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Saturday,16-May-2026
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जलवायु परिवर्तन से कॉफी, बादाम और टमाटर की फसल सर्वाधिक प्रभावित

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वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में सर्वाधिक प्रभाव कॉफी,बादाम और टमाटर की फसल पर पड़ रहा है। इटली यूरोप का सबसे बड़ा टमाटर उत्पादक है और वह हर साल औसतन 60 से 70 लाख मीट्रिक टन टमाटर की आपूर्ति करता है।

गत साल लेकिन उत्तरी इटली में टमाटर की फसल में 19 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी और इसमें और अधिक कमी आने की आशंका है।

इटली में जलवायु के कारण ऐसा हो रहा है। एक समय यहां का गर्म मौसम टमाटर की फसल के लिये बिल्कुल उपयुक्त था लेकिन अब यहां सर्दी पड़ रही है और साथ ही बारिश की आशंका भी बनी रहती है।

मौसम के ठंडा होने से टमाटर की फसल देर से पकती है और वर्ष 2019 में ऐसी हालत हो गयी थी कि मात्र आधी फसल ही समय पर तैयार हो पायी थी।

अगर ऐसी ही स्थिति आगे भी बनी रही तो जल्द ही सुपरमार्केट में टमाटर की किल्लत होने लगी जिससे इसके दाम बढ़ जायेंगे।

बीमा कंपनी सीआईए लैंडलॉर्ड के शोध के मुताबिक जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक असर पांच फसलों पर पड़ता है, जिनमें से टमाटर भी एक है। टमाटर के अलावा, बादाम, कॉफी, हेजलनट और सोयाबीन की फसल पर जलवायु परिवर्तन का अधिक असर होता है।

इटली में वनक्षेत्र भी हाल के वर्षो में घटा है क्योंकि इटली में चमड़े के लिये गायों को पाला जाता है और गाय के लिये चारागाह जरूरी है। इन्हीं चारागाहों के लिये जंगलों की कटाई की जाती है।

जंगल की कटाई होने से हवा में ऑक्सीजन और कार्बन डाइ ऑक्साइड का संतुलन बिगड़ जाता है। प्रदूषित हवा न सिर्फ श्वसन संबंधी परेशानियों को अधिक कर देती है बल्कि इससे स्वस्थ व्यक्ति को भी सांस की तकलीफ होने लगती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्ष 2040 तक इंसानों के पास समय है कि वे जलवायु परिवर्तन के इस चक्र को बदलें क्योंकि उसके बाद कुछ भी हमारे हाथ में नहीं होगा।

कैलिफोर्निया दुनिया के बादाम के निर्यात का 80 प्रतिशत हिस्सा उगाता है और इसका कारोबार छह अरब डॉलर का है।

हालांकि, बादाम को उगाने की प्रक्रिया लंबी होती है और इसके लिए शारीरिक और मानवीय दोनों तरह की ऊर्जा की बहुत अधिक आवश्यकता होती है।

कैलिफोर्निया 60 प्रतिशत मधुमक्खी के छत्तों का उपयोग केवल बादाम परागण के लिये प्रत्येक सर्दियों में करता है और मधुमक्खियों के परिवहन की लागत और उन्हें कोल्ड स्टोरेज में रखने का मतलब है कि बादाम उत्पादन में कार्बन उर्त्सजन अधिक होता है।

बादाम को सभी सूखे मेवों में सबसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है। बादाम का दूध बनाने के लिये मात्र एक बीज को आवश्यक आकार तक पहुंचने के लिये 3.2 गैलन पानी की आवश्यकता होती है।

बादाम के दूध की लोकप्रियता बढ़ी है। यह डेयरी विकल्प के रूप में लिया जा रहा है। पौधा आधारित दूध बाजार में इसकी हिस्सेदारी 63 प्रतिशत है।

