अंतरराष्ट्रीय
भारत में बढ़ रहा है रक्षा बजट पर खर्च, आईएमएफ ने तेजी से बढ़ोतरी की उम्मीद जताई
वॉशिंगटन, 9 अप्रैल : अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा कि भारत का घरेलू डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने का कदम आर्थिक बढ़ोतरी को मजबूत कर सकता है। आईएमएफ ने बताया कि जब सैन्य खर्च स्थानीय उद्योगों को समर्थन देता है, तो इससे उत्पादन में बढ़ोतरी हो सकती है और अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
आईएमएफ ने वैश्विक रक्षा रुझानों को लेकर अपने ताजा विश्लेषण में कहा कि रक्षा क्षेत्र में बढ़ोतरी से अल्पावधि में आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है। इसके चलते उपभोग और निवेश दोनों में वृद्धि देखने को मिल सकती है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच दुनिया भर में रक्षा खर्च बढ़ रहा है। हाल के सालों में लगभग आधे देशों ने रक्षा बजट बढ़ाया है, जिससे कोल्ड वॉर के बाद आई गिरावट पलट गई है।
भारत के लिए, ईएमएफ के नतीजे साफ तौर पर आर्थिक बढ़त की ओर इशारा करते हैं। जब डिफेंस खर्च इम्पोर्ट के बजाय घरेलू प्रोडक्शन पर आधारित होता है तो फायदा और ज्यादा होता है।
आईएमएफ ने कहा, “रक्षा खर्च मल्टीप्लायर औसतन 1 के करीब हैं।” इसका मतलब है कि खर्च में हर बढ़ोतरी मोटे तौर पर इकोनॉमिक आउटपुट में भी वैसी ही बढ़ोतरी में बदलती है।
हालांकि, इसका असर अलग-अलग देशों में बहुत अलग-अलग होता है। इसमें आगे कहा गया, “जो देश हथियारों के इंपोर्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, उनमें रक्षा खर्च मल्टीप्लायर छोटे होते हैं, जो विदेशों में डिमांड में कमी को दिखाता है।”
यह अंतर भारत के पक्ष में है। भारत ने विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने और घरेलू रक्षा बेस बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। खर्च का एक बड़ा हिस्सा अब लोकल मैन्युफैक्चरिंग, प्राइवेट फर्मों और जॉइंट वेंचर्स की ओर जाता है।
आईएमएफ ने कहा कि इंपोर्ट पर ज्यादा खर्च बाहरी संतुलन को कमजोर कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया, “बाहरी संतुलन तब बिगड़ते हैं जब डिमांड इंपोर्टेड इक्विपमेंट की ओर बढ़ जाती है।”
स्वदेशीकरण पर भारत का जोर ऐसे दबावों को कम करने में सहायक हो सकता है। इससे मांग का बड़ा हिस्सा देश की अर्थव्यवस्था के भीतर ही बना रहता है, जो रोजगार सृजन और निवेश को बढ़ावा देने में मदद करता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डिफेंस खर्च एक टारगेटेड डिमांड शॉक की तरह काम करता है। यह सरकारी कंजम्प्शन बढ़ाता है और प्राइवेट खर्च को बढ़ा सकता है, खासकर डिफेंस से जुड़े सेक्टर में।
समय के साथ, यह प्रोडक्टिविटी को भी सपोर्ट कर सकता है। आईएमएफ ने कहा, “एक बिल्डअप जो सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता बनाता है, लंबे समय तक प्रोडक्टिविटी ग्रोथ का समर्थन कर सकता है।”
हालांकि, आईएमएफ ने खर्च बहुत तेजी से बढ़ने पर रिस्क को भी बताया। इसमें कहा गया है, “फिस्कल डेफिसिट जीडीपी के लगभग 2.6 फीसदी तक बढ़ जाता है और पब्लिक कर्ज तीन साल के अंदर लगभग 7 फीसदी बढ़ जाता है।”
ये दबाव संघर्ष के दौरान और भी ज्यादा होते हैं, जब कर्ज तेजी से बढ़ता है और सामाजिक खर्च कम हो सकता है।
2010 के दशक के बीच से दुनिया भर में रक्षा खर्च बढ़ रहा है। अब लगभग 40 फीसदी देश अपनी जीडीपी का 2 फीसदी से ज्यादा रक्षा पर खर्च करते हैं। नाटो सदस्यों ने 2035 तक रक्षा और सुरक्षा से जुड़े खर्च को जीडीपी के 5 फीसदी तक बढ़ाने का वादा किया है, जो सैन्य खर्च में लगातार बढ़ोतरी की ओर इशारा करता है।
भारत अपनी डीजीपी का लगभग 2 फीसदी रक्षा पर खर्च करता है। इसने हाल के सालों में नीति में सुधारों और इंसेंटिव के जरिए घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाया है।
आईएमएफ के विश्लेषण से पता चलता है कि जिन देशों की लोकल डिफेंस इंडस्ट्री मजबूत हैं, वे ज्यादा मिलिट्री खर्च को ग्रोथ में बदलने और बाहरी जोखिमों को कम करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं।
राष्ट्रीय
