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70 दिनों में बस से पूरा करें दिल्ली से लंदन तक का सफर
अगर आप दुनिया घूमने का शौक रखते हैं तो ये खबर आप लोगों के लिए है, अक्सर दिल्ली से लंदन जाने के लिए लोग हवाई जहाज का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अब आप सड़क के रास्ते भी दिल्ली से लंदन जा सकेंगे। गुड़गांव के निजी ट्रैवलर कंपनी ने 15 अगस्त को एक बस लॉन्च की जिसका नाम ‘बस टू लंदन’ है। इस बस के माध्यम से 70 दिनों में आप दिल्ली से लंदन पहुंच सकते हैं, वो भी सड़क के रास्ते और ये सफर एक तरफा होगा।
70 दिन के दिल्ली से लंदन के सफर में आपको 18 अन्य देशों से होकर गुजरना पड़ेगा। जिसमें इंडिया, म्यांमार, थाईलैंड, लाओस, चीन, किर्गिजस्तान ,उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, रूस, लातविया, लिथुआनिया, पोलैंड, चेक गणराज्य, जर्मनी, नीदरलैंड, बेल्जियम, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम।
हालांकि कई लोगों के मन में ये सवाल होगा कि ये कैसे मुमकिन होगा।
दरअसल दिल्ली निवासी दो शख्श तुषार और संजय मदान, दोनों पहले भी सड़क के रास्ते दिल्ली से लंदन जा चुके हैं। इतना ही नहीं दोनों ने 2017, 2018 और 2019 में कार से ये सफर तय किया था। उसी तर्ज पर इस बार 20 लोगों के साथ ये सफर बस से पूरा करने का प्लान किया है।
‘बस टू लंदन’ के इस सफर में आपको हर सुविधा दी जाएगी। इस सफर के लिए खास तरीके की बस तैयार की जा रही है। इस बस में 20 सवारियों के बैठने का इंतजाम होगा। और सभी सीटें बिजनेस क्लास की होंगी। बस में 20 सवारी के अलावा 4 अन्य लोग और होंगे, जिसमें एक ड्राइवर, एक एसिस्टेंट ड्राइवर, ऑर्गनाइजर की तरफ से एक शख्स और एक गाइड होगा। दरअसल 18 देशों के इस सफर में गाइड बदलते रहेंगे, जिससे कि यात्रियों को किसी तरह की कोई दिक्कत ना हो।
अब आपने मन में ये सवाल जरूर होगा कि सफर पूरा करने के लिए वीसा और कितना पैसा लगेगा ? तो आपको बतादें की एक व्यक्ति को इस सफर के लिए 10 वीसा की जरूरत होगी। वहीं सवारियों को किसी तरह की परेशानी न हो इसलिए ये ट्रैवलर कंपनी ही आपके वीसा का पूरा इंतजाम करेगी।
‘बस टू लंदन’ के इस सफर के लिए 4 कैटगरी चुनी गईं हैं। किसी के पास समय की कमी है और वो लंदन तक का सफर नहीं पूरा कर सकता, और वो अन्य देशों को घूमना चाहता है, तो वो अन्य कैटेगरी को चुन सकता है। हर एक कैटेगरी के लिए आपको अलग-अलग दाम चुकाने पड़ेंगे। दिल्ली से लंदन तक का सफर के लिए आपको 15 लाख रुपये खर्च करने होंगे। इस टूर के लिए आपको ईएमआई का ऑप्शन भी दिया जायेगा।
एडवेंचर ओवरलैंड टैवलर कंपनी के फाउंडर तुषार अग्रवाल ने आईएएनएस को बताया, “मैंने और मेरे साथी संजय मदान ने 2017, 2018 और 2019 में कार से दिल्ली से लंदन गये थे, वहीं हमारे साथ कुछ अन्य साथी भी थे। हम हर साल इस तरह का एक ट्रिप ऑर्गनाइज करते हैं।”
उन्होंने बताया, “हमसे कई लोगों ने इस प्लान में शामिल होने की इच्छा जाहिर की थी। जिसके बाद हमने ये बस का प्लान बनाया। दरअसल इस ट्रिप को 15 अगस्त को लॉन्च किया है। हम उम्मीद करते हैं कि हमारा ये सफर मई 2021 को शुरू हो। फिलहाल कोरोना को देखते हुए इस सफर का रजिस्ट्रेशन शुरू नहीं किया है। भारत के साथ-साथ अन्य देशों के हालातों को देखते हुए इस सफर को शुरू किया जाएगा।”
तुषार अग्रवाल ने बताया कि, “70 दिनों के इस सफर में हम हर तरह की सुविधा लोगों को देंगे। जिस होटल में रुकने की व्यवस्था की जाएगी, वो 4 सितारा या फिर 5 सितारा होटल होगा। यात्री अगर अन्य देशों में इंडियन खाने का लुत्फ उठाना चाहेंगे, तो उनके अनुसार उन्हें खाना दिया जाएगा, चाहे वो किसी भी देश में हो।”
उन्होंने कहा, “इस सफर के लिए पैशनेट होना बहुत जरूरी है। दुनिया घूमने का शौक होगा तभी आप इस सफर में शामिल होंगे।”
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नासिक: जालसाज अशोक खराट की जांच में अहम नतीजा, कई जगहों पर छापेमारी के दौरान जानवरों के अवशेष और महिलाओं के बाल बरामद, बली देने का संदेह