हालांकि, पूरे कैलिफोर्निया में सूखे के कारण किसान अपने बागों को छोड़ रहे हैं क्योंकि उन्हें बनाये रखने के लिये पर्याप्त पानी का जुगाड़ मुश्किल से हो रहा है।

सूखे का मतलब यह भी है कि किसानों को विभिन्न कीटनाशकों को बादाम पर डालना पड़ रहा है, जिनमें से कुछ मधुमक्खियों के लिये घातक हैं और मधुमक्खियां पहले से ही लुप्तप्राय प्रजाति हैं।

इनके कारण कैलिफोर्निया में हरियाली और फूलों की संख्या में गिरावट देखने को मिल सकती है। मधुमक्खियां ही परागण कर सकती हैं और इसी वजह से इन पर भी इसका असर हो रहा है।

यही हाल सोयाबीन का है। ब्राजील में मौसम गर्म और शुष्क होता जा रहा है लेकिन सोयाबीन गर्म और नम जलवायु में सबसे अच्छी तरह से होता है। किसानों को यह तय करना होगा कि अब वे इस फसल को कैसे उगाते हैं।

विभिन्न कीटनाशकों का उपयोग करके और पौधों को अलग-अलग जलवायु के प्रति अधिक सहिष्णु बनने के लिये मजबूर करके, किसान सोयाबीन के उत्पादन की मात्रा को प्रभावी ढंग से बढ़ाने में सक्षम हुये हैं।

हालांकि, यह टिकाऊ उपाय नहीं है क्योंकि इस प्रकार जलवायु खराब होती रहेगी। इसी वजह से यह अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2050 तक सोयाबीन का उत्पादन 86-92 प्रतिशत कम हो जायेगा।

सोयाबीन के पौधों को भी बहुत अधिक जगह की आवश्यकता होती है और इसके लिये पूरे ब्राजील में वनों की कटाई की गयी है। यह अमेजन के जंगलों में सबसे अधिक हुआ है, जहां फसलों के लिये जगह बनाने के लिये बड़े पैमाने पर आग जलायी गयी। वैज्ञानिकों ने इसी वजह से चेतावनी दी है कि ये वन अब कार्बन डाइ ऑक्साइड के अवशोषण की तुलना में उसका अधिक उर्त्सजन करते हैं।

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है, यह एक वैश्विक समस्या है क्योंकि हम दुनिया की छह प्रतिशत ऑक्सीजन आपूर्ति प्रदान करने और कार्बन को वायुमंडल से बाहर रखने के लिये अमेजन के जंगहों पर ही पर निर्भर हैं। अगर हम इस स्थान को नष्ट करना जारी रखते हैं तो हमारे ग्रह की वायु गुणवत्ता में कमी आयेगी और ग्लोबल वामिर्ंग तेज हो जायेगी।

यह तापमान में बढ़ोतरी, बदलते वर्षा पैटर्न, जैव विविधता और कृषि में दुनिया भर में गिरावट के रूप में सामने आयेगा।

सीआईए लैंडलॉर्ड के शोध के अनुसार, ब्राजील में अगले कुछ वर्षों में कॉफी उत्पादन में 76 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है क्योंकि देश में शुष्क जलवायु हो रही है।

कॉफी के पौधे नम, उष्णकटिबंधीय जलवायु में सबसे अच्छे तरीके से बढ़ते हैं ,जहां मिट्टी और तापमान लगभग 21 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।

जलवायु परिवर्तन के कारण ब्राजील की हवा शुष्क हो रही है, जिससे कॉफी बीन उत्पादन में गिरावट आ रही है। दूसरी तरफ इटली अपने बढ़ते तापमान के कारण जल्द ही देश की पसंदीदा बीन का उत्पादन करने उम्मीद कर रहा है।

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नीट परीक्षा रद्द, सीबीआई करेगी जांच, जल्द होगा नई परीक्षा की डेट का ऐलान

