राष्ट्रीय समाचार
कम मूल्य वाले सामान पर जीएसटी रिफंड के लिए मूल्य सीमा को समाप्त करने के डीजीएफटी के प्रस्ताव को मिली मंजूरी
नई दिल्ली, 5 सितंबर। ई-कॉमर्स निर्यातकों को राहत देते हुए, जीएसटी परिषद ने कम मूल्य वाले सामान पर जीएसटी रिफंड के लिए मूल्य सीमा को समाप्त करने के डीजीएफटी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की संबंधित धारा में संशोधन किया जाएगा ताकि कर भुगतान के साथ किए गए निर्यातों के लिए, चाहे उनका मूल्य कुछ भी हो, रिफंड की अनुमति मिल सके।
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि यह बहुप्रतीक्षित सुधार छोटे निर्यातकों, विशेष रूप से कूरियर या डाक सेवाओं के माध्यम से माल भेजने वालों की चिंताओं का समाधान करता है। इससे प्रक्रियाओं को सरल बनाने और कम मूल्य वाले ई-कॉमर्स निर्यात को सुगम बनाने की उम्मीद है।
सरकार ने लागत कम करने, शुल्क-संबंधी विकृतियों को दूर करने और कागज, चमड़ा, लकड़ी, हस्तशिल्प, वाणिज्यिक वाहन, ट्रैक्टर, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, खिलौने और पैकेजिंग सामग्री जैसे विविध क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के उद्देश्य से जीएसटी दरों को रेशनलाइज बनाने के उपायों की एक सीरीज शुरू की है।
जीएसटी रिफंड के लिए मूल्य सीमा को हटाने से छोटे और ई-कॉमर्स निर्यातकों को काफी लाभ होगा क्योंकि इससे कम मूल्य के शिपमेंट भी रिफंड के लिए पात्र हो जाएंगे।
इससे नकदी प्रवाह में सुधार होगा, कार्यशील पूंजी की कमी कम होगी, अनुपालन सरल होगा और धनवापसी प्रक्रियाएं, विशेष रूप से कूरियर या डाक सेवाओं के माध्यम से भेजे गए माल के लिए, सुव्यवस्थित होंगी।
मंत्रालय ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप, एमएसएमई और छोटे विक्रेता अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अधिक प्रभावी ढंग से भाग ले सकेंगे, जिससे कम मूल्य वाले ई-कॉमर्स निर्यात में वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
उद्योग निकायों ने इन सुधारों का स्वागत किया है और इस बात पर जोर दिया है कि तेज निर्यात रिफंड, इंवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत अस्थायी राहत और प्रमुख क्षेत्रों में दरों को रेशनलाइज बनाने जैसे उपायों से नकदी का दबाव कम होगा, कार्यशील पूंजी की रुकावटें कम होंगी और सप्लाई चेन मजबूत होंगी।
इन कदमों से विनिर्माण को बढ़ावा मिलने, एमएसएमई को समर्थन मिलने, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने और लागत लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने की उम्मीद है।
कागज पैकेजिंग, कपड़ा, चमड़ा और लकड़ी पर जीएसटी को 12-18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने से उत्पादन लागत कम होगी, जिससे निर्यातक अधिक प्रतिस्पर्धी मूल्य प्रदान कर सकेंगे।
कपड़ा, हस्तशिल्प, चमड़ा, खाद्य प्रसंस्करण और खिलौनों में तेजी से रिफंड और रेट्स को रेशनलाइज बनाने से एमएसएमई और उच्च मांग वाले निर्यात क्षेत्रों को मदद मिलेगी।
ट्रकों और डिलीवरी वैन पर जीएसटी 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने और पैकेजिंग सामग्री पर जीएसटी कम करने से माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
खिलौनों और खेल के सामानों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने से घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा, सस्ते आयात का मुकाबला होगा और बढ़ती वैश्विक मांग का लाभ उठाया जा सकेगा।
जीएसटी के रेशनलाइज होने से एमएसएमई और निर्यातकों के लिए इनपुट लागत कम होने, उपभोक्ताओं पर मुद्रास्फीति का दबाव कम होने जैसी संरचनात्मक विसंगतियों को ठीक करने की उम्मीद है।
