राजनीति
बच्चों ने शिवराज को लिखा पत्र, स्वास्थ्य और शिक्षा की हकीकत की बयां
इन दिनों कोरोना ने दुनिया के हर हिस्से और हर वर्ग को प्रभावित कर रखा है। मध्यप्रदेश के भी बड़े हिस्से में कोरोना का असर है और बच्चों को भी इससे दो चार होना पड़ रहा है। यही कारण है कि बच्चों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर शिक्षा और स्वास्थ्य के हालात की हकीकत बयां की है।
कोरोना के कारण बच्चों के जीवन से मौज-मस्ती और खेलकूद लगभग गायब हो गया है क्योंकि वे सामूहिक तौर पर मेल मिलाप करने से लेकर खेलने कूदने तक से हिचक रहे हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ जो पढ़ाया जा रहा है।
कोरोना के कारण स्कूल बंद है और बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है मगर कई खामियों के चलते उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सा व्यवस्था भी उनके सामने कई सवाल खड़े कर रही है। इसी को लेकर कई बच्चों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखे हैं।
अनूपपुर में 10वीं कक्षा की छात्रा लालिमा वाधवा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया है। लालिमा ने लिखा है, “कोरोना काल के समय में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हम बच्चों को स्कूल न खुलने के कारण पढ़ाई में दिक्कत हो रही है। ऑनलाइन क्लासेज में जो पढ़ाया जाता है वह समझ में नहीं आता, शिक्षकों से भी अच्छे से पढ़ाते नहीं बन रहा है, नेटवर्क कम होने के कारण क्लास से जुड़ नहीं पाते हैं, गांव में नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता है, साथ ही हर महीने रिचार्ज की समस्या का सामना करना पड़ता है।”
लालिमा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि मेरी इन समस्याओं का समाधान निकाला जाए और हमारे उज्जवल भविष्य के लिए प्रयास किए जाएं।
इसी तरह अनूपपुर जिले की ही 11वीं कक्षा की छात्रा वीणा सिंह ने स्वास्थ्य समस्याओं की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट किया है। वीणा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है, “प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की बहुत कम संख्या है। निशुल्क प्रदान की जाने वाली दवाएं बहुत सीमित होती हैं। शासकीय चिकित्सक अपने निजी दवा खाने पर ज्यादा ध्यान देते हैं। इसके साथ ही अधिकांश नर्सिग, पैरामेडिकल स्टाफ मरीजों व उनके परिजनों से अभद्र व्यवहार भी करते हैं। प्रदेश सरकार को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।”
आठवीं की छात्रा समृद्धि भटनागर ने खेल-खेल में स्कूल में पढ़ाई कराए जाने की बात कही है। छात्रा का कहना है कि “खेल-खेल में हमारी कक्षाएं होनी चाहिए जिससे हमें जल्दी याद हो जाए और हमें उस विषय की जानकारी मिल जाए। हम बच्चों की रुचि जिन विषयों में हो उसके आधार पर हमारा साल भर का परिणाम तैयार किया जाए।”
स्कूल की समस्या का जिक्र करते हुए समृद्धि ने लिखा है, “स्कूल में कंप्यूटर तो होते हैं पर उनमें से आधे से ज्यादा खराब रहते हैं, जिससे प्रैक्टिकल नहीं कर पाते और बिजली की भी समस्या रहती है। हमारे स्कूल और प्राइवेट स्कूल की किताबें एक जैसी होनी चाहिए, इसके साथ ही स्कूल का समय कम किया जाना चाहिए जैसे हमारे माता-पिता के समय में होता था। सरकारी स्कूल हो या प्राइवेट स्कूल हो, सभी का कोर्स कम होना चाहिए। हमें भी यूनिफर्म मिलना चाहिए। कई स्कूल में अभी भी बच्चों के लिए बेंच और टेबल नहीं है, उन्हें भी बेंच और टेबल मिलना चाहिए। हमारे स्कूल में अच्छे खेल का मैदान नहीं है, हमारे यहां भी खेल का मैदान होना चाहिए।”
बच्चों के बीच पैरवी (एडवोकेसी) का काम करने वाली संस्था चाइल्ड राइट ऑब्जर्वेटरी की प्रेसीडेंट और पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच का कहना है कि सीआरओएमपी बच्चों को अपनी बात ऊपर तक बताने के लिए प्रोत्साहित करता है। उन्होंने (बच्चों) जब भी अपनी समस्याओं को बताया है तो सरकार ने तत्काल पहल की है। वर्तमान दौर में जरुरी है कि इन बातों को लेकर हमें भी पहल करनी चाहिए क्योकि कोरोना ने नई चुनोतियां पेश की है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते से व्यापार और निवेश के खुलेंगे नए अवसर

