अंतरराष्ट्रीय
एमआई की एक और हार के बाद कोच जयवर्धने बल्लेबाजों की करेंगे समीक्षा
मुंबई इंडियंस (एमआई) के मुख्य कोच महेला जयवर्धने आईपीएल 2022 में अपनी टीम के एक और खराब प्रदर्शन के बाद बल्लेबाजों के प्रदर्शन की समीक्षा करेंगे। हालांकि, आठ मैचों में आठ हार के बाद आने वाली ‘समीक्षा’ पांच बार के चैंपियन के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती। टीम अंक तालिका में बिना खाता खोले टूर्नामेंट में बाहर होने की उम्मीद कर रही है।
लखनऊ का नेतृत्व कर रहे केएल राहुल ने 62 गेंदों पर नाबाद 103 रन की पारी खेली। जयवर्धने ने कहा, “मुझे बल्लेबाजों के प्रदर्शन की समीक्षा करने की आवश्यकता है। टीम ने पूर्व में काफी शानदार प्रदर्शन किया है, जिस वजह से वे पांच बार आईपीएल की चैंपियन रही है।”
हालांकि, श्रीलंकाई महान खिलाड़ी अपने गेंदबाजों के प्रदर्शन से प्रभावित थे, क्योंकि कप्तान केएल राहुल के नाबाद शतक के बावजूद एलएसजी को गेंदबाजों ने 168 पर रोक दिया था।
जयवर्धने ने कहा, “हमने बहुत अच्छी गेंदबाजी की। केएल ने एक विशेष पारी खेली, वह जानते थे कि उन्हें टीम के लिए एक लंबा स्कोर बनाना है, जो उन्होंने किया। उसके बावजूद टीम के गेंदबाजों ने एलएसजी को 168 पर रोक दिया।”
उन्होंने आगे कहा, “हमें गेंदबाजी में भी कुछ सुधार करने की जरूरत है। हालांकि, हमने बल्लेबाजों को ज्यादा रन नहीं बनाने दिए, लेकिन वे ज्यादा विकेट चटकाने में भी विफल रहे।”
श्रीलंकाई कोच ने यह भी संकेत दिया कि वह आईपीएल मेगा नीलामी में टीम के सबसे महंगे खिलाड़ी ईशान किशन को अपना मैच खेलने की पूरी स्वतंत्रता दिए जाने के बावजूद उनके प्रदर्शन से वे निराश हैं।
पहले दो मैचों में दो अर्धशतक लगाने के बाद किशन की फॉर्म अच्छी नहीं रही। जयवर्धने ने कहा, “हमने उन्हें अपना स्वाभाविक मैच खेलने की आजादी दी है। मैंने अभी तक उनसे एलएसजी से हार के बाद बात नहीं की है, लेकिन मैं उनसे इस बारे में जल्द ही बातचीत करूंगा।”
मुंबई 30 अप्रैल को डीवाई पाटिल स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ अपनी हार की भरपाई करने की उम्मीद करेगी।
अंतरराष्ट्रीय
भारत ने अहमदिया लोगों पर अत्याचार के मामले में पाकिस्तान के इस्लामोफोबिया को उजागर किया

संयुक्त राष्ट्र, 17 मार्च : भारत ने अहमदिया मुसलमानों पर जानलेवा जुल्म में पाकिस्तान के अपने इस्लामोफोबिया को सामने ला दिया है। वहीं, इस्लामाबाद के प्रतिनिधि ने लगभग मान लिया है कि उनका देश अहमदिया मुसलमानों के साथ जुल्म कर रहा है।
बिना पाकिस्तान का नाम लिए और उसे ‘हमारा पश्चिमी पड़ोसी’ बताते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने सोमवार (स्थानीय समय) को कहा, ”यह सोचना जरूरी है कि अहमदिया समुदाय पर हो रहे अत्याचार, बेबस अफगानों की बड़े पैमाने पर वापसी (या जबरन निर्वासन) और रमजान के पवित्र महीने में की गई हवाई बमबारी को आखिर क्या कहा जाए?