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नई दिल्ली, 12 मई। देश भर में आयोजित की गई मेडिकल की नीट यूजी परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। यह परीक्षा एमबीबीएस में दाखिले के लिए थी। मंगलवार को यह जानकारी साझा की गई।

परीक्षा आयोजित करने वाले संस्थान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का कहना है कि 3 मई को आयोजित की गई नीट परीक्षा रद्द कर दी गई है। अब यह परीक्षाएं दोबारा से आयोजित की जाएगी। फिलहाल परीक्षा की तारीख घोषित नहीं की गई है।

गौरतलब है कि नीट परीक्षा में पूछे गए कई प्रश्न परीक्षा होने से पहले ही लीक होने की बातें सामने आई थी। अब इस पूरे मामले की जांच सीबीआई द्वारा की जाएगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी परीक्षा से जुड़े सारे दस्तावेज एवं अन्य जानकारियां सीबीआई के समक्ष प्रस्तुत करेंगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने यह बड़ा फैसला लेते हुए 3 मई 2026 को आयोजित नीट (यूजी) 2026 परीक्षा को रद्द करने और परीक्षा दोबारा आयोजित करने की घोषणा की है।

यह परीक्षा 3 मई रविवार को देशभर के विभिन्न केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में इस वर्ष लगभग 23 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। एजेंसी ने कहा कि यह निर्णय भारत सरकार की मंजूरी के बाद लिया गया है। एजेंसी के अनुसार, 8 मई 2026 को परीक्षा से जुड़े मामलों को स्वतंत्र जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्रीय एजेंसियों को भेजा गया था। केंद्रीय एजेंसियों ने इस संबंध में जानकारी साझा की थी।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों व कानून प्रवर्तन संस्थाओं से प्राप्त जांच रिपोर्टों तथा तथ्यों की समीक्षा की गई है। प्राप्त रिपोर्ट व सूचनाओं और निष्कर्षों के आधार पर यह पाया गया कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को बरकरार रखना उचित नहीं होगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने बताया कि मौजूदा हालात को देखते हुए नीट की परीक्षा दोबारा करवाना अनिवार्य हो गया है। राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह परीक्षा रद्द की गई है। इसलिए अब विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय लिया गया है।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का कहना है कि दोबारा आयोजित की जाने वाली नीट परीक्षा की नई तिथियां और नए प्रवेश पत्र जारी करने का कार्यक्रम जल्द ही आधिकारिक माध्यमों से घोषित किया जाएगा। भारत सरकार ने पूरे मामले की व्यापक जांच के लिए इस प्रकरण को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीई) को सौंपने का भी निर्णय लिया है। एजेंसी ने कहा कि वह जांच एजेंसी को सभी रिकॉर्ड, दस्तावेज और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने यह माना कि परीक्षा दोबारा कराने से छात्रों और उनके परिवारों को वास्तविक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन एजेंसी के अनुसार परीक्षा प्रणाली पर लोगों का विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। एजेंसी ने मंगलवार को इस विषय में जानकारी देते हुए कहा कि यदि यह कदम नहीं उठाया जाता तो राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को अधिक गंभीर और दीर्घकालिक नुकसान पहुंच सकता था।

इसके साथ ही एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मई 2026 चक्र में छात्रों द्वारा किया गया पंजीकरण, उम्मीदवार विवरण और चुने गए परीक्षा केंद्र पुनर्परीक्षा में स्वत मान्य रहेंगे। जिन छात्रों ने नीट परीक्षा के लिए आवेदन किया था ऐसे छात्रों को दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले आवेदन कर चुके या परीक्षा में शामिल हो चुके छात्रों से कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क भी नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा पहले जमा की गई परीक्षा फीस वापस की जाएगी।

पुनर्परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी अपने आंतरिक संसाधनों से आयोजित करेगी। एजेंसी ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट खबरों से बचें। छात्रों की सहायता के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। अभ्यर्थी 011-40759000 और 011-69227700 पर संपर्क कर सकते हैं।

