राजनीति
पहलगाम हमले पर भारत की जवाबी कार्रवाई ने आतंकवाद की ओर दुनिया का ध्यान फिर से खींचा: पूर्व भारतीय राजदूत मंजीव पुरी
नई दिल्ली, 24 जुलाई। 22 अप्रैल के कायराना पहलगाम आतंकी हमले के लगभग तीन महीने बीत जाने के बाद, पूर्व भारतीय राजदूत मंजीव सिंह पुरी ने कहा है कि जिस तरह’ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए भारत ने आतंकवादियों को सबक सिखाया था, उसने दुनिया का ध्यान आतंकवाद की ओर वापस खींचा। सबने एक सुर में सभी प्रकार के आतंकवाद की निंदा की।
यह बयान पूर्व राजनयिक पुरी ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित एक सम्मेलन में दिया। इस सम्मेलन का आयोजन वैश्विक मामलों पर केंद्रित थिंक टैंक ‘द सेंटर फॉर ग्लोबल इंडिया इनसाइट्स’ और ‘इंडिया एंड द वर्ल्ड’ पत्रिका द्वारा किया गया था। इस सम्मेलन में भारत की सैन्य प्रतिक्रिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के पीछे के गहन विश्लेषण और चिंतन पर चर्चा की गई।
ऑपरेशन सिंदूर, भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ)’ द्वारा 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या का सख्त जवाब लेने के लिए शुरू की गई थी।
इस सम्मेलन में कई पूर्व रक्षा विश्लेषकों, राजनयिकों, राजनीतिक नेताओं, मीडियाकर्मियों और प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया, जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक शक्तिशाली सैन्य प्रतिक्रिया के रूप में चर्चा, विश्लेषण और विचार-विमर्श किया और नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा स्थापित एक नया सामान्य और सिद्धांत स्थापित किया कि भारतीय धरती पर पाकिस्तान द्वारा किए गए आतंकवादी हमलों को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पहलगाम आतंकी हमले के तीन महीने बाद, पूर्व भारतीय राजदूत पुरी ने कहा, “पाकिस्तान आतंकवाद का एक प्रमुख केंद्र है और लोग इस बात से वाकिफ हैं। हालांकि, विभिन्न कारणों से, हाल के दिनों में आतंकवाद की ओर वैश्विक ध्यान थोड़ा कम हुआ है। हमने दुनिया को स्पष्ट कर दिया है कि यह ध्यान भटकना नहीं चाहिए, वैश्विक निगाहें आतंकवाद पर ही टिकी रहनी चाहिए… ठीक उसी तरह जैसे 10 साल पहले ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में पकड़ा गया था। वैश्विक आतंकवाद, सीमा पार आतंकवाद और सीमा पार आतंकवाद ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिन पर दुनिया का ध्यान केंद्रित है। पाकिस्तान वित्तीय और अन्य चीजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है और उसे यह समझना होगा कि उसकी धरती से पनपने वाले आतंकवाद की एक कीमत चुकानी पड़ती है, जिसका असर अंततः पाकिस्तान के लोगों पर पड़ता है। भारत और पाकिस्तान एक ही समय में आजाद हुए थे, लेकिन आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और उसकी प्रति व्यक्ति आय उच्च जीडीपी है, जबकि पाकिस्तान को जल्द से जल्द आतंकवाद का त्याग करना चाहिए और यह एहसास पाकिस्तान को जल्द से जल्द महसूस होना चाहिए। उन्हें (पाकिस्तान को) अपने लोगों के हितों के बारे में सोचना चाहिए और अपनी भलाई के लिए आतंकवाद का त्याग करना चाहिए।”
वहीं, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने कहा, “यह (ऑपरेशन सिंदूर) 88 घंटे लंबी लड़ाई थी, जो लगभग चार दिनों तक चली, लेकिन पूरा देश इसमें शामिल था। आज के आधुनिक युद्ध केवल सेना नहीं लड़ती। देश का हर अंग इसमें योगदान देता है, चाहे वह आर्थिक रूप से हो, तकनीकी रूप से हो, सैन्य रूप से हो, या आम जनता की भागीदारी के माध्यम से हो… यह एक जटिल स्थिति थी और ऑपरेशन सिंदूर जैसे सैन्य अभियान का एक तिहाई भी केवल तीन महीनों में विश्लेषण नहीं किया जा सकता, अब तक 20 प्रतिशत का भी विश्लेषण नहीं किया गया है। पैनल चर्चा और सेमिनार जैसे आयोजनों से ऑपरेशन सिंदूर जैसी भारत की सैन्य प्रतिक्रिया के बारे में जनता में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी और आतंकवाद से सख्ती से निपटने के लिए भारत को विदेशों में एक मजबूत राष्ट्र के रूप में पेश किया जा सकेगा।”