भारत ने इस्लामोफोबिया से लड़ने के अंतरराष्ट्रीय दिवस पर जनरल असेंबली में पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन अपने बयान में एक इशारा किया ताकि इस्लामाबाद को यह मानने की जरूरत न पड़े कि उस पर आरोप लगाया गया है, जबकि बयान से यह साफ हो गया।
भले ही उनके देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया था, फिर भी पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने अपनी प्रतिक्रिया में इन आरोपों का खंडन भी नहीं किया। उन्होंने यह कहा कि भारत इस्लामोफोबिया पर जनरल असेंबली की बैठक का राजनीतिकरण कर रहा है।
पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने अहमदिया लोगों पर हो रहे जुल्म को लगभग मान लिया।
अहमदिया समुदाय को लेकर पाकिस्तान के संविधान में 1974 के एक बदलाव में इस्लामी कट्टरपंथ की नीति अपनाई गई। इसके तहत अहमदिया लोगों को ‘गैर-मुस्लिम’ घोषित किया गया और उनके खिलाफ जुल्म को सरकारी नीति बना दिया गया। उनकी धार्मिक मस्जिदों पर अक्सर होने वाले हमलों के अलावा, ईशनिंदा विरोधी कानूनों की वजह से उन्हें मौत की सजा हो सकती है।
पाकिस्तान का नाम लिए बिना, हरीश ने साफ तौर पर कहा कि भारत के बारे में उसका प्रोपेगेंडा सिर्फ इस्लामाबाद की ‘आतंकवादी सोच को दिखाता है, जिसे इस देश ने अपनी शुरुआत से ही बनाए रखा है।
उन्होंने कहा, ”असली मुद्दा यही है। किसी भी दूसरे देश की तुलना में भारत सबसे ज्यादा धर्मों (हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म) की जन्मभूमि होने के नाते सर्व धर्म समभाव की सोच को मानता है, जो सभी धर्मों के लिए बराबर सम्मान की बात कहता है और भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को प्रेरित करता है।
उन्होंने कहा, “भारत धर्म के नाम पर हिंसा और नफरत की कड़ी निंदा करता है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब पहले से ही एक ऐसी घोषणा मौजूद है, जो सभी धर्मों के खिलाफ घृणा की स्पष्ट रूप से निंदा करती है, तो संयुक्त राष्ट्र का केवल इस्लामोफोबिया पर विशेष जोर देना उचित है या नहीं।
पी. हरीश 1981 में अपनाए गए सभी तरह की असहिष्णुता और धर्म या विश्वास के आधार पर भेदभाव को खत्म करने की घोषणा का जिक्र कर रहे थे।
उन्होंने कहा, “1981 की घोषणा हमारे विचार में एक बहुत ही संतुलित और टिकाऊ साधन है, जो बिना किसी को विशेषाधिकार दिए सभी धार्मिक अनुयायियों के अधिकारों को सुरक्षित रखता है।
उन्होंने कहा, ”मैं इस बात पर जोर देता हूं कि यूएन के लिए यह जरूरी है कि वह धार्मिक पहचान को हथियार बनाने और छोटे राजनीतिक मकसदों को पूरा करने के लिए इसका इस्तेमाल करने के बढ़ते व्यापार और खतरों पर ध्यान दे। भारत का पश्चिमी पड़ोसी अपने पड़ोस में इस्लामोफोबिया की मनगढ़ंत कहानियां गढ़ने का एक बेहतरीन उदाहरण है।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान: 56 ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान, इनमें से 19 तेहरान में

तेहरान, 17 मार्च : यूएस-इजरायल की एयरस्ट्राइक में ईरान की 50 से ज्यादा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुमूल्य स्थलों को नुकसान पहुंचा है। यह जानकारी ईरान के हेरिटेज मंत्रालय ने दी है।
सरकारी न्यूज एजेंसी आईआरएनए ने मंत्रालय के हवाले से बताया कि कुल 56 स्थलों को नुकसान हुआ है। इनमें राजधानी तेहरान की 19 अहम जगहें शामिल हैं। इनमें गोलस्तान पैलेस, तेहरान बाजार और पुरानी सीनेट बिल्डिंग भी शामिल है।
इससे पहले भी नुकसान को लेकर रिपोर्ट आई थी, लेकिन ये नहीं पता था कि तेहरान में कुल कितनी इमारतें इसकी जद में आई हैं।
रिपोर्ट में प्रमुख औद्योगिक शहर इस्फहान की कुछ ऐतिहासिक जगहों को भी नुकसान पहुंचा है। इनमें नक्श-ए-जहान स्क्वायर स्थित मशहूर इमाम शाह मस्जिद के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। नक्श-ए-जहान स्क्वायर 16वीं-17वीं सदी की सफवीद वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर सूची में भी शामिल कर रखा है।
