राष्ट्रीय समाचार
रांची, मुंबई और सूरत में सीए नरेश केजरीवाल के 15 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी
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रांची, 2 दिसंबर: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार सुबह झारखंड के चर्चित चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) नरेश केजरीवाल के ठिकानों पर फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के तहत बड़ी कार्रवाई की है।
उनके रांची, मुंबई और सूरत के कुल 15 ठिकानों पर सुबह छह बजे से ईडी की टीमों ने एक साथ दबिश दी है। नरेश केजरीवाल कई प्रमुख राजनेताओं के वित्तीय मामलों को संभालते रहे हैं। विदेशों में अवैध रूप से धन निवेश और नियमों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों के आधार पर यह कार्रवाई की जा रही है।
ईडी की टीम रांची में चर्च कॉम्प्लेक्स स्थित केजरीवाल के कार्यालय के अलावा उनके आवासीय परिसरों की भी तलाशी ले रही है। फेमा के तहत की गई झारखंड में ईडी की यह पहली छापेमारी बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, आयकर विभाग द्वारा पूर्व में की गई छापेमारी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल डेटा मिले थे। इन्हीं तथ्यों के आधार पर ईडी ने फेमा के तहत जांच प्रारंभ की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि केजरीवाल और उनसे जुड़े व्यक्तियों द्वारा दुबई, अमेरिका सहित कुछ अन्य देशों में धन का निवेश किया गया है।
जांच अधिकारियों को विदेशों में किए गए निवेश से जुड़े लेनदेन, कंपनियों और बैंक खातों के बारे में अहम जानकारी मिली है। ईडी का कहना है कि विदेशों में किए गए निवेश के दौरान निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। प्रारंभिक जांच में कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जो फेमा के प्रावधानों के उल्लंघन की ओर संकेत करते हैं।
इसी आधार पर मंगलवार को बहु-राज्यीय कार्रवाई की गई। तलाशी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, कंप्यूटर डेटा, विदेशी लेनदेन के कागजात और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
राजनीति
बंगाल चुनाव : सुजापुर में टीएमसी की बड़ी जीत, सबीना यास्मीन ने कांग्रेस गढ़ में फिर मारी बाजी

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले की बेहद अहम और हाई-प्रोफाइल सुजापुर विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखा है। 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की उम्मीदवार और राज्य सरकार में मंत्री सबीना यास्मीन ने शानदार जीत दर्ज करते हुए कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ में लगातार दूसरी बार जीत हासिल की है।
चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सबीना येस्मीन को कुल 1,12,795 वोट मिले और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के अब्दुल हन्नान को 60,287 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अभिजीत रजक 20,066 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
सुजापुर विधानसभा सीट (सीट नंबर 53) का राजनीतिक इतिहास काफी समृद्ध और दिलचस्प रहा है। 1957 में गठित इस सीट को लंबे समय तक कांग्रेस का अभेद्य किला माना जाता रहा। दिग्गज कांग्रेसी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए.बी.ए. गनी खान चौधरी (बरकत दा) के परिवार का इस क्षेत्र पर वर्षों तक प्रभाव रहा। 1967 से 1977 तक गनी खान चौधरी की लगातार जीत, और बाद में रूबी नूर, मौसम नूर और ईशा खान चौधरी जैसे नेताओं ने इस विरासत को आगे बढ़ाया।
हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार इस किले में सेंध लगाते हुए जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में मोहम्मद अब्दुल गनी ने टीएमसी को ऐतिहासिक सफलता दिलाई थी। 2026 में पार्टी ने रणनीतिक बदलाव करते हुए उनकी जगह मोथाबाड़ी की पूर्व विधायक और मंत्री सबीना यास्मीन को चुनावी मैदान में उतारा और यह दांव पूरी तरह सफल साबित हुआ।
इस बार सुजापुर में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला, जिसमें टीएमसी की सबीना यास्मीन, कांग्रेस के अब्दुल हन्नान और भाजपा के अभिजीत रजक आमने-सामने थे। मालदा को पारंपरिक रूप से कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, ऐसे में यह मुकाबला खास तौर पर टीएसी और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया था।
जनसांख्यिकीय दृष्टि से यह सीट काफी अहम है। सुजापुर एक अल्पसंख्यक (मुस्लिम) बहुल क्षेत्र है, जहां के मतदाता चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
सुजापुर विधानसभा क्षेत्र ‘मालदा दक्षिण’ लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, टीएमसी की यह बड़ी जीत इस बात का संकेत है कि पार्टी ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।
सबीना यास्मीन की निर्णायक जीत न सिर्फ उनके व्यक्तिगत राजनीतिक कद को मजबूत करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ कर लिया है।
राजनीति
असम चुनाव परिणाम 2026: असम के जोरहाट में भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने कांग्रेस के गौरव गोगोई को 23,000 से अधिक वोटों से हराया

जोरहाट : असम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एकतरफा जीत की ओर बढ़ रही है, भगवा पार्टी 126 में से 99 सीटों पर आगे चल रही है, और जीत के लिए 64 का आंकड़ा निर्णायक साबित होगा।
चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार, जोरहाट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के मौजूदा विधायक हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई को 23,182 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया है। गोगोई ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था।
हितेंद्र नाथ गोस्वामी कौन हैं?