ये उपाय ‘वोकल फॉर लोकल’ को भी बढ़ावा देंगे, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देंगे और कपड़ा, ट्रैक्टर, खाद्य प्रसंस्करण, ऑटो कंपोनेंट और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में एक ग्लोबल हब के रूप में उभरने की भारत की महत्वाकांक्षा का समर्थन करेंगे, साथ ही यह सुनिश्चित करेंगे कि लागत लाभ अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंचें।
राष्ट्रीय समाचार
‘सीएजी रिपोर्ट पर पीएसी की टिप्पणियों को गंभीरता से लें अधिकारी’, विधानसभा अध्यक्ष का विभागों को आदेश

दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने शुक्रवार को सरकारी खर्च में जवाबदेही पर जोर देते हुए दिल्ली सरकार के विभागों को आवश्यक निर्देश दिए। स्पीकर ने कहा कि विभाग पिछले साल की सीएजी (नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक) रिपोर्ट पर पीएसी (पब्लिक अकाउंट्स कमिटी) की टिप्पणियों पर ध्यान दें और तय समय के अंदर ‘एक्शन टेकन नोट्स’ (की गई कार्रवाई की रिपोर्ट) जमा करें।
आठवीं दिल्ली विधानसभा के छठे सत्र के पहले दिन एक बयान में स्पीकर गुप्ता ने कहा, “पिछले साल से, पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (पीएसी) लगातार उन सीएजी रिपोर्टों की जांच कर रही है, जिन्हें पिछली सरकारों के कार्यकाल के दौरान सदन के सामने पेश नहीं किया गया था।”
उन्होंने कहा, “कमेटी ने अब उन सीएजी रिपोर्टों पर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जो पिछले साल पेश की गई थीं।”
उन्होंने कहा, “मुझे भरोसा है कि इस साल पेश की गई सीएजी रिपोर्टों की जांच भी साल के आखिर तक पूरी हो जाएगी। मैंने विधानसभा सचिवालय को निर्देश दिया है कि वे इन रिपोर्टों को संबंधित विभागों को भेजें ताकि जल्द से जल्द ‘एक्शन टेकन नोट्स’ मिल सकें।”
स्पीकर ने आगे कहा, “जैसा कि मैंने पहले कहा है, सीएजी की टिप्पणियां केवल कुछ मामलों की जांच पर आधारित होती हैं। इसलिए, संबंधित विभागों को इन टिप्पणियों को एक चेतावनी के तौर पर लेना चाहिए और भविष्य में ऐसी कमियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि सरकार के सीमित संसाधनों का सबसे अच्छे तरीके से इस्तेमाल हो सके।”
उन्होंने कहा कि ये रिपोर्टें सिर्फ कमियों का ब्योरा नहीं हैं, बल्कि सुधार का रास्ता भी दिखाती हैं। मैं सभी विभागों से आग्रह करता हूं कि वे इन निष्कर्षों को पूरी गंभीरता से लें, तय समय के भीतर अपने ‘एक्शन टेकन नोट्स’ जमा करें और जरूरी सुधारात्मक कदम उठाएं ताकि जनता के पैसे का एक-एक रुपया सिर्फ उसी मकसद के लिए इस्तेमाल हो जिसके लिए वह है।
इससे पहले, शुक्रवार को आठवीं दिल्ली विधानसभा का छठा सत्र शुरू हुआ। मानसून सत्र में 10 और 11 अगस्त को कम से कम दो और बैठकें होने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय समाचार
हर घर तिरंगा अभियान: जौनपुर में 300 महिलाओं ने संभाली झंडा बनाने की जिम्मेदारी

स्वतंत्रता दिवस नजदीक आने के साथ ही जौनपुर के ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिलाएं ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। केंद्र प्रायोजित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत 62 स्वयं सहायता समूहों की लगभग 300 महिलाओं ने ‘हर घर तिरंगा’ और ‘तिरंगा यात्रा’ अभियान में सरकार के विशाल राष्ट्रव्यापी ध्वजारोहण अभियान से पहले राष्ट्रीय ध्वज बनाने का कार्य अपने हाथ में लिया है।
जिले के लिए पांच लाख झंडे तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और इन झंडों को सभी ब्लॉकों में 62 स्वयं सहायता समूहों की लगभग 300 महिलाएं तैयार कर रही हैं। बजरंग स्वयं सहायता समूह की महिला विजयलक्ष्मी मौर्या ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि उसके समूह को 17 हजार झंडे बनाने का लक्ष्य मिला है। हमने छह हजार झंडों की सिलाई पूरी करके उन्हें आगे ब्लॉक कार्यालय में भेज दिया है।