सेंटर फॉर ग्लोबल इंडिया इनसाइट्स के संस्थापक और सीईओ मनीष चंद ने कहा, “…अभी भी कई सवाल हैं। संसद में यह एक बड़ा मुद्दा है क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के विकास से जुड़ा है। ऑपरेशन सिंदूर पर इस सम्मेलन का उद्देश्य लोगों को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ – इसके वैचारिक और मनोवैज्ञानिक आयामों – के बारे में जानकारी देना था। पहलगाम आतंकी हमला भी एक आर्थिक युद्ध था, जिसका उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था, खासकर जम्मू-कश्मीर की पर्यटन-आधारित अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना था…। इसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ एक भू-राजनीतिक चाल के रूप में भी किया गया था क्योंकि भारत आज एक राष्ट्र के रूप में उभर रहा है जबकि पाकिस्तान ऐसा नहीं कर सका।”
भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृज लाल ने कहा, “…आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को बेनकाब करने के नरेंद्र मोदी सरकार के वैश्विक प्रयासों के तहत, सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों ने 33 देशों का दौरा किया। मैं भी ऐसे ही एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा था जिसने जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया और इंडोनेशिया का दौरा किया था। वहां यह महत्वपूर्ण था कि यह विभिन्न राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल था। हमने वहां बताया कि राजनीतिक और वैचारिक रूप से अलग-अलग होने के बावजूद सभी राजनीतिक दल आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हैं। कई अन्य मुद्दों पर दोनों एक जैसे थे, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर एकमत थे। इससे पहले जब उरी और पठानकोट में आतंकी हमले हुए थे, तो नरेंद्र मोदी सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इसी तरह, पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की और अब पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया।
महोत्सव
गणेश प्रतिमा हटाए जाने को लेकर भाजपा ने कर्नाटक सरकार की आलोचना की

प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट के खिलाफ किसानों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम हटाने के ऑपरेशन में कर्नाटक पुलिस द्वारा गणेश प्रतिमा हटाए जाने से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर किसानों की चिंताओं और धार्मिक भावनाओं, दोनों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
यह पुलिस कार्रवाई शुक्रवार को हुई, जब अधिकारी बिदादी-हारोहल्ली मुख्य सड़क को खाली कराने पहुंचे, जिसे प्रदर्शनकारी किसानों ने ब्लॉक कर दिया था। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें पुलिसकर्मी प्रदर्शन स्थल पर स्थापित गणेश प्रतिमा को उठाते और हटाते दिख रहे हैं।
प्रस्तावित ‘ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप’ प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे किसान 21 सितंबर से बैरामंगला के पास अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे और उन्होंने विरोध स्थल पर प्रतिमा स्थापित की थी, जहां रोजाना पूजा-अर्चना की जा रही थी।
रिपोर्टों के अनुसार, जब प्रदर्शनकारियों ने ट्रैक्टर, बैलगाड़ियों और अन्य वाहनों का इस्तेमाल करके सड़क को ब्लॉक कर दिया, तो पुलिस ने हस्तक्षेप किया। ट्रैफिक बहाल करने के ऑपरेशन के तहत, पुलिस ने सड़क पर रखी प्रतिमा को हटा दिया और स्थल से अन्य रुकावटों को भी साफ कर दिया। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई के दौरान महिला किसानों समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
शनिवार को घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए, वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने कहा कि सरकार को विरोध स्थल से गणेश प्रतिमा हटाने के बजाय किसानों की जायज मांगों को पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए था।
