राष्ट्रीय समाचार
दीपिका पादुकोण के सेल्फ केयर ब्रांड के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का ‘लोटस’ पर अंतरिम रोक से इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के सेल्फ-केयर ब्रांड ’82°ई’ के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में ‘लोटस हर्बल्स’ के पक्ष में अंतरिम निषेधाज्ञा पारित करने से इनकार कर दिया है, जो विशेष रूप से प्रोडक्ट ‘लोटस स्प्लैश’ सौम्य फेस क्लींजर से संबंधित है।
न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर ने कहा कि प्रोडक्ट्स की कीमत में पर्याप्त भिन्नता के साथ उपस्थिति में महत्वपूर्ण असमानताएं प्रदर्शित हुईं, और उन्हें पारित करने के मामले का कोई आधार नहीं मिला।
अदालत ने कहा कि दोनों ब्रांडों के बीच एकमात्र सामान्य एलिमेंट ‘लोटस’ शब्द था। अदालत ने कहा कि उपभोक्ता को ‘लोटस स्प्लैश’ और वादी के लोटस फैमली के प्रोडक्ट्स के बीच अंतर के बारे में पता होगा। यह नहीं कहा जा सकता कि प्रतिवादी अपने प्रोडक्ट को वादी के प्रोडक्ट के रूप में पेश करना चाह रहे हैं।
अदालत ने कहा कि ‘लोटस स्प्लैश’ सामान की विशेषताओं का सूचक था और इसलिए, मार्क के उपयोग को उल्लंघनकारी नहीं माना गया।
इसके अलावा, इसने प्रतिवादियों के प्रोडक्ट बोतलों के निचले किनारे पर ’82°ई’ ब्रांड नाम की उपस्थिति को नोट किया, जो खुदरा सेटिंग में उपभोक्ताओं के लिए स्पष्ट होगा। लोटस हर्बल्स ने अपने प्रोडक्ट के लिए मार्क के हिस्से के रूप में ‘लोटस’ के उपयोग को रोकने के लिए 82°ई के मालिक, डीपीकेए यूनिवर्सल कंज्यूमर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा पारित करने की मांग की थी।
अंतरिम निषेधाज्ञा के लिए लोटस हर्बल्स के आवेदन को खारिज करते हुए अदालत ने बताया कि प्रथम दृष्टया चरण में एक उपभोक्ता संभवत: ‘लोटस हर्बल्स’ प्रोडक्ट को ‘लोटस स्प्लैश’ के साथ नहीं जोड़ पाएगा, क्योंकि दोनों नामों में ‘लोटस’ का प्रमुख उपयोग होता है।
चूंकि ‘लोटस स्प्लैश’ मार्क माल की विशेषताओं का संकेतक है, इसलिए मार्क के उपयोग को प्रकृति में उल्लंघनकारी नहीं माना जा सकता।
राष्ट्रीय समाचार
आईएसओ 55001:2024 प्रमाणन हासिल करने वाला भारत का पहला मेट्रो संगठन बना डीएमआरसी

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएमआरसी) ने मुंबई मेट्रो लाइन-3 के एसेट मैनेजमेंट सिस्टम के लिए आईएसओ 55001:2024 प्रमाणन हासिल कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। डीएमआरसी भारत का पहला मेट्रो संगठन बन गया है, जिसे परिसंपत्ति प्रबंधन के इस नवीनतम अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप प्रमाणित किया गया है।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि यह उपलब्धि केवल एक प्रमाणन नहीं, बल्कि मेट्रो परिसंपत्तियों के प्रबंधन में रोकथाम-आधारित देखभाल से आगे बढ़कर रणनीतिक, जोखिम-आधारित और जीवन-चक्र आधारित परिसंपत्ति प्रबंधन की दिशा में डीएमआरसी की महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है।
आईएसओ 55001:2024 के तहत परिसंपत्तियों का प्रबंधन केवल उनके अनुरक्षण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि प्रदर्शन, जोखिम, लागत और दीर्घकालिक जीवन-चक्र को संगठन के समग्र उद्देश्यों के साथ जोड़कर किया जाता है। इससे परिसंपत्तियों की विश्वसनीयता एवं उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ संसाधनों के बेहतर उपयोग और दीर्घकालिक लागत-प्रभावशीलता में भी सहायता मिलती है।