मुंबई: नासिक के धोखेबाज अशोक खरात की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं और SIT ने कई जगहों पर छापेमारी की है। SIT को यहां से जानवरों के अवशेष भी मिले हैं, लेकिन SIT ने यह जांच शुरू कर दी है कि क्या ये सच में जानवरों के अवशेष हैं या फिर मानव बलि का मामला है। इस मामले में SIT ने अवशेषों को अपने कब्जे में भी ले लिया है, वहीं शक है कि अशोक खरात अघोरी करता था और इसी प्रथा के चलते उसने मानव बलि भी दी होगी। इस बारे में SIT की जांच सही दिशा में जा रही है। नासिक के धोखेबाज अशोक खरात मामले में SIT की जांच में कई अहम नतीजे भी निकले हैं। SIT टीम की हेड तेजस्वी सतपोवे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों पर काम कर चुकी हैं और उनकी जांच कर चुकी हैं। इसी तरह अब नासिक मामले में भी जांच चल रही है। तेजस्वी सतपोवे की मां टीचर हैं जबकि उनके पिता किसान हैं। वह अहमदनगर के शेगांव की रहने वाली हैं। तेजस्वी सतपोवे ने अब खरात के पॉलिटिकल कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है। अशोक खरात के कई बड़े नेताओं और अफसरों से भी कनेक्शन थे। महिला आयोग की हेड रूपाली चाकणकर से भी उनके कनेक्शन थे, इसी आधार पर रूपाली को इस्तीफा देना पड़ा था। SIT जांच में जानवरों के अवशेषों के साथ महिलाओं के बाल भी मिले थे। अब SIT टीमें पता लगा रही हैं कि ये बाल किसके हैं, क्या ये एक महिला के बाल हैं या कई महिलाओं के बाल हैं।
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मुंबई : मलाड रेलवे स्टेशन पर नमाज़ का वीडियो वायरल होने के बाद 3 हॉकरों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज

मुंबई : रेलवे पुलिस ने बताया कि मलाड रेलवे स्टेशन पर नमाज़ पढ़ते हुए तीन फेरीवालों का एक वीडियो ऑनलाइन वायरल होने के बाद उनके खिलाफ एफ आई आर दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, तीनों हॉकरों की पहचान मुश्ताक बाबू लोन, सोहेब सदाकत साहा और बिस्मिल्लाह दीन अंसारी के रूप में हुई है। आरपीएफ ने अनाधिकार प्रवेश के लिए रेलवे अधिनियम की धारा 147 के तहत मामला दर्ज किया, जबकि जीआरपी ने स्टेशन मास्टर की शिकायत के बाद बीएनएस की धारा 168 के तहत एक और मामला दर्ज किया। वीडियो वायरल होने के बाद, भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा कि इस घटना के संबंध में एफ आई आर दर्ज की जाएगी। समाचार एजेंसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुंबई के मलाड रेलवे स्टेशन पर, स्टेशन के प्लेटफॉर्म के ऊपर, खुलेआम एक छोटे मंडप जैसी संरचना बना दी गई है, और वहाँ नमाज़ पढ़ी जाने लगी है… इस पूरे मामले को लेकर एक एफ आई आर दर्ज की जाएगी।”
वायरल वीडियो में कुछ लोग मलाड रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 के ठीक बगल में बने एक अस्थायी शेड के नीचे नमाज़ पढ़ते हुए दिखाई दिए। रिपोर्ट के अनुसार, मलाड वेस्ट रेलवे स्टेशन पर विस्तार का काम चल रहा है और रेलवे ने इस प्रोजेक्ट के लिए प्लेटफॉर्म नंबर 1 के पास एक बड़ी खुली जगह बनाई है। इस बीच, पिछले ही हफ़्ते बॉम्बे हाई कोर्ट ने टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों को रमज़ान के दौरान शहर के हवाई अड्डे के भीतर एक अस्थायी शेड में नमाज़ अदा करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि सुरक्षा धर्म से ऊपर है।
अदालत ने कहा कि रमज़ान मुस्लिम धर्म का एक अहम हिस्सा है, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि लोग किसी भी जगह पर नमाज़ पढ़ने के धार्मिक अधिकार का दावा नहीं कर सकते, खासकर हवाई अड्डे के आस-पास, जहाँ सुरक्षा को लेकर काफ़ी चिंताएँ होती हैं। अदालत टैक्सी-रिक्शा ओला-ऊबर मेंस यूनियन की तरफ़ से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें यह दावा किया गया था कि जिस अस्थायी शेड में वे नमाज़ पढ़ते थे, उसे पिछले साल गिरा दिया गया था। याचिका में अदालत से यह गुज़ारिश की गई थी कि वह अधिकारियों को निर्देश दे कि वे उन्हें उसी इलाके में नमाज़ पढ़ने के लिए कोई जगह आवंटित करें।
