राष्ट्रीय
जलवायु परिवर्तन से कॉफी, बादाम और टमाटर की फसल सर्वाधिक प्रभावित
वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में सर्वाधिक प्रभाव कॉफी,बादाम और टमाटर की फसल पर पड़ रहा है। इटली यूरोप का सबसे बड़ा टमाटर उत्पादक है और वह हर साल औसतन 60 से 70 लाख मीट्रिक टन टमाटर की आपूर्ति करता है।
गत साल लेकिन उत्तरी इटली में टमाटर की फसल में 19 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी और इसमें और अधिक कमी आने की आशंका है।
इटली में जलवायु के कारण ऐसा हो रहा है। एक समय यहां का गर्म मौसम टमाटर की फसल के लिये बिल्कुल उपयुक्त था लेकिन अब यहां सर्दी पड़ रही है और साथ ही बारिश की आशंका भी बनी रहती है।
मौसम के ठंडा होने से टमाटर की फसल देर से पकती है और वर्ष 2019 में ऐसी हालत हो गयी थी कि मात्र आधी फसल ही समय पर तैयार हो पायी थी।
अगर ऐसी ही स्थिति आगे भी बनी रही तो जल्द ही सुपरमार्केट में टमाटर की किल्लत होने लगी जिससे इसके दाम बढ़ जायेंगे।
बीमा कंपनी सीआईए लैंडलॉर्ड के शोध के मुताबिक जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक असर पांच फसलों पर पड़ता है, जिनमें से टमाटर भी एक है। टमाटर के अलावा, बादाम, कॉफी, हेजलनट और सोयाबीन की फसल पर जलवायु परिवर्तन का अधिक असर होता है।
इटली में वनक्षेत्र भी हाल के वर्षो में घटा है क्योंकि इटली में चमड़े के लिये गायों को पाला जाता है और गाय के लिये चारागाह जरूरी है। इन्हीं चारागाहों के लिये जंगलों की कटाई की जाती है।
जंगल की कटाई होने से हवा में ऑक्सीजन और कार्बन डाइ ऑक्साइड का संतुलन बिगड़ जाता है। प्रदूषित हवा न सिर्फ श्वसन संबंधी परेशानियों को अधिक कर देती है बल्कि इससे स्वस्थ व्यक्ति को भी सांस की तकलीफ होने लगती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्ष 2040 तक इंसानों के पास समय है कि वे जलवायु परिवर्तन के इस चक्र को बदलें क्योंकि उसके बाद कुछ भी हमारे हाथ में नहीं होगा।
कैलिफोर्निया दुनिया के बादाम के निर्यात का 80 प्रतिशत हिस्सा उगाता है और इसका कारोबार छह अरब डॉलर का है।
हालांकि, बादाम को उगाने की प्रक्रिया लंबी होती है और इसके लिए शारीरिक और मानवीय दोनों तरह की ऊर्जा की बहुत अधिक आवश्यकता होती है।
कैलिफोर्निया 60 प्रतिशत मधुमक्खी के छत्तों का उपयोग केवल बादाम परागण के लिये प्रत्येक सर्दियों में करता है और मधुमक्खियों के परिवहन की लागत और उन्हें कोल्ड स्टोरेज में रखने का मतलब है कि बादाम उत्पादन में कार्बन उर्त्सजन अधिक होता है।
बादाम को सभी सूखे मेवों में सबसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है। बादाम का दूध बनाने के लिये मात्र एक बीज को आवश्यक आकार तक पहुंचने के लिये 3.2 गैलन पानी की आवश्यकता होती है।
बादाम के दूध की लोकप्रियता बढ़ी है। यह डेयरी विकल्प के रूप में लिया जा रहा है। पौधा आधारित दूध बाजार में इसकी हिस्सेदारी 63 प्रतिशत है।
हालांकि, पूरे कैलिफोर्निया में सूखे के कारण किसान अपने बागों को छोड़ रहे हैं क्योंकि उन्हें बनाये रखने के लिये पर्याप्त पानी का जुगाड़ मुश्किल से हो रहा है।
सूखे का मतलब यह भी है कि किसानों को विभिन्न कीटनाशकों को बादाम पर डालना पड़ रहा है, जिनमें से कुछ मधुमक्खियों के लिये घातक हैं और मधुमक्खियां पहले से ही लुप्तप्राय प्रजाति हैं।
इनके कारण कैलिफोर्निया में हरियाली और फूलों की संख्या में गिरावट देखने को मिल सकती है। मधुमक्खियां ही परागण कर सकती हैं और इसी वजह से इन पर भी इसका असर हो रहा है।
यही हाल सोयाबीन का है। ब्राजील में मौसम गर्म और शुष्क होता जा रहा है लेकिन सोयाबीन गर्म और नम जलवायु में सबसे अच्छी तरह से होता है। किसानों को यह तय करना होगा कि अब वे इस फसल को कैसे उगाते हैं।
विभिन्न कीटनाशकों का उपयोग करके और पौधों को अलग-अलग जलवायु के प्रति अधिक सहिष्णु बनने के लिये मजबूर करके, किसान सोयाबीन के उत्पादन की मात्रा को प्रभावी ढंग से बढ़ाने में सक्षम हुये हैं।
हालांकि, यह टिकाऊ उपाय नहीं है क्योंकि इस प्रकार जलवायु खराब होती रहेगी। इसी वजह से यह अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2050 तक सोयाबीन का उत्पादन 86-92 प्रतिशत कम हो जायेगा।
सोयाबीन के पौधों को भी बहुत अधिक जगह की आवश्यकता होती है और इसके लिये पूरे ब्राजील में वनों की कटाई की गयी है। यह अमेजन के जंगलों में सबसे अधिक हुआ है, जहां फसलों के लिये जगह बनाने के लिये बड़े पैमाने पर आग जलायी गयी। वैज्ञानिकों ने इसी वजह से चेतावनी दी है कि ये वन अब कार्बन डाइ ऑक्साइड के अवशोषण की तुलना में उसका अधिक उर्त्सजन करते हैं।