डीआरएमसी ने ने यह प्रमाणन रिकॉर्ड समय में हासिल किया है। इसके लिए रणनीतिक संपत्ति प्रबंधन योजना (एसएएमपी) को मजबूत करने, परिसंपत्ति प्रबंधन के उद्देश्यों को संगठनात्मक प्राथमिकताओं से जोड़ने, जोखिम आकलन एवं जीवन-चक्र नियंत्रणों को सुदृढ़ करने और अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया। संपत्ति प्रबंधन व्यवस्था की निरंतर निगरानी केपीआईएस, ऑडिट और प्रबंधन समीक्षा के माध्यम से की जा रही है।
विज्ञप्ति के अनुसार, डीएमआरसी मुंबई मेट्रो लाइन-3 के 33.5 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के परिचालन और रक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहा है, जो कोलाबा, बांद्रा और सीपज को जोड़ता है। इसके अंतर्गत रोलिंग स्टॉक, ट्रैक्शन, सिग्नलिंग, टेलीकम्युनिकेशन, स्टेशन, लिफ्ट, एस्केलेटर, ट्रैक और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर सहित अनेक महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों का सुरक्षित एवं कुशल प्रबंधन शामिल है।
आईएसओ 55001:2024 प्रमाणन के साथ डीएमआरसी ने सुरक्षा, विश्वसनीयता, दक्षता और स्थायित्व के अपने मूल उद्देश्यों को परिसंपत्ति प्रबंधन की एक वैश्विक रूप से मान्य प्रणाली के साथ और मजबूती से जोड़ा है।
यह उपलब्धि भारत के शहरी रेल क्षेत्र में वैज्ञानिक, संरचित और जीवन-चक्र आधारित परिसंपत्ति प्रबंधन के लिए एक नया बेंचमार्क स्थापित करती है। साथ ही, यह डीएमआरसी की उस क्षमता को भी प्रदर्शित करती है जिसके माध्यम से वह देश के विभिन्न शहरों में विश्वस्तरीय मेट्रो ओ एंड एम एवं परिसंपत्ति प्रबंधन विशेषज्ञता उपलब्ध करा सकता है।
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7,756 मीटर ऊंची माउंट कामेट फतह करेंगे भारत-अर्जेंटीना के 35 जवान

भारत और अर्जेंटीना की सेना के संयुक्त सैन्य सहयोग को नई ऊंचाई मिलने जा रही है। दोनों देशों के 35 जवानों का एक संयुक्त पर्वतारोहण दल 7,756 मीटर ऊंची ‘माउंट कामेट’ पर चढ़ाई के लिए रवाना हो गया है। ‘माउंट कामेट’ उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है।
गौरतलब है कि यह चोटी भारत की तीसरी सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। इस चुनौतीपूर्ण अभियान को शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर से लेफ्टिनेंट जनरल अजय रामदेव ने हरी झंडी दिखाई। वह महानिदेशक एकीकृत प्रशिक्षण और आर्मी सर्विस कोर के कर्नल कमांडेंट हैं। अभियान का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल चिराग चटर्जी कर रहे हैं। दल में भारतीय सेना के 25 और अर्जेंटीना की सेना के 10 सैनिक शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों का यह संयुक्त पर्वतारोहण माउंट कामेट पर अभियान आसान नहीं होगा। यह पर्वतीय चोटी अत्यधिक ऊंचाई पर है जहां ऑक्सीजन की कमी है। इसके साथ ही पहाड़ी कठिन भूभाग और मौसम में अचानक बदलाव सैनिकों के सामने बड़ी चुनौती होंगे। अभियान के दौरान उनकी शारीरिक सहनशक्ति, तकनीकी पर्वतारोहण क्षमता और आपसी तालमेल की परीक्षा होगी। सेना के मुताबिक दोनों सेनाओं इससे पहले भी संयुक्त पर्वतारोहण अभियान किया है।
माउंट कामेट अभियान भारत और अर्जेंटीना की सेनाओं के बीच अब यह तीसरा संयुक्त पर्वतारोहण अभियान है। इससे पहले दोनों सेनाओं ने जनवरी 2025 में अर्जेंटीना की माउंट एकोंकागुआ पर संयुक्त चढ़ाई की थी। इसके बाद अगस्त 2025 में लद्दाख की 7,077 मीटर ऊंची माउंट कुन पर भी संयुक्त अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया था। अब माउंट कामेट अभियान दोनों देशों की सेनाओं के बीच बढ़ते सैन्य-से-सैन्य सहयोग और पेशेवर संबंधों की अगली कड़ी है।
अभियान को रवाना करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल अजय रामदेव ने कहा कि ऐसे संयुक्त अभियान केवल पर्वतारोहण तक सीमित नहीं हैं। इनके जरिए मित्र देशों की सेनाओं के बीच आपसी विश्वास, सौहार्द और पेशेवर समझ मजबूत होती है।