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असदुद्दीन ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, विवादित वीडियो को लेकर दी शिकायत

हैदराबाद, 9 फरवरी : एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर को औपचारिक शिकायत दी। यह शिकायत एक कथित विवादित और अब डिलीट किए जा चुके वीडियो को लेकर की गई है, जिसमें सीएम सरमा को मुसलमानों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया है।
पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में ओवैसी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कई वर्षों से सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, सार्वजनिक भाषणों और अन्य मंचों के माध्यम से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयान देते रहे हैं, जिनमें से कई अब भी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं।
पुलिस कमिश्नर के नाम पत्र में ओवैसी ने कहा, “मैं आपका ध्यान इस बात की ओर दिलाना चाहता हूं कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कई सालों से सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, सार्वजनिक भाषणों और अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए मुस्लिम समुदाय के खिलाफ लगातार बयान दे रहे हैं। ऐसे कई भाषण अभी भी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं। हाल के महीनों में मुख्यमंत्री ने जानबूझकर अपने नफरत भरे भाषणों को और तेज कर दिया है, जिसका साफ और सचेत इरादा मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना और हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दुश्मनी और नफरत को बढ़ावा देना है, यह जानते हुए भी कि ऐसे आरोप राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक हैं और सांप्रदायिक सद्भाव को नष्ट करने वाले हैं।”
ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन अब्दुल्ला बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य के मामले में साफ तौर पर कहा है कि मौलिक अधिकारों की रक्षा करना, संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखना और राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक चरित्र, विशेष रूप से कानून के शासन की रक्षा करना राज्य और कानून लागू करने वाली एजेंसियों का संवैधानिक कर्तव्य है। कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि पुलिस को औपचारिक शिकायत के अभाव में भी नफरत भरे भाषणों के मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए और कोई भी निष्क्रियता या हिचकिचाहट कर्तव्य की गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।
उन्होंने कहा, “मैं यह बताना चाहता हूं कि असम भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट द्वारा 7 फरवरी को पोस्ट किया गया एक हालिया वीडियो, जिसे एक दिन बाद हटा दिया गया था लेकिन अभी भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, उसमें हिमंत बिस्वा सरमा को हथियार से लैस दिखाया गया है और वे उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जिन्हें साफ तौर पर मुसलमान दिखाया गया है और उन्हें गोली मार रहे हैं। उक्त पोस्ट और वीडियो, उसमें इस्तेमाल की गई तस्वीरों और ‘पॉइंट ब्लैंक शॉट’ और ‘कोई दया नहीं’ जैसे बयानों के साथ, मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, धार्मिक समुदायों के बीच नफरत और दुर्भावना को बढ़ावा देने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के इरादे से किया गया एक जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह वीडियो ऑनलाइन पोस्ट किया गया था और पूरे भारत में उपलब्ध था, जिसमें इस पुलिस स्टेशन का अधिकार क्षेत्र भी शामिल है। मैंने इसे इस पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में देखा है। उपरोक्त तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप कानून के अनुसार श्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ तत्काल और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करें।
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