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है, यह एक वैश्विक समस्या है क्योंकि हम दुनिया की छह प्रतिशत ऑक्सीजन आपूर्ति प्रदान करने और कार्बन को वायुमंडल से बाहर रखने के लिये अमेजन के जंगहों पर ही पर निर्भर हैं। अगर हम इस स्थान को नष्ट करना जारी रखते हैं तो हमारे ग्रह की वायु गुणवत्ता में कमी आयेगी और ग्लोबल वामिर्ंग तेज हो जायेगी।
यह तापमान में बढ़ोतरी, बदलते वर्षा पैटर्न, जैव विविधता और कृषि में दुनिया भर में गिरावट के रूप में सामने आयेगा।
सीआईए लैंडलॉर्ड के शोध के अनुसार, ब्राजील में अगले कुछ वर्षों में कॉफी उत्पादन में 76 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है क्योंकि देश में शुष्क जलवायु हो रही है।
कॉफी के पौधे नम, उष्णकटिबंधीय जलवायु में सबसे अच्छे तरीके से बढ़ते हैं ,जहां मिट्टी और तापमान लगभग 21 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।
जलवायु परिवर्तन के कारण ब्राजील की हवा शुष्क हो रही है, जिससे कॉफी बीन उत्पादन में गिरावट आ रही है। दूसरी तरफ इटली अपने बढ़ते तापमान के कारण जल्द ही देश की पसंदीदा बीन का उत्पादन करने उम्मीद कर रहा है।
राष्ट्रीय
मुंबई पुलिस ने अंधेरी ईस्ट से लापता महिला को सुरक्षित बरामद किया

police
मुंबई, 18 मार्च : मुंबई की अंधेरी पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। टीम ने एक 52 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को सुरक्षित बरामद कर लिया और उसे उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया है। महिला की वापसी से परिवारवालों ने राहत की सांस ली है।
दरअसल, मुंबई पुलिस के कमिश्नर देवेन भारती के निर्देश पर लापता महिलाओं और बच्चों का पता लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत अंधेरी पुलिस ने 15 दिन की कड़ी मेहनत के बाद 52 साल की रत्ना धर्मेंद्र यादव को खोज निकाला, जो कि पिछले कई दिनों से लापता थीं।
रत्ना अंधेरी ईस्ट के सैवादी इलाके से गायब हुई थीं। उनकी बेटी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी और उसी के आधार पर लापता होने का मामला दर्ज किया गया। इसके बाद अंधेरी पुलिस ने उनकी खोजबीन के लिए एक स्पेशल अभियान चलाया।
पुलिस की टीम ने हर छोटे-बड़े रास्ते, कॉलोनी और आस-पड़ोस की जगहों पर छानबीन की। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के सहारे पता चला कि रत्ना अस्थायी तौर पर चेंबूर के एक होमलेस शेल्टर में रह रही थीं।
जांच के दौरान पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि रत्ना मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं और बोल नहीं सकती थीं। ऐसे में उन्हें सुरक्षित ढंग से ढूंढना और वहां से लाना आसान काम नहीं था। पुलिस ने बहुत धैर्य और समझदारी से काम लिया और आखिरकार उन्हें सुरक्षित उनके परिवार के पास पहुंचा दिया।
उनकी बेटी और परिवार ने मुंबई पुलिस की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने जो मेहनत और लगन दिखाई, उससे उन्हें रत्ना की खोज में बहुत मदद मिली। इसके लिए उनका परिवार मुंबई पुलिस का आभारी है।
पुलिस का कहना है कि उनके द्वारा लापता महिलाओं और बच्चों का पता लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस तरह के मामलों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस की टीमें जल्द से जल्द लापता लोगों की खोज में लग जाती हैं। इस क्रम में रत्ना को भी सुरक्षित बरामद कर उनके परिवार को सौंप दिया गया।
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ईरान में युद्ध लंबा चला तो बढ़ सकती हैं वैश्विक चुनौतियां, फिलहाल भारत पर कोई असर नहीं: एन चंद्रशेखरन

जमशेदपुर, 3 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध और वैश्विक परिस्थितियों को लेकर टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान में युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ सकता है।