उन्होंने अभियान दल को सफल शिखर आरोहण और सुरक्षित वापसी के लिए शुभकामनाएं दीं। माउंट कामेट की कठिन चढ़ाई अब भारत और अर्जेंटीना के सैनिकों के साहस और कौशल की परीक्षा लेगी। साथ ही, बर्फ से ढकी यह ऊंची चोटी दोनों देशों की सेनाओं के बीच बढ़ती दोस्ती और सहयोग की नई मिसाल भी बनेगी।
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भारतीय शेयर बाजार सपाट बंद, मेटल और बैंकिंग स्टॉक्स में हुई खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में करीब सपाट बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 3 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,540.83 और निफ्टी 20.15 अंक या 0.08 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,252.00 पर था।
सत्र के दौरान बाजार में खरीदारी को सहारा मेटल और बैंकिंग शेयरों ने दिया। सूचकांकों में निफ्टी मेटल 0.86 प्रतिशत की तेजी के साथ टॉप गेनर था। इसके अलावा, निफ्टी बैंक (0.46 प्रतिशत), निफ्टी पीएसई (0.46 प्रतिशत), निफ्टी रियल्टी (0.40 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया डिफेंस (0.32 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस (0.22 प्रतिशत) और निफ्टी इन्फ्रा (0.15 प्रतिशत) की तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुए।
इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी (0.74 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (0.60 प्रतिशत), निफ्टी आईटी (0.46 प्रतिशत), निफ्टी कंजप्शन (0.40 प्रतिशत) और निफ्टी हेल्थकेयर ( 0.25 प्रतिशत) की गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए।
लार्जकैप की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप में खरीदारी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 64.20 अंक या 0.10 प्रतिशत की तेजी के साथ 63,735.75 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 136.30 अंक या 0.69 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,977.75 पर था।
सेंसेक्स पैक में पावर ग्रिड, बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक, एनटीपीसी, बजाज फिनसर्व, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी, टाइटन, टीसीएस, अदाणी पोर्ट्स, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक गेनर्स थे। ट्रेंट, मारुति सुजुकी, इंडिगो, एचसीएल टेक, एचयूएल, इन्फोसिस, एमएंडएम, टेक महिंद्रा, आईटीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, एक्सिस बैंक और बजाज फाइनेंस लूजर्स थे।
बाजार के जानकारों ने कहा कि ग्लोबल बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर मार्केट में चिंता का कारण बना हुआ है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और लगातार महंगाई की आशंकाओं के बीच, बॉन्ड यील्ड को कम करने के लिए यूएस ट्रेजरी के हालिया कदम से कोई खास और लंबे समय तक रहने वाली राहत नहीं मिली। घरेलू स्तर पर, आरबीआई की सख्त रुख वाली मीटिंग के मिनट्स और स्थानीय महंगाई के जोखिम व कम लिक्विडिटी के कारण भारत की 10-साल की बॉन्ड यील्ड दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
उन्होंने आगे कहा कि हालिया सर्विस पीएमआई डेटा अनिश्चित ग्लोबल माहौल के बावजूद घरेलू मजबूती को दिखाता है। हालांकि, गिरावट के बाद आकर्षक वैल्यूएशन और मजबूत क्रेडिट ग्रोथ के दम पर फाइनेंशियल सेक्टर की बड़ी कंपनियों में अच्छी वैल्यू बाइंग से मार्केट सपाट कारोबार कर रहा है। मेटल की स्थिर कीमतें भी कमोडिटी स्टॉक्स को अहम सपोर्ट दे रही हैं।
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