इस्फहान शहर को ‘आधा जहां’ कहा जाता है क्योंकि यहां दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतें मौजूद हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 17वीं सदी के इस ऐतिहासिक महल के लकड़ी के खंभों, दरवाजों और अन्य हिस्सों को भारी नुकसान पहुंचा है। महल के अंदर और चारों ओर बिखरा मलबा, टूटी खिड़कियां और गिरे हुए मलबे की तस्वीर एजेंसी ने जारी की है।
बता दें, ईरान के तीसरे बड़े शहर के तौर पर इस्फहान को पहचाना जाता है। इसके आसपास ईरान के कई संवेदनशील प्रतिष्ठान मौजूद हैं, जिनमें परमाणु अनुसंधान केंद्र, मिसाइल उत्पादन सुविधाएं, एक प्रमुख तेल रिफाइनरी और वायुसेना के अड्डे शामिल हैं।
इस्फहान ईरान के स्टील उद्योग का भी प्रमुख केंद्र है। यहां स्थित मुबारक स्टील कंपनी को मध्य-पूर्व के सबसे बड़े स्टील उत्पादकों में गिना जाता है। इसके अलावा शहर में एक बड़ा एयरफोर्स बेस भी मौजूद है, जहां ईरान के पुराने अमेरिकी निर्मित एफ-14 टॉमकैट लड़ाकू विमानों का बेड़ा तैनात बताया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के काबुल रिहैब सेंटर पर एयरस्ट्राइक की, 400 से ज्यादा मौतें : तालिबान

काबुल, 17 मार्च : पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अब भी जारी है। तालिबान अधिकारियों और स्थानीय मीडिया ने बताया कि काबुल में एक बड़े नशा मुक्ति हॉस्पिटल पर पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक में 400 से ज्यादा लोग मारे गए और कम से कम 250 लोग घायल हो गए।
तालिबान की सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, यह हमला रात करीब 9 बजे काबुल में 2,000 बेड वाले उम्मीद नशा मुक्ति हॉस्पिटल को निशाना बनाकर किया गया। तालिबान के उपप्रवक्ता मुल्ला हमदुल्ला फितरत ने कहा कि हमले से पूरे हॉस्पिटल में बहुत ज्यादा तबाही हुई है।
उप्रवक्ता फितरत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “पाकिस्तान की सैन्य सरकार ने उम्मीद नाम के 2,000 बेड वाले वाले हॉस्पिटल पर बमबारी की। इससे हॉस्पिटल का ज्यादातर हिस्सा तबाह हो गया और अनुमान से भी ज्यादा लोगों के मरने की आशंका बढ़ गई है।”
उन्होंने यह भी बताया कि मरने वालों की संख्या करीब 400 हो गई है, जबकि 250 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने भी एक्स पर एक पोस्ट में इस घटना की निंदा की और कहा कि मरने वालों में ज्यादातर कमजोर आम लोग थे।
उन्होंने लिखा, “(पाकिस्तानी सैन्य समूह) की बमबारी की वजह से 2,000 बेड वाले हॉस्पिटल में कल रात ज्यादातर बेगुनाह आम लोग और नशे की लत वाले लोग मारे गए। सच में, हम ऊपर वाले के हैं और उन्हीं के पास लौटेंगे।”
अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि इमरजेंसी टीमें रात भर मौके पर पहुंचीं, जब बचाव दल हॉस्पिटल के खराब हिस्सों में तलाशी ले रहे थे। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता शराफ जमान ने कहा कि कम से कम 170 घायल मरीजों को शुरू में पास की मेडिकल सुविधाओं में भेजा गया।
जमान ने मीडिया से कहा, “रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है और मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। हॉस्पिटल के कई हिस्से तबाह हो गए।” स्थानीय मीडिया ने बताया कि बचाव दल आग बुझाने और मलबे से शवों को निकालने की कोशिश कर रहे थे।
खामा प्रेस के मुताबिक, अधिकारियों ने इस हमले को हाल के सालों में काबुल में हुए सबसे खतरनाक हमलों में से एक बताया है। आउटलेट ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने इस घटना पर तुरंत रिएक्ट किया।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के अफगानिस्तान मामले के स्पेशल रिपोर्टर रिचर्ड बेनेट ने आम लोगों के मारे जाने की खबर पर चिंता जताई और काबुल और इस्लामाबाद के बीच संयम बरतने की अपील की। अफगान शांति वार्ता के पूर्व वार्ताकार अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने भी हमले की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और कहा कि विवादों को बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए।
अफगान के साथ सुलह के लिए अमेरिका के पूर्व स्पेशल प्रतिनिधि जल्माय खलीलजाद ने भी आम लोगों के मारे जाने पर चिंता जताई और पीड़ितों के लिए मानवीय मदद की अपील की।
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