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा की 187वीं जयंती के अवसर पर जमशेदपुर पहुंचे थे। इस दौरान टाटा स्टील परिसर में आयोजित मुख्य समारोह में उन्होंने संस्थापक को श्रद्धांजलि अर्पित की और शहरवासियों को संस्थापक दिवस की शुभकामनाएं दीं।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट क्षेत्र से टाटा समूह को लाइमस्टोन सहित अन्य कच्चे माल का आयात होता है। समूह का कारोबार वैश्विक स्तर पर फैला हुआ है, ऐसे में किसी भी लंबे युद्ध का प्रभाव सप्लाई चेन, माल की डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स और सस्टेनेबिलिटी पर पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस युद्ध का टाटा समूह या भारत पर कोई सीधा असर नहीं पड़ा है।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि टाटा समूह के कर्मचारी विश्व भर में मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज, होटल और अन्य क्षेत्रों में कार्यरत हैं। ऐसे में सभी कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा समूह की सर्वोच्च प्राथमिकता है और कंपनी इस दिशा में सतर्कता के साथ आवश्यक कदम उठा रही है।
रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि नई इकाइयों की स्थापना और विस्तार योजनाओं के कारण रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले पांच-छह वर्षों में समूह के कर्मचारियों की संख्या लगभग 7 लाख तक थी, लेकिन अब बढ़कर 11 लाख तक पहुंच चुकी है। वहीं आने वाले 5-6 साल में इसे 15 लाख तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही महिला कर्मचारियों की भागीदारी 28-30 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
आईटी क्षेत्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि नई तकनीकों के आगमन से रोजगार को लेकर आशंकाएं स्वाभाविक हैं, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से स्टील, ऑटोमोबाइल, फाइनेंस और अन्य क्षेत्रों में नए अवसर उत्पन्न होंगे। इसका सकारात्मक लाभ टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को भी मिलेगा।
इस अवसर पर टाटा स्टील के सीईओ टी वी नरेन्द्रन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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नए आधार वर्ष के साथ भारत की जीडीपी वृद्धि दर मजबूत बने रहने की उम्मीद

GDP
नई दिल्ली, 27 फरवरी : नई जीडीपी सीरीज (बेस ईयर 2022-23) शुक्रवार को जारी होने वाली है। इससे पहले सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा गठित एक उप-समिति ने जीडीपी अनुमानों के लिए नई सीरीज में जीएसटी डेटा के अधिक उपयोग की सिफारिश की है।
उप-समिति की यह रिपोर्ट राष्ट्रीय खातों के बेस ईयर को वित्त वर्ष 2022-23 में संशोधित करने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे एमओएसपीआई ने शुरू किया है।
2011-12 सीरीज में जीएसटी डेटा का उपयोग तिमाही राष्ट्रीय खातों और वार्षिक राष्ट्रीय खातों के कुछ क्षेत्रों में किया गया था।
भारत अब जीडीपी का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर रहा है। इसके साथ ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का बेस भी 2024 में अपडेट किया जाएगा, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचना को बेहतर तरीके से दिखाना है, जिसमें डिजिटल कारोबार और सेवा क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी शामिल है।
इस बदलाव में असंगठित क्षेत्र के बेहतर आकलन और जीएसटी जैसे नए डेटा स्रोतों का इस्तेमाल शामिल है। इसके अलावा ई-वाहन (वाहन पंजीकरण) और प्राकृतिक गैस की खपत से जुड़े आंकड़ों को भी शामिल किया जाएगा। नई पद्धति से भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।
पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसमें मुख्य योगदान घरेलू मांग का होगा।
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8 से 8.1 प्रतिशत के बीच रह सकती है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था ने मजबूत रफ्तार बनाए रखी है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 (चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही) के उच्च-आवृत्ति आंकड़े भी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती दिखाते हैं।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में प्रतिकूल बेस इफेक्ट के बावजूद जीडीपी वृद्धि दर 8.3 प्रतिशत तक रह सकती है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दूसरे अग्रिम जीडीपी अनुमान, पिछले तीन वित्त वर्षों के जीडीपी आंकड़े और नए बेस 2022-23 के अनुसार त्रैमासिक जीडीपी आंकड़े शुक्रवार को जारी किए जाएंगे।
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