भारत और न्यूजीलैंड द्विपक्षीय संबंध एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं। दोनों देश पारंपरिक कूटनीतिक मित्रता से आगे बढ़कर व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, कृषि और रणनीतिक सहयोग पर आधारित व्यापक साझेदारी की ओर जा रहे हैं। यह जानकारी एक लेख में दी गई।
ग्रीक समाचार पोर्टल डायरेक्टस में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे दोनों देशों के कारोबारियों, किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), उद्यमियों और युवा पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
लेख में कहा गया है कि इस समझौते का महत्व केवल सीमा शुल्क में कटौती तक सीमित नहीं है। यह बाजार तक पहुंच बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, निवेश को बढ़ावा देने, कौशल एवं प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने और एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं वाली दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच मजबूत कारोबारी संबंध बनाने का ढांचा प्रदान करता है।
‘रोडमैप टू 2030’ से मजबूत हुई व्यापक रणनीतिक साझेदारी इस आर्थिक जुड़ाव को दीर्घकालिक दिशा प्रदान करती है। एफटीए और इसके साथ जुड़ी सहयोग पहल मिलकर भारत और न्यूजीलैंड को अधिक विविधतापूर्ण, मजबूत और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध बनाने में मदद कर सकती हैं।
इस एफटीए की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक न्यूजीलैंड की ओर से भारत के सभी 8,284 उत्पाद श्रेणियों के निर्यात पर तत्काल शून्य शुल्क की सुविधा देना है। इससे भारतीय निर्यातकों को कीमतों के मामले में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने, विदेशी बाजारों में विविधता लाने और विकसित अर्थव्यवस्था में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा।
श्रम-प्रधान और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को इस समझौते से विशेष लाभ मिलने की संभावना है। फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, मशीनरी, रत्न एवं आभूषण, खेल के सामान, जूते और चमड़े के उत्पाद उन क्षेत्रों में शामिल हैं, जिनमें निर्यात की काफी संभावनाएं हैं। ये उद्योग बेहतर बाजार पहुंच का लाभ उठाकर उत्पादन बढ़ा सकते हैं, नए ऑर्डर हासिल कर सकते हैं और अपने वितरण नेटवर्क को मजबूत कर सकते हैं।
इस समझौते से एमएसएमई, कारीगरों और महिला उद्यमियों को भी बाजार के बढ़ते अवसरों का लाभ मिलने की उम्मीद है। छोटे कारोबारियों को अक्सर अधिक लेनदेन लागत, बाजार से जुड़ी सीमित जानकारी और विदेशों में कारोबारी संबंध स्थापित करने में कठिनाइयों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में परेशानी होती है। बेहतर शुल्क सुविधा, संस्थागत सहयोग और कारोबारियों के बीच मजबूत संपर्क से इन बाधाओं को दूर करने में मदद मिलेगी।
लेख में आगे कहा गया है कि एफटीए के रणनीतिक ढांचे के तहत 2030 तक वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर लगभग 3 अरब डॉलर तक पहुंचने की परिकल्पना की गई है। ये लक्ष्य दोनों देशों की महत्वाकांक्षा को दर्शाते हैं, लेकिन इन्हें हासिल करना प्रभावी क्रियान्वयन, कारोबारियों की भागीदारी और कई क्षेत्रों में निरंतर वृद्धि पर निर्भर करेगा।
राजनीति
‘दीया मिर्जा को मुस्लिम होने के कारण टारगेट किया जा रहा’, पटाखा विवाद पर वारिस पठान

दिवाली पर पटाखे फोड़ने और सड़कों पर आतिशबाजी को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बीच एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने अभिनेत्री दीया मिर्जा के प्रदूषण-मुक्त दिवाली मनाने की अपील वाले वीडियो पर भाजपा नेता की आपत्ति को दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया। पठान ने सवाल किया कि जब कई अन्य हस्तियों ने भी इसी तरह की अपील की थी, तो केवल दीया मिर्जा को ही क्यों निशाना बनाया गया?
