राजनीति
कोविड के खिलाफ सुरक्षा को कम न करें : राष्ट्रपति कोविंद
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 75वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोनावायरस अभी भी यहां है, दूर नहीं हुआ है और किसी को भी सुरक्षा के उपायों में कमी नहीं करनी चाहिए। यह देखते हुए कि टीका सर्वोत्तम संभव सुरक्षा है, उन्होंने कहा, “हमें अभी तक इस वर्ष इसकी पुनरावृत्ति के विनाशकारी प्रभावों से बाहर आना बाकी है। पिछले साल, सभी के असाधारण प्रयासों के साथ, हम संक्रमण के प्रसार को नियंत्रण में लाने में सफल रहे थे। हमारे वैज्ञानिकों ने बहुत ही कम समय में टीके विकसित करने में सफलता हासिल की है।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस साल की शुरुआत में दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा टीकाकरण अभ्यास शुरू किया गया था, जिसमें लोगों से टीकाकरण करने का आग्रह किया गया था।
राष्ट्रपति ने कोविड की दूसरी लहर का जिक्र करते हुए कहा, अंतराल को पाटने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए गए थे, जबकि नेतृत्व चुनौती के लिए बढ़ गया था और सरकार के प्रयासों को राज्यों, निजी क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं, नागरिक समाज की पहल द्वारा पूरक किया गया था।
उन्होंने कहा, “इस असाधारण मिशन में, विदेशी राष्ट्रों ने उदारता से आवश्यक चीजों को साझा किया, जैसे कि भारत कई देशों में दवा, उपकरण और टीके के साथ पहुंचा था। मैं वैश्विक बिरादरी का आभारी हूं जो मदद के लिए आगे आया।”
हाल ही में संपन्न टोक्यो ओलंपिक के बारे में बात करते हुए उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन का जिक्र किया। ओलंपिक में भाग लेने के 121 वर्षो में भारत ने सबसे अधिक पदक जीते हैं।
उन्होंने कहा, “हमारी बेटियों ने कई प्रतिकूलताओं को पार करते हुए खेल के मैदानों में विश्व स्तर की उत्कृष्टता हासिल की है। खेल के साथ-साथ, जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी और सफलता में युगांतरकारी परिवर्तन हो रहे हैं। उच्च शिक्षण संस्थानों से लेकर सशस्त्र बलों तक, प्रयोगशालाओं से खेल के मैदानों तक, हमारी बेटियां अपनी पहचान बना रही हैं। अपनी बेटियों की इस सफलता में मुझे भविष्य के विकसित भारत की एक झलक दिखाई दे रही है।”
कोविंद ने कहा, “स्वतंत्रता दिवस हमारे लिए स्वतंत्रता का त्योहार है। यह स्वतंत्रता सेनानियों की पीढ़ियों द्वारा संभव बनाया गया था, कुछ ज्ञात, कई अज्ञात। उन्होंने महान बलिदान दिए। आज, आप और मैं उनके वीर कार्यो के लिए स्वतंत्र आसमान के नीचे सांस लेते हैं। मैं नमन करता हूं। उन बहादुर शहीदों की पवित्र स्मृति के लिए सम्मान।”
उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी के नेतृत्व में हमारा राष्ट्रवादी आंदोलन सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित था। कोविंद ने कहा कि उन्होंने और अन्य सभी राष्ट्रीय नायकों ने हमें न केवल औपनिवेशिक शासन से राष्ट्र को मुक्त करने के लिए, बल्कि इसके पुनर्निर्माण के लिए एक अमूल्य खाका प्रदान किया और उनका संघर्ष भारतीय लोकाचार और मानवीय गरिमा की वापसी के लिए था।
उन्होंने कहा, “हमने संसदीय लोकतंत्र की प्रणाली को अपनाया है। इसलिए, हमारी संसद हमारे लोकतंत्र का मंदिर है जो हमें सर्वोच्च मंच प्रदान करती है, जहां हम अपने लोगों की भलाई के लिए चर्चा, बहस और मुद्दों पर निर्णय लेते हैं। सभी भारतीयों के लिए यह बहुत गर्व की बात है कि हमारी संसद जल्द ही एक नए भवन में होगी। यह हमारे दृष्टिकोण का एक उपयुक्त कथन होगा : यह समकालीन दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के साथ-साथ हमारी विरासत का सम्मान करेगा। यह प्रतीकात्मक से भी अधिक है कि स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के वर्ष में नए भवन का उद्घाटन किया जाएगा।”
गगनयान मिशन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना के पायलट विदेशों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। जब वे अंतरिक्ष में उड़ान भरेंगे, तो भारत मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन को अंजाम देने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।
कोविंद ने अंत में कहा, “मैं भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आप सभी को बधाई देता हूं। इस वर्षगांठ को मनाते हुए, मैं अपने दिमाग को 2047 के एक शक्तिशाली, समृद्ध और शांतिपूर्ण भारत की कल्पना करने से नहीं रोक सकता, जब हम अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेंगे।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान पर आर्थिक दबाव तेज, हर दिन 50 करोड़ डॉलर का नुकसान : ट्रंप