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पश्चिम एशिया संकट के बीच डीजी शिपिंग का बड़ा कदम, निर्यातकों को राहत देने के निर्देश; नाविकों को सुरक्षित रहने की सलाह

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है। कि युद्ध प्रभावित पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) क्षेत्र में फंसे माल (कार्गो) वाले निर्यातकों को राहत दी जाए और उन्हें जरूरी छूट प्रदान की जाए।

एक सर्कुलर में कहा गया है कि बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली छूट, जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट, रीफर प्लग-इन (कनेक्टेड लोड) और अन्य टर्मिनल चार्ज, सभी मामलों में समान रूप से निर्यातकों तक नहीं पहुंच रही हैं।

डीजी शिपिंग ने निर्देश दिया है कि पोर्ट अथॉरिटी द्वारा दी गई सभी छूट पारदर्शी तरीके से सीधे संबंधित हितधारकों, जिनमें फ्रेट फॉरवर्डर्स और एनवीओसीसी शामिल हैं, को दी जाएं और वे आगे इसे निर्यातकों तक पहुंचाएं।

इसके साथ ही बंदरगाह प्राधिकरणों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे टर्मिनल स्तर पर इसकी निगरानी करें ताकि छूट का लाभ बिना देरी के सही लोगों तक पहुंचे।

रेगुलेटर ने पोर्ट और टर्मिनल ऑपरेटर्स से कहा है कि वे इन निर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि लागत में पारदर्शिता बनी रहे, निर्यातकों के हित सुरक्षित रहें और संकट के दौरान कामकाज प्रभावित न हो।

यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि निर्यातक 497 करोड़ रुपए की रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना के तहत दावा कर सकें और लाभ उठा सकें।

डीजी शिपिंग ने कहा, “शिपिंग कंपनियां ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा बनाए रखें। साथ ही, कार्गो पर लगने वाला वॉर रिस्क प्रीमियम भी बदला है, जो पहले के निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकता। इस मामले को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है।

इसी बीच डीजी शिपिंग ने ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है।

एडवाइजरी में कहा गया है कि जो नाविक किनारे पर हैं, वे घर के अंदर रहें, संवेदनशील जगहों से दूर रहें और अपनी आवाजाही के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।

वहीं, जो नाविक जहाज पर हैं, उन्हें जहाज पर ही रहने और बिना जरूरत किनारे पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।

सभी कर्मियों से सतर्क रहने, आधिकारिक जानकारी पर नजर रखने और अपनी कंपनी व संबंधित अधिकारियों के संपर्क में बने रहने की अपील की गई है।

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राणा अयूब के संदेशों पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स से मांगा जवाब

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल : दिल्ली उच्च न्यायालय में पत्रकार राणा अयूब से जुड़े एक मामले में अहम सुनवाई हुई है।

यह मामला वर्ष 2013 से 2017 के बीच उनके सामाजिक माध्यम पर किए गए संदेशों से जुड़ा है, जिनमें उन पर भारत विरोधी भावना फैलाने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने राणा अयूब द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर को लेकर किए गए कुछ संदेशों पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि ये संदेश अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक प्रकृति के प्रतीत होते हैं, जो समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई होना आवश्यक है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस संबंध में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स को निर्देश दिया है कि वे इन संदेशों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी दें। साथ ही, यह भी बताएं कि आगे क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में देरी उचित नहीं है और इसे तुरंत सुना जाना जरूरी है।

न्यायालय ने राणा अयूब को भी नोटिस जारी किया है और उनसे इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत का कहना है कि यह मामला सार्वजनिक भावना और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों का जवाब समय पर आना जरूरी है।

साथ ही, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और सोशल साइट एक्स को निर्देश दिया है कि वे अगले दिन तक अपना जवाब दाखिल करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को तय की है, जहां इस पूरे प्रकरण पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

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