अशोक ने कहा कि जहां किसान अपनी जायज मांगों के लिए सत्याग्रह कर रहे हैं, वहां स्थापित गणेश प्रतिमा को हटाना किसानों की भावनाओं और हिंदू धार्मिक रीति-रिवाजों को आहत करने वाला है।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सरकार के पास प्रतिमा हटाने का समय तो था, लेकिन वह किसानों की शिकायतों का समाधान करने में विफल रही।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाले प्रशासन की आलोचना करते हुए अशोक ने कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत करनी चाहिए, धार्मिक रीति-रिवाजों का सम्मान करना चाहिए और टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए तुरंत बातचीत करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की समस्याओं से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। उसे तुरंत बिदादी के किसानों की मांगें सुननी चाहिए और उन्हें न्याय देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के आंदोलन और उनकी धार्मिक आस्था को दबाया नहीं जा सकता।
इस विवाद ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कार्यकाल की एक पुरानी घटना की यादें भी ताजा कर दी हैं, जब पुलिस द्वारा गणेश प्रतिमा को जब्त करने और उसे पुलिस वाहन में रखने की घटना की तस्वीरों और वीडियो के ऑनलाइन वायरल होने के बाद भारी आलोचना हुई थी।
राष्ट्रीय समाचार
रामलीला, दुर्गा पूजा और छठ की तैयारियों के लिए दिल्ली सरकार ने बनाईं तीन समितियां, मंत्रियों-विधायकों को मिली जिम्मेदारी

राजधानी दिल्ली में आने वाले आस्था के बड़े पर्वों रामलीला, दुर्गा पूजा और छठ पूजा को भव्य और सुव्यवस्थित तरीके से मनाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर तीनों पर्वों के लिए तीन अलग-अलग विशेष समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों की कमान मंत्रियों, विधायकों और समाजसेवियों को सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इन समितियों का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा, सुरक्षा और सुचारु व्यवस्था उपलब्ध कराना है। सरकार चाहती है कि दिल्ली में ये पर्व श्रद्धा, अपनत्व और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाए जाएं और आयोजन समितियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
रामलीला समिति की कमान मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह कोरामलीला आयोजनों के लिए गठित समिति के अध्यक्ष समाज कल्याण, एससी/एसटी कल्याण, सहकारिता एवं निर्वाचन मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह बनाए गए हैं। इस समिति में विधायक अशोक गोयल, अनिल कुमार शर्मा, श्याम शर्मा, संजय गोयल और संदीप सहरावत सदस्य होंगे, जबकि सचिव, राजस्व-सह-मंडलायुक्त इसके सदस्य सचिव होंगे।
समिति की मुख्य जिम्मेदारी जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के माध्यम से सिंगल विंडो सिस्टम के तहत रामलीला के लिए जरूरी एनओसी जारी करवाना होगी। इसके अलावा रामलीला स्थलों पर पीने के पानी, चिकित्सा सहायता, एंबुलेंस, अग्निशमन सेवा, सुरक्षा, मोबाइल शौचालय, यातायात प्रबंधन, सफाई, फॉगिंग और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना भी इसी समिति का काम होगा।
समिति रामलीला के मंच से पर्यावरण संरक्षण, वोकल फॉर लोकल, स्वच्छता, जल संरक्षण, स्वदेशी और नशा मुक्त भारत अभियान जैसे जनहित के संदेशों को भी बढ़ावा देगी।
दुर्गा पूजा की तैयारियों के लिए गठित समिति की अध्यक्षता कानून एवं न्याय, श्रम, रोजगार, विकास, कला-संस्कृति भाषा तथा पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा करेंगे। समिति में विधायक शिखा रॉय और नीरज बसोया के साथ सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भट्टाचार्य, देवदत्त भारद्वाज और अरुण मुखर्जी सदस्य के रूप में शामिल हैं।
यह समिति भी पूजा स्थलों पर सभी नागरिक सुविधाएं, सुरक्षा और एनओसी की व्यवस्था देखेगी। इसके अलावा, दुर्गा पूजा के लिए विशेष रूप से मूर्तियों के विसर्जन हेतु कृत्रिम और अस्थायी तालाबों की व्यवस्था करना और विसर्जन के बाद अवशेषों की सफाई सुनिश्चित करना भी इसकी जिम्मेदारी होगी।