पश्चिम एशिया संकट के बीच डीजी शिपिंग का बड़ा कदम, निर्यातकों को राहत देने के निर्देश; नाविकों को सुरक्षित रहने की सलाह

oil
नई दिल्ली, 9 अप्रैल : पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है। कि युद्ध प्रभावित पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) क्षेत्र में फंसे माल (कार्गो) वाले निर्यातकों को राहत दी जाए और उन्हें जरूरी छूट प्रदान की जाए।
एक सर्कुलर में कहा गया है कि बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली छूट, जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट, रीफर प्लग-इन (कनेक्टेड लोड) और अन्य टर्मिनल चार्ज, सभी मामलों में समान रूप से निर्यातकों तक नहीं पहुंच रही हैं।
डीजी शिपिंग ने निर्देश दिया है कि पोर्ट अथॉरिटी द्वारा दी गई सभी छूट पारदर्शी तरीके से सीधे संबंधित हितधारकों, जिनमें फ्रेट फॉरवर्डर्स और एनवीओसीसी शामिल हैं, को दी जाएं और वे आगे इसे निर्यातकों तक पहुंचाएं।
इसके साथ ही बंदरगाह प्राधिकरणों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे टर्मिनल स्तर पर इसकी निगरानी करें ताकि छूट का लाभ बिना देरी के सही लोगों तक पहुंचे।
रेगुलेटर ने पोर्ट और टर्मिनल ऑपरेटर्स से कहा है कि वे इन निर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि लागत में पारदर्शिता बनी रहे, निर्यातकों के हित सुरक्षित रहें और संकट के दौरान कामकाज प्रभावित न हो।
यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि निर्यातक 497 करोड़ रुपए की रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना के तहत दावा कर सकें और लाभ उठा सकें।
डीजी शिपिंग ने कहा, “शिपिंग कंपनियां ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा बनाए रखें। साथ ही, कार्गो पर लगने वाला वॉर रिस्क प्रीमियम भी बदला है, जो पहले के निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकता। इस मामले को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है।
इसी बीच डीजी शिपिंग ने ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है।
एडवाइजरी में कहा गया है कि जो नाविक किनारे पर हैं, वे घर के अंदर रहें, संवेदनशील जगहों से दूर रहें और अपनी आवाजाही के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।
वहीं, जो नाविक जहाज पर हैं, उन्हें जहाज पर ही रहने और बिना जरूरत किनारे पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।
सभी कर्मियों से सतर्क रहने, आधिकारिक जानकारी पर नजर रखने और अपनी कंपनी व संबंधित अधिकारियों के संपर्क में बने रहने की अपील की गई है।
व्यापार
मध्य पूर्व में तनाव के बीच केंद्र ने एलपीजी आवंटन का नया फॉर्मूला तय किया; फार्मा, फूड और कृषि जैसे क्षेत्रों को मिलेगी राहत

gas
नई दिल्ली, 8 अप्रैल : केंद्र सरकार ने बुधवार को एलपीजी आवंटन का नया फॉर्मूला तय किया है। इसके तहत फर्मा, फूड और कृषि के साथ अर्थव्यवस्था के लिए अहम सेक्टर्स को राहत मिलेगी।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक,अब फार्मा, फूड, पॉलीमर, कृषि, पैकेजिंग, पेंट, यूरेनियम, हैवी वाटर, स्टील, बीज, मेट, सिरेमिक, फाउंड्री, फोर्जिंग, ग्लास और एयरोसोल जैसे सेक्टर्स को बल्क एलपीजी मिलेगी।
इन इंडस्ट्रीज को मार्च 2026 से पहले की उनकी खपत का 70 प्रतिशत एलपीजी मिलेगी, हालांकि पूरे सेक्टर के लिए कुल सीमा 0.2 टीएमटी (थाउजेंड मीट्रिक टन) प्रति दिन तय की गई है।
सरकार के मुताबिक, जिन फैक्ट्रियों में एलपीजी की जगह प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल नहीं हो सकता, उन्हें पहले एलपीजी दी जाएगी।
साथ ही, इंडस्ट्रीज को तेल वितरक कंपनियों (ओएमसी) यानी तेल कंपनियों के साथ रजिस्ट्रेशन करना होगा और पीएनजी यानी पाइप्ड नेचुरल गैस कनेक्शन के लिए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के पास आवेदन करना होगा।
हालांकि, जहां एलपीजी मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस का जरूरी हिस्सा है और उसकी जगह गैस नहीं आ सकती, वहां पीएनजी आवेदन की शर्त माफ कर दी गई है।
सरकार द्वारा राज्यों को पहले ही पैक्ड नॉन-डोमेस्टिक एलपीजी का 70 प्रतिशत आवंटन किया जा चुका है। इसमें 10 प्रतिशत का अतिरिक्त कोटा उन राज्यों को मिलेगा जो पीएनजी से जुड़े तय सुधार लागू करेंगे।