विजयलक्ष्मी मौर्या ने बताया कि समूह में 10 से अधिक महिलाएं हैं, जो इस कार्य को कर रही हैं। हम लोग झंडों की सिलाई का कार्य कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस कार्य में उन्हें 30 से 40 हजार रुपए की कमाई होगी।
स्वतः रोजगार उपायुक्त जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस बार हमारे जनपद को पांच लाख झंडे बनाने का लक्ष्य मिला है। मुख्य कार्य संकुल स्तरीय स्वयं सहायता समूह से किया जा रहा है। सरकार के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के लक्ष्य सरकार की ओर से दिए गए लक्ष्य को पूरा कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि एक झंडे पर डेढ़ से दो रुपया समूह की महिलाओं को मिल जाता है, क्योंकि यह महिलाएं सिर्फ सिलाई करती हैं। मुख्य रूप से संकुल को एक झंडा बनाने के लिए 20 रुपए दिया जा रहा है और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को एक झंडे पर 2 से 3 रुपए तक जरूर मिल जाएगा।
राजनीति
राहुल गांधी को महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए : रिजिजू

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महिलाओं की आजादी और भागीदारी पर बयान दिया। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि जब तक महिलाएं खुलकर अपनी बात नहीं रख पाएंगी, तब तक कोई भी देश पूरी तरक्की नहीं कर सकता।
राहुल गांधी के इस बयान पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिक्रिया देते हुए ‘एक्स’ पोस्ट में कहा कि कांग्रेस को अब संसद में महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
दरअसल, राहुल गांधी ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर एक वीडियो पोस्ट कर में अपनी बात रखी। गुरुवार को भी ‘आस्क मी एनीथिंग’ सत्र में भी उन्होंने इसी मुद्दे पर बात की थी।
उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “मैं सोच रहा था कि भारत की महिलाओं की ऊर्जा फंसी हुई है, उसे व्यक्त करने की इजाजत नहीं है, कल्पना करने की आजादी नहीं है। मेरे लिए कोई भी देश तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक वहां की महिलाएं खुद को व्यक्त न कर सकें।”
वीडियो में राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं की आवाज दबने से देश की तरक्की पर असर पड़ता है। मेरी राजनीति का एक बड़ा हिस्सा यही है कि लोग समझें कि महिलाओं की अभिव्यक्ति के बिना हमारा देश अधूरा और पिछड़ा है।
राहुल गांधी ने कहा कि महिला सशक्तीकरण सिर्फ बिजनेस या राजनीति तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह सिर्फ इस बारे में नहीं है कि महिलाएं बिजनेस या राजनीति में अच्छा करें, बल्कि यह भी है कि वे अपने घरों में, परिवार में और सार्वजनिक जगहों पर खुलकर बोल सकें और सड़कों पर आराम से चल सकें।
उन्होंने आगे कहा, “महिलाओं को यह आजादी होनी चाहिए कि वे दूसरों से अलग राय रख सकें, अपने माता-पिता, पति, भाई-बहन से सवाल कर सकें। भारत को सच में विकसित होना है तो पितृसत्ता और पुरुषों के कड़े नियंत्रण से महिलाओं को थोड़ी आजादी मिलनी ही चाहिए।”
राहुल गांधी के इस वीडियो बयान पर किरेन रिजिजू ने कहा कि यह कांग्रेस के नजरिए में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
यह कांग्रेस पार्टी का सकारात्मक संदेश लगता है। राहुल गांधी के दिल में महिलाओं को लेकर बदलाव दिख रहा है। अब मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करेगी।
महिला आरक्षण विधेयक, जिसे संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 या नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जाता है, एक ऐतिहासिक कानून है। इसके तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। फिलहाल महिला आरक्षण को लेकर सियासी बहस तेज है और सभी की नजर संसद के अगले कदम पर है।
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