हिरेंद्र नाथ गोस्वामी ने इससे पहले 2017 से 2021 तक असम विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था। इससे पहले वे असम गण परिषद (एजीपी) से जुड़े थे। 2014 में नेतृत्व संबंधी चिंताओं के कारण एजीपी छोड़ने के बाद वे भाजपा में शामिल हो गए, लेकिन उन्होंने कांग्रेस विरोधी रुख को बरकरार रखा।
इसके अलावा, चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा उम्मीदवार जिबन गोगोई ने असम के नवगठित सिसीबरगांव निर्वाचन क्षेत्र से 40,593 वोटों के अंतर से जीत हासिल की है।
उन्होंने 75,758 वोट हासिल किए, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी, रायजोर दल के दुलाल चंद्र बोरुआ को 35,165 वोट मिले। 2023 के परिसीमन के बाद गठित इस सीट पर गोगोई की यह पहली चुनावी जीत है।
राजनीति
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: मुस्लिम बहुल सीटों पर भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता के बीच टीएमसी की पकड़ कमजोर हुई।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के शुरुआती मतगणना रुझानों से संकेत मिलता है कि मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा अब पहले के चुनावों की तरह नहीं रहा है। 293 सीटों में से 43 ऐसे निर्वाचन क्षेत्र हैं जहां 50 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी है और वहां चुनावी माहौल में बदलाव दिख रहा है।
शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, टीएमसी और उसके सहयोगी दल इन 30 सीटों पर आगे चल रहे हैं, जो पहले के प्रदर्शन की तुलना में 12 की गिरावट है। भारतीय जनता पार्टी नौ सीटों पर आगे है, जबकि अन्य दलों की चार-चार सीटें हैं, जो मामूली बढ़त दर्शाती हैं।अतीत के प्रभुत्व से एक विचलन
मौजूदा रुझान 2021 के विधानसभा चुनावों से बिलकुल अलग है, जब टीएमसी ने मुस्लिम बहुल 44 सीटों में से 43 पर जीत हासिल की थी और लगभग 58 प्रतिशत वोट शेयर प्राप्त किया था। भाजपा को उस समय 21 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर मिलने के बावजूद इनमें से किसी भी सीट पर जीत हासिल करने में सफलता नहीं मिली थी। वामपंथी और अन्य दलों का प्रभाव सीमित ही रहा था।
मौजूदा रुझान इन निर्वाचन क्षेत्रों में वोटों के विखंडन का संकेत देते हैं, जिससे पता चलता है कि पहले से समेकित समर्थन में आंतरिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
मतगणना जारी रहने के बीच नेताओं की प्रतिक्रिया
शुरुआती रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल के विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि हिंदू मतदाताओं में एकजुटता दिख रही है, जबकि मुस्लिम मतदाता इस बार अधिक विभाजित नजर आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने कुछ ऐसे बूथों पर भी अपनी पकड़ मजबूत की है जहां पहले उसे संघर्ष करना पड़ता था।
अधिकारी ने आगे कहा कि मतगणना के शुरुआती दौर के बाद कई निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा को बढ़त मिलती दिख रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को श्रेय देते हुए पार्टी के सरकार बनाने का विश्वास व्यक्त किया।
भवानीपुर प्रतियोगिता ने खींचा ध्यान
भाबानीपुर के बारे में बात करते हुए अधिकारी ने कहा कि शुरुआती दौर के मतदान में अल्पसंख्यक आबादी वाले क्षेत्रों में उन्हें नुकसान हुआ था, लेकिन बाद के दौर के मतदान में उनके पक्ष में रुझान बदल गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पीछे चल रही हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
मतगणना अभी जारी है, इसलिए राजनीतिक विश्लेषक सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। हालांकि, शुरुआती रुझान पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव को रेखांकित करते हैं, जहां मतदाताओं का व्यवहार पिछले चुनावों की तुलना में अधिक भिन्न प्रतीत होता है।
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