छठ पूजा के लिए भी मंत्री कपिल मिश्रा की अध्यक्षता में ही समिति बनाई गई है। इसमें विधायक अभय कुमार वर्मा, चंदन कुमार चौधरी, संदीप सहरावत, दीपक चौधरी और सामाजिक कार्यकर्ता संतोष ओझा सदस्य होंगे। सचिव, राजस्व-सह-मंडलायुक्त इसके सदस्य सचिव होंगे।
छठ समिति घाटों और आयोजन स्थलों पर पानी, चिकित्सा, एंबुलेंस, सुरक्षा, सफाई और बिजली जैसी सभी व्यवस्थाओं की निगरानी करेगी और सिंगल विंडो सिस्टम से एनओसी दिलाने में मदद करेगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “रामलीला, दुर्गा पूजा और छठ पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि दिल्ली की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को जोड़ने वाले आस्था के पर्व हैं। इनसे लाखों लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं। हमारी सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालु पूरी भक्ति के साथ अपने पर्व मना सकें और उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।”
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता समय रहते सभी व्यवस्थाएं पूरी करना है ताकि सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता और सौहार्द का माहौल बना रहे।
राष्ट्रीय समाचार
यूपीएससी भर्ती 2026: जूनियर टेक्निकल ऑफिसर सहित कई पदों पर आवेदन शुरू, जानें योग्यता और सैलरी

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने विभिन्न विभागों और मंत्रालयों में अलग-अलग कुल 13 पदों पर नियुक्ति के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर आवेदन मांगे हैं।
यूपीएससी की ओर से जारी 13 रिक्तियों में नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट, कानपुर (खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय) में जूनियर टेक्निकल ऑफिसर (शुगर टेक्नोलॉजी) का 1; विधि और न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग में असिस्टेंट लेजिस्लेटिव काउंसिल (भारतीय कानूनी सेवा का ग्रेड IV) के 8; दिल्ली सरकार के लैंड एंड बिल्डिंग डिपार्टमेंट में लॉ ऑफिसर के 3; और नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) में स्पेशलिस्ट ग्रेड-II (जूनियर स्केल)-कार्डियोलॉजी का 1 पद शामिल है।
इन सभी पोस्ट के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 26 सितंबर से शुरू हो गई। अप्लाई करने की अंतिम तिथि 16 अक्टूबर तक तय की गई है। ऐसे में जो पात्र और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, वे आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि की शाम 6 बजे तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से पद से जूनियर टेक्निकल ऑफिसर के लिए साइंस या इंजीनियरिंग में डिग्री, असिस्टेंट लेजिस्लेटिव काउंसिल के लिए कानून में डिग्री और स्पेशलिस्ट ग्रेड-II (जूनियर स्केल)-कार्डियोलॉजी के लिए कार्डियोलॉजी में पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री (डीएम कार्डियोलॉजी) या इसके समकक्ष योग्यता होनी चाहिए। इसके अलावा, कैंडिडेट्स के पास पद के अनुसार प्रासंगिक क्षेत्र में निर्धारित 2 से 7 वर्षों का अनुभव होना भी अनिवार्य है।
आवेदकों की अधिकतम आयु पद के अनुसार 30 से 48 वर्ष के बीच तय की गई है, जिसकी गणना आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदनों की स्क्रीनिंग, भर्ती परीक्षा (आरटी)/संयुक्त भर्ती परीक्षा (सीआरटी) और साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी पोस्ट के अनुसार वेतन स्तर (7वां सीपीसी) के तहत लेवल 7 से 11 के बीच प्रतिमाह होगी। इसके अलावा कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे।
आवेदन पत्र भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो जनरल/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस के लिए 25 रुपए तय किया गया है। वहीं, महिलाएं/एससी/एसटी/बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी गई है।
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