सरकार के अनुसार, सरकार ने राज्यों तीन जरूरी कदम उठाने को कहा है, जिसमें पहला- नेचुरल गैस एंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026 को सभी संबंधित विभागों तक पहुंचाना, दूसरा- 10 प्रतिशत रिफॉर्म-लिंक्ड एलपीजी अलोकेशन का फायदा जल्द से जल्द उठाना और तीसरा- कंप्रेस्ड बायो गैस से जुड़ी राज्य नीति को जल्द नोटिफाई करना शामिल है।
इससे पहले मंगलवार को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 23 मार्च से अब तक लगभग 7.8 लाख 5-किलो के फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। सोमवार को देशभर में 1.06 लाख से अधिक 5-किलो के सिलेंडर बिके, जबकि फरवरी महीने में प्रतिदिन औसतन 7,7000 सिलेंडर बिके थे।
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने पिछले चार दिनों में 5-किलो सिलेंडरों के लिए लगभग 1,300 जागरूकता शिविर भी आयोजित किए, जिनमें 10,000 से अधिक सिलेंडर बिके।
व्यापार
युद्ध विराम के बाद शेयर बाजार ने लगाई बड़ी छलांग, मार्केट कैप करीब 17 लाख करोड़ रुपए बढ़ा

मुंबई, 8 अप्रैल : भारतीय शेयर बाजार में बुधवार के कारोबारी सत्र में दमदार तेजी देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 2,946.32 अंक या 3.95 प्रतिशत की तेजी के साथ 77,563.90 और निफ्टी 873.70 अंक या 3.78 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,997.35 पर था।
बाजार में चौतरफा तेजी देखी गई। इसका नेतृत्व रियल्टी और ऑटो स्टॉक्स ने किया। निफ्टी रियल्टी (6.75 प्रतिशत) और निफ्टी ऑटो (6.69 प्रतिशत) की मजबूती के साथ टॉप गेनर्स थे। निफ्टी प्राइवेट बैंक (5.56 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस (5.54 प्रतिशत), निफ्टी पीएसयू बैंक (5.46 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरबेल्स (5.23 प्रतिशत) और निफ्टी इन्फ्रा (4.13 प्रतिशत) की मजबूती के साथ बंद हुआ।
कोई भी सूचकांक लाल निशान में बंद नहीं हुआ।
लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में मजबूत बढ़त देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 2,198.95 अंक या 4.03 प्रतिशत की बढ़त के साथ 56,799.50 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 694.75 अंक या 4.39 प्रतिशत की बढ़त के साथ 16,538.05 पर था।
सेंसेक्स पैक में इंडिगो, एलएंडटी, बजाज फाइनेंस, एमएंडएम, एक्सिस बैंक, मारुति सुजुकी, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाइटन, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, अदाणी पोर्ट्स, आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, टाटा स्टील और एसबीआई गेनर्स थे। केवल टेक महिंद्रा, सन फार्मा और पावर ग्रिड ही लाल निशान में बंद हुए।
बाजार में तेजी के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केटकैप लगभग 17 लाख करोड़ रुपए बढ़कर करीब 446 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि पहले 429 लाख करोड़ रुपए था।
वेंचुरा के रिसर्च हेड विनीत बोलिंजकर ने कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध विराम से जोखिम में सुधार हुआ है और इससे कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट आई है।
उन्होंने आगे कहा कि निवेशकों को अपने पोर्टफलियो में ऐसे लार्जकैप को शामिल करना चाहिए, जिनकी आय मजबूत हो।
युद्ध विराम के ऐलान के बाद कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आई है और ब्रेंट क्रूड का दाम करीब 14 प्रतिशत कम होकर 94 डॉलर प्रति बैरल हो गया है।
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
महाराष्ट्र9 months agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
-
अनन्य3 years agoउत्तराखंड में फायर सीजन शुरू होने से पहले वन विभाग हुआ सतर्क
-
न्याय2 years agoमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ हाईकोर्ट में मामला दायर
-
अपराध4 years agoबिल्डर पे लापरवाही का आरोप, सात दिनों के अंदर बिल्डिंग खाली करने का आदेश, दारुल फैज बिल्डिंग के टेंट आ सकते हैं सड़कों पे
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
