बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी विचार-विमर्श में भाग लिया।

राष्ट्रीय

पश्चिम एशिया संकट के बीच डीजी शिपिंग का बड़ा कदम, निर्यातकों को राहत देने के निर्देश; नाविकों को सुरक्षित रहने की सलाह

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है। कि युद्ध प्रभावित पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) क्षेत्र में फंसे माल (कार्गो) वाले निर्यातकों को राहत दी जाए और उन्हें जरूरी छूट प्रदान की जाए।

एक सर्कुलर में कहा गया है कि बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली छूट, जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट, रीफर प्लग-इन (कनेक्टेड लोड) और अन्य टर्मिनल चार्ज, सभी मामलों में समान रूप से निर्यातकों तक नहीं पहुंच रही हैं।

डीजी शिपिंग ने निर्देश दिया है कि पोर्ट अथॉरिटी द्वारा दी गई सभी छूट पारदर्शी तरीके से सीधे संबंधित हितधारकों, जिनमें फ्रेट फॉरवर्डर्स और एनवीओसीसी शामिल हैं, को दी जाएं और वे आगे इसे निर्यातकों तक पहुंचाएं।

इसके साथ ही बंदरगाह प्राधिकरणों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे टर्मिनल स्तर पर इसकी निगरानी करें ताकि छूट का लाभ बिना देरी के सही लोगों तक पहुंचे।

रेगुलेटर ने पोर्ट और टर्मिनल ऑपरेटर्स से कहा है कि वे इन निर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि लागत में पारदर्शिता बनी रहे, निर्यातकों के हित सुरक्षित रहें और संकट के दौरान कामकाज प्रभावित न हो।

यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि निर्यातक 497 करोड़ रुपए की रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना के तहत दावा कर सकें और लाभ उठा सकें।

डीजी शिपिंग ने कहा, “शिपिंग कंपनियां ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा बनाए रखें। साथ ही, कार्गो पर लगने वाला वॉर रिस्क प्रीमियम भी बदला है, जो पहले के निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकता। इस मामले को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है।

इसी बीच डीजी शिपिंग ने ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है।

एडवाइजरी में कहा गया है कि जो नाविक किनारे पर हैं, वे घर के अंदर रहें, संवेदनशील जगहों से दूर रहें और अपनी आवाजाही के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।

वहीं, जो नाविक जहाज पर हैं, उन्हें जहाज पर ही रहने और बिना जरूरत किनारे पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।

सभी कर्मियों से सतर्क रहने, आधिकारिक जानकारी पर नजर रखने और अपनी कंपनी व संबंधित अधिकारियों के संपर्क में बने रहने की अपील की गई है।

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राष्ट्रीय

राणा अयूब के संदेशों पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स से मांगा जवाब

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल : दिल्ली उच्च न्यायालय में पत्रकार राणा अयूब से जुड़े एक मामले में अहम सुनवाई हुई है।

यह मामला वर्ष 2013 से 2017 के बीच उनके सामाजिक माध्यम पर किए गए संदेशों से जुड़ा है, जिनमें उन पर भारत विरोधी भावना फैलाने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने राणा अयूब द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर को लेकर किए गए कुछ संदेशों पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि ये संदेश अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक प्रकृति के प्रतीत होते हैं, जो समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई होना आवश्यक है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस संबंध में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स को निर्देश दिया है कि वे इन संदेशों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी दें। साथ ही, यह भी बताएं कि आगे क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में देरी उचित नहीं है और इसे तुरंत सुना जाना जरूरी है।

न्यायालय ने राणा अयूब को भी नोटिस जारी किया है और उनसे इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत का कहना है कि यह मामला सार्वजनिक भावना और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों का जवाब समय पर आना जरूरी है।

साथ ही, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और सोशल साइट एक्स को निर्देश दिया है कि वे अगले दिन तक अपना जवाब दाखिल करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को तय की है, जहां इस पूरे प्रकरण पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

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राजनीति

बारामती उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार आकाश मोरे की इस शर्त से बढ़ी सियासी हलचल