वारिस पठान ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई में दिवाली के दौरान सड़कों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने से बचने का निर्देश दिया था। इसके पीछे ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को कारण बताया गया था। मुंबई नगर निगम आयुक्त अश्विनी भिडे ने भी स्पष्ट किया था कि हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन किया जाना है।
पठान ने कहा कि निर्देशों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए नगर निगम की ओर से कई मशहूर हस्तियों से संपर्क किया गया था। उनसे लोगों से अपील करने को कहा गया था कि वे त्योहार मनाएं, लेकिन सार्वजनिक सड़कों और गलियों में पटाखे न फोड़ें। इसके बाद अभिनेत्री माधुरी दीक्षित, पूर्व क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे और अन्य हस्तियों के साथ दीया मिर्जा ने भी वीडियो के जरिए लोगों से अपील की थी। मिर्जा ने अपने संदेश में दिवाली मनाने के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन साथ ही पटाखों से होने वाले प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी नुकसान को ध्यान में रखने की बात कही थी।
वारिस पठान ने कहा कि मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम ने इस मुद्दे पर एक्स पोस्ट के जरिए केवल दीया मिर्जा को निशाना बनाया। उन्होंने सवाल किया कि जब माधुरी दीक्षित और अजिंक्य रहाणे सहित अन्य लोगों ने भी इसी तरह के वीडियो बनाए थे, तो उनके खिलाफ कोई टिप्पणी क्यों नहीं की गई? यदि भाजपा को इन अपीलों पर आपत्ति थी तो उसे सभी हस्तियों के बारे में एक समान बात रखनी चाहिए थी। दीया मिर्जा को उनके मुस्लिम नाम के कारण निशाना बनाया जा रहा है।
एआईएमआईएम प्रवक्ता ने कहा कि नगर निगम आयुक्त के निर्देशों के तहत वीडियो बनवाए गए और अब उन्हें हटाने की बात की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह पहल हाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों के पालन के लिए थी, तो इस पर विवाद क्यों खड़ा किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि दिवाली सभी को मनाने का अधिकार है, लेकिन त्योहार के नाम पर केवल एक मुस्लिम अभिनेत्री को निशाना बनाना दोहरा मापदंड है।
राजनीति
इंडिया ब्लॉक की रैली को भाजपा ने बताया ‘फ्लॉप’ तो भड़के अबू आजमी, बोले- खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे

इंडिया ब्लॉक की रैली को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के बयानों पर समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि इंडिया ब्लॉक की रैली को फ्लॉप कहना खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे जैसा है। वहीं, आजम खान पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर प्रताड़ित और फंसाया जा रहा है।
सपा विधायक अबू आजमी ने कहा, “1974 के बाद दिल्ली के रामलीला मैदान में सबसे बड़ी रैली हुई है, तो उसे फ्लॉप शो कहा जाएगा? इसका मतलब खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे। यह किसी के खिलाफ दुश्मनी नहीं है, बल्कि प्रदेश और संविधान के खिलाफ काम करने वालों के खिलाफ है। जो चोरी से सरकारें बनीं, उनके खिलाफ है। जिन्होंने यह सारा काम किया, उस चुनाव आयोग के खिलाफ है, जिसने भाजपा के कार्यकर्ता की तरह काम किया। उनका पोल खुल चुका है। जनता की आवाज पर प्रधानमंत्री को पहले ही दिन उन्हें बदल देना चाहिए था, तो इतना बड़ा बवाल खड़ा ही नहीं होता। अब उनको जेल भी जाना पड़ेगा। जनता सब समझ चुकी है।”
उन्होंने कहा कि मैं तो सीजेआई को भी बधाई देना चाहता हूं। आपने सोए हुए लोगों को जगा दिया। आपने पढ़े-लिखे लड़कों को कॉकरोच बोल दिया। अब कॉकरोच जनता पार्टी के साथ-साथ आम जनता भी सड़क पर आ गई है। अब 2027 और 2029 उनके नहीं होंगे।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर सपा विधायक ने कहा कि ठीक बात कह रहे हैं। जवाबदेही तो होनी ही चाहिए। जो भी व्यक्ति हो, कोई कानून से बड़ा नहीं होता। अगर किसी ने कानून के खिलाफ काम किया है, तो उसकी जवाबदेही बनती है। भारतवर्ष के संविधान के मुताबिक, चाहे सड़क पर भीख मांगने वाला व्यक्ति हो या प्रधानमंत्री, सबके साथ एक जैसा कानून होना चाहिए।
वहीं, आजम खान के मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि आजम खान कई सालों से जेल में हैं। जब भी उन्हें जमानत मिलती है, कोई नया मामला सामने आ जाता है। बड़ी मुश्किल से वे बाहर आते हैं, फिर ईडी का मामला आ जाता है। अगर इतने सालों से वे जेल में थे, तो उसी समय उनके बयान लेकर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है। मुंबई में भी कई मंत्री गिरफ्तार हुए। दो साल जेल में रहने के बाद अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ पर्याप्त आधार नहीं हैं और वे छूट गए, लेकिन तब तक उनका राजनीतिक और व्यक्तिगत नुकसान हो चुका था। यह सब जो चल रहा है, संविधान की भावना के खिलाफ है।
सपा विधायक ने आरोप लगाया कि आजम खान को प्रताड़ित और परेशान किया जा रहा है। अगर उनकी यूनिवर्सिटी में कोई कमी है, तो सरकार उसे ठीक कराए, लेकिन एक ऐसे व्यक्ति, जो कई बार विधायक और मंत्री रह चुके हैं और जिन्होंने मुलायम सिंह यादव के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पार्टी को खड़ा किया। उनके पूरे परिवार को बर्बाद करने की कोशिश करना गलत है। मैं इसकी खुलकर निंदा करता हूं।
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