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की हालिया संघर्ष का अर्थव्यवस्था पर गंभीर दबाव पड़ रहा है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक छोटे से पोस्ट के जरिए अपने अंदाज में ईरान की बदहाली बयां की।
उन्होंने कहा कि ईरान “कैश के लिए तरस रहा है” और हर दिन करीब 50 करोड़ डॉलर का नुकसान झेल रहा है, जिससे वह तुरंत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाना चाहता है। वहां के नौसैनिक और पुलिस को वेतन नहीं मिल रहा है और वो सब दुखी हैं।
ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी ने ईरान की तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है।
होर्मुज, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है, इस पूरे संकट का केंद्र बन गया है।
दरअसल, ईरान की अर्थव्यवस्था इस जलमार्ग और तेल निर्यात पर अत्यधिक निर्भर है। एक अनुमान के मुताबिक, नाकेबंदी के कारण ईरान को रोजाना लगभग 43.5 करोड़ डॉलर का नुकसान हो सकता है, जो तेल निर्यात और व्यापार रुकने से जुड़ा है।
हालात को और गंभीर बनाते हुए रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान का 90 प्रतिशत से अधिक समुद्री व्यापार इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में लंबे समय तक नाकेबंदी रहने पर आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप हो सकती हैं, जिससे मुद्रा पर दबाव, महंगाई और बैंकिंग संकट जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
इस बीच, क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जहां पहले रोजाना 100 से अधिक जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या बेहद सीमित रह गई है। कई टैंकर और जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ा है।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह आर्थिक दबाव ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के लिए बनाया गया है। हालांकि, तेहरान ने इस रणनीति को “आर्थिक युद्ध” बताया है और चेतावनी दी है कि यदि नाकेबंदी जारी रही तो वह इसका जवाब दे सकता है।
स्थिति सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पहले ही चेतावनी दे चुका है कि इस संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति में बाधा के कारण वैश्विक आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है और महंगाई बढ़ सकती है।
एटलांटिक काउंसिल ऑफ युनाइटेड स्टेट्स के अनुसार, अगर हॉर्मुज लंबे समय तक बाधित रहता है, तो न केवल ईरान बल्कि पूरी दुनिया को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। तेल की कीमतों में तेजी, आपूर्ति में कमी और व्यापार मार्गों में बाधा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
राष्ट्रीय समाचार
2006 मालेगांव ब्लास्ट केस: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, चार आरोपी हुए बरी

2006 के मालेगांव ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने बुधवार को चार आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने वाले आदेश को रद्द कर करते हुए उन्हें बरी कर दिया। मालेगांव में इन धमाकों में 37 लोगों की जान चली गई थी।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस श्याम चांदक की डिवीजन बेंच ने आरोपियों की ओर से एक स्पेशल कोर्ट के सितंबर 2025 के उस आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर यह फैसला सुनाया, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे। इस अपील में ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोप तय करने के तरीके और मामले में कई सह-आरोपियों को बरी किए जाने पर भी सवाल उठाए गए थे।
फिलहाल, हाईकोर्ट ने जिन चार आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने वाले आदेश को रद्द किया है, उनमें राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर राम सिंह नरवारिया और लोकेश शर्मा शामिल हैं। हाईकोर्ट के आज के फैसले से इन आरोपियों के खिलाफ मामला बंद हो गया और उनके खिलाफ चल रहा ट्रायल भी खत्म हो गया।
बेंच ने इससे पहले अपील दायर करने में हुई 49 दिन की देरी को माफ कर दिया था, यह देखते हुए कि यह चुनौती राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम (एनआईए अधिनियम) की धारा 21 के तहत एक वैधानिक अपील थी।
मालेगांव मामला 8 सितंबर 2006 का है, जब इस शहर में हुए सिलसिलेवार धमाकों के बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और अन्य कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच सबसे पहले महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने की थी, जिसने 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया और दिसंबर 2006 में चार्जशीट दायर की।
इसके बाद फरवरी 2007 में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई और बाद में एनआईए ने इसे अपने हाथ में ले लिया। एनआईए ने आगे की जांच के बाद अन्य आरोपियों के साथ-साथ इन चारों को भी आरोपी बनाया था और एक नई चार्जशीट दायर की थी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरानी शिक्षा मंत्री का दावा, ‘1,300 में से आधे से अधिक स्कूलों की मरम्मत पूरी’

अमेरिका-इजरायल एयर स्ट्राइक के बाद 40 दिन तक चले संघर्ष में ईरान की कई इमारतों और बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचा। कई शैक्षिक संस्थान तबाह हो गए। इस बीच ईरान में शिक्षा व्यवस्था को बहाल करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। शिक्षा मंत्री अलीरेजा काजेमी ने कहा है कि संघर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त हुए 1,300 स्कूलों में से 775 की मरम्मत अब तक पूरी कर ली गई है।
ईरानी न्यूज एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, शिक्षा मंत्री ने बताया कि करीब 20 स्कूल पूरी तरह नष्ट हो गए थे, जबकि सबसे अधिक नुकसान तेहरान, केर्मानशाह, इस्फहान और होर्मोजगान प्रांतों में हुआ। उन्होंने कहा कि बुरी तरह से क्षतिग्रस्त स्कूलों की मरम्मत अक्टूबर तक पूरी होने की उम्मीद है।
काजेमी ने यह भी बताया कि हमलों के बावजूद देश में शैक्षिक गतिविधियां जारी रहीं। कई स्थानों पर कक्षाएं ऑफलाइन चलाई गईं, जबकि अन्य जगहों पर ऑनलाइन माध्यम अपनाया गया, जिसमें इरानियन टेलीविजन स्कूल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
छात्रों और शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए काउंसलिंग सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं। इसके साथ ही स्कूलों में उन 170 लोगों की याद में कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो मिनाब स्थित शजराह तैयबा प्राइमरी स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में मारे गए थे। इनमें अधिकांश छात्राएं और शिक्षक थे। अमेरिका-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के पहले दिन (28 फरवरी) ही प्राइमरी स्कूल पर हमला हुआ। हमले का शिकार हुई बच्चियों की उम्र 7 से 12 बरस के बीच की बताई गई थी।
ईरान सरकार का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को सामान्य बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है, ताकि युद्ध के असर को कम किया जा सके और छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो।
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