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पुणे, 6 अप्रैल : बारामती विधानसभा उपचुनाव में एक नए मोड़ आ गया है। कांग्रेस उम्मीदवार और वकील आकाश मोरे ने साफ कह दिया है कि वह अपना नामांकन तभी वापस लेंगे, जब महाराष्ट्र सरकार अजित पवार के विमान हादसे की जांच के लिए एफआईआर दर्ज करेगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह हादसा केवल संयोग नहीं था और सच सामने लाना बेहद जरूरी है।

आकाश मोरे ने कहा, “हम यह लड़ाई लोकतंत्र की रक्षा और भाजपा की विचारधारा का विरोध करने के लिए लड़ रहे हैं। अगर सरकार इस मामले में एफआईआर दर्ज करती है और गंभीर जांच करती है, तभी मैं अपना नामांकन वापस लेने पर विचार करूंगा।”

आकाश मोरे पेशे से वकील हैं और उनकी एक राजनीतिक विरासत है। उनके पिता 2014 में अजित पवार के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं।

उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि गृह मंत्रालय को इतने बड़े नेता की मौत को गंभीरता से लेना चाहिए। मोरे ने कहा, “बारामती और महाराष्ट्र के ‘कर्तापुरुष’ चले गए। सवाल यह है कि आखिर एफआईआर क्यों नहीं हुई या जांच क्यों नहीं हुई? हमने अजित दादा का राजनीतिक विरोध किया, ये हो सकता है, लेकिन राज्य के विकास के मामले में उनके साथ खड़े रहे। अगर कोई बड़ा नेता हादसे में मर जाए और एफआईआर दर्ज न हो, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।”

उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल भी इस रुख से सहमत हैं। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे की शर्त पूरी तरह जायज है। उन्होंने कहा, “अजित दादा के निधन के बाद उनके परिवार ने भी जांच की मांग की थी। इसलिए उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन यह प्रक्रिया कहां अटकी? रोहित पवार को एफआईआर दर्ज कराने के लिए महाराष्ट्र भर में दौड़ लगानी पड़ी और आखिरकार यह एफआईआर केवल कर्नाटक में हुई। क्या यही संवेदनशीलता है? हमारी मांग है कि एफआईआर महाराष्ट्र, खासकर बरामती में दर्ज हो तभी हम निर्णय करेंगे।”

अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे सोमवार को कांग्रेस की तरफ से नामांकन दाखिल करेंगे। इस पर काफी चर्चा और आलोचना हो रही है। कई लोग पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए सुझाव दे रहे हैं कि कांग्रेस को इस चुनाव में निर्विरोध मतदान होने देना चाहिए। क्या नांदेड में वसंतराव चव्हाण की मृत्यु के बाद चुनाव नहीं हुए थे? क्या भरत भालके के निधन के बाद मंगलवेढा में चुनाव नहीं हुए थे? ऐसे अनगिनत उदाहरण दिए जा सकते हैं जहां भाजपा ने अपनी सुविधा के अनुसार राजनीति की है।”

कांग्रेस के इस कदम ने निर्विरोध चुनाव की संभावना को रोक दिया है। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि शरद पवार और उद्धव ठाकरे के समर्थन से सुनेत्रा पवार बिना मुकाबले चुनाव जीत सकती हैं, लेकिन कांग्रेस द्वारा आकाश मोरे को मैदान में उतारे जाने के फैसले ने सबको चौंका दिया और अब नामकंन वापस लेने के लिए ये मांग रखी है।

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने पहले कोशिश की कि चुनाव बिना मुकाबले हो, लेकिन कांग्रेस ने आकाश मोरे को मैदान में उतारकर खेल बदल दिया। जैसे-जैसे नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है, सबकी नजरें अब महायुति सरकार पर हैं कि वह इस मांग का क्या जवाब देती है। इस बीच, एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने बारामती के लोगों से अपील की है कि सुनेत्रा पवार को रिकॉर्ड बहुमत से चुने।

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